दिन 165

आपका देश बदल सकता है

बुद्धि नीतिवचन 14:25-35
नए करार प्रेरितों के काम 8:4-40
जूना करार 2 शमूएल 20:1-21:22

परिचय

लंदन की सड़कों पर 10000 वेश्याएँ अपना व्यवसाय कर रही थी. शराब पीना और जुआ खेलना फैल चुका था. यूके में अवनति और अनैतिकता हो रही थी. यह अठारहवीं शताब्दी थी. चर्चों में लोगों की संख्या घट चुकी थी (जैसा कि वर्तमान दशकों में हुआ है). वस्तुत: अंग्रेजी चर्चों के कुछ हिस्से अविश्वासी बन गए थे.

फिर भी, देश बदल गया. वेसली और व्हाइटफिल्ड का उपदेश प्रभाव बनाने लगा. हजारों लोगों ने उनके संदेश का उत्तर दिया और यीशु से मुलाकात की. 1780 में रॉबर्ट रेक ने अपने पहले संडे स्कूल की शुरुवात की. इस एक विचार से पाँच वर्षों में वृद्धि 300000 बच्चों तक पहुँच गई. 1910 तक, 5668760 बच्चे संडे स्कूल में आते थे. परमेश्वर ने विल्बरफोर्स, शेफ्टसबरी और दूसरों को उठाया. ना केवल लोगों के हृदय बदले – लेकिन देश भी बदल गया.

जैसे ही आज हम अपने विश्व को देखते हैं, हम देखते हैं कि यह पहले से कही ज्यादा तेजी से बदल रहा है. पिछले पच्चीस वर्षों में, बहुत अधिक बदलाव आया है – राजनैतिक रूप से, आर्थिक रूप से और तकनीकी रूप से. विश्व भर में बहुत से देशों में व्यापक बदलावा आ रहा है. आपके देश का आत्मिक मौसम कैसे बदल सकता है?

बुद्धि

नीतिवचन 14:25-35

25 एक सच्चा साक्षी अनेक जीवन बचाता है
 पर झूठा गवाह, कपट पूर्ण होता है।

26 ऐसा मनुष्य जो यहोवा से डरता है,
 उसके पास एक संरक्षित गढ़ी होती है।
 और वहीं उसके बच्चों को शरण मिलती है।

27 यहोवा का भय जीवन स्रोत होता है,
 वह व्यक्ति को मौत के फंदे से बचाता है।

28 विस्तृत विशाल प्रजा राजा की महीमा हैं,
 किन्तु प्रजा बिना राजा नष्ट हो जाती है।

29 धैर्यपूर्ण व्यक्ति बहुत समझ बूझ रखता है,
 किन्तु ऐसा व्यक्ति जिसे जल्दी से क्रोध आये वह तो अपनी ही मूर्खता दिखाता है।

30 शान्त मन शरीर को जीवन देता है
 किन्तु ईर्ष्या हड्डियों तक को सड़ा देती है।

31 जो गरीब को सताती है, वह तो सबके सृजनहार का अपमान करता है।
 किन्तु वह जो भी कोई गरीब पर दयालु रहता है, वह परमेश्वर का आदर करता है।

32 जब दुष्ट जन पर विपदा पड़ती है तब वह हार जाते हैं
 किन्तु धर्मी जन तो मृत्यु में भी विजय हासिल करते हैं।

33 बुद्धिमान के मन में बुद्धि का निवास होता है,
 और मूर्खो के बीच भी वह निज को जानती है।

34 नेकी से राष्ट्र का उत्थान होता है;
 किन्तु पाप हर जाति का कलंक होता है।

35 विवेकी सेवक, राजा की प्रसन्नता है,
 किन्तु वह सेवक जो मूर्ख होता है वह उसका क्रोध जगाता है।

समीक्षा

शांतिमय लोग

नीतिवचन के लेखक कहते हैं, 'जाति की बढ़ती सत्यनिष्ठा ही से होती है, परंतु पाप से देश के लोगों का अपमान होता है' (व.34). ('परमेश्वर के लिए समर्पण एक देश को मजबूत बनाता है, व.34, एम.एस.जी'). पाप एक देश को नष्ट करता है. सत्यनिष्ठा एक देश को बढ़ाती है. सत्यनिष्ठा में सही संबंध शामिल है.

  1. परमेश्वर की शांति

परमेश्वर के साथ शांति में आने से सत्यनिष्ठा की शुरुवात होती है (रोमियो 5:1). परमेश्वर के भय से इसकी शुरुवात होती है (परमेश्वर के लिए उचित सम्मान के साथ).

'यहोवा के भय मानने वालों को दृढ़ भरोसा होता है, और उसके पुत्रों को शरणस्थान मिलता है. यहोवा का भय मानना, जीवन का सोता है, और उसके द्वारा लोग मृत्यु के फन्दों से बच जाते हैं' (नीतिवचन 14:26-27अ, एम.एस.जी.).

  1. दूसरों के साथ शांती

जहाँ तक संभव हो, 'सभी के साथ शांती में रहो' (रोमियो 12:18). दूसरों के साथ सही संबंधो की विशेषता है सत्यनिष्ठ वचन और कार्य. पहला, हमारे वचनों को सच्चा होना चाहिए नाकि एक धोखे से भरा हुआ क्योंकि 'एक सच्चा गवाह जीवन को बचाता है' (नीतिवचन 14:25).

दूसरा, हमारे कामों ने दूसरों के कुशल-क्षेम की एक इच्छा को दर्शाना चाहिए. धैर्यवान बनें नाकि जल्दी गुस्सा करने वाले (व.29). जरुरतमंदो के प्रति दयालु बने. 'आप अपने सृजनहार का अपमान करते हैं जब आप शक्तिहीनों का शोषण करते हैं; जब आप गरीबों के प्रति दया दिखाते हैं, तब आप परमेश्वर का सम्मान करते हैं' (व.31, एम.एस.जी.). जो बुद्धि से काम करते हैं उनके प्रति अपनी प्रसन्नता को दर्शायें (वव.33,35).

  1. अपने आपके साथ शांती

सत्यनिष्ठा में शामिल है अपने आपके साथ एक सही संबंध. आप शांती को जान सकते हैं:'शांत मन, तन का जीवन है' (व.30अ, ए.एम.पी.). गुस्सा, क्षमा न करना, ईष्या और जलन आपके भौतिक शरीर को खराब कर सकती है. अपने जीवन में बुरी चीजों से छुटकारा पाना और 'मन की शांती' पाना आपके स्वास्थ के लिए अच्छा है.

आखिर में, शांती आती है वर्तमान और भविष्य दोनों के विषय में संतुष्ट रहने से. क्योंकि, 'सत्यनिष्ठ को मृत्यु के समय भी शरण मिलती है' (व.32ब). जो परमेश्वर का भय मानते हैं, उनके लिए वह वर्तमान में (व.26) और भविष्य में (व.32ब) हमारा शरणस्थान बन जाते हैं.

प्रार्थना

परमेश्वर, मैं प्रार्थना करता हूँ कि हमारा देश फिर से आपकी ओर फिरेगा और फिर से संसद में, सरकार में, स्कूल में और न्यायालय में आपके नाम का सम्मान होगा. हमारी सहायता कीजिए कि गरीबों को हम प्राथमिकता दें और जरुरतमंदो के प्रति दयालु बनें.

नए करार

प्रेरितों के काम 8:4-40

4 उधर तितर-बितर हुए लोग हर कहीं जा कर सुसमाचार का संदेश देने लगे।

सामरिया में फिलिप्पुस का उपदेश

5 फिलिप्पुस सामरिया नगर को चला गया और वहाँ लोगों में मसीह का प्रचार करने लगा। 6 फिलिप्पुस के लोगों ने जब सुना और जिन अद्भुत चिन्हों को वह प्रकट किया करता था, देखा, तो जिन बातों को वह बताया करता था, उन पर उन्होंने गम्भीरता के साथ ध्यान दिया। 7 बहुत से लोगों में से, जिनमें दुष्टात्माएँ समायी थी, वे ऊँचे स्वर में चिल्लाती हुई बाहर निकल आयीं थी। बहुत से लकवे के रोगी और विकलांग अच्छे हो रहे थे। 8 उस नगर में उल्लास छाया हुआ था।

9 वहीं शमौन नाम का एक व्यक्ति हुआ करता था। वह काफी समय से उस नगर में जादू-टोना किया करता था। और सामरिया के लोगों को आश्चर्य में डालता रहता था। वह महापुरुष होने का दावा किया करता था। 10 छोटे से लेकर बड़े तक सभी लोग उसकी बात पर ध्यान देते और कहते, “यह व्यक्ति परमेश्वर की वही शक्ति है जो ‘महान शक्ति कहलाती है।’” 11 क्योंकि उसने बहुत दिनों से उन्हें अपने चमत्कारों के चक्कर में डाल रखा था, इसीलिए वे उस पर ध्यान दिया करते थे। 12 किन्तु उन्होंने जब फिलिप्पुस पर विश्वास किया क्योंकि उसने उन्हें परमेश्वर के राज्य का सुसमाचार और यीशु मसीह का नाम सुनाया था, तो वे स्त्री और पुरुष दोनों ही बपतिस्मा लेने लगे। 13 और स्वयं शमौन ने भी उन पर विश्वास किया। और बपतिस्मा लेने के बाद फिलिप्पुस के साथ वह बड़ी निकटता से रहने लगा। उन महान् चिन्हों और किये जा रहे अद्भुत कार्यों को जब उसने देखा, तो वह दंग रह गया।

14 उधर यरूशलेम में प्रेरितों ने जब यह सुना कि सामरिया के लोगों ने परमेश्वर के वचन को स्वीकार कर लिया है तो उन्होंने पतरस और यूहन्ना को उनके पास भेजा। 15 सो जब वे पहुँचे तो उन्होंने उनके लिये प्रार्थना की कि उन्हें पवित्र आत्मा प्राप्त हो। 16 क्योंकि अभी तक पवित्र आत्मा किसी पर भी नहीं उतरा था, उन्हें बस प्रभु यीशु के नाम का बपतिस्मा ही दिया गया 17 सो पतरस और यूहन्ना ने उन पर अपने हाथ रखे और उन्हें पवित्र आत्मा प्राप्त हो गया।

18 जब शमौन ने देखा कि प्रेरितों के हाथ रखने भर से पवित्र आत्मा दे दिया गया तो उनके सामने धन प्रस्तुत करते हुए वह बोला, 19 “यह शक्ति मुझे दे दो ताकि जिस किसी पर मैं हाथ रखूँ, उसे पवित्र आत्मा मिल जाये।”

20 पतरस ने उससे कहा, “तेरा और तेरे धन का सत्यानाश हो, क्योंकि तूने यह सोचा कि तू धन से परमेश्वर के वरदान को मोल ले सकता है। 21 इस विषय में न तेरा कोई हिस्सा है, और न कोई साझा क्योंकि परमेश्वर के सम्मुख तेरा हृदय ठीक नहीं है। 22 इसलिए अपनी इस दुष्टता से मन फिराव कर और प्रभु से प्रार्थना कर। हो सकता है तेरे मन में जो विचार था, उस विचार के लिये तू क्षमा कर दिया जाये। 23 क्योंकि मैं देख रहा हूँ कि तू कटुता से भरा है और पाप के चंगुल में फँसा है।”

24 इस पर शमौन ने उत्तर दिया, “तुम प्रभु से मेरे लिये प्रार्थना करो ताकि तुमने जो कुछ कहा है, उसमें से कोई भी बात मुझ पर न घटे!”

25 फिर प्रेरित अपनी साक्षी देकर और प्रभु का वचन सुना कर रास्ते के बहुत से सामरी गाँवों में सुसमाचार का उपदेश करते हुए यरूशलेम लौट आये।

कूश से आये व्यक्ति को फिलिप्पुस का उपदेश

26 प्रभु के एक दूत ने फिलिप्पुस को कहते हुए बताया, “तैयार हो, और दक्षिण दिशा में उस राह पर जा, जो यरूशलेम से गाजा को जाती है।” (यह एक सुनसान मार्ग है।)

27 सो वह तैयार हुआ और चल पड़ा। वहीं एक कूश का खोजा था। वह कूश की रानी कंदाके का एक अधिकारी था जो उसके समुचे कोष का कोषपाल था। वह आराधना के लिये यरूशलेम गया था। 28 लौटते हुए वह अपने रथ में बैठा भविष्यवक्ता यशायाह का ग्रंथ पढ़ रहा था।

29 तभी फिलिप्पुस को आत्मा से प्रेरणा मिली, “उस रथ के पास जा और वहीं ठहर।” 30 फिलिप्पुस जब उस रथ के पास दौड़ कर गया तो उसने उसे यशायाह को पढ़ते सुना। सो वह बोला, “क्या जिसे तू पढ़ रहा है, उसे समझता है?”

31 उसने कहा, “मैं भला तब तक कैसे समझ सकता हूँ, जब तक कोई मुझे इसकी व्याख्या नहीं करे?” फिर उसने फिलिप्पुस को रथ पर अपने साथ बैठने को बुलाया। 32 शास्त्र के जिस अंश को वह पढ़ रहा था, वह था:

  “उसे वध होने वाली भेड़ के समान ले जाया जा रहा था।
  वह तो उस मेमने के समान चुप था। जो अपनी ऊन काटने वाले के समक्ष चुप रहता है,
  ठीक वैसे ही उसने अपना मुँह खोला नहीं!
  33 ऐसी दीन दशा में उसको न्याय से वंचित किया गया।
  उसकी पीढ़ी का कौन वर्णन करेगा?
  क्योंकि धरती से उसका जीवन तो ले लिया था।”

34 उस खोजे ने फिलिप्पुस से कहा, “अनुग्रह करके मुझे बता कि भविष्यवक्ता यह किसके बारे में कह रहा है? अपने बारे में या किसी और के?” 35 फिर फिलिप्पुस ने कहना शुरू किया और इस शास्त्र से लेकर यीशु के सुसमाचार तक सब उसे कह सुनाया।

36 मार्ग में आगे बढ़ते हुए वे कहीं पानी के पास पहुँचे। फिर उस खोजे ने कहा, “देख! यहाँ जल है। अब मुझे बपतिस्मा लेने में क्या बाधा है?” 37 38 तब उसने रथ को रोकने की आज्ञा दी। फिर फिलिप्पुस और वह खोजा दोनों ही पानी में उतर गए और फिलिप्पुस ने उसे बपतिस्मा दिया। 39 और फिर जब वे पानी से बाहर निकले तो फिलिप्पुस को प्रभु की आत्मा कहीं उठा ले गई, और उस खोजे ने फिर उसे कभी नहीं देखा। उधर खोजा आनन्द मनाता हुआ अपने मार्ग पर आगे चला गया। 40 उधर फिलिप्पुस ने अपने आपको अशदोद में पाया और जब तक वह कैसरिया नहीं पहुँचा तब तक, सभी नगरों में सुसमाचार का प्रचार करते हुए यात्रा करता रहा।

समीक्षा

शक्तिशाली उपदेश

आरंभिक कलीसिया आपके और मेरी तरह साधारण लोगों से बनी थी. फिर भी इसने विश्व को बदल दिया. यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान और पवित्र आत्मा के ऊँडेले जाने के बाद संपूर्ण विश्व बदल गया. प्रेरितों के काम की पुस्तक हमें बताती है कि यह कैसे हुआ.

जहाँ कही वे गए, उन्होंनें यीशु के विषय में संदेश का प्रचार किया (व.4, एम.एस.जी). इस लेखांश में हम देखते हैं कि उन्होंने भीड़ को और हर व्यक्ति को प्रचार किया, जैसे कि शमौन जादू-टोना करने वाला और इथोपिया का खजांची था.

शहर, नगर और गाँव मिलकर देश बनता है. उन्होंने तीनों में सुसमाचार का प्रचार किया. सामरिया में फिलिप्पुस ने सुसमाचार का प्रचार किया (व.5). बहुत से सामरी गाँवो में पतरस और यूहन्ना ने सुसमाचार का प्रचार किया (व.25). फिलिप्पुस ने सभी नगरों में सुसमाचार का प्रचार किया जब तक वह केसरिया नहीं पहुँच गए (व.40).

उनके प्रचार में शामिल थे – और सच में तीन कारकों के द्वारा बढ़ाः

  1. सताव

सताव के साथ इसकी शुरुवात हुईः' जो तितर – बितर हुए थे, वे सुसमाचार सुनाते हुए फिरे' (व.4). वितरण महान आशीष को लाया. जहाँ कही वे गए, उन्होंने 'मसीह का प्रचार किया' (व.5).

चर्च के इतिहास में बार-बार सताव और विरोध के कारण अनपेक्षित परिणाम आए. जब हम अड़चनों का सामना करते हैं तब हृदय का कच्चा होना सरल बात है, लेकिन यह हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर अद्भुत रीति से उनका इस्तेमाल कर सकते हैं.

  1. प्रार्थना

इस लेखांश में हम प्रार्थना के महत्व को देखते हैं. पतरस और यूहन्ना ने सामरियों के लिए प्रार्थना की कि वे पवित्र आत्मा को ग्रहण करें (वव.15-17).

शिमौन एक जादू-टोना करने वाले व्यक्ति से जिसने सभी लोगों को इससे चकित करके रखा था (वव.9-11, एम.एस.जी.). उसने विश्वास किया और बपतिस्मा लिया, लेकिन अपने पुराने तरीकों के कारण वह पवित्र आत्मा को खरीदना चाहता था (व.19).

पतरस प्रसन्न नहीं हुए, 'तेरे रुपये तेरे साथ नष्ट हों... अपनी इस बुराई से मन फिराकर प्रभु से प्रार्थना कर, सम्भव है तेरे मन का विचार क्षमा किया जाए. क्योंकि मैं देखता हूँ कि तू पित्त की सी कड़वाहट और बुराई के बन्धन में पड़ा है' (वव.20-23, एम.एस.जी).

शिमौन ने समझा कि केवल परमेश्वर उसे क्षमा कर सकते थे और उसने उनसे कहा कि उसके लिए प्रार्थना करें (व.24).

  1. सामर्थ

आरंभिक कलीसिया की विशेषता थी अत्यधिक प्रभावशीलताः 'जो बातें फिलिप्पुस ने कहीं उन्हें लोगों ने सुनकर और जो चिह्न वह दिखाता था उन्हें देख देखकर, एक चित्त होकर मन लगाया. क्योंकि बहुतों में से अशुद्ध आत्माएँ बड़े शब्द से चिल्लाती हुई निकल गई, और बहुत से लकवे के रोगी और लंगड़े भी चंगे किए गए' (वव.6-7).

वे पूरी तरह से पवित्र आत्मा पर निर्भर थे. खजांची के साथ फिलिप्पुस की मुलाकात, एक युक्तिकारक योजना सभा का परिणाम नहीं था. इसके बजाय, 'आत्मा ने फिलिप्पुस को बताया...' (व.29). पवित्र आत्मा की अगुवाई में चलने के परिणामस्वरूप खजांची ने उल्लेखनीय रूप से मन फिराया, जिसके कारण इथियोपिया का संपूर्ण देश आज तक प्रभावित हुआ है. उस दिन जिस चर्च का जन्म हुआ, उस देश में कभी भी उसकी मृत्यु नहीं हुई.

पवित्र आत्मा बदलाव के एजेंट हैं. वह एक देश में बदलाव को ला सकते हैं. वह बदलाव लोगों के जीवन में बदलाव के साथ शुरु होता है. इस इथियोपिया में बदलाव में शामिल कारक ध्यान देने योग्य है.

पहला, परमेश्वर की आत्मा ने उसके हृदय को तैयार किया. खजांची अपनी अज्ञानता के प्रति ईमानदार थे (व.31), उत्तर को खोज रहे थे (व.32) और सहायता मांगने के लिए अति अहंकारी नहीं थे (व.34). बाईबल में आपने जो पढ़ा, यदि हमेशा यह आपको समझ में नहीं आता है तो इसमें शर्म की बात नहीं है. बुद्धिमानी है कि भरोसेमंद लोगों से सहायता ले या बाईबल टिप्पणीयों से ताकि अपने जीवन में इसे लगाने में आपकी सहायता हो.

दूसरा, परमेश्वर के वचन के द्वारा परमेश्वर का आत्मा कार्य करता है. जैसे ही खजांची यशायाह की पुस्तक को देखते हैं, तब वह उत्तर को खोजना शुरु करते हैं (वव.32-33). अक्सर, पवित्र आत्मा वचनों को प्रकट करने, समझाने और लगाने में सहायता करने के लिए मनुष्य का इस्तेमाल करते हैं. यहाँ पर यही हुआ, यशायाह 53 से शुरुवात करते हुए, फिलिप्पुस 'यीशु के विषय में अच्छे समाचार' को समझाते हैं (व.35).

पवित्र आत्मा एक सुधारवादी और पूर्ण तरीके से खजांची के हृदय को बदलते हैं कि वह तुरंत विश्वास करते हैं और बपतिस्मा लेने की माँग करते हैं. पवित्र आत्मा के अलावा बदलाव का कोई अत्यधिक शक्तिशाली एजेंट नहीं है.

प्रार्थना

परमेश्वर हमारी सहायता करें कि आरंभिक कलीसिया की तरह हम बने. हमारी सहायता करें कि हम और अधिक प्रार्थना करें और हर दिन पवित्र आत्मा की अगुवाई में चले. मैं प्रार्थना करता हूँ कि हमारा देश बदल जाएगा जैसे ही लोग आपको जानते हैं.

जूना करार

2 शमूएल 20:1-21:22

शेबा इस्राएलियों को दाऊद से अलग संचालित करता है

20ऐसा हुआ कि बिक्री का पुत्र शेबा नाम का एक बुरा आदमी था। शेबा बिन्यामीन परिवार समूह का था। उसने तुरही बजाई और कहा,

 “हम लोगों का कोई हिस्सा दाऊद में नहीं है।
 यिशै के पुत्र का कोई अंश हममें नहीं है।
 पूरे इस्राएली, हम लोग अपने डेरों में घर चले।”

2 तब सभी इस्राएलियों ने दाऊद को छोड़ दिया, और बिक्री के पुत्र शेबा का अनुसरण किया। किन्तु यहूदा के लोग अपने राजा के साथ लगातार यरदन नदी से यरूशलेम तक बने रहे।

3 दाऊद अपने घर यरूशलेम को आया। दाऊद ने अपनी पत्नियों में से दस को घर की देखभाल के लिये छोड़ा था। दाऊद ने इन स्त्रियों को एक विशेष घर में रखा। लोगों ने इस घर की रक्षा की। स्त्रियाँ उस घर में तब तक रहीं जब तक वे मरी नहीं। दाऊद ने उन्हें भोजन दिया, किन्तु उनके साथ शारीरिक सम्बन्ध नहीं किया। वे मरने के समय तक विधवा की तरह रहीं।

4 राजा ने अमासा से कहा, “यहूदा के लोगों से कहो कि वे मुझसे तीन दिन के भीतर मिलें, और तुम्हें भी यहाँ आना होगा और मेरे सामने खड़ा होना होगा।”

5 तब अमासा यहूदा के लोगों को एक साथ बुलाने गया। किन्तु उसने, जितना समय राजा ने दिया था, उससे अधिक समय लिया।

दाऊद अबीशै से शेबा को मारने को कहता है

6 दाऊद ने अबीशै से कहा, “बिक्री का पुत्र शेबा हम लोगों के लिये उससे भी अधिक खतरनाक है जितना अबशालोम था। इसलिये मेरे सेवकों को लो और शेबा का पीछा करो। शेबा को प्राचीर वाले नगरों में पहुँचने से पहले इसे शीघ्रता से मारो। यदि शेबा प्राचीर वाले नगरों में पहुँच जायेगा तो वह हम लोगों से बच निकलेगा।”

7 योआब के व्यक्ति करेती, पलेती और सैनिक यरूशलेम से बाहर गये। उन्होंने बिक्री के पुत्र शेबा का पीछा किया।

योआब अमासा को मार डालता है

8 जब योआब और सेना गिबोन की विशाल चट्टान तक आई, अमासा उनसे मिलने आया। योआब अपने सैनिक पोशाक में था। योआब ने पेटी बाँध रखी थी। उसकी तलवार उसकी म्यान में थी। योआब अमासा से मिलने आगे बढ़ा और उसकी तलवार म्यान से गिर पड़ी। योआब ने तलवार को उठा लिया और उसे अपने हाथ में रखा। 9 योआब ने अमासा से पूछा, “भाई, तुम हर तरह से कुशल तो हो?” योआब ने चुम्बन करने के लिये अपने दायें हाथ से, अमासा को उसकी दाढ़ी के सहारे पकड़ा। 10 अमासा ने उस तलवार पर ध्यान नहीं दिया जो उसके हाथ में थी। योआब ने अमासा के पेट में तलवार घुसेड़ दी और उसकी आँते भूमि पर आ पड़ीं। योआब को अमासा पर दुबारा चोट नहीं करनी पड़ी, वह पहले ही मर चुका था।

दाऊद के लोग शेबा की खोज में लगे रहे

तब योआब और उसका भाई अबीशै दोनों ने बिक्री के पुत्र शेबा की खोज जारी रखी। 11 योआब के युवकों में से एक व्यक्ति अमासा के शव के पास खड़ा रहा। इस युवक ने कहा, “हर एक व्यक्ति जो योआब और दाऊद का समर्थन करता है, उसे योआब का अनुसरण करना चाहिये। शेबा का पीछा करने में उसकी सहायता करो।”

12 अमासा अपने ही खून में सड़क के बीच पड़ा रहा। सभी लोग शव को देखने रुकते थे। इसलिये युवक अमासा के शव को सड़क से ले गया और उसे मैदान में रख दिया। तब उस ने अमासा के शव पर एक कपड़ा डाल दिया। 13 जब अमासा का शव सड़क से हटा लिया गया, सभी लोगों ने योआब का अनुसरण किया। वे बिक्री के पुत्र शेबा का पीछा करने योआब के साथ गए।

शेबा आबेल बेतमाका को बच निकलता है

14 बिक्री का पुत्र शेबा सभी इस्राएल के परिवार समूहों से होता हुआ आबेल बेतमाका पहुँचा। सभी बेरी लोग भी एक साथ आए और उन्होंने शेबा का अनुसरण किया।

15 योआब और उसके लोग आबेल और बेतमाका आए। योआब की सेना ने नगर को घेर लिया। उन्होंने नगर दीवार के सहारे मिट्टी के ढेर लगाए। ऐसा करने के बाद वे दीवार के ऊपर चढ़ सकते थे। तब योआब के सैनिकों ने दीवार से पत्थरों को तोड़ना प्रारम्भ किया। वे दीवार को गिरा देना चाहते थे।

16 एक बुद्धिमती स्त्री नगर की ओर से चिल्लाई। उसने कहा, “मेरी सुनो! योआब को यहाँ बुलाओ। मैं उससे बात करना चाहती हूँ।”

17 योआब उस स्त्री के पास बात करने गया। उस स्त्री ने पूछा, “क्या तुम योआब हो?”

योआब ने उत्तर दिया, “हाँ, मैं हूँ।”

तब उस स्त्री ने योआब से कहा, “मैं जो कहूँ सुनो।”

योआब ने कहा, “मैं सुन रहा हूँ।”

18 तब उस स्त्री ने कहा, “अतीत में लोग कहते थे, ‘आबेल में सलाह माँगो तब समस्या सुलझ जाएगी।’ 19 मैं इस्राएल के राजभक्त तथा शान्तिप्रिय लोगों में से एक हूँ। तुम इस्राएल के एक महत्वपूर्ण नगर को नष्ट कर रहे हो। तुम्हें, वह कोई भी चीज, जो यहोवा की है, नष्ट नहीं करनी चाहिये।”

20 योआब ने कहा, “नहीं, मैं कुछ भी नष्ट नहीं करना चाहता! 21 किन्तु एक व्यक्ति एप्रैम के पहाड़ी प्रदेश का है वह बिक्री का पुत्र शेबा है। वह राजा दाऊद के विरुद्ध हो गया है। यदि तुम उसे मेरे पास लाओ तो मैं नगर को शान्त छोड़ दूँगा।”

उस स्त्री ने कहा, “बहुत ठीक, उसका सिर दीवार के ऊपर से तुम्हारे लिये फेंक दिया जायेगा।”

22 तब उस स्त्री ने बड़ी बुद्धिमानी से नगर के सभी लोगों से बातें कीं। लोगों ने बिक्री के पुत्र शेबा का सिर काट डाला। तब लोगों ने योआब के लिये शेबा का सिर नगर की दीवार पर से फेंक दिया।

इसलिये योआब ने तुरही बजाई और सेना ने नगर को छोड़ दिया। हर एक व्यक्ति अपने घर में गया, और योआब राजा के पास यरूशलेम लौटा।

दाऊद के सेवक लोग

23 योआब इस्राएल की सारी सेना का नायक था। यहोयादा का पुत्र बनायाह, करेतियों और पलेतियों का संचालन करता था। 24 अदोराम उन लोगों का संचालन करता था जो कठिन श्रम करने के लिये विवश थे। अहिलूद का पुत्र यहोशापात इतिहासकार था। 25 शेवा सचिव था। सादोक और एब्यातार याजक थे। 26 और याईरी दाऊद का प्रमुख याजक था।

शाऊल का परिवार दण्डित हुआ

21दाऊद के समय में भूखमरी का काल आया। इस बार भूखमरी तीन वर्ष तक रही। दाऊद ने यहोवा से प्रार्थना की। यहोवा ने उत्तर दिया, “इस भूखमरी का कारण शाऊल और उसका हत्यारा परिवार है। इस समय भूखमरी आई क्योंकि शाऊल ने गिबोनियों को मार डाला।” 2 (गिबोनी इस्राएली नहीं थे। वे ऐसे एमोरियों के समूह थे जो अभी तक जीवित छोड़ दिये गये थे। इस्राएलियों ने प्रतिज्ञा की थी कि वे गिबोनी पर चोट नहीं करेंगे। किन्तु शाऊल को इस्राएल और यहूदा के प्रति गहरा लगाव था। इसलिये उसने गिबोनियों को मारना चाहा।)

राजा दाऊद ने गिबोनी को एक साथ इकट्ठा किया। उसने उनसे बातें कीं। 3 दाऊद ने गिबोनी से कहा, “मैं आप लोगों के लिये क्या कर सकता हूँ? इस्राएल के पापों को धोने के लिये मैं क्या कर सकता हूँ जिससे आप लोग यहोवा के लोगों को आशीर्वाद दे सकें?”

4 गिबोनी ने दाऊद से कहा, “शाऊल और उसके परिवार के पास इतना सोना—चाँदी नहीं है कि वे उसके बदले उसे दे सकें जो उन्होंने काम किये। किन्तु हम लोगों के पास इस्राएल के किसी व्यक्ति को भी मारने का अधिकार नहीं है।”

दाऊद ने पूछा, “किन्तु मैं तुम्हारे लिये क्या कर सकता हूँ?”

5 गिबोनी ने दाऊद से कहा, “शाऊल ने हमारे विरूद्ध योजनायें बनाईं। उसने हमारे सभी लोगों को, जो इस्राएल में बचे हुए हैं, नष्ट करने का प्रयत्न किया। 6 शाऊल यहोवा का चुना हुआ राजा था। इसलिये उसके सात पुत्रों को हम लोगों के सामने लाया जाये। तब हम लोग उन्हें शाऊल के गिबा पर्वत पर यहोवा के सामने फाँसी चढ़ा देंगे।”

राजा दाऊद ने कहा, “मैं उन पुत्रों को तुम्हें दे दूँगा।” 7 किन्तु राजा ने योनातन के पुत्र मपीबोशेत की रक्षा की। योनातन शाऊल का पुत्र था। दाऊद ने यहोवा के नाम पर योनातन से प्रतिज्ञा की थी। इसलिये राजा ने मपीबोशेत को उन्हें चोट नहीं पहुँचाने दिया। 8 किन्तु राजा ने अर्मोनी, और मपीबोशेत, रिस्पा और शाऊल के पुत्रों को लिया (रिस्पा अय्या की पुत्री थी)। राजा ने रिस्पा के इन दो पुत्रों और शाऊल की पुत्री मीकल के पाँचों पुत्रों को लिया। महोल नगर का निवासी बर्जिल्लै का पुत्र अद्रीएल मेराब के सभी पाँच पुत्रों का पिता था। 9 दाऊद ने इन सात पुत्रों को गिबोनी को दे दिया। तब गिबोनी ने इन सातों पुत्रों को यहोवा के सामने गिबा पर्वत पर फाँसी दे दी। ये सातों पुत्र एक साथ मरे। वे फसल की कटाई के पहले दिन मार डाले गए। (जौ की कटाई आरम्भ होने जा रही थी।)

दाऊद और रिस्पा

10 अय्या की पुत्री रिस्पा ने शोक के वस्त्र लिये और उसे चट्टान पर रख दिया। वह वस्त्र फसल की कटाई आरम्भ होने से लेकर जब तक वर्षा हुई चट्टान पर पड़ा रहा। दिन में रिस्पा अपने पुत्रों के शव को आकाश के पक्षियों द्वारा स्पर्श नहीं होने देती थी। रात को रिस्पा खेतों के जानवरों को अपने पुत्रों के शवों को छूने नहीं देती थी।

11 लोगों ने दाऊद को बताया, जो कुछ शाऊल की दासी अय्या की पुत्री रिस्पा कर रही थी। 12 तब दाऊद ने शाऊल और योनातन की अस्थियाँ याबेश गिलाद के लोगों से लीं। (याबेश के लोगों ने इन अस्थियों को बेतशान के सार्वजनिक रास्ते से चुरा ली थी। यह सार्वजनिक रास्ता बेतशान में वहाँ है जहाँ पलिश्तियों ने शाऊल और योनातन के शवों को लटकाया था। पलिश्तियों ने इन शवों को शाऊल को गिलबो में मारने के बाद लटकाया था) 13 दाऊद, शाऊल और उसके पुत्र योनातन की अस्थियों को, गिलाद से लाया। तब लोगों ने शाऊल के सात पुत्रों के शवों को इकट्ठा किया जो फाँसी चढ़ा दिये गये थे। 14 उन्होंने शाऊल और उसके पुत्र योनातन की अस्थियों को बिन्यामीन के जेला स्थान में दफनाया। लोगों ने शवों को शाऊल के पिता कीश की कब्र में दफनाया। लोगों ने वह सब किया जो राजा ने आदेश दिया। तब परमेश्वर ने देश के लिये की गई उनकी प्रार्थना सुनी।

पलिश्तियों के साथ युद्ध

15 पलिश्तियों ने इस्राएलियों के विरुद्ध फिर युद्ध छेडा। दाऊद और उसके लोग पलिश्तियों से लड़ने गए। किन्तु दाऊद थक गया और कमजोर हो गया। 16 रपाई के वंश में से यिशबोबनोब एक था। यिशबोबनोब के भाले का वजन साढ़े सात पौंड था। यिशबोबनोब के पास एक नयी तलवार थी। उसने दाऊद को मार डालने की योजना बनाई। 17 किन्तु सरूयाह के पुत्र अबीशै ने उस पलिश्ती को मार डाला और दाऊद के जीवन को बचाया।

तब दाऊद के लोगों ने दाऊद से प्रतिज्ञा की। उन्होंने उससे कहा, “तुम हम लोगों के साथ भविष्य में युद्ध करने नहीं जा सकते। यदि तुम फिर युद्ध में जाते हो और मार दिये जाते हो तो इस्राएल अपने सबसे बड़े मार्ग दर्शक को खो देगा।”

18 तत्पश्चात, गोब में पलिश्तियों के साथ दूसरा युद्ध हुआ। हूशाई सिब्बकै ने सप एक अन्य रपाईवंशी पुरुष को मार डाला।

19 तब गोब में फिर पलिश्तियों से एक अन्य युद्ध छिड़ा। यारयोरगीम के पुत्र एलहनान ने, जो बेतलेहेम का था, गती गोल्यत को मार डाला। गोल्यत का भाला जुलाहे की छड़ के बराबर लम्बा था।

20 गत में फिर युद्ध आरम्भ हुआ। वहाँ एक विशाल व्यक्ति था। उस व्यक्ति के हर एक हाथ में छः छः उँगलियाँ और हर एक पैर में छः–छः अंगूठे थे। सब मिलाकर उसकी चौबीस उंगलियाँ और अंगूठे थे। यह व्यक्ति भी एक रपाईवंशी था। 21 इस व्यक्ति ने इस्राएल को ललकारा। किन्तु योनातन ने इस व्यक्ति को मार डाला। (योनातन दाऊद के भाई शिमी का पुत्र था।)

22 ये चारों व्यक्ति गत के रपाईवंशी थे। वे सभी दाऊद और उसके लोगों द्वारा मारे गए।

समीक्षा

जुनूनी प्रार्थना

दाऊद के जीवन में लड़ाईयाँ लगती है जैसे कभी खत्म नहीं होगी. आज के लेखांश में हम दो और लड़ाईयों को देखते हैं.

पहला, 'एक शेबा नामक परेशानी पैदा करने वाला व्यक्ति था' (20:1). यह अबशालोम के साथ दाऊद के संघर्ष के जैसा है (16:22). इस्राएल के लोग अत्यधिक निष्ठाहीन थेः'इसलिये सब इस्राएली पुरुष दाऊद के पीछे चलना छोड़कर शेबा के पीछे हो लिए' (20:2). परमेश्वर ने दाऊद को शेबा पर विजय दिलाई लेकिन तुरंत ही दूसरी लड़ाई आगे तैयार थी.

तीन लगातार वर्षों तक अकाल पड़ा था (21:1अ). जैसे ही देश ने आपदा का सामना किया, 'दाऊद ने यहोवा से प्रार्थना की' (व.1ब). कभी –कभी एक असली आपदा की आवश्यकता पड़ती है तब ही हम अपने घुटनों पर आते हैं. जैसे ही उन्होंने प्रार्थना की, परमेश्वर ने उनसे बात की.

उन्हेंने इस्राएल से वायदा किया जो कि गिबोनियें से किया गया था (यहोशु 9 देखें). वायदे के बावजूद, शाऊल ने उन्हें नष्ट करने की कोशिश की, लेकिन जो प्रतिज्ञा परमेश्वर से की जाती है वह बहुत ही महत्वपूर्ण है और उसे आसानी से तोड़ा नहीं जा सकता है. (आज सबसे सामान्य प्रतिज्ञाएँ, विवाह की सभा में और न्यायालय में प्रतिज्ञा है). जब दाऊद ने वस्तुओं को सही से किया और परमेश्वर से की गई प्रतिज्ञा का सम्मान किया, तभी परमेश्वर ने देश के लिए प्रार्थना का उत्तर दिया (2शमुएल 21:14).

प्रार्थना

परमेश्वर, मैं अपने देश के लिए आपसे प्रार्थना करता हूँ. हम पर दया करें. हमारी सहायता करें कि हम ऐसा एक देश बने जो आपका सम्मान करते हैं, हमारे विवाह की प्रतिज्ञाओं में वफादार रहकर और हमारे न्यायालय में सच्चाई रखकर. परमेश्वर, फिर से देश के लिए प्रार्थना का उत्तर दें. होने दीजिए कि हमारा देश फिर से आपकी ओर फिरे. होने दें कि आपका नाम सम्मान पाए. आपका राज्य आए.

पिप्पा भी कहते है

प्रेरितों के काम 8:39-40

'परमेश्वर का आत्मा अचानक फिलिप्पुस को उठा ले गया...किंतु फिलिप्पुस अशदोद में आ निकला...'

मैं नहीं जानता हूँ कि यह उत्साहजनक होगा या भयभीत करने वाली बात होगी कि एक मिनट में लंदन में एच.टी.बी. में रहूँ और अगले मिनट ब्रिटन में! मेरे साथ यह केवल तभी होता है जब मैं अचेतन रूप से गाड़ी चलाता हूँ और अपने आपको पूरी तरह से गलत स्थान में पाता हूँ!

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संदर्भ

जहाँ पर कुछ बताया न गया हो, उन वचनों को पवित्र बाइबल, न्यू इंटरनैशनल संस्करण एन्ग्लिसाइड से लिया गया है, कॉपीराइट © 1979, 1984, 2011 बिबलिका, पहले इंटरनैशनल बाइबल सोसाइटी, हूडर और स्टोगन पब्लिशर की अनुमति से प्रयोग किया गया, एक हॅचेट यूके कंपनी सभी अधिकार सुरक्षित। ‘एनआईवी’, बिबलिका यू के का पंजीकृत ट्रेडमार्क संख्या 1448790 है।

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