दिन 222

महानता के तीन स्तर

बुद्धि भजन संहिता 93:1-5
नए करार 1 कुरिन्थियों 5:1-13
जूना करार 1 इतिहास 28:1-29:30

परिचय

हमारी पत्रिकाएँ और टी.व्ही स्क्रीन अमीर, सुंदर और मजबूत कहानियों से भरे हुए हैं। हमारी संस्कृति इन चीजों को एक मंचिका पर रखती है और हममें से बहुत से उन्हें पाने की अभिलाषा करते हैं। इन चीजों के साथ कुछ गलत नहीं है – लेकिन वे सबकुछ नहीं हैं।

फ्रेंच फिलोसफर, ब्लेस पास्कल, ने महानता के तीन क्रम के बारे में बताया है। अमीरी, सुंदरता और ताकत उनकी “भौतिक महानता” के पहले भाग में आते हैं।

इसके ऊपर ऊंचा, महानता का दूसरा स्तर है। यह प्रतिभा, विज्ञान और कला की महानता है। माईकलेंजलो की कला या बाच का गीत या अल्बर्ट आईंस्टाईन कुशाग्रबुद्धि की महानता - भौतिक महानता के कहीं ऊपर इनका दर्जा है।

किंतु, पास्कल के अनुसार एक तीसरे प्रकार की महानता है – पवित्रता का क्रम। (और यहाँ पर लगभग एक अनंत गुणवत्तात्मक अंतर है दूसरे और तीसरे विभाग के बीच में)। यह तथ्य कि एक अमीर व्यक्ति मजबूत या कमजोर, अमीर या गरीब, बहुत विद्वान या अनपढ़ है, यह किसी चीज को जोड़ती या घटाती नहीं है क्योंकि उस व्यक्ति की महानता एक अलग और बिल्कुल अनंत स्तर में है। यह हम सभी के लिए खुला है कि महान बनें पवित्रता के क्रम में।

शब्द “पवित्र” (पवित्र किया गया, पवित्र, पवित्रता) बाईबल में 500से अधिक बार दिखाई देता है। परमेश्वर पवित्र हैं। वह आपको अपना पवित्र आत्मा देते हैं, आपको पवित्र करने के लिए, और आप उनकी पवित्रता में सहभागी होने के लिए बुलाए गए हैं।

शब्द “संत” का अर्थ है “पवित्र लोग”। नये नियम में यह सभी मसीहों पर लागू होता है। आप “पवित्र बनने” के लिए बुलाए गए हैं (1कुरिंथियो 1:2)। पवित्रता एक वरदान है जिसे आप ग्रहण करते हैं जब आप यीशु पर भरोसा करते है, उनकी सत्यनिष्ठा और पवित्र आत्मा के वरदान को ग्रहण करते हैं। परमेश्वर के वरदान के प्रति आभारी उत्तर में एक पवित्र जीवन जीने का प्रयास करे, पवित्र आत्मा की सामर्थ में यीशु का अनुकरण करने के द्वारा।

बुद्धि

भजन संहिता 93:1-5

93यहोवा राजा है।
 वह सामर्थ्य और महिमा का वस्त्र पहने है।
 वह तैयार है, सो संसार स्थिर है।
 वह नहीं टलेगा।

2 हे परमेश्वर, तेरा साम्राज्य अनादि काल से टिका हुआ है।
 तू सदा जीवित है।
3 हे यहोवा, नदियों का गर्जन बहुत तीव्र है।
 पछाड़ खाती लहरों का शब्द घनघोर है।
4 समुद्र की पछाड़ खाती लहरे गरजती हैं, और वे शक्तिशाली हैं।
 किन्तु ऊपर वाला यहोवा अधिक शक्तिशाली है।

5 हे यहोवा, तेरा विधान सदा बना रहेगा।
 तेरा पवित्र मन्दिर चिरस्थायी होगा।

समीक्षा

पवित्र परमेश्वर

परमेश्वर सारी सृष्टि के निर्माता हैं, लेकिन वह उस विश्व से अलग रखे गए हैं जो उन्होंने स्थापित की है। वह सृष्टि की सारी चीजों से अधिक महान और प्रतापी हैं, महासागर के शब्दों से भी अधिक (व.4)।

भजनसंहिता के लेखक स्तुति की पराकाष्ठा परमेश्वर की पवित्रता पर आधारित है। वह कहते हैं,”तेरी चितौनियां अति विश्वासयोग्य हैं; हे यहोवा, तेरे भवन को युग युग पवित्रता ही शोभा देती है” (व.5)। एन.ई.बी. इसका अनुवाद करता है,”पवित्रता तेरे मंदिर की सुंदरता है...” मंदिर एक सुंदर और मोहक भवन था, लेकिन भजनसंहिता के लेखक पहचानते हैं कि परमेश्वर की पवित्रता मंदिर की सच्ची आंतरिक सुंदरता और महिमा है।

प्रार्थना

परमेश्वर, आपकी पवित्रता की सुंदरता में हम आपकी आराधना करते हैं। आप एकमात्र पवित्र परमेश्वर हैं। पवित्र, पवित्र, पवित्र, पवित्र सर्वशक्तिमान परमेश्वर हैं (यशायाह 6:3)।

नए करार

1 कुरिन्थियों 5:1-13

कलीसिया में दुराचार

5सचमुच ऐसा बताया गया है कि तुम लोगों में दुराचार फैला हुआ है। ऐसा दुराचार-व्यभिचार तो अधर्मियों तक में नहीं मिलता। जैसे कोई तो अपनी विमाता तक के साथ सहवास करता है। 2 और फिर तुम लोग अभिमान में फूले हुए हो। किन्तु क्या तुम्हें इसके लिये दुखी नहीं होना चाहिये? जो कोई ऐसा दुराचार करता है उसे तो तुम्हें अपने बीच से निकाल बाहर करना चाहिये था। 3 मैं यद्यपि शारीरिक रूप से तुम्हारे बीच नहीं हूँ किन्तु आत्मिक रूप से तो वहीं उपस्थित हूँ। और मानो वहाँ उपस्थित रहते हुए जिसने ऐसे बुरे काम किये हैं, उसके विरुद्ध मैं अपना यह निर्णय दे चुका हूँ 4 कि जब तुम मेरे साथ हमारे प्रभु यीशु के नाम में मेरी आत्मा और हमारे प्रभु यीशु की शक्ति के साथ एकत्रित होओगे 5 तो ऐसे व्यक्ति को उसके पापपूर्ण मानव स्वभाव को नष्ट कर डालने के लिये शैतान को सौंप दिया जायेगा ताकि प्रभु के दिन उसकी आत्मा का उद्धार हो सके।

6 तुम्हारा यह बड़बोलापन अच्छा नहीं है। तुम इस कहावत को तो जानते ही हो, “थोड़ा सा ख़मीर आटे के पूरे लौंदे को खमीरमय कर देता है।” 7 पुराने ख़मीर से छुटकारा पाओ ताकि तुम आटे का नया लौंदा बन सको। तुम तो बिना ख़मीर वाली फ़सह की रोटी के समान हो। हमें पवित्र करने के लिये मसीह को फ़सह के मेमने के रूप में बलि चढ़ा दिया गया। 8 इसलिए आओ हम अपना फ़सह पर्व बुराई और दुष्टता से युक्त पुराने ख़मीर की रोटी से नहीं बल्कि निष्ठा और सत्य से युक्त बिना ख़मीर की रोटी से मनायें।

9 अपने पिछले पत्र में मैंने लिखा था कि तुम्हें उन लोगों से अपना नाता नहीं रखना चाहिए जो व्यभिचारी हैं। 10 मेरा यह प्रयोजन बिलकुल नहीं था कि तुम इस दुनिया के व्यभिचारियों, लोभियों, ठगों या मूर्ति-पूजकों से कोई सम्बन्ध ही मत रखो। ऐसा होने पर तो तुम्हें इस संसार से ही निकल जाना होगा। 11 किन्तु मैंने तुम्हें जो लिखा है, वह यह है कि किसी ऐसे व्यक्ति से नाता मत रखो जो अपने आपको मसीही बन्धु कहला कर भी व्यभिचारी, लोभी, मूर्तिपूजक चुगलखोर, पियक्कड़ या एक ठग है। ऐसे व्यक्ति के साथ तो भोजन भी ग्रहण मत करो।

12 जो लोग बाहर के हैं, कलीसिया के नहीं, उनका न्याय करने का भला मेरा क्या काम। क्या तुम्हें उन ही का न्याय नहीं करना चाहिये जो कलीसिया के भीतर के हैं? 13 कलीसिया के बाहर वालों का न्याय तो परमेश्वर करेगा। शास्त्र कहता है: “तुम पाप को अपने बीच से बाहर निकाल दो।”

समीक्षा

पवित्र चर्च

आज चर्च में पवित्रता के विषय में बात करने में वहाँ पर बहुत सी मुश्किल चीजें हैं। पहला, वहाँ पर एक बर्ताव का खतरा है वह है “तुम से ज्यादा पवित्र।” स्वयं-सत्यनिष्ठता वरिष्ठता से दूर रहिये। दूसरा, वहाँ पर सिद्धतवादी होना है। केवल परमेश्वर पूरी तरह से पवित्र हैं। हमें श्रेष्ठता की लालसा करने की आवश्यकता है, लेकिन हम इस जीवन में सिद्धता को प्राप्त नहीं करेंगे।

हमारी पवित्रता, परमेश्वर की पवित्रता के प्रति उचित उत्तर है – और फिर भी यह केवल परमेश्वर के वरदान और अनुग्रह के द्वारा संभव बनायी गई है। चर्च में पवित्रता पवित्र आत्मा के वरदान से आती है (1कुरिंथियो 3:16-17)।

क्योंकि चर्च को पवित्र होना चाहिए, इसलिए पौलुस यह देखकर हैरान हो गए कि कुरिंथ में क्या चल रहा था। “ यहाँ तक सुनने में आता है कि तुम में व्यभिचार होता है, वरन् ऐसा व्यभिचार जो अन्यजातियों में भी नहीं होता” (5:1)।

वह लिखते हैं,” और तुम शोक तो नहीं करते, जिससे ऐसा काम करने वाला तुम्हारे बीच में से निकाला जाता” (व.2, एम.एस.जी)।

चर्च पवित्र रहे इसलिए अनुशासन का इस्तेमाल करने की आवश्यकता है। कुछ घोर पाप हैं जिसके परिणामस्वरूप उन्हें चर्च में से बाहर निकाल देना चाहिए (व.13)। ऐसे पाप हैं जो पूरी तरह से स्पष्ट हैं। उदाहरण के लिए, व्यभिचार के मामले में यह एक घोर प्रकार का व्यभिचार है (एक मनुष्य और उसकी सौतेली माँ के बीच में, व.1)।

वचन 10-11 में, हमने उन लोगों के लिए अनुशासन के बारे में पढ़ा जो “ लोभी, या मूर्तिपूजक, या गाली देने वाला, या पियक्कड़, या अन्धेर करने वाला हो” (व.11)। यहाँ पर “लालच” लोभ को बताता है इस हद तक कि लूट या धोखा देना। ऐसे दूसरे पापों में व्यभिचार और हत्या शामिल है (गाली देना –निंदा करना और गाली देने वाले लोग)।,

“पियक्कड़” वे लोग हैं जो इच्छापूर्वक और लगातार पीते हैं। यहाँ पर पौलुस का ध्यान उन लोगों पर नहीं है जो शराब (या किसी दूसरे व्यसन)छोड़ने का प्रयास कर रहे हैं, जिनके लिए चर्च को चंगाई का एक स्थान होना चाहिए नाकि नकार दिये जाने वाला स्थान। यहाँ पर शब्द दूसरी बुरी आदतों से जुड़ा हुआ है – हिंसा और व्यभिचार।

पौलुस इसे पूरी तरह से स्पष्ट करते हैं कि वह चर्च के बाहर वालों के विषय में बात नहीं कर रहे हैं (व.10)। हमें यहाँ तक कि सबसे बुरे “पापियों” को अलग नहीं रखना है। यीशु “पापियों के मित्र थे।” वह सभी से मिलते थे। इन्हीं लोगो तक हमें भी पहुँचना है।

इसके बजाय, पौलुस कह रहे हैं कि यदि लोग बिना पश्चाताप के ऐसे तीक्ष्ण और स्पष्ट पाप में बने रहते हैं, तो चर्च में उनके लिए कोई स्थान नहीं है। यदि हम मामलें से न निबटे,”एक छोटा सा खमीर पूरे आटे को खमीरा कर देगा” (व.6) - यह पूरे चर्च को प्रभावित करेगा।

इसलिए चर्च का अनुशासन बहुत ही सकारात्मक है, इस तरह से कि यह व्यक्ति को सक्षम बनाता है कि अपने व्यवहार का सामना करे और इससे निपटे (व.5)। यह चर्च के लिए भी सकारात्मक है क्योंकि यह समस्त चर्च समुदाय में बुराई को फैलने से रोकेगा (व.6)।

धन्यवाद हो परमेश्वर का क्योंकि क्षमा पाना संभव हैः” क्योंकि हमारा भी फसह, जो मसीह है, बलिदान हुआ है” (व.7)। हममें से कोई भी परमेश्वर के वरदान के बिना पवित्र नहीं है। फसह के मेमने के रूप में यीशु ने अपनी जान दी ताकि हम क्षमा पायें और शुद्ध हो। पवित्रता परमेश्वर की ओर से एक उपहार है। जब हम गलती करते हैं तब हमें जल्दी से क्रूस के पास वापस आना है और क्षमा ग्रहण करनी है।

प्रार्थना

आज परमेश्वर मैं वापस आपके पास आता हूँ और आपकी क्षमा और शुद्धिकरण को माँगता हूँ। मेरी सहायता कीजिए कि एक पवित्र जीवन जीऊं। आपका चर्च एक पवित्र स्थान हो।

जूना करार

1 इतिहास 28:1-29:30

दाऊद मन्दिर की योजना बनाता है।

28दाऊद ने इस्राएल के सभी प्रमुखों को इकट्ठा किया। उसने सभी प्रमुखों को यरूशलेम आने का आदेश दिया। दाऊद ने परिवार समूहों के प्रमुखों, राजा की सेवा करने वाली सेना की टुकड़ियों के सेनापतियों, सेनाध्यक्षों, राजा और उनके पुत्रों के जानवरों तथा सम्पत्ति की देखभाल करने वाले अधिकारियों, राजा के महत्वपूर्ण अधिकारियों, शक्तिशाली वीरों और सभी वीर योद्धाओं को बुलाया।

2 राजा दाऊद खड़ा हुआ और कहा, “मेरे भाईयो और मेरे लोगो, मेरी बात सुनो। मैं अपने हृदय से यहोवा के साक्षीपत्र के सन्दुक को रखने के लिये एक स्थान बनाना चाहता हूँ। मैं एक ऐसा स्थान बनाना चाहता हूँ जो परमेश्वर का पद पीठ बन सके और मैंने परमेश्वर के लिये एक मन्दिर बनाने की योजना बनाई। 3 किन्तु परमेश्वर ने मुझसे कहा, ‘नहीं दाऊद, तुम्हें मेरे नाम पर मन्दिर नहीं बनाना चाहिये। तुम्हें यह नहीं करना चाहिये क्योंकि तुम एक योद्धा हो और तुमने बहुत से व्यक्तियों को मारा है।’

4 “यहोवा इस्राएल के परमेश्वर ने इस्राएल के परिवार समूहों का नेतृत्व करने के लिये यहूदा के परिवार समूह को चुना। तब उस परिवार समूह में से, यहोवा ने मेरे पिता के परिवार को चुना और उस परिवार से परमेश्वर ने मुझे सदा के लिये इस्राएल का राजा चुना। परमेश्वर मुझे इस्राएल का राजा बनाना चाहता था। 5 यहोवा ने मुझे बहुत से पुत्र दिये हैं और उन सारे पुत्रों में से, सुलैमान को यहोवा ने इस्राएल का नया राजा चुना। परन्तु इस्राएल सचमुच यहोवा का राज्य है। 6 यहोवा ने मुझसे कहा, दाऊद, तुम्हारा पुत्र सुलैमान मेरा मन्दिर और इसके चारों ओर का क्षेत्र बनाएगा। क्यों? क्योंकि मैंने सुलैमान को अपना पुत्र चुना है और मैं उसका पिता रहूँगा। 7 अब सुलैमान मेरे नियमों और आदेशों का पालन कर रहा है। यदि वह मेरे नियमों का पालन करता रहता है तो मैं सुलैमान के राज्य को सदा के लिये शक्तिशाली बना दूँगा!”

8 दाऊद ने कहा, “अब, इस्राएल और परमेश्वर के सामने मैं तुमसे ये बातें कहता हूँ: यहोवा अपने परमेश्वर के सभी आदेशों को मानने में सावधान रहो! तब तुम इस अच्छे देश को अपने पास रख सकते हो और तुम सदा के लिए इसे अपने वंशजों को दे सकते हो।

9 “और मेरे पुत्र सुलैमान, तुम, अपने पिता के परमेश्वर को जानते हो। शुद्ध हृदय से परमेश्वर की सेवा करो। परमेश्वर की सेवा करने में अपने हृदय (मस्तिष्क) में प्रसन्न रहो। क्यों? क्योंकि यहोवा जानता है कि हर एक के हृदय (मस्तिष्क) में क्या है। हर बात जो सोचते हो, यहोवा जानता है। यदि तुम यहोवा के पास सहायता के लिये जाओगे, तो तुम्हें वह मिलेगी। किन्तु यदि उसको छोड़ते हो, तो वह तुमको सदा के लिये छोड़ देगा। 10 सुलैमान, तुम्हें यह समझना चाहिये कि यहोवा ने तुमको अपना पवित्र स्थान मन्दिर बनाने के लिये चुना है। शक्तिशाली बनो और कार्य को पूरा करो।”

11 तब दाऊद ने अपने पुत्र सुलैमान को मन्दिर बनाने के लिये योजनाएँ दीं। वे योजनाएँ मन्दिर के चारों ओर प्रवेश—कक्ष बनाने, इसके भवन, इसके भंडार—कक्ष, इसके ऊपरी कक्ष, इसके भीतरी कक्ष और दयापीठ के स्थान के लिये थी। 12 दाऊद ने मन्दिर के सभी भागों के लिये योजनाएँ बनाईं थीं। दाऊद ने उन योजनाओं को सुलैमान को दिया। दाऊद ने यहोवा के मन्दिर के चारों ओर के आँगन और उसके चारों ओर के कक्षों की योजनाएँ दीं। दाऊद ने मन्दिर के भंडारकक्षकों और उन भंडारकक्षों की योजनाएँ दीं जहाँ वे उन पवित्र चीजों को रखते थे जो मन्दिर में काम आती थीं। 13 दाऊद ने सुलैमान को, याजकों और लेवीवंशियों के समूहों के बारे में बताया। दाऊद ने सुलैमान को यहोवा के मन्दिर में सेवा करने के काम के बारे में और मन्दिर में काम आने वाली वस्तुओं के बारे में बताया। 14 दाऊद ने सुलैमान को बताया कि मन्दिर में काम आने वाली चीजों को बनाने में कितना सोना और चाँदी लगेगा। 15 सोने के दीपकों और दीपाधारों की योजनाएँ थी। और चांदी के दीपकों और दीपाधारों की योजनाएँ थी। दाऊद ने बताया कि हर एक दीपाधार और उसके दीपक के लिये कितनी सोने या चाँदी का उपयोग किया जाये। विभिन्न दीपाधार, जहाँ आवश्यकता थी, उपयोग में आने वाले थे। 16 दाऊद ने बाताया कि पवित्र रोटी के लिये काम में आने वाली हर एक मेज के लिये कितना सोना काम में आएगा। दाऊद ने बताया कि चाँदी की मेज़ों के लिये कितनी चाँदी काम में आएगी। 17 दाऊद ने बताया कि कितना शुद्ध सोना, काँटे, छिड़काव की चिलमची और घड़े बनाने में लगेगा। दाऊद ने बताया कि हर एक तश्तरी बनाने में कितना सोना लगेगा और हर एक चाँदी की तश्तरी में कितनी चाँदी लगेगी। 18 दाऊद ने बताया कि सुगन्धि की वेदी के लिये कितना शुद्ध सोना लगेगा। दाऊद ने सुलैमान को परमेश्वर का रथ, यहोवा के साक्षीपत्र के सन्दूक के ऊपर अपने पँखों को फैलाये करूब (स्वर्गदूत) के साथ दयापीठ की योजना भी दी। करूब(स्वर्गदूत) सोने के बने थे।

19 दाऊद ने कहा, “ये सभी योजनाएँ मुझे यहोवा से मिले निर्देशों के अनुसार बने हैं। यहोवा ने योजनाओं की हर एक चीज समझने में मुझे सहायता दी।”

20 दाऊद ने अपने पुत्र सुलैमान से यह भी कहा, “दृढ़ और वीर बनो और इस काम को पूरा करो। डरो नहीं, क्योंकि यहोवा, मेरा परमेश्वर तुम्हारे साथ है। वह तुम्हारी सहायता तब तक करेगा जब तक तुम्हारा यह काम पूरा नहीं हो जता। वह तुमको छोड़ेगा नहीं। तुम यहोवा का मन्दिर बनाओगे। 21 परमेश्वर के मन्दिर का सभी काम करने के लिये याजकों और लेवीवंशियों के समूह तैयार हैं। सभी कामों में तुम्हें सहायता देने के लिये कुशल कारीगर तैयार है जो भी तुम आदेश दोगे उसका पालन अधिकारी और सभी लोग करेंगे।”

मन्दिर बनाने के लिये भेंट

29राजा दाऊद ने वहाँ एक साथ इकट्ठे इस्राएल के सभी लोगों से कहा, “परमेश्वर ने मेरे पुत्र सुलैमान को चुना। सुलैमान बालक है और वह उन सब बातों को नहीं जानता जिनकी आवश्यकता उसे इस काम को करने के लिये है। किन्तु काम बुहत महत्वपूर्ण है। यह भवन लोगों के लिये नहीं है अपितु यहोवा परमेश्वर के लिये है। 2 मैंने पूरी शक्ति से अपने परमेश्वर के मन्दिर को बनाने की योजना पर काम किया है। मैंने सोने से बनने वाली चीज़ों के लिये सोना दिया है। मैं ने चाँदी से बनने वाली चीजों के लिए चाँदी दी है। मैंने काँसे से बनने वाली चीजों के लिये काँसा दिया है। मैंने लोहे से बनने वाली चीज़ों के लिये लोहा दिया है। मैंने लकड़ी से बनने वाली चीज़ों के लिये लकड़ी दी है। मैंने नीलमणि, रत्नजटित फलकों के लिये विभिन्न रंगों के सभी प्रकार के बहुमूल्य रत्न और श्वेत संगमरमर भी दिये हैं। मैंने यहोवा के मन्दिर को बनाने के लिये ये चीजें अधिक और बहुत अधिक संख्या में दी हैं। 3 मैं अपने परमेश्वर के मन्दिर के लिये सोने और चाँदी की एक विशेष भेंट दे रहा हूँ। मैं यह इसलिये कर रहा हूँ कि मैं सचमुच अपने परमेश्वर के मन्दिर को बनाना चाहता हूँ। मैं इस पवित्र मन्दिर को बनाने के लिये इन सब चीजों को दे रहा हूँ। 4 मैंने ओपीर से एक सौ टन शुद्ध सोना दिया है। मैंने दो सौ साठ टन शुद्ध चाँदी दी है। चाँदी मन्दिर के भवनों की दीवारों के ऊपर मढ़ने के लिये है। 5 मैंने सोना और चाँदी उन सब चीजों के लिये दी हैं जो सोने और चाँदी की बनी होती हैं। मैं ने सोना और चाँदी दिया है जिनसे कुशल कारीगर मन्दिर के लिये सभी विभिन्न प्रकार की चीज़ें बना सकेंगे। अब ईस्राएल के लोगो आप लोगों में से कितने आज यहोवा के लिये अपने को अर्पित करने के लिये तैयार हैं?”

6 परिवारों के प्रमुख, इस्राएल के परिवार समूहों के प्रमुख, सेनाध्याक्ष, राजा के काम करने के लिये उत्तरदायी अधिकारी, सभी तैयार थे और उन्होंने बहुमूल्य चीजें दीं। 7 ये वे चीजें हैं जो उन्होंने परमेश्वर के गृह के लिये दीं एक सौ नब्बे टन सौना, तीन सौ पचहत्तर टन चाँदी, छःसौ पचहत्तर टन काँसा; तीन सौ पचास टन लोहा, 8 जिन लोगों के पास कीमती रत्न थे उन्होंने यहोवा के मन्दिर के लिये दिये। यहीएल कीमती रत्नों का रक्षक बना। यहीएल गेर्शोन के परिवार में से था। 9 लोग बहुत प्रसन्न थे क्योंकि उनके प्रमुख उतना अधिक देने में प्रसन्न थे। प्रमुख स्वतन्त्रता पूर्वक खुले दिल से देने में प्रसन्न थे। राजा दाऊद भी बहुत प्रसन्न था।

दाऊद की सुन्दर प्रार्थना

10 तब दाऊद ने उन लोगों के सामने, जो वहाँ एक साथ इकट्ठे थे, यहोवा की प्रशंसा की। दाऊद ने कहाः

“यहोवा इस्राएल का परमेश्वर, हमारा पिता,
सदा—सदा के लिये तेरी स्तुति हो!
11 महानता, शक्ति, यश, विजय और प्रतिष्ठा तेरी है!
क्यों? क्योंकि हर एक चीज़ धरती और आसमान की तेरी ही है!
हे यहोवा! राज्य तेरा है,
तू हर एक के ऊपर शासक है।
12 सम्पत्ति और प्रतिष्ठा तुझसे आती है।
तेरा शासन हर एक पर है।
तू शक्ति और बल अपने हाथ में रखता है!
तेरे हाथ में शक्ति है कि तू किसी को— महान और शक्तिशाली बनाता है!
13 अब, हमारे परमेश्वर हम तुझको धन्यवाद देते हैं,
और हम तेरे यशस्वी नाम की स्तुति करते हैं!
14 ये सभी चीज़ें मुझसे और मेरे लोगों से नहीं आई हैं!
ये सभी चीज़े तुझ से आईं
और हमने तुझको वे चीज़ें दीं जो तुझसे आई हैं।
15 हम अजनबी और यात्रियों के समान हैं! हमारे सारे पूर्वज भी अजनबी हैं, और यात्री रहे।
इस धरती पर हमारा समय जाती हुई छाया सा है
और हम इसे नहीं पकड़ सकते,
16 हे यहोवा हमारा परमेश्वर, हमने ये सभी चीज़ों तेरा मन्दिर बनाने के लिये इकट्ठी की हैं।
हम लोग तेरा मन्दिर तेरे नाम के सम्मान के लिये बनायेंगे
किन्तु ये सभी चीज़ें तुझसे आई हैं
हर चीज़ तेरी है।
17 मेरे परमेश्वर, मैं यह भी जानता हूँ तू लोगों के हृदयों की जाँच करता है,
और तू प्रसन्न होता है, यदि लोग अच्छे काम करते हैं
मैं सच्चे हृदय से ये सभी चीज़े देने
में प्रसन्न था।
अब मैंने तेरे लोगों को वहाँ इकट्ठा देखा
जो ये चीज़ें तुझको देने में प्रसन्न हैं।
18 हे यहोवा, तू परमेश्वर है हमारे पूर्वज
इब्राहीम, इसहाक और इस्राएल का।
कृपया तू लोगों की सहायता सही योजना बनाने में कर
उन्हें तेरे प्रति विश्वास योग्य और सच्चा होने में कर।
19 और मेरे पुत्र सुलैमान को तेरे प्रति सच्चा होने में सहायता दे
तेरे विधियों, नियमों और आदेशों को सर्वदा पालन करने में इसकी सहायता कर।
उन कामों को करने में सुलैमान की सहायता कर
और उस महल को बनाने में उसकी सहायता कर जिसकी योजना मैंने बनाई है।”

20 तब दाऊद ने वहाँ एक साथ इकट्ठे सभी समूहों के लोगों से कहा, “अब यहोवा, अपने परमेश्वर की स्तुति करो।” अतः सब ने यहोवा परमेश्वर, उस परमेश्वर को जिसकी उपासना उनके पूर्वजों ने की, स्तुति की। उन्होंने यहोवा तथा राजा को सम्मान देने के लिये धरती पर माथा टेक कर प्रणाम किया।

सुलैमान राजा होता है

21 अगले दिन लोगों ने यहोवा को बलि भेंट दी। उन्होंने यहोवा को होमबलि दी। उन्होंने एक हजार बैल, एक हजार मेंढ़े एक हजार मेमने भेंट में दिये और उन्होंने पेय— भेंट भी दी। इस्राएल के लोगों के लिये वहाँ अनेकानेक बलिदान किये गये। 22 उस दिन लोगों ने खाया और पिया और यहोवा वहाँ उनके साथ था।

वे बहुत प्रसन्न थे और उन्होंने दाऊद के पुत्र सुलैमान को दूसरी बार राजा बनाया उन्होने सुलेमान का अभिषेक राजा के रूप में किया और उहोंने सादोक का अभिषेक याजक बनाने के लिये किया। उन्होंने यह उस स्थान पर किया जहाँ यहोवा था।

23 तब सुलैमान राजा के रूप में यहोवा के सिहांसन पर बैठा। सुलैमान ने अपने पिता का स्थान लिया। सुलैमान बहुत सफल रहा। इस्राएल के सभी लोग सुलैमान का आदेश मानते थे। 24 सभी प्रमुख, सैनिक और राजा दाऊद के सभी पुत्रों ने सुलैमान को राजा के रूप में स्वीकार किया और उसकी आज्ञा का पालन किया। 25 यहोवा ने सुलैमान को बहुत महान बनाया। इस्राएल के सभी लोग जानते थे कि यहोवा सुलैमान को महान बना रहा है। यहोवा ने सुलैमान को वह सम्मान दिया जो एक राजा को मिलना चाहिये। सुलैमान के पहले इस्राएल के किसी राजा को यह सम्मान नहीं मिला।

दाऊद की मृत्यु

26-27 यिशै का पुत्र दाऊद पूरे इस्राएल पर चालीस वर्ष तक राजा रहा। दाऊद हेब्रोन नगर में सात वर्ष तक राजा रहा। तब दाऊद यरूशलेम में तैंतिस वर्ष तक राजा रहा। 28 दाऊद तब मरा जब वह बूढ़ा था। दाऊद ने एक अच्छा लम्बा जीवन बिताया था। दाऊद के पास बहुत सम्पत्ति और प्रतिष्ठा थी और दाऊद का पुत्र सुलैमान उसके बाद राजा बना।

29 वे कार्य, जो आरम्भ से लेकर अन्त तक दाऊद ने किये, सभी शमूएल दृष्टा की रचनाओं में और नातान नबी की रचनाओं में तथा गाद दृष्टा की रचनाओं में लिखे हैं। 30 वे रचनायें इस्राएल के राजा के रूप में दाऊद ने जो काम किये, उन सब की सूचना देती हैं। वे दाऊद की शक्ति और उसके साथ जो घटा, उसके विषय में भी बताती हैं और वे इस्राएल और उसके चारों ओर के राज्यों में जो हुआ, उसके बारे में बताती हैं।

समीक्षा

पवित्र मंदिर

दाऊद को पवित्र मंदिर के निर्माण के लिए तैयारी करने के लिए बुलाया गया था (29:2-3)। क्योंकि मंदिर पवित्र था, दाऊद स्वयं इसे नहीं बनवा पाये, क्योंकि “उन्होंने बहुत सी लड़ाईयाँ लड़ी थी – बहुत से लोगों की हत्या की थी” (28:3, एम.एस.जी)।

किंतु, परमेश्वर ने दाऊद का मार्गदर्शन किया कैसे मंदिर का निर्माण करना है। यें योजनाएँ “आत्मा” के द्वारा “उनके दिमाग में रखी गई” (व.12)। अक्सर इसी तरह से परमेश्वर हमारा मार्गदर्शन करते हैं –एक निश्चित तरीके से कार्य करने के लिए वह हमारे दिमाग के सामने कारण रखते हैं।

दाऊद ने अपने पुत्र सुलैमान को यह कार्य सौंपा। उन्होंने उनसे कहा,”तू खरे मन और प्रसन्न जीव से उसकी सेवा करता रह; क्योंकि यहोवा मन को जाँचता और विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है उसे समझता है” (व.9)। परमेश्वर आपको पवित्रता के लिए बुलाते हैं, जैसा कि उन्होंने सुलैमान के साथ किया, जो कार्य, हृदय, इच्छा और विचार के परे जाता है।

दाऊद ने कहा कि परमेश्वर वह परमेश्वर हैं जो हृदय को जाँचते हैं और विश्वसनीयता से प्रसन्न होते हैं (29:17)। दाऊद “खरे मन का” एक व्यक्ति था (भजनसंहिता 78:72)। यह पवित्रता की एक अच्छी परिभाषा है।

ऐसा कहा जाता है कि हर एक के पास तीन जीवन हैं – एक जनता का जीवन, एक व्यक्तिगत जीवन और एक गुप्त जीवन। पवित्रता है एक खरा जीवन जीना, नाकि बेईमान का जीवन जीना। पवित्रता है जहाँ पर हमारे जनसामूहिक, व्यक्तिगत और गुप्त जीवन के बीच में कोई अंतर नहीं है और जो हम कहते हैं और जो हम करते हैं, उनके बीच में कोई अंतर नहीं। पवित्रता, पूर्णता से जुडी हुई है। जब परमेश्वर आपको पवित्र बनने के लिए बुलाते हैं, वह कह रहे हैं “पूरी तरह से मेरे हो जाओ।”

दाऊद ने प्रार्थना की,”मेरे पुत्र सुलैमान का मन ऐसा खरा कर दे कि वह तेरी आज्ञाओं, चितौनियों और विधियो को मानता रहे और यह सब कुछ करे, और उस भवन को बनाए, जिसकी तैयारी मैंने की है” (1इतिहास 29:19)।

यह ध्यान देना आवश्यक है कि उस मंदिर को बनाने के लिए बहुत सा पैसा इकट्ठा करने की आवश्यकता थी। उन्होंने इसे प्राप्त किया क्योंकि लीडर्स ने अगुवाई की। सभी लीडर्स ने पहले दिया (व.3)। फिर दूसरे लीडर्स ने दिया (व.6)। फिर सभी कए जाने “इच्छापूर्वक दिया” (व.6) “उत्सव मनाते हुए” (व.17, एम.एस.जी)।

परमेश्वर चाहते हैं कि आप इच्छापूर्वक दें। यदि आप इच्छुक नहीं हैं, तो आप प्रार्थना कर सकते हैं,”परमेश्वर मुझे इच्छुक बनने के लिए इच्छुक बनाईये।” और जैसा कि सॅन्डि मिलर अक्सर कहते हैं, आप प्रार्थना कर सकते हैं,”परमेश्वर मुझे इच्छुक बनने की और इच्छा करने के लिए उप्युक्त बनाईये!”

जैसे ही परमेश्वर के लोगों ने इच्छापूर्वक दिया, वे महान आनंद से भर गए। जो कुछ आपके पास है वह परमेश्वर से आता हैः”यह सबकुछ आपका था” (व.16, एम.एस.जी.)। जैसे ही आप उदारता से और मुक्त रूप से अपने स्त्रातों को परमेश्वर के काम के लिए देते हैं, आप महान आनंद से भर जाते हैं।

पवित्र मंदिर जिसे दाऊद और सुलैमान ने बनवाया, वह केवल चर्च के पवित्र मंदिर की तैयारी थी, जहाँ पर पवित्र आत्मा रहते हैं। ना केवल आत्मा चर्च में रहते हैं, वह आपके अंदर भी रहते हैं। आपका शरीर पवित्र आत्मा का मंदिर है (1कुरिंथियो 6:19-20)।

प्रार्थना

परमेश्वर, मैं प्रार्थना करता हूँ आज मुझे अपने पवित्र आत्मा से भर दीजिए, और मेरी सहायता कीजिए पवित्र बनने में।

पिप्पा भी कहते है

1इतिहास 29:9ब

“...क्योंकि उन्होंने मुक्त रूप से और पूरे दिल से परमेश्वर को दिया।”

मैं हमेशा परमेश्वर के प्रावधान और परमेश्वर के लोगों की अकथनीय उदारता पर आश्चर्य करती हूँ। चर्च के कार्य के लिए हमने फिर से परमेश्वर के असाधारण प्रावधान को देखा है, ठीक जब चीजे असंभव लग रही थी। मुझे नहीं लगता कि मैं इस अद्भुत उदारता के लिए परमेश्वर का पर्याप्त धन्यवाद दे सकती हूँ।

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संदर्भ

ब्लेस पास्कल, पेनसीस, (पेन्गुन क्लासिक, 1995)।

जहाँ पर कुछ बताया न गया हो, उन वचनों को पवित्र बाइबल, न्यू इंटरनैशनल संस्करण एन्ग्लिसाइड से लिया गया है, कॉपीराइट © 1979, 1984, 2011 बिबलिका, पहले इंटरनैशनल बाइबल सोसाइटी, हूडर और स्टोगन पब्लिशर की अनुमति से प्रयोग किया गया, एक हॅचेट यूके कंपनी सभी अधिकार सुरक्षित। ‘एनआईवी’, बिबलिका यू के का पंजीकृत ट्रेडमार्क संख्या 1448790 है।

जिन वचनों को (एएमपी, AMP) से चिन्हित किया गया है उन्हें एम्प्लीफाइड® बाइबल से लिया गया है. कॉपीराइट © 1954, 1958, 1962, 1964, 1965, 1987 लॉकमैन फाउंडेशन द्वारा प्राप्त अनुमति से उपयोग किया गया है। (www.Lockman.org)

जिन वचनों को (एमएसजी MSG) से चिन्हित किया गया है उन्हें मैसेज से लिया गया है। कॉपीराइट © 1993, 1994, 1995, 1996, 2000, 2001, 2002. जिनका प्रयोग एनएवीप्रेस पब्लिशिंग ग्रुप की अनुमति से किया गया है।

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