दिन 181

विश्व में सबसे शक्तिशाली संदेश

बुद्धि भजन संहिता 78:40-55
नए करार प्रेरितों के काम 20:1-38
जूना करार 2 राजा 1:1-2:25

परिचय

कैनन ऐन्द्रियु व्हाईट 'बगदाद के पादरी' के रूप में पहचाने जाते हैं. उन्होंने मुझे एक ईमेल भेजा, जिसका शीर्षक था, 'आँसुओं का एक दिन, ' जिसमें उन्होंने लिखा, 'आज का दिन बहुत बुरा था. दो सालों से हम हर दिन दो जॅसन्स को वापस लाने के लिए काम कर रहे थे. वे मेरे मित्र थे; मैं उनके साथ खाता था और रहता था. एक दिन जब मैं बीमार था, उनमें से एक ने अस्पताल में मेरी देखभाल की; वह एक सेना के चिकित्सक थे. ये लोग केवल बंधक नहीं थे...वे मेरे मित्र थे. हर दिन मैंने उनके लिए प्रार्थना की और उन्हें मुक्त करवाने का प्रयास किया.

'मैं अंगीकार करता हूँ कि जब (हत्या करने) के समाचार की पुष्टि हो गई तब मैं रोने लगा...मैं उनके प्रिय परिवार के दर्द की कल्पना नहीं कर सकता हूँ. उनके लिए यह कितना भयानक होगा और कैसे हम उनके लिए प्रार्थना करते हैं.

'जैसे ही मैं आँसुओं में था और मैं अपनी सभा की तैयारी कर रहा था...चर्च हमेशा की तरह महान थी, लोग भी बहुत अच्छे और बहुत ही उत्साहित करने वाले थे; एक साथ हमने अपना दर्द और प्रेम बाँटा.'

जैसा कि पौलुस प्रेरित का मामला था, वहाँ पर बहुत से आँसू थे. फिर भी, ऐन्द्रयु आत्मा की सामर्थ में निरंतर सुसमाचार का प्रचार करते हैं.

यीशु का संदेश विश्व में सबसे शक्तिशाली संदेश है. यह अच्छा समाचार है. यह जीवनों को बदलता है. यह शहरों और संस्कृतियों को बदलता है. तब भी यह एक ऐसा संदेश है जो विरोध को उकसाता है. आपको पवित्र आत्मा देने के द्वारा परमेश्वर आपको इस संदेश को दूसरों तक ले जाने के लिए तैयार करते हैं.

बुद्धि

भजन संहिता 78:40-55

40 हाय, उन लोगों ने मरूभूमि में परमेश्वर को कष्ट दिया!
 उन्होंने उसको बहुत दु:खी किया था!
41 परमेश्वर के धैर्य को उन लोगों ने फिर परखा,
 सचमुच इस्राएल के उस पवित्र को उन्होंने कष्ट दिया।
42 वे लोग परमेश्वर की शक्ति को भूल गये।
 वे लोग भुल गये कि परमेश्वर ने उनको कितनी ही बार शत्रुओं से बचाया।
43 वे लोग मिस्र की अद्भुत बातों को
 और सोअन के क्षेत्रों के चमत्कारों को भूल गये।
44 उनकी नदियों को परमेश्वर ने खून में बदल दिया था!
 जिनका जल मिस्र के लोग पी नहीं सकते थे।
45 परमेश्वर ने भिड़ों के झुण्ड भेजे थे जिन्होंने मिस्र के लोगों को डसा।
 परमेश्वर ने उन मेढकों को भेजा जिन्होंने मिस्त्रियों के जीवन को उजाड़ दिया।
46 परमेश्वर ने उनके फसलों को टिड्डों को दे डाला।
 उनके दूसरे पौधे टिड्डियो को दे दिये।
47 परमेश्वर ने मिस्त्रियों के अंगूर के बाग ओलों से नष्ट किये,
 और पाला गिरा कर के उनके वृक्ष नष्ट कर दिये।
48 परमेश्वर ने उनके पशु ओलों से मार दिये
 और बिजलियाँ गिरा कर पशु धन नष्ट किये।
49 परमेश्वर ने मिस्र के लोगों को अपना प्रचण्ड क्रोध दिखाया।
 उनके विरोध में उसने अपने विनाश के दूत भेजे।
50 परमेश्वर ने क्रोध प्रकट करने के लिये एक राह पायी।
 उनमें से किसी को जीवित रहने नहीं दिया।
 हिंसक महामारी से उसने सारे ही पशुओं को मर जाने दिया।
51 परमेश्वर ने मिस्र के हर पहले पुत्र को मार डाला।
 हाम के घराने के हर पहले पुत्र को उसने मार डाला।
52 फिर उसने इस्राएल की चरवाहे के समान अगुवाई की।
 परमेश्वर ने अपने लोगों को ऐसे राह दिखाई जैसे जंगल में भेड़ों कि अगुवाई की है।
53 वह अपनेनिज लोगों को सुरक्षा के साथ ले चला।
 परमेश्वर के भक्तों को किसी से डर नहीं था।
 परमेश्वर ने उनके शत्रुओं को लाल सागर में हुबाया।
54 परमेश्वर अपने निज भक्तों को अपनी पवित्र धरती पर ले आया।
 उसने उन्हें उस पर्वत पर लाया जिसे उसने अपनी ही शक्ति से पाया।
55 परमेश्वर ने दूसरी जातियों को वह भूमि छोड़ने को विवश किया।
 परमेश्वर ने प्रत्येक घराने को उनका भाग उस भूमि में दिया।
 इस तरह इस्राएल के घराने अपने ही घरों में बस गये।

समीक्षा

पाप से छुटकारे के अच्छे समाचार को बताईये

आप तब तक पूरी तरह से सुसमाचार के अच्छे समाचार को नहीं समझ पायेंगे, जब तक आप समझ नहीं लेते कि आपको छुटकारे की क्यों आवश्यकता थी.

यीशु ने अपने जीवन, मृत्यु और पुनरुत्थान और पवित्र आत्मा के उपहार के द्वारा, हमें पाप से छुड़ाया है. यहाँ पर हमें एक झलक मिलती है कि हम किससे छुड़ाए गए हैं.

पहला, हम पाप के स्वभाव को देखते हैं. पाप परमेश्वर के विरूद्ध विद्रोह हैः 'उन्होंने परमेश्वर के विरूद्ध बलवा किया' (व.40). यह एक एकमेव कार्य नहीं है. भजनसंहिता के लेखक लिखते हैं, 'कितनी बार...बार-बार' (वव.40-41). परमेश्वर के चरित्र, परमेश्वर के वचन और परमेश्वर के कार्यों में भरोसा न करने से पाप आता है (वव.41-43).

दूसरा, हम पाप के परिणामों को देखते हैं. यह परमेश्वर को दुखित करता है (व.40). यह गुस्से, क्रोध, रोष और शत्रुता की भावना को लाता है (व.49). अंत में यह मृत्यु को लाता है (व.50).

केवल मिस्री लोगों ने पाप नहीं किया (वव.43-51) लेकिन परमेश्वर के लोगों ने भी किया (वव.40-42). तब भी परमेश्वर ने उन्हें बचाया. उसने उन्हें छुड़ाया (व.42): 'अपनी प्रजा को भेड़-बकरियों के समान प्रस्थान कराया, और जंगल में उनकी अगुवाई पशुओं के झुण्ड की सी की' (व.52). उन्होंने सुरक्षित रूप से उनका मार्गदर्शन किया, इसलिए वे डरे नहीं (व.53). यह सब यीशु में छुटकारे के लिए परमेश्वर की महान योजना के लिए तैयारी थी.

प्रार्थना

धन्यवाद परमेश्वर मुझे यीशु के द्वारा छुड़ाने के लिए और क्षमा करने के लिए. आपका धन्यवाद क्योंकि आप मेरी अगुवाई करते हैं और मेरा मार्गदर्शन करते हैं ताकि मुझे डरने की आवश्यकता न पड़े.

नए करार

प्रेरितों के काम 20:1-38

पौलुस का मकिदुनिया और यूनान जाना

20फिर इस उपद्रव के शांत हो जाने के बाद पौलुस ने यीशु के शिष्यों को बुलाया और उनका हौसला बढ़ाने के बाद उनसे विदा ले कर वह मकिदुनिया को चल दिया। 2 उस प्रदेश से होकर उसने यात्रा की और वहाँ के लोगों की उत्साह के अनेक वचन प्रदान किये। फिर वह यूनान आ गया। 3 वह वहाँ तीन महीने ठहरा और क्योंकि यहूदियों ने उसके विरुद्ध एक षड्यन्त्र रच रखा था।

सो जब वह जल मार्ग से सीरिया जाने को ही था कि उसने निश्चय किया कि वह मकिदुनिया को लौट जाये। 4 बिरिया के पिरूस का बेटा सोपत्रुस, थिसलुनिकिया के रहने वाले अरिस्तर्खुस और सिकुन्दुस, दिरबे का निवासी गयूस और तिमुथियुस तथा एशियाई क्षेत्र के तुखिकुस और त्रुफिमुस उसके साथ थे। 5 ये लोग पहले चले गये थे और त्रोआस में हमारी परीक्षा कर रहे थे। 6 बिना ख़मीर की रोटी के दिनों के बाद हम फिलिप्पी से नाव द्वारा चल पड़े और पाँच दिन बाद त्रोआस में उनसे जा मिले। वहाँ हम सात दिन तक ठहरे।

त्रोआस को पौलुस की अन्तिम यात्रा

7 सप्ताह के पहले दिन जब हम रोटी विभाजित करने के लिये आपस में इकट्ठे हुए तो पौलुस उनसे बातचीत करने लगा। उसे अगले ही दिन चले जाना था सो वह आधी रात तक बातचीत करता ही रहा। 8 सीढ़ीयों के ऊपर के कमरे में जहाँ हम इकट्ठे हुए थे, वहाँ बहुत से दीपक थे। 9 वहीं युतुखुस नामक एक युवक खिड़की पर बैठा था वह गहरी नींद में डूबा था। क्योंकि पौलुस बहुत देर से बोले ही चला जा रहा था सो उसे गहरी नींद आ गयी थी। इससे वह तीसरी मंजिल से नीचे लुढ़क पड़ा और जब उसे उठाया तो वह मर चुका था।

10 पौलुस नीचे उतरा और उस से लिपट गया। उसे अपनी बाहों में ले कर उसने कहा, “घबराओ मत क्योंकि उसके प्राण अभी उसी में हैं।” 11 फिर वह ऊपर चला गया और उसने रोटी को तोड़ कर विभाजित किया और उसे खाया। वह उनके साथ बहुत देर, पौ-फटे तक बातचीत करता रहा। फिर उसने उनसे विदा ली। 12 उस जीवित युवक को वे घर ले आये। इससे उन्हें बहुत चैन मिला।

त्रोआस से मितुलेने की यात्रा

13 हम जहाज़ पर पहले ही पहुँच गये और अस्सुस को चल पड़े। वहाँ पौलुस को हमें जहाज़ पर लेना था। उसने ऐसी ही योजना बनायी थी। वह स्वयं पैदल आना चाहता था। 14 वह जब अस्सुस में हमसे मिला तो हमने उसे जहाज़ पर चढ़ा लिया और हम मितेलेने को चल पड़े। 15 दूसरे दिन वहाँ से चल कर हम खियुस के सामने जा पहुँचे और अगले दिन उस पार सामोस आ गये। फिर उसके एक दिन बाद हम मिलेतुस आ पहुँचे। 16 क्योंकि पौलुस जहाँ तक हो सके पिन्तेकुस्त के दिन तक यरूशलेम पहुँचने की जल्दी कर रहा था, सो उसने निश्चय किया कि वह इफ़िसुस में रुके बिना आगे चला जायेगा जिससे उसे एशिया में समय न बिताना पड़े।

पौलुस की इफ़िसुस के बुजुर्गों से बातचीत

17 उसने मिलेतुस से इफिसुस के बुजुर्गों और कलीसिया को संदेसा भेज कर अपने पास बुलाया।

18 उनके आने पर पौलुस ने उनसे कहा, “यह तुम जानते हो कि एशिया पहुँचने के बाद पहले दिन से ही हर समय मैं तुम्हारे साथ कैसे रहा हूँ 19 और दीनतापूर्वक आँसू बहा-बहा कर यहूदियों के षड्यन्त्रों के कारण मुझ पर पड़ी अनेक परीक्षाओं में भी मैं प्रभु की सेवा करता रहा। 20 तुम जानते हो कि मैं तुम्हें तुम्हारे हित की कोई बात बताने से कभी हिचकिचाया नहीं। और मैं तुम्हें उन बातों का सब लोगों के बीच और घर-घर जा कर उपदेश देने में कभी नहीं झिझका। 21 यहूदियों और यूनानियों को मैं समान भाव से मन फिराव के परमेश्वर की तरफ़ मुड़ने को कहता रहा हूँ और हमारे प्रभु यीशु में विश्वास के प्रति उन्हें सचेत करता रहा हूँ।

22 “और अब पवित्र आत्मा के अधीन होकर मैं यरूशलेम जा रहा हूँ। मैं नहीं जानता वहाँ मेरे साथ क्या कुछ घटेगा। 23 मैं तो बस इतना जानता हूँ कि हर नगर में पवित्र आत्मा यह कहते हुए मुझे सचेत करती रहती है कि बंदीगृह और कठिनताएँ मेरी प्रतीक्षा कर रही हैं। 24 किन्तु मेरे लिये मेरे प्राणों का कोई मूल्य नहीं है। मैं तो बस उस दौड़ धूप और उस सेवा को पूरा करना चाहता हूँ जिसे मैंने प्रभु यीशु से ग्रहण किया है वह है — परमेश्वर के अनुग्रह के सुसमाचार की साक्षी देना।

25 “और अब मैं जानता हूँ कि तुममें से कोई भी, जिनके बीच मैं परमेश्वर के राज्य का प्रचार करता फिरा, मेरा मुँह आगे कभी नहीं देख पायेगा। 26 इसलिये आज मैं तुम्हारे सामने घोषणा करता हूँ कि तुममें से किसी के भी खून का दोषी मैं नहीं हूँ। 27 क्योंकि मैं परमेश्वर की सम्पूर्ण इच्छा को तुम्हें बताने में कभी नहीं हिचकिचाया हूँ। 28 अपनी और अपने समुदाय की रखवाली करते रहो। पवित्र आत्मा ने उनमें से तुम्हें उन पर दृष्टि रखने वाला बनाया है ताकि तुम परमेश्वर की उस कलीसिया का ध्यान रखो जिसे उसने अपने रक्त के बदले मोल लिया था। 29 मैं जानता हूँ कि मेरे विदा होने के बाद हिंसक भेड़िये तुम्हारे बीच आयेंगे और वे इस भोले-भाले समूह को नहीं छोड़ेंगे। 30 यहाँ तक कि तुम्हारे अपने बीच में से ही ऐसे लोग भी उठ खड़े होंगे, जो शिष्यों को अपने पीछे लगा लेने के लिए बातों को तोड़-मरोड़ कर कहेंगे। 31 इसलिये सावधान रहना। याद रखना कि मैंने तीन साल तक एक एक को दिन रात रो रो कर सचेत करना कभी नहीं छोड़ा था।

32 “अब मैं तुम्हें परमेश्वर और उसके सुसंदेश के अनुग्रह के हाथों सौंपता हूँ। वही तुम्हारा निर्माण कर सकता है और तुम्हें उन लोगों के साथ जिन्हें पवित्र किया जा चुका है, तुम्हारा उत्तराधिकार दिला सकता है। 33 मैंने कभी किसी के सोने-चाँदी या वस्त्रों की अभिलाषा नहीं की। 34 तुम स्वयं जानते हो कि मेरे इन हाथों ने ही मेरी और मेरे साथियों की आवश्यकताओं को पूरा किया है। 35 मैंने अपने हर कर्म से तुम्हें यह दिखाया है कि कठिन परिश्रम करते हुए हमें निर्बलों की सहायता किस प्रकार करनी चाहिये और हमें प्रभु यीशु का वह वचन याद रखना चाहिये जिसे उसने स्वयं कहा था, ‘लेने से देने में अधिक सुख है।’”

36 यह कह चुकने के बाद वह उन सब के साथ घुटनों के बल झुका और उसने प्रार्थना की। 37-38 हर कोई फूट फूट कर रो रहा था। गले मिलते हुए वे उसे चूम रहे थे। उसने जो यह कहा था कि वे उसका मुँह फिर कभी नहीं देखेंगे, इससे लोग बहुत अधिक दुःखी थे। फिर उन्होंने उसे सुरक्षा पूर्वक जहाज़ तक पहुँचा दिया।

समीक्षा

परमेश्वर के अनुग्रह के अच्छे समाचार को बतायें

अपने बहुमूल्य जीवन का एक भी दिन व्यर्थ मत गवाँये, जिसे परमेश्वर ने आपको दिया है. आप चाहे जो करने के लिए बुलाए गए हैं, आपकी परिस्थिति चाहे कितनी भी कठिन हो, तब भी आप अपनी बुलाहट का आनंद ले सकते हैं और आनंद के साथ कार्य को पूरा कर सकते हैं.

सुसमाचार का संदेश एक बड़े रूप से उत्साहित करने वाला संदेश है. जहाँ कही पौलुस गए, उन्होंने उन्हें 'अच्छे कार्य को करना जारी रखने' के लिए उत्साहित किया (व.1, एम.एस.जी). जैसे ही उन्होंने यात्रा की, 'उन्होंने नियमित रूप से उत्साह दिया, उनकी आत्मा को उठाते हुए और ताजी आशा के साथ उन्हें आवेशित करते हुए' (व.2, एम.एस.जी).

इस संदेश के विषय में पौलुस ने जोशीला महसूस किया. इसका प्रचार करने से उन्हें रोकना मुश्किल बात थी. त्रोआस में वह 'निरंतर बोल रहे थे' (व.7). जैसे ही 'पौलुस लगातार बोलते रहे' (व.9), यूतुखुस नाम का एक जवान खिड़की पर बैठा हुआ गहरी नींद से झुक रहा था. जब पौलुस देर तक बातें करता रहा तो वह नींद के झोके में तीसरी अटारी पर से गिर पड़ा और मरा हुआ उठाया गया. पौलुस ने उसे मृत्यु में से जीवित किया और फिर ' इतनी देर तक उनसे बातें करता रहा कि सुबह हो गई' (व.11, एम.एस.जी).

एक प्रचारक को रोकना मुश्किल बात है जब वे शुरु हो जाते हैं – मंडली के सदस्यों का मरना और फिर जी उठना केवल एक कॉफी ब्रेक ला सकता है!

संदेश को सुनाने के हर अवसर का लाभ लें. पौलुस ने कहा, ' और जो – जो बातें तुम्हारे लाभ की थीं, उनको बताने और लोगों के सामने और घर घर सिखाने से कभी न झिझका... क्योंकि मैं परमेश्वर के सारे अभिप्राय को तुम्हें पूरी रीति से बताने से न झिझका' (वव.20,27). उन्होंने 'जनता में' और घर-घर जाकर प्रचार किया (व.20).

यह कठिन परिश्रम था (व35). पौलुस ने अपना जीवन बगल में रख दिया (व.19, एम.एस.जी). वह प्रक्रिया में मरने से नहीं डर रहे थे. उन्होंने अपने आपको अपरिहार्य नहीं मानाः' परन्तु मैं अपने प्राण को कुछ नहीं समझता कि उसे प्रिय जानूँ, वरन् यह कि मैं अपनी दौड़ को और उस सेवा को पूरी करूँ' (व.24, ए.एम.पी.).

वह जानते थे कि यह 'कोई पिकनीक नहीं होगी, क्योंकि पवित्र आत्मा हर नगर में गवाही देकर मुझ से कहता है कि बन्धन और क्लेश तेरे लिये तैयार हैं' (व.23, एम.एस.जी). तीक्ष्ण रूप से उनकी परीक्षा हुई (व.19). वहाँ पर बहुत से आँसू थे (वव.19,31,37).

क्यों यह इन सभी चीजों से गुजरने के योग्य हैं? यहाँ पर हम तीन कारण देखते हैं:

  1. वचनों की सामर्थ

आपके पास विश्व में सबसे शक्तिशाली संदेश है. पौलुस 'परमेश्वर के अनुग्रह' का संदेश प्रचार करते हुए फिरे (व.24), 'अकथनीय रूप से परमेश्वर की अतिरिक्त उदारता' (एम.एस.जी.). यह 'सच्चाई' थी (व.30).

यह यीशु के विषय में था. अनुग्रह है प्रेम, जिसके हम योग्य नहीं थे. यह यीशु के द्वारा संभव हुआ और 'उनके लहू के द्वारा' (व.28). इसे कमाया नहीं जा सकता है. यह एक मुफ्त उपहार है.

आप कैसे उपहार को ग्रहण करते हैं? पहला, मन फिराकर परमेश्वर के पास आयें (व.21). पछतावा एक सकारात्मक शब्द है. इसका अर्थ है पाप से मुड़कर परमेश्वर के पास आना.

दूसरा, हमारे प्रभु यीशु में विश्वास करें (व.21). यीशु मसीह में विश्वास के द्वारा आप उपहार को ग्रहण करते हैं.

  1. पवित्र आत्मा की सामर्थ

पवित्र आत्मा आपमें रहते हैं. हर कोई जो पाप से पश्चाताप करता है और यीशु मसीह में विश्वास करता है, वह पवित्र आत्मा ग्रहण करता है. पौलुस बताते हैं कि कैसे 'पवित्र आत्मा ने उन्हें विवश' किया (व.22). पवित्र आत्मा उनसे बातें करते हैं (व.23). पवित्र आत्मा लीडर्स को अभिषिक्त करते हैं और तैयार करते हैं.

  1. देने की सामर्थ

अ.आप आशीषित होंगे जैसे ही आप देते हैं. पौलुस जानते थे कि पैसा खुशी की पूँजी नहीं हैः' प्रभु यीशु के वचन स्मरण रखना अवश्य है, जो उसने आप ही कहा है : ‘लेने से देना धन्य है' (व.35, एम.एस.जी).

पौलुस 'परमेश्वर की इच्छा' का प्रचार करते हैं (व.27). निश्चित ही, इसमें बहुत कुछ शामिल है! इस लेखांश में हम केवल एक झलक को देखते हैं. लेकिन इसमें स्पष्ट रूप से परमेश्वर का वचन शामिल है (व.32), प्रार्थना (व.36), रखवाली करने वाले और चरवाहों का एक चर्च है (व.28), पवित्र विधी (वव.7-11), शुद्धिकरण (व.32), कमजोर की सहायता करना (व.35), और इसके अतिरिक्त बहुत कुछ.

प्रार्थना

धन्यवाद परमेश्वर, क्योंकि आपने मुझे पवित्र आत्मा की सामर्थ दी है. मुझे साहस दीजिए कि कठिन परिश्रम, आँसू और बाकी दूसरी अड़चनों का सामना कर सकूं ताकि 'दौड़ पूरी करुं' और उस कार्य को पूरा करुं जो आपने मुझे दिया है (व.24).

जूना करार

2 राजा 1:1-2:25

अहज्याह के लिये सन्देश

1अहाब के मरने के बाद मोआब इस्राएल के शासन से स्वतन्त्र हो गया।

2 एक दिन अहज्याह शोमरोन में अपने घर की छत पर था। अहज्याह अपने घर की छत के लकड़ी के छज्जे से गिर गया। वह बुरी तरह घायल हो गया। अहज्याह ने सन्देशवाहकों को बुलाया और उनसे कहा, “एक्रोन के देवता बालजबूब के याजकों के पास जाओ। उनसे पूछो कि क्या मैं अपनी चोटों से स्वस्थ हो सकूँगा।”

3 किन्तु यहोवा के दूत ने तिशबी एलिय्याह से कहा, “राजा अहज्याह ने शोमरोन से कुछ सन्देशवाहक भेजे हैं। जाओ और इन लोगों से मिलो। उनसे यह कहो, ‘इस्राएल में परमेश्वर है! तो भी तुम लोग एक्रोन के देवता बलाजबूब से प्रश्न करने क्यों जा रहे हो 4 राजा अहज्याह से ये बातें कहोः तुमने बालजबूब से प्रश्न करने के लिये सन्देशवाहक भेजे। क्योंकि तुमने यह किया, इस कारण यहोवा कहता हैः तुम अपने बिस्तर से उठ नहीं पाओगे। तुम मरोगे!’” तब एलिय्याह चल पड़ा और उसने अहज्याह के सेवकों से यही शब्द कहे।

5 सन्देशवाहक अहज्याह के पास लौट आए। अहज्याह ने सन्देशवाहकों से पूछा, “तुम लोग इतने शीघ्र क्यों लौटे।”

6 सन्देशवाहकों ने अहज्याह से कहा, “एक व्यक्ति हमसे मिलने आया। उसने हम लोगों से उस राजा के पास वापस जाने को कहा जिसने हमें भेजा था और उससे यहोवा ने जो कहा, वह कहने को कहा, ‘इस्राएल में एक परमेश्वर है! तो तुम ने एक्रोन के देवता बालजबूब से प्रश्न करने के लिये सन्देशवाहकों को क्यों भेजा। क्योंकि तुमने यह किया है इस कारण तुम अपने बिस्तर से नहीं उठोगे। तुम मरोगे!’”

7 अहज्याह ने संदेशवाहकों से पूछा, “जो व्यक्ति तुमसे मिला और जिसने तुमसे ऐसा कहा वह कैसा दिखाई पड़ता था”

8 सन्देशवाहकों ने अहज्याह से कहा, “वह व्यक्ति एक रोयेंदार अँगरखा पहने था और अपनी कमर में एक चमड़े की पेटी बाँधे था।”

तब अहज्याह ने कहा, “यह तिशबी एलिय्याह है!”

अहज्याह द्वारा भेजे गए सेनापतियों को आग नष्ट करती है

9 अहज्याह ने एक सेनापति और पचास पुरुषों को एलिय्याह के पास भेजा। सेनापति एलिय्याह के पास गया। उस समय एलिय्याह एक पहाड़ी की चोटी पर बैठा था। सेनापति ने एलिय्याह से कहा, “परमेश्वर के जन राजा का आदेश है, ‘नीचे आओ।’”

10 एलिय्याह ने पचास सैनिकों के सेनापति को उत्तर दिया, “यदि मैं परमेश्वर का जन हूँ तो स्वर्ग से आग गिर पड़े और तुमको एवं पचास सैनिकों को नष्ट कर दे!”

अतः स्वर्ग से आग गिर पड़ी और उसने सेनापति एवं उसके पचास व्यक्तियों को नष्ट कर दिया।

11 अहज्याह ने अन्य सेनापति और पचास सैनिकों को भेजा। सेनापति ने एलिय्याह से कहा, “परमेश्वर के जन, राजा का आदेश है ‘शीघ्र नीचे आओ!’”

12 एलिय्याह ने सेनापति और उसके पचास सैनिकों से कहा, “यदि मैं परमेश्वर का जन हूँ तो स्वर्ग से आग गिर पड़े और वह तुमको और तुम्हारे पचास सैनिकों को नष्ट कर दे!”

परमेश्वर की आग स्वर्ग से गिर पड़ी और सेनापति एवं पचास सैनिकों को नष्ट कर दिया।

13 अहज्याह ने तीसरे सेनापति को पचास सैनिकों के साथ भेजा। पचास सैनिकों का सेनापति एलिय्याह के पास आया। सेनापति ने अपने घुटनों के बल झुककर उसको प्रणाम किया। सेनापति ने उससे यह कहते हुए प्रार्थना की, “परमेश्वर के जन मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ, कृपया मेरे जीवन और अपने इन पचास सेवकों के जीवन को अपनी दृष्टि में मूल्यवान मानें! 14 स्वर्ग से आग गिर पड़ी और प्रथम दो सेनापतियों और उन के पचास सैनिकों को उसने नष्ट कर दिया। किन्तु अब कृपा करें और हमें जीवित रहने दें!”

15 यहोवा के दूत ने एलिय्याह से कहा, “सेनापति के साथ जाओ। उससे डरो नहीं।”

अतः एलिय्याह सेनापति के साथ राजा अहज्याह को देखने गया।

16 एलिय्याह ने अहज्याह से कहा, “इस्राएल में परमेश्वर है ही, तो भी तुमने सन्देशवाहकों को एक्रोन के देवता बालजबूब से प्रश्न करने के लिये क्यों भेजा क्योंकि तुमने यह किया है, इस कारण तुम अपने बिस्तर से नहीं उठोगे। तुम मरोगे!”

यहोराम, अहज्याह का स्थान लेता है

17 अहज्याह वैसे ही मरा जैसा यहोवा ने एलिय्याह के द्वारा कहा था। अहज्याह का कोई पुत्र नहीं था। अतः अहज्याह के बाद यहोराम नया राजा हुआ। यहोराम ने यहूदा के राजा यहोशापात के पुत्र यहोराम के राज्यकाल के दूसरे वर्ष शासन करना आरम्भ किया।

18 अहज्याह ने जो अन्य कार्य किये वे इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखे गये हैं।

एलिय्याह को अपने पास लेने की यहोवा की योजना

2यह लगभग वह समय था जब यहोवा ने एक तूफान के द्वारा एलिय्याह को स्वर्ग में बुला लिया। एलिय्याह एलीशा के साथ गिलगाल गया।

2 एलिय्याह ने एलीशा से कहा, “कृपया यहीं रुको, क्योंकि यहोवा ने मुझे बेतेल जाने को कहा है।”

किन्तु एलीशा ने कहा, “जैसा कि यहोवा की सत्ता शाश्वत है और आप जीवित हैं, इसको साक्षी कर मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि मैं आपका साथ नहीं छोड़ूँगा।” इसलिये दोनों लोग बेतेल तक गये।

3 बेतेल के नबियों का समूह एलीशा के पास आया और उसने एलीशा से कहा, “क्या तुम जानते हो कि आज तुम्हारे स्वामी को यहोवा तुमसे अलग करके ले जाएगा”

एलीशा ने कहा, “हाँ, मैं यह जानता हूँ। इस विषय में बातें न करो।”

4 एलिय्याह ने एलीशा से कहा, “कृपया यहीं ठहरो क्योंकि यहोवा ने मुझे यरीहो जाने को कहा है।”

किन्तु एलीशा ने कहा, “जैसा कि यहोवा की सत्ता शाश्वत है और आप जीवित हैं, इसको साक्षी करके मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि मैं आपका साथ नहीं छोडूँगा!” इसलिये दोनों लोग यरीहो गए।

5 यरीहो के नबियों का समूह एलीशा के पास आया और उन्होंने उससे कहा, “क्या तुमको मालूम है कि यहोवा आज तुम्हारे स्वामी को तुमसे दूर ले जाएगा।”

एलीशा ने कहा, “हाँ, मैं इसे जानता हूँ। इस विषय में बातें न करो।”

6 एलिय्याह ने एलीशा से कहा, “कृपया यहीं ठहरो क्योंकि यहोवा ने मुझे यरदन नदी तक जाने को कहा है।”

एलीशा ने उत्तर दिया, “जैसा कि यहोवा की सत्ता शाश्वत है और आप जीवित हैं, इसको साक्षी करके प्रतिज्ञा करता हूँ कि मैं आपका साथ नहीं छोड़ूँगा!” अतः दोनों व्यक्ति चलते चले गए।

7 नबियों के समूह में से पचास व्यक्तियों ने उनका अनुसरण किया। एलिय्याह और एलीशा यरदन नदी पर रुक गए। पचास व्यक्ति एलिय्याह और एलीशा से बहुत दूर खड़े रहे। 8 एलिय्याह ने अपना अंगरखा उतारा, उसे तह किया और उससे पानी पर चोट की। पानी दायीं और बायीं ओर को फट गया। एलिय्याह और एलीशा ने सूखी भूमि पर चलकर नदी को पार किया।

9 जब उन्होंने नदी को पार कर लिया तब एलिय्याह ने एलीशा से कहा, “इससे पहले कि परमेश्वर मुझे तुमसे दूर ले जाए, तुम क्या चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिए करुँ।”

एलीशा ने कहा, “मैं आपके आत्मा का दुगना अपने ऊपर चाहता हूँ।”

10 एलिय्याह ने कहा, “तुमने कठिन चीज़ माँगी है। यदि तुम मुझे उस समय देखोगे जब मुझे ले जाया जाएगा तो वही होगा। किन्तु यदि तुम मुझे नहीं देख पाओगे तो वह नहीं होगा।”

परमेश्वर एलिय्याह को स्वर्ग में ले जाता है

11 एलिय्याह और एलीशा एक साथ बातें करते हुए टहल रहे थे। अचानक कुछ घोड़े और एक रथ आया और उन्होंने एलिय्याह को एलीशा से अलग कर दिया। घोड़े और रथ आग के समान थे। तब एलिय्याह एक बवंडर में स्वर्ग को चला गया।

12 एलीशा ने इसे देखा और जोर से पुकारा, “मेरे पिता! मेरे पिता! इस्राएल के रथ और उसके अश्वारोही सैनिक!”

एलीशा ने एलिय्याह को फिर कभी नहीं देखा। एलीशा ने अपने वस्त्रों को मुट्ठी में भरा, और अपना शोक प्रकट करने के लिये उन्हें फाड़ डाला। 13 एलिय्याह का अंगरखा भूमि पर गिर पड़ा था अतः एलीशा ने उसे उठा लिया। एलीशा ने पानी पर चोट की और कहा, “एलिय्याह का परमेश्वर यहोवा, कहाँ है” 14 जैसे ही एलीशा ने पानी पर चोट की, पानी दाँयी और बांयी ओर को फट गया और एलीशा ने नदी पार की।

नबी एलिय्याह की माँग करते हैं

15 जब यरीहो के नबियों के समूह ने एलीशा को देखा, उन्होंने कहा, “एलिय्याह की आत्मा अब एलीशा पर है।” वे एलीशा से मिलने आए। वे एलीशा के सामने नीचे भूमि तक प्रणाम करने झुके। 16 उन्होंने उससे कहा, “देखो, हम अच्छे खासे पचास व्यक्ति हैं। कृपया इनको जाने दो और अपने स्वामी की खोज करने दो। सम्भव है यहोवा की शक्ति ने एलिय्याह को ऊपर ले लिया हो और उसे किसी पर्वत या घाटी में गिरा दिया हो!”

किन्तु एलीशा ने उत्तर दिया, “नहीं, एलिय्याह की खोज के लिये आदमियों को मत भेजो।”

17 नबियों के समूह ने एलीशा से इतनी अधिक प्रार्थना की, कि वह उलझन में पड़ गया। तब एलीशा ने कहा, “ठीक है, एलिय्याह की खोज में आदमियों को भेज दो।”

नबियों के समूह ने पचास आदमियों को एलिय्याह की खोज के लिये भेजा। उन्होंने तीन दिन तक खोज की किन्तु वे एलिय्याह को न पा सके। 18 अतः वे लोग यरीहो गए जहाँ एलीशा ठहरा था। उन्होंने उससे कहा कि वे एलिय्याह को नहीं पा सके। एलीशा ने उनसे कहा, “मैंने तुम्हें जाने को मना किया था।”

एलीशा पानी को शुद्ध करता है

19 नगर के निवासियों ने एलीशा से कहा, “महोदय, आप अनुभव कर सकते हैं कि यह नगर सुन्दर स्थान में है। किन्तु यहाँ पानी बुरा है। यही कारण है कि भूमि में फसल की उपज नहीं होती।”

20 एलीशा ने कहा, “मेरे पास एक नया कटोरा लाओ और उसमें नमक रखो।”

लोग कटोरे को एलीशा के पास ले आए। 21 तब एलीशा उस स्थान पर गया जहाँ पानी भूमि से निकल रहा था। एलीशा ने नमक को पानी में फेंक दिया। उसने कहा, “यहोवा कहता है, ‘मैं इस पानी को शुद्ध करता हूँ। अब, मैं इस पानी से किसी को मरने न दूँगा, और न ही भूमि को अच्छी फसल देने से रोकूँगा।’”

22 पानी शुद्ध हो गया और पानी अब तक भी शुद्ध है। यह वैसा ही हुआ जैसा एलीशा ने कहा था।

कुछ लड़के एलीशा का मजाक उड़ाते हैं

23 उस नगर से एलीशा बेतेल गया। एलीशा नगर की ओर पहाड़ी पर चल रहा था जब कुछ लड़के नगर से नीचे आ रहे थे। वह एलीशा का मजाक उड़ाने लगे और उन्होंने कहा, “हे गन्जे, तू ऊपर चढ़ जा! हे गन्जे तू ऊपर चढ़ जा!”

24 एलीशा ने मुड़ कर उन्हें देखा। उसने यहोवा से बिनती की कि उन के साथ बुरा हो। उसी समय जंगल से दो रीछों ने आ कर उन लड़कों पर हमला किया, वहाँ बयालीस लड़के रीछों द्वारा फाड़ दिये गये।

25 वहाँ से एलीशा बेतेल होता हुआ कर्म्मेल पर्वत पर गया, उस के बाद वह शोमरोन पहुँचा।

समीक्षा

यीशु के विषय में अच्छे समाचार को बतायें

अच्छे लीडर वारिस को तैयार करते हैं. बाईबल में यह एक उदाहरण है जहाँ पर वारिस तैयार करने का काम अच्छी तरह से किया गया है.

एक अच्छा सिखाने वाला महान उपहार है. एलिय्याह एलिशा का एक सिखाने वाला और उसने अपनी सामर्थ उसे सौंप दी. एलिशा ने मांगा, 'तुझ में जो आत्मा है, उसका दुगना भाग मुझे मिल जाए' (2:9). अपने सिखाने वाले की तरह ही, वह एक पवित्र मनुष्य बनना चाहते थे.

एलिय्याह ने उनसे कहा कि उसे वह मिलेगा जो माँगा है, यदि वह अंत तक उनके साथ बने रहेंगेः'यदि तू मुझे उठा लिये जाने के बाद देखने पाए तो तेरे लिये ऐसा ही होगा; नहीं तो नहीं होगा' (व.10, एम.एस.जी).

'चिपके रहने की योग्यता' सेवकाई में बहुत महत्वपूर्ण है. जोश और उत्साह के साथ शुरुवात करना आसान बात है, लेकिन हर एक के पास 'चिपके रहने की योग्यता' नहीं है कि कठिन परिश्रम, मुश्किल और निराशा को सहें और अंत तक चीजों को देख पाएँ, जैसा कि एलिशा ने किया.

एलिशा ने सच में 'दुगने भाग' को ग्रहण किया. एलिय्याह की चादर एलिशा पर गिर गई (व.13). जो देख रहे थे उन सभी को यह स्पष्ट हो गया कि एलिशा अभिषिक्त वारिस थाः'एलिय्याह की आत्मा एलिशा पर आकर ठहर गई' (व.15).

एलिय्याह और उनकी असाधारण सामर्थ की घटना, स्वर्ग से आग को नीचे बुलाना (1:12) और पानी को दो भागों में बाँटना (2:8), इसे नये नियम के प्रकाश में पढ़ा जा सकता है. एलिय्याह, यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले के आदिरूप थे.'यूहन्ना ने 'एलिय्याह की आत्मा और सामर्थ में सेवकाई की' (लूका 1:14), यीशु के लिए मार्ग तैयार करते हुए.

यीशु कहते हैं कि तुम एलिय्याह और एलिशा से बेहतर हो. वह कहते हैं कि, 'महिलाओं से जन्में में से कोई भी यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले जितना महान नहीं है' (एलिय्याह जो कि आने वाला था). फिर भी वह आगे कहते हैं, 'जो कोई स्वर्ग के राज्य में सबसे छोटा है, वह उससे बड़ा है' (मत्ती 11:11). कम से कम दो कारणों से हर मसीह एलिय्याह और यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले की तुलना में अधिक बेहतर स्थिति में है.

पहला, आप यीशु के विषय में अच्छे समाचार को बताने के लिए एक बेहतर स्थिति में हैं. दूसरा, आपको पिंतेकुस्त के दिन पवित्र आत्मा का उपहार दिया गया है. हर मसीह ('जो कोई स्वर्ग के राज्य में सबसे छोटा है') के पास पवित्र आत्मा की सामर्थ में सुसमाचार का प्रचार करने का अवसर है – विश्व में सबसे शक्तिशाली संदेश.

प्रार्थना

परमेश्वर, आपका धन्यवाद इस अद्भुत सुविधा के लिए जिसे आपने मुझे और हर मसीह को दिया है – विश्व में सबसे शक्तिशाली संदेश को प्रचार करने में सक्षम होना. आपका धन्यवाद क्योंकि यह संदेश जीवन, समुदाय और संस्कृति को बदलता है.

पिप्पा भी कहते है

आज के लेखांश में दो चेतावनीयाँ-

गंजे लोगों के प्रति बहुत क्रूर न बने (2राजा 2:23-25)

यदि प्रचारक निरंतर बोलते जाते हैं, तो झपकी लेने के लिए एक आरामदायक (और सुरक्षित) स्थान ढूँढ लें (प्रेरितों के काम 20:7-12).

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संदर्भ

जहाँ पर कुछ बताया न गया हो, उन वचनों को पवित्र बाइबल, न्यू इंटरनैशनल संस्करण एन्ग्लिसाइड से लिया गया है, कॉपीराइट © 1979, 1984, 2011 बिबलिका, पहले इंटरनैशनल बाइबल सोसाइटी, हूडर और स्टोगन पब्लिशर की अनुमति से प्रयोग किया गया, एक हॅचेट यूके कंपनी सभी अधिकार सुरक्षित। ‘एनआईवी’, बिबलिका यू के का पंजीकृत ट्रेडमार्क संख्या 1448790 है।

जिन वचनों को (एएमपी, AMP) से चिन्हित किया गया है उन्हें एम्प्लीफाइड® बाइबल से लिया गया है. कॉपीराइट © 1954, 1958, 1962, 1964, 1965, 1987 लॉकमैन फाउंडेशन द्वारा प्राप्त अनुमति से उपयोग किया गया है। (www.Lockman.org)

जिन वचनों को (एमएसजी MSG) से चिन्हित किया गया है उन्हें मैसेज से लिया गया है। कॉपीराइट © 1993, 1994, 1995, 1996, 2000, 2001, 2002. जिनका प्रयोग एनएवीप्रेस पब्लिशिंग ग्रुप की अनुमति से किया गया है।

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