भूरे रंग का कोई उतार-चढ़ाव नहीं (नो शेड्स ऑफ ग्रे)
परिचय
1960 में, मॉन्किस नामक बैंड ने गीत गाया कि कैसे कोई भी अब पूर्ण सदाचार में विश्वास नहीं करता था. ... शेड्स ऑफ ग्रे में उन्होंने गाया:
जब विश्व और मैं जवान था,
कल ही की बात है.
जीवन एक सरल खेल था...
तब सही और गलत बताना आसान था...
आज कोई काला या सफेद नही है,
केवल भूरे रंग में उतार-चढ़ाव है.
अब 'भूरे रंग के उतार-चढ़ाव' का यह भाव बदनाम और विवादित किताबों और फिल्म के नाम के साथ जुड़ा होता है.
आजकल कई लोग जरा भी विश्वास नहीं करते कि संपूर्ण सही और संपूर्ण गलत जैसी भी कोई बाते हैं. समाज में एकदम अलग विषमता और काला तथा सफेद भिन्नता को निगलना हमेशा आसान नहीं होता, जिसमें तुलना करना दिन का क्रम है. सब कुछ तुलनात्मक है – श्रेणी की एक बात.
यीशु के अनुयायियों के रूप में हम इन तुलनात्मक विचारों पर हार नहीं मान सकते हैं. हमें अवश्य ही वचन की भविष्यवाणी के प्रति खुला होना चाहिए, जो अक्सर जटिल परेशानियों और स्थितियों के बीच में कठोर विरोध, तत्पर नैतिक चुनाव और अलगाव के रास्तों को खोजता है, जटिल परेशानियों और स्थितियों के बीच में.
सही और गलत की वास्तविकता आज के लेखांश में बहुत स्पष्ट है और दोनों के बीच में कठोर विरोध है.
भजन संहिता 71:9-18
9 केवल इस कारण की मैं बूढ़ा हो गया हूँ मुझे निकाल कर मत फेंक।
मैं कमजोर हो गया हूँ मुझे मत छोड़।
10 सचमुच, मेरे शत्रुओं ने मेरे विरूद्ध कुचक्र रच डाले हैं।
सचमुच वे सब इकटठे हो गये हैं, और उनकी योजना मुझको मार डालने की है।
11 मेरे शत्रु कहते हैं, “परमेश्वर, ने उसको त्याग दिया है। जा, उसको पकड़ ला!
कोई भी व्यक्ति उसे सहायता न देगा।”
12 हे परमेश्वर, तू मुझको मत बिसरा!
हे परमेश्वर, जल्दी कर! मुझको सहारा दे!
13 मेरे शत्रुओं को तू पूरी तरह से पराजित कर दे!
तू उनका नाश कर दे!
मुझे कष्ट देने का वे यत्न कर रहे हैं।
वे लज्जा अनुभव करें ओर अपमान भोगें।
14 फिर मैं तो तेरे ही भरोसे, सदा रहूँगा।
और तेरे गुण मैं अधिक और अधिक गाऊँगा।
15 सभी लोगों से, मैं तेरा बखान करूंगा कि तू कितना उत्तम है।
उस समय की बातें मैं उनको बताऊँगा,
जब तूने ऐसे मुझको एक नहीं अनगिनित अवसर पर बचाया था।
16 हे यहोवा, मेरे स्वामी। मैं तेरी महानता का वर्णन करूँगा।
बस केवल मैं तेरी और तेरी ही अच्छाई की चर्चा करूँगा।
17 हे परमेश्वर, तूने मुझको बचपन से ही शिक्षा दी।
मैं आज तक बखानता रहा हूँ, उन अद्भुत कर्मो को जिनको तू करता है!
18 मैं अब बूढा हो गया हूँ और मेरे केश श्वेत है। किन्तु मैं जानता हूँ कि तू मुझको नहीं तजेगा।
हर नयी पीढ़ी से, मैं तेरी शक्ति का और तेरी महानता का वर्णन करूँगा।
समीक्षा
अच्छी तरह से समाप्त करना बनाम शर्म में नष्ट हो जाना
बाईबल में केवल एक प्रकार का 'भूरा रंग' है, वह है 'भूरे बाल', जिसे 'वैभव के एक मुकुट के रूप में देखा जाता है...जो एक सत्यनिष्ठ जीवन के द्वारा प्राप्त होता है' (नीतिवचन 16:31). व्यक्तिगत रूप से, मुझे यह उत्साहित करने वाली बात लगती है!
भजनसंहिता का लेखक अच्छी रिती से समाप्त करने के लिए दृढ़ संकल्पित है. वह लिखते हैं, 'ब़ुढापे के समय मेरा त्याग न कर; जब मेरा बल घटे तब मुझ को छोड़ न दे...इसलिये हे परमेश्वर, जब मैं बूढ़ा हो गया, और मेरे बाल पक गए, तब भी तू मुझे न छोड़, जब तक मैं आने वाली पीढ़ी के लोगों को तेरा बाहुबल और सब उत्पन्न होने वालों को तेरा पराक्रम न सुनाऊँ' (भजनसंहिता 71:9,18).
यह उनके शत्रुओं के विधान के लिए कठोर विरोध है, जिनके लिए वह आशा करते हैं कि वे 'शर्म में नष्ट होंगे' (व.13). नये नियम के दृष्टिकोण से, यह किसी के शत्रुओं के लिए प्रार्थना करने का सही तरीका नहीं है! किंतु, यह निश्चित रूप से सच है कि कुछ लोग 'शर्म में नष्ट' होते हुए दिखाई देते हैं. यह किसी के जीवन की समाप्ति का तरीका है.
भजनसंहिता के लेखक अपनी तुलना उन लोगों के साथ करते हैं जो शर्म में नष्ट होते हैं. वह लिखते हैं, 'लेकिन जहाँ तक मेरा संबंध है...' (व.14). वह अपने जीवन के अंत तक परमेश्वर के नजदीक रहना चाहते हैं. वास्तव में, वह चाहते हैं कि उनके जीवन का अंत, आरंभ से अधिक फलदायी हो. वह कहते हैं, 'मैं और अधिकाधिक आपकी स्तुति करुँगा' (व.14). हर पीढ़ी के पास उत्तरदायित्व है कि 'बेटन को अगली पीढ़ी को सौंप दे' (व.18). वारिस की योजना बनाना, अच्छी रीति से समाप्त करने का एक मुख्य भाग है. ऐसा कहा जाता है कि यह महत्वपूर्ण है कि एक पौलुस के पीछे जाएँ और एक तीमुथियुस को प्रशिक्षित करे, एक मरियम से सीखे और एक फीबेर को तैयार करे.
प्रार्थना
परमेश्वर, मेरी सहायता करे कि मैं अच्छी रीति से समाप्त करुँ और अगली पीढ़ी में आपकी सामर्थ की चर्चा करुं. होने दे कि मेरा मुँह आपकी सत्यनिष्ठा का वर्णन करे और आपके सामर्थी कामों की घोषणा करे.
प्रेरितों के काम 4:23-5:11
पतरस और यूहन्ना की वापसी
23 जब उन्हें छोड़ दिया गया तो वे अपने ही लोगों के पास आ गये और उनसे जो कुछ प्रमुख याजकों और बुजुर्ग यहूदी नेताओं ने कहा था, वह सब उन्हें कह सुनाया। 24 जब उन्होंने यह सुना तो मिल कर ऊँचे स्वर में वे परमेश्वर को पुकारते हुए बोले, “स्वामी, तूने ही आकाश, धरती, समुद्र और उनके अन्दर जो कुछ है, उसकी रचना की है। 25 तूने ही पवित्र आत्मा के द्वारा अपने सेवक, हमारे पूर्वज दाऊद के मुख से कहा था:
‘इन जातियों ने जाने क्यों अपना अहंकार दिखाया?
लोगों ने व्यर्थ ही षड़यन्त्र क्यों रच डाले?
26 ‘धरती के राजाओं ने, उसके विरुद्ध युद्ध करने को तैयार किया।
और शासक प्रभु और उसके मसीह के विरोध में एकत्र हुए।’
27 हाँ, हेरोदेस और पुन्तियुस पिलातुस भी इस नगर में ग़ैर यहूदियों और इस्राएलियों के साथ मिल कर तेरे पवित्र सेवक यीशु के विरोध में, जिसे तूने मसीह के रूप में अभिषिक्त किया था, वास्तव में एकजुट हो गये थे। 28 वे इकट्ठे हुए ताकि तेरी शक्ति और इच्छा के अनुसार जो कुछ पहले ही निश्चित हो चुका था, वह पूरा हो। 29 और अब हे प्रभु, उनकी धमकियों पर ध्यान दे और अपने सेवकों को निर्भयता के साथ तेरे वचन सुनाने की शक्ति दे। 30 जबकि चंगा करने के लिये तू अपना हाथ बढ़ाये और चिन्ह तथा अद्भुत कर्म तेरे पवित्र सेवकों द्वारा यीशु के नाम पर किये जा रहे हों।”
31 जब उन्होंने प्रार्थना पूरी की तो जिस स्थान पर वे एकत्र थे, वह हिल उठा और उन सब में पवित्र आत्मा समा गया, और वे निर्भयता के साथ परमेश्वर के वचन बोलने लगे।
विश्वासियों का सहयोगी जीवन
32 विश्वासियों का यह समूचा दल एक मन और एक तन था। कोई भी यह नहीं कहता था कि उसकी कोई भी वस्तु उसकी अपनी है। उनके पास जो कुछ होता, उस सब कुछ को वे बाँट लेते थे। 33 और वे प्रेरित समूची शक्ति के साथ प्रभु यीशु के फिर से जी उठने की साक्षी दिया करते थे। परमेश्वर का महान बरदान उन सब पर बना रहता। 34 उस दल में से किसी को भी कोई कमी नहीं थी। क्योंकि जिस किसी के पास खेत या घर होते, वे उन्हें बेच दिया करते थे और उससे जो धन मिलता, उसे लाकर 35 प्रेरितों के चरणों में रख देते और जिसको जितनी आवश्यकता होती, उसे उतना धन दे दिया जाता था।
36 उदाहरण के लिये यूसुफ नाम का, साइप्रस में पैदा हुआ, एक लेवी था जिसे प्रेरित बरनाबास (अर्थात चैन का पुत्र) भी कहा करते थे। 37 उसने एक खेत बेच दिया जिसका वह मालिक था और उस धन को लाकर प्रेरितों के चरणों पर रख दिया।
हनन्याह और सफ़ीरा
5हनन्याह नाम के एक व्यक्ति और उसकी पत्नी सफ़ीरा ने मिलकर अपनी सम्पत्ति का एक हिस्सा बेच दिया। 2 और अपनी पत्नी की जानकारी में उसने इसमें से कुछ धन बचा लिया और कुछ धन प्रेरितों के चरणों में रख दिया।
3 इस पर पतरस ने कहा, “हे हनन्याह, शैतान को तूने अपने मन में यह बात क्यों डालने दी कि तूने पवित्र आत्मा से झूठ बोला और खेत को बेचने से मिले धन में से थोड़ा बचा कर रख लिया? 4 उसे बेचने से पहले क्या वह तेरी ही नहीं थी? और जब तूने उसे बेच दिया तो वह धन क्या तेरे ही अधिकार में नहीं था? तूने इस बात की क्यों सोची? तूने मनुष्यों से नहीं, परमेश्वर से झूठ बोला है।”
5-6 हनन्याह ने जब ये शब्द सुने तो वह पछाड़ खाकर गिर पड़ा और दम तोड़ दिया। जिस किसी ने भी इस विषय में सुना, सब पर गहरा भय छा गया। फिर जवान लोगों ने उठ कर उसे कफ़न में लपेटा और बाहर ले जाकर गाड़ दिया।
7 कोई तीन घण्टे बाद, जो कुछ घटा था, उससे अनजान उसकी पत्नी भीतर आयी। 8 पतरस ने उससे कहा, “बता, तूने तेरे खेत क्या इतनें में ही बेचे थे?”
सो उसने कहा, “हाँ। इतने में ही।”
9 तब पतरस ने उससे कहा, “तुम दोनों प्रभु की आत्मा की परीक्षा लेने को सहमत क्यों हुए? देख तेरे पति को दफनाने वालों के पैर दरवाज़े तक आ पहुँचे हैं और वे तुझे भी उठा ले जायेंगे।” 10 तब वह उसके चरणों पर गिर पड़ी और मर गयी। फिर जवान लोगों भीतर आये और मरा पा कर उसे उठा ले गये और उसके पति के पास ही उसे दफ़ना दिया। 11 सो समूची कलीसिया और जिस किसी ने भी इन बातों को सुना, उन सब पर गहरा भय छा गया।
समीक्षा
पवित्र आत्मा से भरना विरूद्ध शैतान से भरना
फिर से, हम एक कठोर विरोध को देखते हैं. यहाँ पर, यह चेलों के बीच में है जो कि 'सभी पवित्र आत्मा से भरे हुए हैं' (4:31) और हनन्याह और सफीरा. पतरस हनन्याह से कहते हैं, 'कैसे शैतान ने तुम्हारे हृदय को भर दिया है' (5:3).
पहला, हम पवित्र आत्मा से भरने के परिणामों को देखते हैं:
- निर्भीकता
पतरस और यूहन्ना उन धमकियों से रूके नहीं जो उन्हें दी गई थी (4:17,21). इसके बजाय, 'उन्होंने एक साथ मिलकर ऊँची आवाज में परमेश्वर से प्रार्थना की' (व.24). उन्होंने प्रार्थना की, ' अब हे प्रभु, उनकी धमकियों को देख; और अपने दासों को यह वरदान दे कि तेरा वचन बड़े साहस से सुनाएँ' (व.29). ' जब वे प्रार्थना कर चुके, तो वह स्थान जहाँ वे इकट्ठे थे हिल गया, और वे सब पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो गए, और परमेश्वर का वचन साहस से सुनाते रहे' (व.31).
- एकता
'सभी विश्वासी एक दिमाग और एक हृदय के थे' (व.32अ). वे सभी पवित्र आत्मा से भर गए थे. आत्मा से भरे समुदाय का एक चिह्न है एकता.
- उदारता
उनके पास अपनी संपत्तियों के प्रति उदारता का व्यवहार थाः 'जो कुछ उनके पास था, वह उसे एक-दूसरे में बाँट देते थे...उनके बीच में किसी भी व्यक्ति को कोई कमी नहीं थी' (वव.32,34). जो लोग सहायता कर सकते थे, उन्होंने जरुरतमंदों की सहायता की (वव.34-35).
- सामर्थ
उन्होंने प्रार्थना की थी, ' चंगा करने के लिये तू अपना हाथ बढ़ा कि चिह्न और अद्भुत काम तेरे पवित्र सेवक यीशु के नाम में किए जाएँ' (व.30). उनकी प्रार्थना का उत्तर आयाः ' प्रेरित बड़ी सामर्थ से प्रभु यीशु के जी उठने की गवाही देते रहे' (व.33अ).
- अनुग्रह
'उन सभी के ऊपर बड़ा अनुग्रह था' (व.33ब). परमेश्वर के अनुग्रह के अनुभव को अनुग्रह और अनुग्रही समुदाय को लाना चाहिए.
कठोर विरोध के द्वारा, आज के लेखांश के दूसरे भाग में हम शैतान के द्वारा भरने के परिणामों को देखते है. पतरस बहुत ही कठोर भाषा का इस्तेमाल करते हैं, जब वह कहते हैं, 'हनन्याह, कैसे शैतान ने तेरे हृदय को भर दिया है' (5:3).
हनन्याह और सफीरा पर कोई दबाव नहीं था कि वह अपनी जायदाद या पैसे को देः' जब तक वह तेरे पास रही, क्या तेरी न थी? और जब बिक गई तो क्या तेरे वश में न थी?' (व.4). उदारता की कमी के कारण उनकी आलोचना नहीं की गई.
इसके बजाय, इस बात का प्रमाण कि शैतान ने उनके हृदय को भर दिया था, केवल उनका झूठ बोलना नहीं था (जो कि एक स्वाभाविक कार्य होता), लेकिन यह कि वे झूठ बोलने के लिए एकसाथ सहमत हो गए. पतरस हनन्याह से कहते हैं, 'तुमने पवित्र आत्मा से झूठ बोला है' (व.3) और वह सफीरा से कहते हैं, ' यह क्या बात है कि तुम दोनों ने प्रभु की आत्मा की परीक्षा के लिये सहमति की है?' (व.9). इस सहमति को पहले ही सोचा गया था और तैयार किया गया था.
परमेश्वर ने पतरस को 'ज्ञान का एक वचन' दिया (वव.3-4). इसने उनके पाप को प्रकट किया. परमेश्वर का भय लोगों के ऊपर आया (वव.5,11). इस प्रकार का भय, मनुष्यों से भय नहीं था या एक दास का भय नहीं था, बल्कि एक पवित्र भय था. वे 'परमेश्वर का सम्मान करते थे'. वे जानते थे कि परमेश्वर को महत्वहीन नहीं समझना चाहिए (व.11, एम.एस.जी).
यह पढ़ने के लिए एक सरल कहानी नहीं है, और हममें से बहुत से लोग लेखांश में परमेश्वर के न्याय की तीक्ष्णता से संघर्ष करते हैं. आखिरकार, केवल परमेश्वर ही हमारे हृदय के रहस्यों को जानते हैं, और हमें भरोसा करने की आवश्यकता है कि उनका न्याय उचित और खरा है. यह हमारे बीच में परमेश्वर की उपस्थिति की अद्भुतता को याद दिलाता है. परमेश्वर की उपस्थिति का बोध इतना अधिक था कि लोग डर रहे थे कि कही उनके पाप प्रकट न हो जाएँ. लेकिन परमेश्वर की इस उपस्थिति ने और पवित्र आत्मा के असाधारण परिवर्तन,ने चंगाई, चिह्न और चमत्कार लाये.
प्रार्थना
परमेश्वर, हमें पवित्र आत्मा से भर दे. होने दे कि हम ऐसे एक चर्च बने जो इसकी निर्भीक घोषणा, एकता, उदारता, सामर्थ और अनुग्रह के लिए पहचाना जाता है.
2 शमूएल 13:1-39
अम्नोन और तामार
13दाऊद का एक पुत्र अबशालोम था। अबशालोम की बहन का नाम तामार था। तामार बहुत सुन्दर थी। दाऊद के अन्य पुत्रों में से एक पुत्र अम्नोन था 2 जो तामार से प्रेम करता था। तामार कुवाँरी थी। अम्नोन उसके साथ कुछ बुरा करने को नहीं सोचता था। लेकिन अम्नोन उसे बहुत चाहता था। अम्नोन उस के बारे में इतना सोचने लगा कि वह बिमार हो गया।
3 अम्नोन का एक मित्र शिमा का पुत्र योनादाब था। (शिमा दाऊद का भाई था।) योनादाब बहुत चालाक आदमी था। 4 योनादाब ने अम्नोन से कहा, “हर दिन तुम दुबले—दुबले से दिखाई पड़ते हो! ‘तुम राजा के पुत्र हो! तुम्हें खाने के लिये बहुत अधिक है, तो भी तुम अपना वजन क्यों खोते जा रहे हो? मुझे बताओ!’”
अम्नोन ने योनादाब से कहा, “मैं तामार से प्रेम करता हूँ। किन्तु वह मेरे सौतेले भाई अबशालोम की बहन है।”
5 योनादाब ने अम्नोन से कहा, “बिस्तर में लेट जाओ। ऐसा व्यवहार करो कि तुम बीमार हो। तब तुम्हारे पिता तुमको देखने आऐंगे। उनसे कहो, ‘कृपया मेरी बहन तामार को आने दें और मुझे खाना देने दें। उसे मेरे सामने भोजन बनाने दें। तब मैं उसे देखूँगा और उसके हाथ से खाऊँगा।’”
6 इसलिये अम्नोन बिस्तर में लेट गया, और ऐसा व्यवहार किया मानों वह बीमार हो। राजा दाऊद अम्नोन को देखने आया। अम्नोन ने राजा दाऊद से कहा, “कृपया मेरी बहन तामार को यहाँ आने दें। मेरे देखते हुए उसे मेरे लिये दो रोटी बनाने दें। तब मैं उसके हाथों से खा सकता हूँ।”
7 दाऊद ने तामार के घर सन्देशवाहकों को भेजा। संदेशवाहकों ने तामार से कहा, “अपने भाई अम्नोन के घर जाओ और उसके लिये कुछ भोजन पकाओ।”
8 अत: तामार अपने भाई अम्नोन के घर गई। अम्नोन बिस्तर में था। तामार ने कुछ गूंधा आटा लिया और इसे अपने हाथों से एक साथ दबाया। उसने अम्नोन के देखते हुये कुछ रोटियाँ बनाईं। तब उसने रोटियों को पकाया। 9 जब तामार ने रोटियों को पकाना पूरा किया तो उसने कढ़ाही में से रोटियों को अम्नोन के लिये निकाला। किन्तु अम्नोन ने खाना अस्वीकार किया। अम्नोन ने अपने सेवकों से कहा, “तुम सभी लोग चले जाओ। मुझे अकेला रहने दो!” इसलिये सभी सेवक अम्नोन के कमरे से बाहर चले गए।
अम्नोन तामार के साथ कुकर्म करता है
10 अम्नोन ने तामार से कहा, “भोजन भीतर वाले कमरे में ले चलो। तब मैं तुम्हारे हाथ से खाऊँगा।”
तामार अपने भाई के पास भीतर वाले कमरे में गई। वह उन रोटियों को लाई जो उसने बनाई थीं। 11 वह अम्नोन के पास गई जिससे वह उसके हाथों से खा सके। किन्तु अम्नोन ने तामार को पकड़ लिया। उसने उससे कहा, “बहन, आओ, और मेरे साथ सोओ।”
12 तामार ने अम्नोन से कहा, “नहीं, भाई! मुझे मजबूर न करो! यह इस्राएल में कभी नहीं किया जा सकता। यह लज्जाजनक काम न करो। 13 मैं इस लज्जा से कभी उबर नहीं सकती! तुम उन मूर्ख इस्राएलियों की तरह मत बनों कृपया राजा से बात करो। वह तुम्हें मेरे साथ विवाह करने देगा।”
14 किन्तु अम्नोन ने तामार की एक न सुनी। वह तामार से अधिक शक्तिशाली था। उसने उसे शारिरिक सम्बन्ध करने के लिये विवश किया। 15 उसके बाद अम्नोन तामार से घृणा करने लगा। अम्नोन ने उसके साथ उससे भी अधिक घृणा की जितना वह पहले प्रेम करता था। अम्नोन ने तामार से कहा, “उठो और चली जाओ!”
16 तामार ने अम्नोन से कहा, “अब मुझे अपने से दूर कर, तुम पहले से भी बड़ा पाप करने जा रहे हो!”
किन्तु अम्नोन ने तामार की एक न सुनी। 17 अम्नोन ने अपने युवक सेवक से कहा, “इस लड़की को इस कमरे से अभी बाहर निकालो। उसके जाने पर दरवाजे में ताला लगा दो।”
18 अत: अम्नोन का सेवक तामार को कमरे के बाहर ले गया और उसके जाने पर ताला लगा दिया।
तामार ने कई रंग का लबादा पहन रखा था। राजा की कुवाँरी कन्यायें ऐसा ही लबादा पहनती थीं। 19 तामार ने राख ली और अपने सिर पर डाल लिया। उसने अपने बहुरंगे लबादे को फाड़ डाला। उसने अपना हाथ अपने सिर पर रख लिया और वह जोर से रोने लगी।
20 तामार के भाई अबशालोम ने तामार से कहा, “तो क्या तुम्हारे भाई अम्नोन ने तुम्हारे साथ सोया। अम्नोन तुम्हारा भाई है। बहन, अब शान्त रहो। इससे तुम बहुत परेशान न हो।” अत: तामार ने कुछ भी नहीं कहा। वह अबशालोम के घर रहने चली गई।
21 राजा दाऊद को इसकी सूचना मिली। वह बहुत क्रोधित हुआ। 22 अबशालोम अम्नोन से घृणा करता था। अबशालोम ने अच्छा या बुरा अम्नोन से कुछ नहीं कहा। वह अम्नोन से घृणा करता था क्योंकि अम्नोन ने उसकी बहन के साथ कुकर्म किया था।
अबशालोम का बदला
23 दो वर्ष बाद कुछ व्यक्ति एप्रैम के पास बाल्हासोर में अबशालोम की भेड़ों का ऊन काटने आये। अबशालोम ने राजा के सभी पुत्रों को आने और देखने के लिये आमन्त्रित किया। 24 अबशालोम राजा के पास गया और उससे कहा, “मेरे पास कुछ व्यक्ति मेरी भेड़ों से ऊन काटने आ रहे हैं। कृपया अपने सेवकों के साथ आएँ और देखें।”
25 राजा दाऊद ने अबशालोम से कहा, “पुत्र नहीं। हम सभी नहीं जाएंगे। इससे तुम्हें परेशानी होगी।” अबशालोम ने दाऊद से चलने की प्रार्थना की। दाऊद नहीं गया, किन्तु उसने आशीर्वाद दिया।
26 अबशालोम ने कहा, “यदि आप जाना नहीं चाहते तो, कृपाकर मेरे भाई अम्नोन को मेरे साथ जाने दें।”
राजा दाऊद ने अबशालोम से पूछा, “वह तुम्हारे साथ क्यों जाये?”
27 अबशालोम दाऊद से प्रार्थना करता रहा। अन्त में दाऊद ने अम्नोन और सभी राजपुत्रों को अबशालोम के साथ जाने दिया।
अम्नोन की हत्या की गई
28 तब अबशालोम ने अपने सवेकों को आदेश दिया। उसने उनसे कहा, “अम्नोन पर नजर रखो। जब वह नशे में धुत होगा तब मैं तुम्हें आदेश दूँगा अम्नोन को जान से मार डालो। सजा पाने से डरो नहीं। आखिरकार, तुम मेरे आदेश का पालन करोगे। अब शक्तिशाली और वीर बनों।”
29 अबशालोम के युवकों ने अबशालोम के आदेश के अनुसार अम्नोन को मार डाला। किन्तु दाऊद के अन्य पुत्र बच निकले। हर एक पुत्र अपने खच्चर पर बैठा और भाग गया।
दाऊद अम्नोन की मृत्यु की सूचना पाता है
30 जब राजा के पुत्र मार्ग में थे, दाऊद को सूचना मिली। सूचना यह थी, “अबशालोम ने राजा के सभी पुत्रों को मार डाला है! कोई भी पुत्र बचा नहीं है।”
31 राजा दाऊद ने अपने वस्त्र फाड़ डाले और धरती पर लेट गया। दाऊद के पास खड़े उसके सभी सेवकों ने भी अपने वस्त्र फाड़ डाले।
32 किन्तु शिमा (दाऊद के भाई) के पुत्र योनादाब ने दाऊद से कहा, “ऐसा मत सोचो कि राजा के सभी युवक पुत्र मार डाले गए हैं। नहीं, यह केवल अम्नोन है जो मारा गया है। जब से अम्नोन ने उसकी बहन तामार के साथ कुकर्म किया था तभी से अबशालोम ने यह योजना बनाई थी। 33 मेरे स्वामी राजा यह न सोचें कि सभी राजपुत्र मारे गए हैं। केवल अम्नोन ही मारा गया।”
34 अबशालोम भाग गया।
एक रक्षक नगर प्राचीर पर खड़ा था। उसने पहाड़ी की दूसरी ओर से कई व्यक्तियों को आते देखा। 35 इसलिये योनादाब ने राजा दाऊद से कहा, “देखो, मैं बिल्कुल सही था। राजा के पुत्र आ रहें हैं।”
36 जब योनादाब ने ये बातें कहीं तभी राजपुत्र आ गए। वे जोर जोर से रो रहे थे। दाऊद और उसके सभी सेवक रोने लगे। वे सभी बहुत विलाप कर रहे थे। 37 दाऊद अपने पुत्र(अम्नोन) के लिये बहुत दिनों तक रोया।
अबशालोम गशूर को भाग गया
अबशालोम गशूर के राजा अम्मीहूर के पुत्र तल्मै के पास भाग गया। 38 अबशालोम के गशूर भाग जाने के बाद, वह वहाँ तीन वर्ष तक ठहरा। 39 अम्नोन की मृत्यु के बाद दाऊद शान्त हो गया। लेकिन अबशालोम उसे बहुत याद आता था।
समीक्षा
प्रेम बनाम नफरत
इस लेखांश में हम बहुत ही विपरीत भावनाओं को देखते हैं. अम्नोन को 'तमार से प्रेम हो गया' (व.1). वह कहते हैं, 'मैं तमार से प्रेम करता हूँ, मेरे भाई अबशालोम की बहन से' (व.4). दाऊद की बहुत सी पत्नियाँ और बहुत से बच्चे थे. शायद से पाँच या छ वर्ष की उम्र होने पर लड़को को लड़कियों से अलग कर दिया जाता था; एक साथ होने का बोध शायद से उन लोगों में नही होगा, जैसा कि आज एक सामान्य परिवार में होता है.
अम्नोन ने तमार का बलात्कार करने का षड़यंत्र रखा, जिसने उससे विनती कीः'ऐसे दुष्ट काम मत करो' (व.12). यहाँ तक कि उसने उससे शादी करने का प्रस्ताव दिया (व.13). नियम सौतेली बहन से विवाह करने से मना करता था. संभव रूप से, उस समय इसे नहीं माना जाता था. तमार उसके शिकंजे में फँस चुकी थी. अम्नोन 'ने उसकी बात नहीं सुनी, और क्योंकि वह उससे अधिक मजबूत था, उसने उसका बलात्कार किया' (व.14).
बाईबल यौन-संबंधी दुष्कर्म को नजदअंदाज नहीं करती है. बलात्कार हमेशा से, और अब भी एक भयानक अपराध है. तमार इसका वर्णन 'दुष्ट कार्य' के रूप में करती है (व.12). यह एक 'दुष्ट मूर्ख' का कार्य है (व.13). यह 'अकेलापन' लाता है (व.20) और यह एक 'शर्मनाक' कार्य है (व.21).
हम उस भयानक नुकसान की एक झलक को देखते हैं जो कि यौन-संबंधी दुष्कर्म अपने शिकार के साथ करता हैः 'तमार ने अपने सिर पर राख डाली, और अपनी रंगबिरंगी कुर्ती को फाड़ डाला; और सिर पर हाथ रखे चिल्लाती हुई चली गई' (व.19, एम.एस.जी). वह 'कड़वी और अकेली' हो गई (व.20, एम.एस.जी).
तुरंत ही, ऐसा दिखाई देता है कि, 'अम्नोन उससे अत्यंत बैर रखने लगा; यहाँ तक कि यह बैर उससे पहले मोह से बढ़कर हुआ' (व.15). इसने दाऊद और उसके घराने के लिए परेशानी खड़ी कर दी. हिंसा बनी रही – अम्नोन की हत्या कर दी गई और अबशालोम दाऊद से अलग होकर दूर भाग जाता है (वव.23-39).
शायद से यह करना ज्यादा सटीक बात होगी कि अम्नोन तमार के 'प्रेम में अंधा हो गया था'. शायद से वह उसके 'प्रेम में' पड़ गया था, लेकिन वह निश्चित ही उससे प्रेम नहीं करता था. यह असाधारण है, यद्पि मनुष्य के गिरे हुए स्वभाव और अनुभव के बारे में सच है, कि प्रेम में अंधा होना जल्द ही नफरत में बदल जाता है. अम्नोन का प्रेम निश्चित ही सच्चा प्रेम नहीं था.
'प्रेम धैर्यवान है, प्रेम दयालु है. यह डाह नहीं करता, यह घमंड नहीं करता, यह अभिमानी नहीं है. यह अक्खड़ नही है, यह स्वार्थी नहीं है, यह जल्दी से गुस्सा नहीं करता, यह गलतियों को याद नहीं रखता. प्रेम बुराई में आनंद नहीं मनाता है बल्कि सच्चाई में आनंद मनाता है. यह हमेशा सुरक्षित रखता है, हमेशा भरोसा करता है, हमेशा आशा करता है, और बचाता है' (1कुरिंथियो 13:4-7).
प्रार्थना
परमेश्वर, हमें नफरत से बचा. होने दे कि हम एक नकली प्रेम से नहीं, बल्कि एक ऐसे प्रेम से भर जाएँ जो कि पवित्र आत्मा का फल है.
पिप्पा भी कहते है
2शमुएल 13:1-39
यहाँ पर परिवार में फूट की शुरुवात होती है. इस समय कुछ भयानक निर्णय लिए जा रहे थे. योनादाब, जो अम्नोन का मित्र था, उसने बुरी सलाह दी (व.5). यदि दाऊद ने अम्नोन को अपनी बहन तमार का बलात्कार करने की सलाह दी होती, तो शायद से अबशालोम ने कानून को अपने हाथों में नहीं लिया होता.
योनादाब, जिसे अपने आप पर शर्म आनी चाहिए थी क्योंकि वही आधी परेशानी था, वह स्पष्ट रूप से जानता था कि अबशालोम अम्नोन को मार डालना चाहता था. फिर भी उसने दाऊद को नहीं चिताया. वह केवल बाद में उन्हें बताता है. वह उन सभी के लिए एक बुरा मित्र था.
कभी – कभी लोगों को सच बताना इससे अधिक मुश्किल बात होती है कि उन्हें वह बताये जो वह सुनना चाहते हैं. लेकिन सही सलाह देना महत्वपूर्ण बात है, यहाँ तक कि यदि मित्रता खतरे में पड़ जाएँ.

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संदर्भ
मॉन्किस, 'शेड्स ऑफ ग्रे' (1965) हेडक्वाटर्स से, संगीतकराः मन्न, बॅरि/वेल, सिन्थिया. लिरिक्स म्युजिक पब्लिशिंग
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