दिन 237

विजय का मार्ग

बुद्धि नीतिवचन 20:25-21:4
नए करार 1 कुरिन्थियों 15:50-16:4
जूना करार 2 इतिहास 21:4-23:21

परिचय

बेशक वह नहीं जानता था कि यह कहाँ है। वह पच्चासी साल का था और दर्जनों पुस्तकें लिख चुका था। मैं उनसे पूछ रहा था कि वह मुझे बता सके कि वास्तव में जो मैं ढूँढ रहा हूँ वह उनकी पुस्तक में मुझे कहा मिल सकता है। परंतु उसने मुझे इस कथन को व्यक्त करने की अनुमति दे दी। तब से मैं उसके ज्यादा से ज्यादा कथनों का इस्तेमाल करने लगा क्योंकि मुझे लगा कि विषप लेसली न्युबीगीन ने यीशु और नये करार के बारे में एक महत्त्वपूर्ण अंतदृष्टी दी है।

पुनरूस्थान हार का खण्डन नहीं है बल्कि यह जीत का प्रदर्शन है।

क्रूस हार नहीं थी बल्कि एक साथ लिया जाए, तो क्रूस और पुनरूस्थान संसार के इतिहास में घटी सबसे बडी विजय है; यह हमारे खुद की जिंदगी; हमारे समाज और हमारी दुनिया के भविष्य के लिए एक बहुत बड़ी और प्रभावशाली घटना है।

जीत के विचार सार्वभौम अधिकार या गर्व का आभास दे सकता है। बेशक अपने आप को श्रेष्ठ साबित करना टाला जा सकता है, हालांकि पवित्र शास्त्र में ‘जीत’ एक नकारात्मक शब्द नहीं है, नए करार में भी नहीं।

जय की सही समझ के लिए मुख्य कुंजी है, इसे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा संभव बनाया गया एक उपहार के रूप में देखना (1 कुरून्थियों 15:57)। इसका अर्थ है कि उचित प्रतिक्रिया गर्व नहीं है, बल्कि कृतज्ञ हृदय होना है।

बुद्धि

नीतिवचन 20:25-21:4

25 यहोवा को कुछ अर्पण करने की प्रतिज्ञा से पूर्व ही विचार ले;
 भली भांति विचार ले। सम्भव है यदि तू बाद में ऐसा सोचे, “अच्छा होता मैं वह मन्नत न मानता।”

26 विवेकी राजा यह निर्णय करता है कि कौन बुरा जन है।
 और वह राजा उस जन को दण्ड देगा।

27 यहोवा का दीपक जन की आत्मा को जाँच लेता,
 और उसके अन्तरात्मा स्वरूप को खोज लेता है।

28 राजा को सत्य और निष्ठा सुरक्षित रखते,
 किन्तु उसका सिंहासन करुणा पर टिकता है।

29 युवकों की महिमा उनके बल से होती है
 और वृद्धों का गौरव उनके पके बाल हैं।

30 यदि हमें दण्ड दिया जाये तो हम बुरा करना छोड़ देते हैं।
 दर्द मनुष्य का परिवर्तन कर सकता है।

21राजाओं का मन यहोवा के हाथ होता,
 जहाँ भी वह चाहता उसको मोड़ देता है वैसे ही जैसे कोई कृषक पानी खेत का।

2 सबको अपनी—अपनी राहें उत्तम लगती हैं
 किन्तु यहोवा तो मन को तौलता है।

3 तेरा उस कर्म का करना जो उचित और नेक है
 यहोवा को अधिक चढ़ावा चढ़ाने से ग्राह्य है।

4 गर्वीली आँखें और दर्पीला मन पाप हैं
 ये दुष्ट की दुष्टता को प्रकाश में लाते हैं।

समीक्षा

हमारे हृद्य में विजय

सबसे बडी लड़ाई हमारे दिल और दिमाग में चलती है, यहीं से विजय की हार या जीत होती है। परमेश्वर केवल आपके कार्य और शब्दों पर ध्यान देते हैं। परमेश्वर हमें अंदर और बाहर देखते हैं और जाँचते भी हैं (20:27, MSG)। वह हमारे इरादों को परखते हैं (21:2, MSG)।

परमेश्वर की नजर में धार्मिक प्रदर्शन से ज्यादा पवित्र जीवन बिताना और पडोसियों के साथ न्याय से रहना; अधिक महत्त्वपूर्ण है (व.3, MSG)। परमेश्वर का चिराग मनुष्य की आत्मा को खोजता है। वह हमारी अंतरात्मा को खोजता है (20:27) मैं नियमित रुप से भजनकार की तरह प्रार्थना करने की कोशिश करता हूँ ‘मुझे खोज, हे प्रभु ....और देख कि मुझ में कोई बुरा मार्ग तो नहीं है’ (भजन 139:23-4, RSV)

मैं दूसरों के लिए भी यही प्रार्थना करता हूँ। (नीतिवचन 20:27) मेरी प्रार्थना में एक उपयोगी वचन है। यदि किसी को लगता है कि वह किसी बात में संघर्ष कर रहे हैं जिससे वह निपट नहीं सकते, तो मैं उन्हें परमेश्वर की आत्मा द्वारा अपने हृद्य की जाँच करने के लिए कहूँगा; और यदि किसी क्षेत्र में कोई पाप है जिसे उन्हें निपटकर ठीक करना है, तो मैं इसे प्रकट करने के लिए पवित्र आत्मा से विनती करता हूँ।

परमेश्वर आपको कभी भी दोषी भावना में रहने नहीं देंगे। यदि पवित्र आत्मा के द्वारा हमें किसी बांत पर अपराध बोध नजर आता है; तो वह स्वंय उस पाप के बारे में हमसे बातं करेंगे जिससे हमें निपटना है। यदि आपके मन में कुछ गलत बातें आती हैं, तो पश्चाताप करने से यीशु द्वारा माफी मिल सकती है।

फिर मैं परमेश्वर के दीप को फिर से चमकने और प्रकट करने के लिए कहता हूँ कि यदि कुछ और बातें हैं जिसे मुझे सही करना जरूरी है, तो वह मुझे बता दें। पाप के ऊपर ‘यीशु’ की विजय क्रूस पर हुई, इसकी वजह से जहां भी पश्चाताप है और यीशु मसीह पर विश्वास है, वहाँ दण्ड की कोई आज्ञा नहीं हो सकती।

राजा के लिए विजय (या हम अगुआ कहसकते हैं) प्रेम और विश्वासयोग्यता से आती है। प्रेम और विश्वासयोग्यता एक अच्छा अगुवा बनाता है। कुशल नेतृत्व प्रेमपूर्ण ईमानदारी पर आधारित है (व.28 MSG))।

राजा का मन नालियों के जल की नाईं परमेश्वर के हाथ में रहता है, जिधर वह चाहता उधर उस को फेर देता है (21:1)। अगुवा के हृद्य का नियंत्रण परमेश्वर अपने पास रखते हैं। जब मैं प्रार्थना करता हूँ नौकरी के इंटरव्यू के लिए, परिषद में अच्छे व्यवहार के लिए, न्यायधीश या सरकार के कामों के लिए, तो मैं स्वंय इस वायदे पर विश्वास रखता हूँ । सौभाग्य से नेतृत्व में रहने वाले व्यक्ति (अगुवे) का हृद्य परमेश्वर के हाथों में रहता है और वह जैसे चाहते हैं वैसे दिशा देते हैं।

हृदय बहुत महत्वपूर्ण है: 'मनुष्य का सारा चाल चलन अपनी दृष्टि में तो ठीक होता है, परन्तु यहोवा मन को जांचता है, धर्म और न्याय करना, यहोवा को बलिदान से अधिक अच्छा लगता है' (व.2-3)।

क्योंकि जय परमेश्वर की ओर से एक उपहार है, हमें इसे घमंड की ओर नहीं ले जाना चाहिए। 'चढ़ी आंखें, घमण्डी मन, और दुष्टों की खेती, तीनों पापमय हैं' (व.4)।

प्रार्थना

प्रभु, मैं प्रार्थना करता हूँ कि आज आप अपना प्रकाश मेरे हृद्य में चमकाइये; मेरे आंतरिक जीवन की जाँच कीजिए। आपकी क्षमा; आजादी और विजय के उपहार के लिए आपने हमें यीशु मसीह के द्वारा दिया।

नए करार

1 कुरिन्थियों 15:50-16:4

50 हे भाइयो, मैं तुम्हें यह बता रहा हूँ: मांस और लहू (हमारे ये पार्थिक शरीर) परमेश्वर के राज्य के उत्तराधिकार नहीं पा सकते। और न ही जो विनाशमान है, वह अविनाशी का उत्तराधिकारी हो सकता है। 51 सुनो, मैं तुम्हें एक रहस्यपूर्ण सत्य बताता हूँ: हम सभी मरेंगे नहीं, बल्कि हम सब बदल दिये जायेंगे। 52 जब अंतिम तुरही बजेगी तब पलक झपकते एक क्षण में ही ऐसा हो जायेगा क्योंकि तुरही बजेगी और मरे हुए अमर हो कर जी उठेंगे और हम जो अभी जीवित हैं, बदल दिये जायेंगे। 53 क्योंकि इस नाशवान देह का अविनाशी चोले को धारण करना आवश्यक है और इस मरणशील काया का अमर चोला धारण कर लेना अनिवार्य है। 54 सो जब यह नाशमान देह अविनाशी चोले को धारण कर लेगी और वह मरणशील काया अमर चोले को ग्रहण कर लेगी तो शास्त्र का लिखा यह पूरा हो जायेगा:

“विजय ने मृत्यु को निगल लिया है।”

55 “हे मृत्यु तेरी विजय कहाँ है?
ओ मृत्यु, तेरा दंश कहाँ है?”

56 पाप मृत्यु का दंश है और पाप को शक्ति मिलती है व्यवस्था से। 57 किन्तु परमेश्वर का धन्यवाद है जो प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें विजय दिलाता है।

58 सो मेरे प्यारे भाइयो, अटल बने डटे रहो। प्रभु के कार्य के प्रति अपने आपको सदा पूरी तरह समर्पित कर दो। क्योंकि तुम तो जानते ही हो कि प्रभु में किया गया तुम्हारा कार्य व्यर्थ नहीं है।

दूसरे विश्वासियों के लिये भेंट

16अब देखो, संतों के लिये दान इकट्ठा करने के बारे में मैंने गलातिया की कलीसियाओं को जो आदेश दिया है तुम भी वैसा ही करो। 2 हर रविवार को अपनी आय में से कुछ न कुछ अपने घर पर ही इकट्ठा करते रहो। ताकि जब मैं आऊँ, उस समय दान इकट्ठा न करना पड़े। 3 मेरे वहाँ पहुँचने पर जिस किसी व्यक्ति को तुम चाहोगे, मैं उसे परिचय पत्र देकर तुम्हारा उपहार यरूशलेम ले जाने के लिए भेज दूँगा। 4 और यदि मेरा जाना भी उचित हुआ तो वे मेरे साथ ही चले जायेंगे।

समीक्षा

मृत्यु पर विजय।

बहुत लोग सोचते हैं कि मृत्यु ही अंत है। वे मानते हैं कि मृत्यु हमेशा जीवन का आखिरी शब्द है – यानि जीवन के अंत में मृत्यु की ही जय होती है।

प्रेरित पौलुस कहते हैं, ’ऐसा नहीं है’। “जय ने मृत्यु को निगल लिया है” (15:54)। वह मृत्यु की निन्दा करता है, “हे मृत्यु, तेरी जय कहाँ रही?” (v.55)।

यीशु, सलीब और पुनरूस्थान द्वारा पाप, दोष और मृत्यु को हरा चुके हैं। इसका नतीजा यह है कि एक दिन हम अविनाश और अमरता में जिलाये जाएंगे।(v.53,54)

तीन चीजें हैं जो हम यीशु मसीह के इस श्रेष्ठ विजय के लिए उन्हे भेंट के रूप में दे सकते हैं

  1. परमेश्वर को धन्यवाद दें

'हे मृत्यु, तेरा डंक कहाँ रहा? मृत्यु का डंक पाप है, और पाप का बल व्यवस्था है। परंतु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें जयवंत करते हैं' (55-57) ।

सुसमाचार प्रचारक डेविड वॅट्सन ने एक कहानी बताई: जब उनकी बेटी डर के मारे जोर से चिल्ला रही थी; एक मधुमक्खी जो उसे डरा रही थी; तो वे बगीचे की तरफ दौड़ कर आए।

उन्होंने अपने दोनों हाथों से उसे लपेट लिया और फिर वह बेटी सुरक्षित महसूस करने लगी और उन्होंने महसूस किया कि उसके शरीर में से तनाव जा रहा है। उन्होने बेटी को आराम से बिना डरे अन्दर जाने के लिए कहाऔर उसे बताया कि “अब तुम चिंता मत करो, मेरी दुलारी बेटी, उस मधुमक्खी ने मुझको डंक मारा है”।

कलवरी क्रूस पर ऐसा ही हुआ जब यीशु ने हमें अपनी बाहों में लपेट लिया और हम पर से मौत के डंक को अपने ऊपर ले लिया। फिर भी हमारी मृत्यु हो सकती है (यदि यीशु के आगमन में देरी हो तो) लेकिन, उन सभी के लिए जो मसीह में विश्वास रखते हैं ‘मृत्यु का डंक’ हटाया जा चुका है, क्रूस और पुनरूत्थान के द्वारा। और जैसे डेविड वाट्सन ने अपनी बेटी से कहा, ‘मधुमक्खी दो बार नहीं डसती,’ “परमेश्वर का धन्यवाद हो” (v.57 MSG) ।

  1. अपने आपको दें

क्या आप कभी ऐसा सोचते हैं कि परमेश्वर की सेवकाई में आपकी जो भागीदारी है; वह हकीकत में कुछ बदलाव ला रही है या नहीं? क्या आप ऐसा सोचने लगते हैं कि आपका समय और प्रयत्न सब बेकार है?

प्रोत्साहित हो जाइये। “आप जो भी करते हैं; उसमें से कुछ भी समय या परिश्रम की बर्बादी नहीं होती” (व.58 MSG)। पौलुस लिखता है कि यीशु की विजय की सही प्रतिक्रिया यह है कि ‘स्थिर बने रहो’, ताकि आपको कोई भी हिला न सके। हमेशा पूर्ण रूप से परमेश्वर के कार्यो के लिए अपने आपको समर्पित कीजिये; क्योंकि आप जानते हैं कि परमेश्वर में आपका परिश्रम कभी व्यर्थ नहीं जायेगा (व.58)।

“परमेश्वर की सेवकाई और कार्यो को” लगातार करते रहें (व.58)। वह सेवकाई जिसे करने के लिए परमेश्वर ने आपको बुलाहट दी है। इस बात की चिंता न करो और दबाव में ना आओ यह देखकर कि दूसरे लोग सेवकाई में कैसे कार्य कर रहे हैं। विभिन्न लोगों को विभिन्न प्रकार की बुलाहट है। न्याय करना हमारा काम नहीं है। वे परमेश्वर की सेवकाई करने में दृढ रहे हैं; शायद कुछ अलग तरीके से। हम में से हर एक व्यक्ति को अपने जीवन में परमेश्वर की बुलाहट को पहचान कर उसके पीछे चलना चाहिए।

आपकी बुलाहट जो परमेश्वर ने आपको दी है उसमें पूर्ण रूप से समर्पित हो जाइये। पुनरूत्थान के कारण आप स्थिर खड़े रह पाएंगे और यह जान लीजिये कि परमेश्वर में आपका परिश्रम व्यर्थ नहीं है।

  1. धन दें

अपने आप को सेवा में समर्पित करना, यानि अपने धन से भी सहायता करना भी है (16:2)। यहाँ हम देने के अनेक सिध्दांतों को देखते हैं। पहला; यह मूल रुप से परमेश्वर के लोगों के लिए है (व.1) यानि कलीसिया में। दूसरा यह नियमित रूप से होना चाहिये; हर सप्ताह के हर पहले दिन (व.2)। तीसरा; हर व्यक्ति (“आप में से हर एक व्यक्ति” व.2) इसमें शामिल होना चाहिए। चौथा, आपकी आमदनी और भेंट देने में संतुलन होना चाहिये (व्यवस्थाविवरण 16:17) को पढ़िये। 'जितना हो सके उतना उदारता से दान दीजिये' (1 कुरिंथियो 16:2 MSG)।

प्रार्थना

पिता, मैं आपको जितना भी धन्यवाद दूँ वह काफी नहीं होगा, जो विजय का उपहार आपने यीशु मसीह द्वारा हमारे पापों के विरोध में, व्यवस्था के विरोध में और मौत के विरोध में हमें दिया है। मैं फिर से समर्पण करता हूँ अपना जीवन, अपना धन और सबकुछ जो कि परमेश्वर की सेवकाई में इस्तेमाल होने वाला है।

जूना करार

2 इतिहास 21:4-23:21

यहूदा का राजा यहोराम

4 यहोराम ने अपने पिता का राज्य प्राप्त किया और अपने को शक्तिशाली बनाया। तब उसने तलवार का उपयोग अपने सभी भाईयों को मारने के लिये किया। उसने इस्राएल के कुछ प्रमुखों को भी मार डाला। 5 यहोराम ने जब शासन आरम्भ किया तो वह बत्तीस वर्ष का था। उसने यरूशलेम में आठ वर्ष तक शासन किया। 6 वह उसी तरह रहा जैसे इस्राएल के राजा रहते थे। वह उसी प्रकार रहा जिस प्रकार अहाब का परिवार रहता था। यह इसलिये हुआ कि यहोराम ने अहाब की पुत्री से विवाह किया और यहोराम ने यहोवा की दृष्टि में बुरा किया। 7 किन्तु यहोवा दाऊद के परिवार को नष्ट नहीं करना चाहता था क्योंकि उसने दाऊद के साथ वाचा की थी। यहोवा ने वचन दिया था कि दाऊद और उसकी सन्तान का एक वंश सदैव चलता रहेगा।

8 यहोराम के समय में, एदोम यहूदा के अधिकार क्षेत्र से बाहर निकल गया। एदोम के लोगों ने अपना राजा चुन लिया। 9 इसलिये यहोराम अपने सभी सेनापतियों और रथों के साथ एदोम गया। एदोमी सेना ने यहोराम और उसके रथ के रथपतियों को घेर लिया। किन्तु यहोराम ने रात में युद्ध करके अपने निकलने का रास्ता ढूँढ लिया। 10 उस समय से अब तक एदोम का देश यहूदा के विरुद्ध विद्रोही रहा है। लिब्ना नगर के लोग भी यहोराम के विरुद्ध हो गए। यह इसलिए हुआ कि यहोराम ने पूर्वजों के, यहोवा परमेश्वर को छोड़ दिया। 11 यहोराम ने उच्च स्थान भी यहूदा के पहाड़ियों पर बनाए। यहोराम ने यरूशलेम के लोगों को, परमेश्वर जो चाहता है उसे करने से मना किया वह यहूदा के लोगों को यहोवा से दूर ले गया।

12 एलिय्याह नबी से यहोराम को एक सन्देश मिला। सन्देश में यह कहा गया था:

“यह वह है जो परमेश्वर यहोवा कहता है। यही वह परमेश्वर है जिसका अनुसरण तुम्हारा पूर्वज दाऊद करता था। यहोवा कहता है, ‘यहोराम, तुम उस प्रकार नहीं रहे जिस प्रकार तुम्हारा पिता यहोशापात रहा। तुम उस प्रकार नहीं रहे जिस प्रकार यहूदा का राजा आसा रहा। 13 किन्तु तुम उस प्रकार रहे जिस प्रकार इस्राएल के राजा रहे। तुमने यहूदा और यरूशलेम के लोगों को वह काम करने से रोका है जो यहोवा चाहता है। यही अहाब और उसके परिवार ने किया। वे यहोवा के प्रति विश्वासयोग्य न रहे। तुमने अपने भाईयों को मार डाला। तुम्हारे भाई तुमसे अच्छे थे। 14 अत: अब यहोवा शीघ्र ही तुम्हारे लोगों को बहुत अधिक दण्ड देगा। यहोवा तुम्हारे बच्चों, पत्नियों और तुम्हारी सारी सम्पत्ति को दण्ड देगा। 15 तुम्हें आँतों की भयंकर बीमारी होगी। यह प्रतिदिन अधिक बिगड़ती जायेगी। तब तुम्हारी भंयकर बीमारी के कारण तुम्हारी आँतें बाहर निकल आएंगी।’”

16 यहोवा ने पलिश्तियों और कूशी लोगों के पास रहने वाले अरब लोगों को यहोराम से रूष्ट किया। 17 उन लोगों ने यहूदा देश पर आक्रमण कर दिया। वे राजमहल की सारी सम्पत्ति और यहोराम के पुत्रों और पत्नियों को ले गए। केवल यहोराम का सबसे छोटा पुत्र छोड़ दिया गया। यहोराम के सबसे छोटे पुत्र का नाम यहोआहाज था।

18 उन चीज़ों के होने के बाद यहोवा ने यहोराम की आँतों में ऐसा रोग उत्पन्न किया जिसका उपचार न हो सका। 19 तब यहोराम की आँतें, दो वर्ष बाद, उसकी बीमारी के कारण, बाहर आ गईं। वह बहुत बुरी पीड़ा में मरा। यहोराम के सम्मान में लोगों ने आग की महाज्वाला नहीं जलाई जैसा उन्होंने उसके पिता के लिये किया था। 20 यहोराम उस समय बत्तीस वर्ष का था जब वह राजा हुआ था। उसने यरुश्लेम में आठ वर्ष शासन किया। जब यहोराम मरा तो कोई व्यक्ति दु:खी नहीं हुआ। लोगों ने यहोराम को दाऊद के नगर में दफनाया किन्तु उन कब्रों में नहीं जहाँ राजा दफनाये जाते हैं।

यहूदा का राजा अहज्याह

22यरूशलेम के लोगों ने अहज्याह को यहोराम के स्थान पर नया राजा होने के लिये चुना। अहज्याह यहोराम का सबसे छोटा पुत्र था। अरब लोगों के साथ जो लोग यहोराम के डेरों पर आक्रमण करने आए थे उन्होंने यहोराम के अन्य पुत्रों को मार डाला था। अत: यहूदा में अहज्याह ने शासन करना आरम्भ किया। 2 अहज्याह ने जब शासन करना आरम्भ किया तब वह बाईस वर्ष का था। अहज्याह ने यरूशलेम में एक वर्ष शासन किया। उसकी माँ का नाम अतल्याह था। अतल्याह के पिता का नाम ओम्री था। 3 अहज्याह भी वैसे ही रहा जैसे अहाब का परिवार रहता था। वह उस प्रकार रहा क्योंकि उसकी माँ ने उसे गलत काम करने के लिये प्रोत्साहित किया। 4 अहज्याह ने यहोवा की दृष्टि में बुरे काम किये। यही अहाब के परिवार ने किया था। अहाब के परिवार ने अहज्याह को उसके पिता के मरने के बाद सलाह दी। उन्होंने अहज्याह को बुरी सलाह दी। उस बुरी सलाह ने उसे मृत्यु तक पहुँचा दिया। 5 अहज्याह ने उसी सलाह का अनुसरण किया जो अहाब के परिवार ने उसे दी। अहज्याह राजा योराम के साथ अराम के राजा हज़ाएल के विरुद्ध गिलाद के रामोत नगर में गया। योराम के पिता का नाम अहाब था जो इस्राएल का राजा था। किन्तु अर्मिया के लोगों ने योराम को युद्ध में घायल कर दिया। 6 योराम लौटकर यिज्रेल नगर को स्वस्थ होने के लिये गया। वह तब घायल हुआ था जब वह अराम के राजा हजाएल के विरुद्ध रामोत में युद्ध कर रहा था। तब अहज्याह योराम से मिलने यिज्रेल नगर को गया। अहज्याह के पिता का नाम यहोराम था। वह यहूदा का राजा था। योराम के पिता का नाम अहाब था। योराम यिज्रेल नगर में था क्योंकि वह घायल था।

7 परमेश्वर ने अहज्याह की मृत्यु तब करवा दी जब वह योराम से मिलने गया। अहज्याह पहुँचा और योराम के साथ येहू से मिलने गया। येहू के पिता का नाम निमशी था। यहोवा ने येहू को अहाब के परिवार को नष्ट करने के लिये चुना। 8 येहू अहाब के परिवार को दण्ड दे रहा था। येहू ने यहूदा के प्रमुखों और अहज्याह के उन सम्बन्धियों का पता लगाया जो अहज्याह की सेवा करते थे। येहू ने यहूदा के उन प्रमुखों और अहज्याह के सम्बन्धियों को मार डाला। 9 तब येहू अहज्याह की खोज में था। येहू के लोगों ने उसे उस समय पकड़ लिया जब वह शोमरोन नगर में छिपने का प्रयत्न कर रहा था। वे अहज्याह को येहू के पास लाए। उन्होंने अहज्याह को मार दिया और उसे दफना दिया। उन्होंने कहा, “अहज्याह यहोशापात का वंशज है। यहोशापात ने पूरे हृदय से यहोवा का अनुसरण किया था।” अहज्याह के परिवार में वह शक्ति नहीं थी कि यहूदा के राज्य को अखण्ड रख सके।

रानी अतल्याह

10 अतल्याह अहज्याह की माँ थी। जब उसने देखा कि उसका पुत्र मर गया तो उसने यहूदा में राजा के सभी पुत्रों को मार डाला। 11 किन्तु यहोशावत ने अहज्याह के पुत्र योआश को लिया और उसे छिपा दिया। यहोशावत ने योआश और उसकी धाय को अपने शयनकक्ष के भीतर रखा। यहोशावत राजा यहोराम की पुत्री थी। वह यहोयादा की पत्नी भी थी। यहोयादा एक याजक था और यहोशावत अहज्याह की बहन थी। अतल्याह ने योआश को नहीं मारा क्योंकि यहोशावत ने उसे छिपा दिया था। 12 योआश याजक के साथ परमेश्वर के मन्दिर में छ: वर्ष तक छिपा रहा। उस काल में अतल्याह ने रानी के रूप में देश पर शासन किया।

याजक यहोयादा और राजा योआश

23छ: वर्ष, बाद यहोयादा ने अपनी शक्ति दिखाई। उसने नायकों के साथ सन्धि की। वे नायक: यरोहाम का पुत्र अजर्याह, यहोहानान का पुत्र इश्माएल, ओबेद का पुत्र अजर्याह, अदायाह का पुत्र मासेयाह और जिक्री का पुत्र एलीशापात थे। 2 वे यहूदा के चारों ओर गए और यहूदा के सभी नगरों से उन्होंने लेवीवंशियों को इकट्ठा किया। उन्होंने इस्राएल के परिवारों के प्रमुखों को भी इकट्ठा किया। तब वे यरूशलेम गए। 3 सभी लोगों ने एक साथ मिलकर राजा के साथ परमेश्वर के मन्दिर में एक सन्धि की।

यहोयादा ने इन लोगों से कहा, “राजा का पुत्र शासन करेगा। यही वह वचन है जो यहोवा ने दाऊद के वंशजों को दिया था। 4 अब, तुम्हें यह अवश्य करना चाहिए: याजकों औऱ लेवीयों सब्त के दिन तुममें से जो काम पर जाते हैं उनका एक तिहाई द्वार की रक्षा करेगा। 5 तुम्हारा एक तिहाई राजमहल पर रहेगा और तुम्हारा एक तिहाई प्रारम्भिक फाटक पर रहेगा। किन्तु अन्य सभी लोग यहोवा के मन्दिर के आँगन में रहेंगे। 6 किसी भी व्यक्ति को यहोवा के मन्दिर में न आने दो। केवल सेवा करने वाले याजकों और लेवीवंशियों को पवित्र होने के कारण, यहोवा के मन्दिर में आने की स्वीकृति है। किन्तु अन्य लोग वह कार्य करेंगे जो यहोवा ने दे रखा है। 7 लेवीवंशी राजा के साथ रहेंगे। हर एक व्यक्ति अपनी तलवार अपने साथ रखेगा। यदि कोई व्यक्ति मन्दिर में प्रवेश करने की कोशिश करता है तो उस व्यक्ति को मार डालो। तुम्हें राजा के साथ रहना है, वह जहाँ कहीं भी जाये।”

8 लेवीवंशी और यहूदा के सभी लोगों ने याजक यहोयादा ने जो आदेश दिया, उसका पालन किया। याजक यहोयादा ने याजकों के समूह में से किसी को छूट न दी। इस प्रकार हर एक नायक और उसके सभी लोग सब्त के दिन उनके साथ अन्दर आए जो सब्त के दिन बाहर गए थे। 9 याजक यहोयादा ने वे भाले तथा बड़ी और छोटी ढालें अधिकारियों को दीं जो राजा दाऊद की थीं। वे हथियार परमेश्वर के मन्दिर में रखे थे। 10 तब यहोयादा ने लोगों को बताया कि उन्हें कहाँ खड़ा होना है। हर एक व्यक्ति अपने हथियार अपने हाथ में लिये था। पुरुष मन्दिर की दांयी ओर से बांयी ओर तक लगातार खड़े थे। वे वेदी, मन्दिर और राजा के निकट खड़े थे। 11 वे राजा के पुत्र को बाहर लाए और उसे मुकुट पहना दिया। उन्होंने उसे व्यवस्था के पुस्तक की एक प्रति दी। तब उन्होंने योआश को राजा बनाया। यहोयादा औऱ उसके पुत्रों ने योआश का अभिषेक किया। उन्होंने कहा, “राजा दीर्घायु हो!”

12 अतल्याह ने मन्दिर की ओर दौड़ते हुए और राजा की प्रशंसा करते हुए लोगों का शोर सुना। वह यहोवा के मन्दिर पर लोगों के पास आई। 13 उसने नजर दौड़ाई और राजा को देखा। राजा राज स्तम्भ के साथ सामने वाले द्वार पर खड़ा था। अधिकारी और लोग जो तुरही बजाते थे, राजा के पास थे। देश के लोग प्रसन्न थे और तुरही बजा रहे थे। गायक संगीत वाद्यों को बजा रहे थे। गायक प्रशंसा के गायन में लोगों का नेतृत्व कर रहे थे। तब अतल्याह ने अपने वस्त्रों को फाड़ डाला, और उसने कहा, “षड़यन्त्र!”

14 याजक यहोयादा सेना के नायकों को बाहर लाया। उसने उनसे कहा, “अतल्याह को, सेना से, बाहर ले आओ। अपनी तलवार का उपयोग उस व्यक्ति को मार डालने के लिये करो जो उसके साथ जाता है।” तब याजक ने सैनिकों को चेतावनी दी, “अतल्याह को यहोवा के मन्दिर में मत मारो।” 15 तब उन लोगों ने अतल्याह को वश में कर लिया जब वह राजमहल के अश्व द्वार पर आई। तब उन्होंने उसी स्थान पर उसे मार डाला।

16 तब यहोयादा ने राजा औऱ सभी लोगों के साथ एक सन्धि की। सभी ने स्वीकार किया कि वे यहोवा के लोग रहेंगे। 17 सभी लोग बाल की मूर्ति के मन्दिर में गए और उसे उखाड़ डाला। उन्होंने बाल के मन्दिर की वेदियों और मूर्तियों को तोड़ डाला। उन्होंने बाल की वेदी के सामने बाल के याजक मत्तान को मार डाला।

18 तब यहोयादा ने यहोवा के मन्दिर के लिये उत्तरदायी याजकों को चुना। वे याजक लेवीशंशी थे और दाऊद ने उन्हें यहोवा के मन्दिर के प्रति उत्तरदायी होने का कार्य सौंपा था। उन याजकों को होमबलि मूसा के आदेश के अनुसार यहोवा को चढ़ानी थी। वे अति प्रसन्नता से दाऊद के आदेश के अनुसार गाते हुए बलि चढ़ाते थे। 19 यहोयादा ने यहोवा के मन्दिर के द्वार पर द्वारपाल रखे जिससे कोई व्यक्ति जो किसी दृष्टि से शुद्ध नहीं था मन्दिर में नहीं जा सकता था।

20 यहोयादा ने सेना के नायकों, प्रमुखों, लोगों के प्रशासकों और देश के सभी लोगों को अपने साथ लिया। तब यहोयादा ने राजा को यहोवा के मन्दिर से बाहर निकाला और वे ऊपरी द्वार से राजमहल में गए। उस स्थान पर उन्होंने राजा को गद्दी पर बिठाया। 21 यहूदा के सभी लोग बहुत प्रसन्न थे और यरूशलेम नगर में शान्ति रही क्योंकि अतल्याह तलवार से मार दी गई थी।

समीक्षा

बुराई पर विजय

आज की खबर। दु:खद घटनाएँ। बुरी शासन-पध्दती। भयंकर हत्याएँ। कुछ भी नया नहीं है।

यह अध्याय परमेश्वर के जन के इतिहास में बुरे समय का वर्णन करता है। परमेश्वर की दृष्टी में यहोराम बुरा व्यक्ति था (21:6 MSG)। उसने यहूदा को परमेश्वर के मार्ग से भटका दिया था (व.11)। कोई आंसू नहीं बचे उसकी मौत पर - यह एक अच्छा छुटकारा था (व.20 MSG)।

अहज्याह कुछ कम न था। उसकी माँ अतल्याह और भी बुरी थी जो उसे दुष्टता करने को प्रोत्साहित करती थी(23:3 MSG)। बेटे की मौत के बाद भी वह बुराई करती रही और विनाश के कार्यो को आगे बढाती रही (व.10)। उसने सारे राजकुमारों को मारने की कोशिश की।

परंतु योआश ; जो पहले मूसा और बाद में यीशु के समान था; जिसे उसी तरह से छिपाया गया था और बचाया गया था (व.11-12)।

परमेश्वर ने दाऊद और उसकी पीढ़ी के लिए सदा दिया बनाये रखने की प्रतिज्ञा की (21:7)। बुराई की हार हुई। योआश को राजा का ताज पहनाया गया (23:11)। तब सब लोग आनन्दित हुए और नगर में शांति हुई। अतल्याह तो तलवार से मार ही डाली गई थी (व.21)।

यह दृष्य है अंतिम जय का; जो बुराई के ऊपर भलाई का होता है। यहोशावत महान महत्त्वकांक्षी था जो आने वाले का पूर्वाभास था।

परमेश्वर ने यीशु को सुरक्षित संभाला उन लोगों के हाथों से जो उन्हें बचपन में ही मार डालना चाहते थे। लेकिन यह वही अभिषिक्त राजा हैं जिन्होंने अंत में बुराई, पाप और मौत को पराजित किया।

प्रार्थना

परमेश्वर का धन्यवाद हो। वह हमें विजय देता है; हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा (1 कुरिंथियो 15:57)।

पिप्पा भी कहते है

इसलिए हे मेरे प्रिय भाइयो, दृढ और अटल रहो, और प्रभु के काम में सर्वदा बढ़ते जाओ, क्योंकि तुम जानते हो कि प्रभु में तुम्हारा परिश्रम व्यर्थ नहीं जाएगा।

यह बहुत बड़ा आग्रह है जो प्रेरित पौलुस ने कुरिंथियों की कलीसिया से कहा है, '‘मेहनत करो, बढते जाओ और परमेश्वर यह सब अपने नाम की महिमा के लिये इस्तेमाल करेंगे’।

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संदर्भ

लेसिल न्यूबिगिन, द ओपन सिक्रेट, (ईर्डेमॅन्स बी पब्लिशिंग, 1995) पन्ना 36.

जिन वचनों को (एएमपी) से चिन्हित किया गया है उन्हें एम्प्लीफाइड® बाइबल से लिया गया है. कॉपीराइट © 1954, 1958, 1962, 1964, 1965, 1987 लॉकमैन फाउंडेशन द्वारा प्राप्त अनुमति से उपयोग किया गया है। (www.Lockman.org)

जिन वचनों को (MSG) से चिन्हित किया गया है उन्हें मैसेज से लिया गया है। कॉपीराइट © 1993, 1994, 1995, 1996, 2000, 2001, 2002. जिनका प्रयोग एनएवीप्रेस पब्लिशिंग ग्रुप की अनुमति से किया गया है।

जहाँ पर कुछ बताया न गया हो, उन वचनों को पवित्र बाइबल, न्यू इंटरनैशनल संस्करण एन्ग्लिसाइड से लिया गया है, कॉपीराइट © 1979, 1984, 2011 बिबलिका, पहले इंटरनैशनल बाइबल सोसाइटी, हूडर और स्टोगन पब्लिशर की अनुमति से प्रयोग किया गया, एक हॅचेट यूके कंपनी सभी अधिकार सुरक्षित। ‘एनआईवी’, बिबलिका यू के का पंजीकृत ट्रेडमार्क संख्या 1448790 है।

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