यह पहले से ही आपका है
परिचय
मेरे नाना-नानी स्कॉटलैण्ड में एडिनबर्ग के नजदीक पिटेनवीम में एक छोटे से गाँव में रहते थे. वहाँ पर उनका एक घर था. 1939 में, दूसरा विश्व युद्ध शुरु होने पर, उन्होंने अपना घर किराये पर दे दिया. जब युद्ध समाप्त हुआ, तब वे अपने घर वापस जाना चाहते थे लेकिन नहीं जा पा रहे थे. उस समय नियम ने किरायेदारों को उस घर में जीवनभर रहने की अनुमति दे दी थी, लगभग उतने ही किराये में (महँगाई के लिए कोई बदलाव न करते हुए!).
चालीस साल तक मेरे नाना-नानी उनके घर का अधिकार नहीं ले पाए. मेरे चाचा को वह घर मेरे नाना-नानी से विरासत में मिला. जब उन्हें घर का अधिकार मिला, तब घर की अवस्था बुरी तरह से बिगड़ी हुई थी. उन्होंने छोटी सी कीमत पर घर को बेच दिया.
यद्पि मेरा परिवार पिटनवीम में इस घर का मालिक था, तब भी इसका अधिकार नहीं ले पाए. मालिक होने में और अधिकार लेने में एक बड़ा अंतर है.
इस्राएल के लोगों को कनान देश दिया गया था, वाचा की भूमि. अब यहोशू इस्रालियों से कहता है, 'उस देश को अपने अधिकार में कर लेने में तुम कब तक ढ़िलाई करते रहोगे?' (यहोशू 18:3). नया नियम 'भूमि' को मसीह जीवन के एक चित्र के रूप में प्रस्तुत करता है (इब्रानियो 4). आपको समझने की आवश्यकता है कि मसीह में पहले से ही आपका क्या है और तब इसका अधिकार लीजिए.
नीतिवचन 10:31-11:8
31 धर्मी के मुख से बुद्धि प्रवाहित होती है,
किन्तु कुटिल जीभ को तो काट फेंका जायेगा।
32 धर्मी के अधर जो उचित है जानते हैं,
किन्तु दुष्ट का मुख बस कुटिल बातें बोलता।
11यहोवा छल के तराजू से घृणा करता है,
किन्तु उसका आनन्द सही नाप—तौल है।
2 अभिमान के संग ही अपमान आता है,
किन्तु नम्रता के साथ विवेक आता है।
3 नेकों की नेकी उनकी अगुवाई करती है,
किन्तु दुष्टों को दुष्टता ही ले डूबेगी।
4 कोप के दिन धन व्यर्थ रहता, काम नहीं आता है;
किन्तु तब नेकी लोगों को मृत्यु से बचाती है।
5 नेकी निर्दोषों के हेतु मार्ग सरल—सीधा बनाती है,
किन्तु दुष्ट जन को उसकी अपनी ही दुष्टता धूलें चटा देती।
6 नेकी सज्जनों को छुड़वाती है,
किन्तु विश्वासहीन बुरी इच्छाओं के जाल में फँस जाते हैं।
7 जब दुष्ट मरता है, उनकी आशा मर जाती है।
अपनी शक्ति से जो कुछ अपेक्षा उसे थी, व्यर्थ चली जाती है।
8 धर्मी जन तो विपत्ति से छुटकारा पा लेता है,
जबकि उसके बदले वह दुष्ट पर आ पड़ती है।
समीक्षा
सत्यनिष्ठा का उपहार
क्या आप जानते हैं कि परमेश्वर ने आपको सत्यनिष्ठा का उपहार दिया है? क्या आपने इस उपहार का अधिकार लिया है?
नीतिवचन का लेखक 'दुष्ट' और 'सत्यनिष्ठ' के बीच के अंतर को बताता है. दुष्टता विनाश की ओर ले जाती है -'विश्वासघाती अपने कपट से नष्ट हो जाते हैं...दुष्ट अपनी दुष्टता के कारण गिर जाता है' (11:3,5ब). सबसे महत्वपूर्ण रूप से, दुष्टता मृत्यु के द्वारा समाप्त होती हैः'जब दुष्ट मरता है, तब उसकी आशा टूट जाती है, और दुष्ट की आशा व्यर्थ होती है' (व.7).
दूसरी ओर, 'सत्यनिष्ठा मृत्यु से छुड़ाती है' (व.4ब). यह एक विवाद है जिसका पतरस प्रेरित पिंतेकुस्त के दिन यीशु के विषय में इस्तेमाल करते हैं –सत्यनिष्ठ सड़ नहीं सकता हैः'यह असंभव था कि वह मृत्यु के वश में रहता' (प्रेरितों के काम 2:24).
यीशु के अलावा कोई भी पूरी तरह से सत्यनिष्ठ नहीं है. सत्यनिष्ठा का अर्थ है परमेश्वर के साथ-साथ और दूसरे लोगों के साथ सही संबंध. विश्वास के द्वारा एक उपहार के रूप में हमने परमेश्वर से इस सत्यनिष्ठ को ग्रहण किया (रोमियो 3:22; फिलिप्पियों 3:9) लेकिन हमें इसका अधिकार लेना है. हमें इसे जीना है.
इस लेखांश में हम कुछ उदाहरणों को देखते हैं कि इसका क्या अर्थ है.
- बुद्धि
'एक अच्छे व्यक्ति के मुँह से बुद्धि टपकती है, पर उलट फेर की बात कहने वाले की जीभ काटी जाएगी. एक अच्छा व्यक्ति ग्रहणयोग्य बात समझ कर बोलता है, परंतु दुष्टों के मुँह से उलट फेर की बातें निकलती हैं' (नीतिवचन 10:31अ, 32अ, एम.एस.जी.).
- दीनता
'जब अभिमान होता है, तब अपमान भी होता है, परंतु नम्र लोगों में बुद्धि होती है' (11:2, एम.एस.जी.).
- विश्वसनीयता
'सीधे लोग अपनी खराई से अगुवाई पाते हैं...एक सही जीवन मृत्यु से भी बचाता है' (व.3अ, 4ब, एम.एस.जी.).
- चरित्र
'खरे मनुष्य का मार्ग सीधा होता है...सीधे लोगों का बचाव उनकी खराई के कारण होता है' (व.5अ, 6अ,एम.एस.जी.)
प्रार्थना
परमेश्वर, मैं विश्वास के द्वारा आपकी सत्यनिष्ठा के उपहार का अधिकार लेता हूँ. मेरी सहायता कीजिए कि मैं बुद्धि, दीनता, विश्वसनीयता और वफादारी का एक जीवन जी सकूँ.
यूहन्ना 1:29-51
यीशु परमेश्वर का मेमना
29 अगले दिन यूहन्ना ने यीशु को अपनी तरफ आते देखा और कहा, “परमेश्वर के मेमने को देखो जो जगत के पाप को हर ले जाता है। 30 यह वही है जिसके बारे में मैंने कहा था, ‘एक पुरुष मेरे पीछे आने वाला है जो मुझसे महान है, मुझसे आगे है क्योंकि वह मुझसे पहले विद्यमान था।’ 31 मैं खुद उसे नहीं जानता था किन्तु मैं इसलिये बपतिस्मा देता आ रहा हूँ ताकि इस्राएल के लोग उसे जान लें।”
32-34 फिर यूहन्ना ने अपनी यह साक्षी दी: “मैनें देखा कि कबूतर के रूप में स्वर्ग से नीचे उतरती हुई आत्मा उस पर आ टिकी। मैं खुद उसे नहीं जान पाया, पर जिसने मुझे जल से बपतिस्मा देने के लिये भेजा था मुझसे कहा, ‘तुम आत्मा को उतरते और किसी पर टिकते देखोगे, यह वही पुरुष है जो पवित्र आत्मा से बपतिस्मा देता है।’ मैनें उसे देखा है और मैं प्रमाणित करता हूँ, ‘वह परमेश्वर का पुत्र है।’”
यीशु के प्रथम अनुयायी
35 अगले दिन यूहन्ना अपने दो चेलों के साथ वहाँ फिर उपस्थित था। 36 जब उसने यीशु को पास से गुजरते देखा, उसने कहा, “देखो परमेश्वर का मेमना।”
37 जब उन दोनों चेलों ने उसे यह कहते सुना तो वे यीशु के पीछे चल पड़े। 38 जब यीशु ने मुड़कर देखा कि वे पीछे आ रहे हैं तो उनसे पूछा, “तुम्हें क्या चाहिये?”
उन्होंने जवाब दिया, “रब्बी, तेरा निवास कहाँ है?” (“रब्बी” अर्थात् “गुरु।”)
39 यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, “आओ और देखो” और वे उसके साथ हो लिये। उन्होंने देखा कि वह कहाँ रहता है। उस दिन वे उसके साथ ठहरे क्योंकि लगभग शाम के चार बज चुके थे।
40 जिन दोनों ने यूहन्ना की बात सुनी थी और यीशु के पीछे गये थे उनमें से एक शमौन पतरस का भाई अन्द्रियास था। 41 उसने पहले अपने भाई शमौन को पाकर उससे कहा, “हमें मसीह मिल गया है।” (“मसीह” अर्थात् “ख्रीष्ट।” )
42 फिर अन्द्रियास शमौन को यीशु के पास ले आया। यीशु ने उसे देखा और कहा, “तू यूहन्ना का पुत्र शमौन है। तू कैफ़ा (“कैफ़ा” यानी “पतरस”) कहलायेगा।”
43 अगले दिन यीशु ने गलील जाने का निश्चय किया। फिर फिलिप्पुस को पाकर यीशु ने उससे कहा, “मेरे पीछे चला आ।” 44 फिलिप्पुस अन्द्रियास और पतरस के नगर बैतसैदा से था। 45 फिलिप्पुस को नतनएल मिला और उसने उससे कहा, “हमें वह मिल गया है जिसके बारे में मूसा ने व्यवस्था के विधान में और भविष्यवक्ताओं ने लिखा है। वह है यूसुफ का बेटा, नासरत का यीशु।”
46 फिर नतनएल ने उससे पूछा, “नासरत से भी कोई अच्छी वस्तु पैदा हो सकती है?”
फिलिप्पुस ने जवाब दिया, “जाओ और देखो।”
47 यीशु ने नतनएल को अपनी तरफ आते हुए देखा और उसके बारे में कहा, “यह है एक सच्चा इस्राएली जिसमें कोई खोट नहीं है।”
48 नतनएल ने पूछा, “तू मुझे कैसे जानता है?”
जवाब में यीशु ने कहा, “उससे पहले कि फिलिप्पुस ने तुझे बुलाया था, मैनें देखा था कि तू अंजीर के पेड़ के नीचे था।”
49 नतनएल ने उत्तर में कहा, “हे रब्बी, तू परमेश्वर का पुत्र है, तू इस्राएल का राजा है।”
50 इसके जवाब में यीशु ने कहा, “तुम इसलिये विश्वास कर रहे हो कि मैंने तुमसे यह कहा कि मैंने तुम्हें अंजीर के पेड़ के नीचे देखा। तुम आगे इससे भी बड़ी बातें देखोगे।” 51 इसने उससे फिर कहा, “मैं तुम्हें सत्य बता रहा हूँ तुम स्वर्ग को खुलते और स्वर्गदूतों को मनुष्य के पुत्र पर उतरते-चढ़ते देखोगे।”
समीक्षा
पवित्र आत्मा का उपहार
क्या आप उन सभी चीजों का आनंद ले रहे हैं जिसे यीशु ने आपके लिए उपलब्ध किया है? या आप अब भी सामर्थहीन और आत्मग्लानि महसूस कर रहे है? यीशु आप तक क्षमा, नया जीवन और पवित्र आत्मा की सामर्थ लाने आए थे. सुनिश्चित कीजिए कि आप उन चीजों का आज ही अधिकार लेते हैं, जो पहले से ही आपकी हैं.
इस लेखांश में हम यीशु को दिए गए शीर्षकों के एक उल्लेखनीय क्रम को देखते हैं. पहले हमने उनमें से कुछ को देखा था. यीशु 'परमेश्वर के पुत्र' हैं (वव.34,49), 'रब्बी' (व.38), 'मसीहा (अर्थात् मसीह)' (व.41), 'जिसे मूसा... और जिसके विषय में भविष्यवक्ताओं ने भी लिखा' (व.45), 'इस्राएल का राजा' (व.49) और 'मनुष्य का पुत्र' (व.51).
मैं इस लेखांश में दो शीर्षकों पर ध्यान देना चाहता हूँ जो यीशु की सेवकाई का वर्णन करते हैं.
- परमेश्वर का मेमना
मेमने के लहू ने इस्रालियों को दासत्व से बचाया और स्वतंत्रतापूर्वक वाचा की भूमि में उन्हें जाने दिया (निर्गमन 11-15). यूहन्ना यीशु के विषय में कहते हैं, 'देखो, यह परमेश्वर का मेमना है जो जगत का पाप उठा ले जाता है' (यूहन्ना 1:29). जैसे ही आप यीशु के पास आते हैं, वह आपके पापों को हटा देते हैं. आपके लिए जो क्षमा उपलब्ध कर दी गई है उसका दावा कीजिए, उसमें भरोसा, और विश्वास कीजिए. सक्रिय रूप से आत्मग्लानि, शर्म और अयोग्यता की भावनाओं को नकार दीजिए. यह एक सक्रिय, प्रायोगिक, दैनिक चुनाव है कि उस क्षमा का अधिकार लें जिसे यीशु ने आपके लिए उपलब्ध किया है.
- आत्मा का बपतिस्मा देने वाला
यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला यीशु का वर्णन 'पवित्र आत्मा से बपतिस्मा देने वाले के रूप में' करता है (व.33). यीशु आपको अपनी पवित्र आत्मा से भरते हैं. यही है जो यीशु ने आपके लिए उपलब्ध किया है. किंतु, आपको उस उपहार का अधिकार लेना है जिसे परमेश्वर ने आपके लिए उपलब्ध किया है.
यीशु ने फिलिप्पुस को निमंत्रण दिया, 'मेरे पीछे आओ' (व.43). 'पीछे आने' के लिए ग्रीक शब्द का अर्थ ना केवल 'कदमों पर चलना है' लेकिन साथ-साथ चलना भी है. यीशु आपको भी उनके साथ एक गहरे व्यक्तिगत मित्रता के लिए आमंत्रित करते हैं.
यीशु आपको भी वह करने का अवसर देते हैं जो यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने किया – दूसरों को यीशु के पीछे भेजना. निश्चित ही, परमेश्वर को एक मानवीय एजेंट की आवश्यकता नहीं है. यीशु हमारी सहायता के बिना अपनी सेवकाई को आगे ले जा सकते हैं. किंतु, हम इस लेखांश में देखते हैं कि कैसे परमेश्वर लोगों का इस्तेमाल करते हैं. यहाँ पर ना केवल यीशु दूसरों को सीधे बुलाते हैं, लेकिन उनके चेले भी ऐसा ही करते हैं.
वे अपने मित्रों को यीशु के पास लाते हैः यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला आंद्रियास से मिलवाता है (वव.35-36); आंद्रियास पतरस से मिलवाता है (व.41) और फिलिप्पुस नतानऐल से मिलवाता है (व.45). नतानएल पहले संदेहास्पद था, लेकिन फिर वह आकर जल्द ही समझ जाता है कि यीशु सच में परमेश्वर के पुत्र हैं (व.49).
कैंटरबरी, विल्यम टेंपल के पूर्वी प्रधानबिशप, ने यूहन्ना के सुसमाचार पर एक टिप्पणी लिखी. जब वह इस वचन पर पहुँचे 'और वह (आंद्रियास) उसे (शिमौन पतरस) को यीशु के पास ले आया' (व.42अ), टेंपल ने एक संक्षिप्त लेकिन यादगार कथन लिखाः 'सबसे महान सेवा वह है जो कि एक व्यक्ति दूसरे के लिए करे.'
शिमौन पतरस मसीहत के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव बनें. शायद से आप वह नहीं कर पाये जो पतरस ने किया था, लेकिन आप वह कर सकते हैं जो आंद्रियास ने किया – आप किसी को यीशु के पास ला सकते हैं.
या, फिलिप्पुस की तरह, आप कह सकते हैं, 'आओ और देखो' (व.46) अपने मित्रों से, परिवार से और सहकर्मियों से. आप परमेश्वर की योजना के एक भाग बन सकते हैं ताकि लोग यीशु के विषय में सुन सकें और उन्हें उत्तर दे सकें, जैसे ही आप उन्हें आमंत्रित करते हैं कि 'आओ और देखो.'
मैंने खोज लिया है कि यीशु की सेवकाई में जुड़ने से अधिक जीवन में कुछ भी ज्यादा उत्साहित करने वाली चीज नहीं है. परमेश्वर बहुत अनुग्रही हैं कि हमें, असिद्ध मानवजाति को अपनी सिद्ध योजना में शामिल करते हैं.
प्रार्थना
परमेश्वर, आज मेरी सहायता कीजिए कि क्षमा के इस उपहार का और पवित्र आत्मा में जीवन की परिपूर्णता का आनंद ले सकूं. मेरी सहायता कीजिए कि दूसरों को आपके पास ला सकूं –और लोगों को आमंत्रित करुं कि 'आओं और देखो' (व.46).
यहोशू 17:1-18:28
17तब मनश्शे के परिवार समूह को भूमि दी गई। मनश्शे यूसुफ का प्रथम पुत्र था। मनश्शे का प्रथम पुत्र माकीर था जो गिलाद का पिता था। माकीर महान योद्धा था, अतः गिलाद और बाशान माकीर के परिवार को दिये गए। 2 मनश्शे के परिवार समूह के अन्य परिवारों को भी भूमि दी गई। वे परिवार अबीएजेर, हेलेक, अस्त्रीएल, शेकेम, हेपेर और शमीदा थे। ये सभी मनश्शे के अन्य पुत्र थे, जो यूसुफ का पुत्र था। इन व्यक्तियों के परिवारों के परिवारों ने कुछ भूमि प्राप्त की।
3 सलोफाद हेपेर का पुत्र था। हेपेर गिलाद का पुत्र था। गिलाद माकीर का पुत्र था और माकीर मनश्शे का पुत्र था। किन्तु सलोफाद को कोई पुत्र न था।उसकी पाँच पुत्रियाँ थीं। पुत्रियों के नाम महला, नोआ, होग्ला, मिल्का और तिर्सा थे। 4 पुत्रियाँ याजक एलीआजर, नून के पुत्र यहोशू और सभी प्रमुखों के पास गईं। पुत्रियों ने कहा, “यहोवा ने मूसा से कहा कि वे हमें वैसे ही भूमि दें जैसे पुरुषों को दी जाती है।” इसलिए एलीआज़र ने यहोवा का आदेश मानते हुए इन पुत्रियों को भी वैसे ही भूमि मिले, जैसे अन्य पुरुषों को मिली थी।
5 इस प्रकार मनश्शे के परिवार के पास यरदन नदी के पश्चिम में भूमि के दस क्षेत्र थे और यरदन नदी के दूसरी ओर दो अन्य क्षेत्र गिलाद और बाशान थे। 6 मनश्शे की पौत्रियों को वैसे ही भूमि दी गई जैसे मनश्शे के अन्य पुरुष सन्तानों को दी गई थी। गिलाद प्रदेश मनश्शे के शेष परिवार को दिया गया।
7 मनश्शे की भूमि आशेर और मिकमतात के क्षेत्र के बीच थी। यह शकेम के निकट है। इसकी सीमा दक्षिण में एनतप्पूह क्षेत्र तक जाती थी। 8 तप्पूह की भूमि मनश्शे की थी किन्तु तप्पूह नगर उसका नहीं था। तप्पूह नगर मनश्शे के प्रदेश की सीमा पर था और यह एप्रैम के पुत्रों का था। 9 मनश्शे की सीमा काना नाले के दक्षिण में था। मनश्शे के इस क्षेत्र के नगर एप्रैम के थे। मनश्शे की सीमा नदी के उत्तर में थी और यह पश्चिम में लगातार भूमध्य सागर तक चली गई थी। 10 दक्षिण की भूमि एप्रैम की थी और उत्तर की भूमि मनश्शे की थी। भूमध्य सागर पश्चिम सीमा बनाता था। यह सीमा उत्तर में आशेर के प्रदेश को छूती थी और पूर्व मे इस्साकार के प्रदेश को।
11 इस्साकार और आशेर के क्षेत्र के बेतशान और इसके छोटे नगर तथा यिबलाम और इसके छोटे नगर मनश्शे के थे। मनश्शे के अधिकार में दोर तथा इसके छोटे नगरों में रहने वाले लोग तथा एनदोर और इसके छोटे नगर भी थे। मनश्शे का अधिकार तानाक और उसके छोटे नगरों में रहने वाले लोगों, और नापेत के तीन नगरों पर भी था। 12 मनश्शे के लोग उन नगरों को नहीं हरा सके थे। इसलिए कनानी लोग वहाँ रहते रहे। 13 किन्तु इस्राएल के लोग शक्तिशाली हुए। जब ऐसा हुआ तो उन्होंने कनानके लोगों को काम करने के लिये विवश किया। किन्तु वे कनानी लोगों को उस भूमि को छोड़ने के लिए विवश न कर सके।
14 यूसुफ के परिवार समूहों ने यहोशू से बातें कीं और कहा, “तुमने हमें भूमि का केवल एक क्षेत्र दिया। किन्तु हम बहुत से लोग हैं। तुमने हम लगों को उस देश का एक भाग ही क्यों दिया जिसे यहोवा ने अपने लोगों को दिया?”
15 और यहोशू ने उनको उत्तर दिया, “यदि तुम लोग संख्या में अधिक हो तो पहाड़ी प्रदेश के जंगलों में ऊपर चढ़ो और वहाँ अपने रहने के लिये स्थान बनाओ। यह प्रदेश परिज्जयों और रपाइ लोगों का है। यदि एप्रैम का पहाड़ी प्रदेश तुम लोगों की आवश्यकता से बहुत छोटा है तो उस भूमि को ले लो।”
16 यूसुफ के लोगों ने कहा, “यह सत्य है कि एप्रैम का पहाड़ी प्रदेश हम लोगों के लिए पर्याप्त नहीं है किन्तु यह प्रदेश जहाँ कनानी लोग रहते हैं खतरनाक है। वे कुशल योद्धा हैं तथा उनके पास शक्तिशाली, अस्त्र—शस्त्र हैं, लोहे के रथ हैं, तथा वे बेतशान के उस क्षेत्र के सभी छोटे नगरों तथा यिज्रेल की घाटी में भी नियंत्रण रखते हैं।”
17 तब यहोशू ने यूसुफ, एप्रैम और मनश्शे के लोगों को कहा, “किन्तु तुम लोगों की संख्या अत्याधिक है। और तुम लोग बड़ी शक्ति रखते हो। तुम लोगों को अधिक भूमि मिलनी चाहिए। 18 तुम लोगों को पहाड़ी प्रदेश लेना होगा। यह जंगल है, किन्तु तुम लोग पेड़ों को काट सकते हो और रहने योग्य अच्छा स्थान बना सकते हो। यह सारा तुम्हारा होगा। तुम लोग कनानी लोगों को उस प्रदेश को छोड़ने के लिए बलपूर्वक विवश करोगे। तुम लोग उन्हें उनके शक्तिशाली अस्त्र—शस्त्र और शक्ति के होते हुए भी पराजित करोगे।”
बचे हुये प्रदेश का विभाजन
18इस्राएल के सभी लोग शीलो नामक स्थान पर इकट्ठा हुए। उस स्थान पर उन्होंने मिलापवाले तम्बू को खड़ा किया। इस्राएल के लोगो उस प्रदेश पर शासन करते थे। उन्होंने उस प्रदेश के सभी शत्रुओं को हराया था। 2 किन्तु उस समय भी इस्राएल के सात परिवार समूह ऐसे थे, जिन्हें परमेश्वर के द्वारा वचन दिये जाने पर भी उन्हें दी गई भूमि नहीं मिली थी।
3 इसलिए यहोशू ने इस्राएल के लोगों से कहा, “तुम लोग अपने प्रदेश लेने में इतनी देर प्रतीक्षा क्यों करते हो? यहोवा, तुम्हारे पूर्वजों के परमेश्वर ने यह प्रदेश तुम्हें दिया है। 4 इसलिए तुम्हारे प्रत्येक परिवार समूह को तीन व्यक्ति चुनने चाहिए। मैं उन व्यक्तियों को उन प्रदेशों की जाँच के लिए भेजूँगा। वे उस प्रदेश का विवरण तैयार करेंगे तब वे मेरे पास लौटेंगे। 5 वे देश को सात भागों में बाटेंगे। यहूदा के लोग अपना प्रदेश दक्षिण में रखेंगे। यूसुफ के लोग अपना प्रदेश उत्तर में रखेंगे। 6 किन्तु तुम लोगों को विवरण तैयार करना चाहिए और प्रदेश को सात भागों में बाँटना चाहिए। विवरण मेरे पास लाओ हम लोग अपने यहोवा परमेश्वर को यह निर्णय करने देंगे कि किस परिवार को कौन सा प्रदेश मिलेगा। 7 किन्तु लेवीवंशी लोग इन प्रदेशों का कोई भी भाग नहीं पाएंगे। वे याजक हैं और उनका कार्य यहोवा की सेवा करना है।गाद, रूबेन और मनश्शे के परिवार समूहों के आधे लोग पहले ही वचन के अनुसार दिया गया अपना प्रदेश पा चुके हैं। ये प्रदेश यरदन नदी के पूर्व में हैं। यहोवा के सेवक मूसा ने उस प्रदेश को उन्हें पहले ही दे दिया था।”
8 इसलिए चुने गये व्यक्ति उस भूमि को देखने और उस का विवरण लिखने चले गये। यहोशू ने उनसे कहा, “जाओ, और उस प्रदेश की जाँच करो तथा उसके विवरण तैयार करो। तब मेरे पास लौटो। उस समय मैं यहोवा से कहूँगा कि जो देश तुम्हें मिलेगा उसे चुनने में वे मेरी सहायता करें।”
9 इसलिए उन पुरुषों ने वह स्थान छोड़ा और उस देश में वे गए। उन्होंने देश की जाँच की और यहोशू के लिए विवरण तैयार किए। उन्होंने हर नगर की जाँच की और पाया कि प्रदेश के सात भाग हैं। उन्होंने अपने विवरणों को तैयार किया और यहोशू के पास आए। यहोशू तब भी शीलो के डेरे में था। 10 उस समय यहोशू ने यहोवा से सहायता माँगी। यहोशू ने हर एक परिवार समूह को देने के लिए एक प्रदेश चुना। यहोशू ने प्रदेश को बाँटा और हर एक परिवार समूह को उसके हिस्से का प्रदेश दिया।
बिन्यामीन के लिये प्रदेश
11 बिन्यामीन के परिवार समूह को वह प्रदेश दिया गया जो यूसुफ और यहूदा के क्षेत्रों के बीच था। बिन्यामीन परिवार समूह के हर एक परिवार ने कुछ भूमि पाई। बिन्यामीन के लिए चुना गया प्रदेश यह थाः 12 इसकी उत्तरी सीमा यरदन नदी से आरम्भ हुई। यह सीमा यरीहो के उत्तरी छोर से गई थी। तब यह सीमा पश्चिम के पहाड़ी प्रदेश में गई थी। यह सीमा लगातार बेतावेन के ठीक पूर्वी ढलान तक थी। 13 तब यह सीमा लूज (यानी बेतेल) के दक्षिणी ढलान तक गई। फिर यह सीमा अत्रोतद्दार तक नीचे गई। अत्रोतद्दार निचले बेथोरोन की दक्षिणी पहाड़ी के ढलान पर है। 14 बेथोरोन दक्षिण में एक पहाड़ी है। यहाँ सीमा इस पहाड़ी पर मुड़ी और उस पहाड़ी की पश्चिमी ओर के निकट से दक्षिण को गई थी। यह सीमा किर्यतबाल (किर्यत्यारीम) को गई। यह एक नगर है, जहाँ यहूदा के लोग रहते थे। यह पश्चिमी सीमा थी।
15 दक्षिण की सीमा किर्यत्यारीम से आरम्भ हुई और नेप्तोह प्रपात को गई। 16 तब सीमा हिन्नोम की घाटी के निकट की पहाड़ी की तलहटी में उतरी। यह रपाईम घाटी का उत्तरी छोर था। यह सीमा यबूसी नगर के ठीक दक्षिण हिन्नोम घाटी में चलती चली गई। तब सीमा एनरोगेल तक चली गई। 17 वहाँ, सीमा उत्तर की ओर मुड़ी और एन शेमेश को गई। यह सीमा लगातार गलीलोत तक जाती है। (गलीलोत, पर्वतों में अदुम्मीम दर्रे के पास है।) यह सीमा उस बड़ी चट्टान तक गई जिसका नाम रूबेन के पुत्र, बोहन के लिए रखा गया था। 18 यह सीमा बेतअराबा के उत्तरी भाग तक लगातार चली गई। तब सीमा अराबा में नीचे उतरी। 19 तब यह सीमा बेथोग्ला के उत्तरी भाग को जाकर, लवण सागर के उत्तरी तट पर समाप्त हुई। यह वही स्थान है जहाँ यरदन नदी समुद्र में गिरती है। यह दक्षिणी सीमा थी।
20 पूर्व की ओर यरदन की नदी सीमा थी। इस प्रकार यह भूमि थी जो बिन्यामीन के परिवार समूह को दी गई। ये चारों ओर की सीमाएं थीं। 21 बिन्यामीन के हर एक परिवार समूह को, इस प्रकार, यह भूमि मिली। उनके अधिकार में ये नगर थे। यरीहो, बेथोग्ला, एमेक्कासीस, 22 बेतराबा, समारैम, बेतेल, 23 अव्वीम, पारा, ओप्रा, 24 कपरम्मोनी, ओप्नी और गेबा। ये बारह नगर, उस छोटे क्षेत्र में, उनके आस पास खेतों सहित थे।
25 बिन्यामीन के परिवार समूह के पास गिबोन, रामाबेरोत, 26 मिस्पा, कपीरा, मोसा, 27 रेकेम, यिर्पेल, तरला, 28 सेला, एलेप, यबूस (यरूशलेम), गिबत और किर्येत नगर भी थे। ये चौदह नगर, उस छोटे क्षेत्र में उनके आस पास के खेतों के साथ थे। ये क्षेत्र बिन्यामीन के परिवार समूह ने पाया था।
समीक्षा
आपके उत्तराधिकार का उपहार
क्या आपके जीवन का कोई ऐसा क्षेत्र है जिसमें आप अब भी मसीह में अपने उत्तराधिकार का आनंद नहीं ले रहे हैं?
भूमि परमेश्वर के लोगों का उत्तराधिकार था (17:4,7; 18:7,20,27). यहोशू ने इस्राएल के लोगों से कहाः'जो देश तुम्हारे पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा ने तुम्हें दिया है, उसे अपने अधिकार में कर लेने में तुम कब तक ढ़िलाई करते रहोगे?' (18:3, एम.एस.जी).
यहाँ पर, एक बार फिर, हम मालिक होने में और अधिकार लेने में और भूमि का आनंद लेने में एक बड़े अंतर को देखते हैं. इस्राएल को भूमि का मालिक बना दिया गया था लेकिन उन्होंने इसका अधिकार और इसका आनंद अभी तक नहीं लिया था.
जब आप यीशु के पीछे चलते हैं, तब आप उनके मित्र बन जाते हैं. आप क्षमा, निर्दोष ठहराया जाना, परमेश्वर की सत्यनिष्ठा और पवित्र आत्मा को ग्रहण करते हैं. आप परमेश्वर की एक संतान बन जाते हैं. आपके पास पाप के ऊपर सामर्थ है और परमेश्वर की उपस्थिति में रास्ता है. शैतानी ताकतों के ऊपर आपके पास सामर्थ है. आप परमेश्वर के साथ शांति में हैं. अपने जीवन में और दूसरों के जीवन में बुराई के ऊपर आपके पास अधिकार है. परमेश्वर की सभी प्रतिज्ञाएँ आपकी हैं. यह मसीह में आपका उत्तराधिकार है.
लेकिन शायद से आप हमेशा, आवश्यक रूप से अपने जीवन में इन सभी चीजों की आशीषों का अधिकार न लें और पूरी तरह से इसका आनंद न ले पायें. यहाँ पर परमेश्वर कहते हैं, अपने लोगों सेः'क्या तुम नहीं समझते कि मैंने यह सब तुम्हें दे दिया है? तुम किसका इंतजार कर रहे हो?'
शायद से आपने अपना जीवन यीशु को दिया है, लेकिन क्या आपने उन्हें आपके जीवन जीने के हर पहलू का अधिकार लेने दिया है – आपका धन, काम, प्रार्थना जीवन, मित्र और परिवार. मेरे जीवन में, यह एक जीवनभर का कार्य है.
संत पौलुस लिखते हैं कि आपको हर विचार को पकड़कर उसे मसीह का आज्ञाकारी बनाना है (2कुरिंथियो 10:5). कुछ क्षेत्रो में शायद से विजय तुरंत मिल जाएँ. दूसरे क्षेत्रो में शायद यह बहुत धीरे हो. आपको हर छोटी सी छोटी अड़चन को निकालना पड़ेगा.
जैसे कि इस्राएल ने परमेश्वर से एक उपहार के रूप में भूमि को ग्रहण किया (यहोशू 18:3), वैसे ही आपने और मैंने यीशु में, हर आत्मिक आशीष को ग्रहण किया है (इफीसियों 1:3). प्रश्न है, 'इन उपहारों का अधिकार लेने में अब आप कब तक ढ़िलाई करेंगे?' (यहोशू 18:3)
प्रार्थना
परमेश्वर, आपका धन्यवाद क्योंकि आपने मुझे मसीह में हर आत्मिक आशीष से आशिषित किया है. आज मेरी सहायता कीजिए कि यीशु के द्वारा विश्वास से उन चीजों का अधिकार ले सकूं जो पहले से ही मेरी हैं.
पिप्पा भी कहते है
यूहन्ना 1:48
'तुम मुझे कैसे जानते हो?' नतानएल ने पूछा. यीशु ने उत्तर दिया, 'इस से पहले कि फिलिप्पुस ने तुझे बुलाया, जब तू अंजीर के पेड़ के तले था, तब मैंने तुझे देखा था.'
जहाँ कही आप हैं और जो कुछ आप कर रहे हैं, यीशु आपको देखते हैं. वह आपको जानते हैं.

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संदर्भ
नोट्स:
विलियम टेंपल, रिडिंग इन सेंट जॉन गॉस्पल, (मॅकमिलियन, 1952)
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