दिन 244

आप सर्वदा जीवित रहेंगे

बुद्धि भजन संहिता 104:31-35
नए करार 2 कुरिन्थियों 4:1-18
जूना करार मीका 1:1-4:13

परिचय

क्या आप कभी निराश होते हैं? क्या आप कभी महसूस करते हैं 'क्या यह सब योग्य है?' क्या हम सच में कही जा रहे हैं। पौलुस लगभग निश्चित ही निराश होने की स्थिति में थे, और उन्होंने उन मसीहों को पत्र लिखा, जो निराश होने की स्थिति में थे।

तब भी पौलुस ने लिखा, 'हम हिम्मत नहीं हारते हैं' (2कुरिंथियो 4:1,16)। 'हम अपना हाथ निकालकर, काम छोड़कर नहीं चले जाते हैं' (व.1, एम.एस.जी)। क्यों नहीं? पौलुस समझाते हैं कि, ऐसा इसलिए है क्योकि यीशु में हमने एक 'खजाना' ग्रहण किया है (व.7)। खजाना यीशु का संदेश है। क्योंकि पौलुस जिस संदेश का प्रचार करते हैं वह इतना अद्भुत है कि वह यह कहकर शुरुवात और अंत करते हैं, 'इसलिए...हम हिम्मत नहीं हारते' (वव.1,16)।

तब भी खजाना आंतरिक और अदृश्य है। पौलुस इसका वर्णन 'मिट्टी के बर्तनो' में रखे गए तेल के रूप में करते हैं (व.7)। हमारी संस्कृति बाहरी और दृश्य पर जोर देती है। मीडिया पैसे, अधिकार, घर, कार, भोजन, भौतिक सुंदरता और बाहरी सफलता के द्वारा प्रभावित है। बाईबल बहुत अलग है। यह हमारे चरित्र की आंतरिक और अदृय पहलुओं की महत्ता पर जोर देता हैः विचार, धारणा और व्यवहार जो हमारे बाहरी बर्ताव को निर्धारित करता है। 'क्योकि जो दिखाई देता है वह स्थायी है लेकिन जो नहीं दिखता है वह अनंत है' (व.18)।

बुद्धि

भजन संहिता 104:31-35

31 यहोवा की महिमा सदा सदा बनी रहे!
 यहोवा अपनी सृष्टि से सदा आनन्दित रहे!
32 यहोवा की दृष्टि से यह धरती काँप उठेगी।
 पर्वतों से धुआँ उठने लग जायेगा।

33 मैं जीवन भर यहोवा के लिये गाऊँगा।
 मैं जब तक जीता हूँ यहोवा के गुण गाता रहूँगा।
34 मुझको यह आज्ञा है कि जो कुछ मैंने कहा है वह उसे प्रसन्न करेगा।
 मैं तो यहोवा के संग में प्रसन्न हूँ!
35 धरती से पाप का लोप हो जाये और दुष्ट लोग सदा के लिये मिट जाये।
 ओ मेरे मन यहोवा कि प्रशंसा कर।

 यहोवा के गुणगान कर!

समीक्षा

आंतरिक और अदृश्य विचार

यदि आप जानते हैं कि कैसे चिंता करनी है, तो आप जानते हैं कैसे मनन करना है! आपको केवल अपनी सोच को बदलना है और आप मसीह मनन का अभ्यास कर रहे होंगे।

'मनन' (व.34) का अर्थ है हम किस बारे में सोचते हैं, हम अपना दिमाग किस चीज पर लगाते हैं। हमारे कार्य और हमारे शब्द महत्वपूर्ण हैं। लेकिन यह केवल हमारे कार्य और शब्द नहीं है जो परमेश्वर को प्रसन्न कर सकते हैं या नहीं सकते हैं; यह हमारी आंतरिक और अदृश्य मनन भी है।

भजनसंहिता के लेखक सृजे गए संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर की स्तुति करते हैं। वह कहते हैं, ' मैं जीवन भर यहोवा का गीत गाता रहूँगा; जब तक मैं बना रहूँगा तब तक अपने परमेश्वर का भजन गाता रहूँगा' (व.33)। फिर वह प्रार्थना करते हैं, ' मेरा ध्यान करना उनको प्रिय लगे' (व.34)।

प्रायोगिक रूप से इसका क्या अर्थ है? पौलुस प्रेरित के पास कुछ अच्छी सलाह हैः ' जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, अर्थात् जो भी सद्गुण और प्रशंसा की बातें हैं उन पर ध्यान लगाया करो' (फिलिप्पियो 4:8)।

प्रार्थना

परमेश्वर, होने दीजिए कि मेरे कार्य, शब्द और विचार आज आपको प्रसन्न करें।

नए करार

2 कुरिन्थियों 4:1-18

मिट्टी के पात्रों में अध्यात्म का धन

4क्योंकि परमेश्वर के अनुग्रह से यह सेवा हमें प्राप्त हुई है, इसलिए हम निराश नहीं होते। 2 हमने तो लज्जापूर्ण गुप्त कार्यों को छोड़ दिया है। हम कपट नहीं करते और न ही हम परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं, बल्कि सत्य को सरल रूप में प्रकट करके लोगों की चेतना में परमेश्वर के सामने अपने आप को प्रशंसा के योग्य ठहराते हैं। 3 जिस सुसमाचार का हम प्रचार करते हैं, उस पर यदि कोई पर्दा पड़ा है तो यह केवल उनके लिये पड़ा है, जो विनाश की राह पर चल रहे हैं। 4 इस युग के स्वामी (शैतान) ने इन अविश्वासियों की बुद्धि को अंधा कर दिया है ताकि वे परमेश्वर के साक्षात प्रतिरूप मसीह की महिमा के सुसमाचार से फूट रहे प्रकाश को न देख पायें। 5 हम स्वयं अपना प्रचार नहीं करते बल्कि प्रभु के रूप में मसीह यीशु का उपदेश देते हैं। और अपने बारे में तो यही कहते हैं कि हम यीशु के नाते तुम्हारे सेवक है। 6 क्योंकि उसी परमेश्वर ने, जिसने कहा था, “अंधकार से ही प्रकाश चमकेगा” वही हमारे हृदयों में प्रकाशित हुआ है, ताकि हमें यीशु मसीह के व्यक्तित्व में परमेश्वर की महिमा के ज्ञान की ज्योति मिल सके।

7 किन्तु हम जैसे मिट्टी के पात्रो में यह सम्पत्ति इस लिये रखी गयी है कि यह अलौकिक शक्ति हमारी नहीं; बल्कि परमेश्वर की सिद्ध हो। 8 हम हर समय हर किसी प्रकार से कठिन दबावों में जीते हैं, किन्तु हम कुचले नहीं गये हैं। हम घबराये हुए हैं किन्तु निराश नहीं हैं। 9 हमें यातनाएँ दी जाती हैं किन्तु हम छोड़े नहीं गये हैं। हम झुका दिये गये हैं, पर नष्ट नहीं हुए हैं। 10 हम सदा अपनी देह में यीशु की मृत्यु को हर कहीं लिये रहते हैं। ताकि यीशु का जीवन भी हमारी देहों में स्पष्ट रूप से प्रकट हो। 11 यीशु के कारण हम जीवितों को निरन्तर मौत के हाथों सौंपा जाता है ताकि यीशु का जीवन भी नाशवान शरीरों में स्पष्ट रूप से उजागर हो। 12 इसी से मृत्यु हममें और जीवन तुममें सक्रिय है।

13 शास्त्र में लिखा है, “मैंने विश्वास किया था इसलिए मैं बोला।” हममें भी विश्वास की वही आत्मा है और हम भी विश्वास करते हैं इसीलिए हम भी बोलते हैं। 14 क्योंकि हम जानते हैं कि जिसने प्रभु यीशु को मरे हुओं में से जिला कर उठाया, वह हमें भी उसी तरह जीवित करेगा जैसे उसने यीशु को जिलाया था। और हमें भी तुम्हारे साथ अपने सामने खड़ा करेगा। 15 ये सब बातें तुम्हारे लिये ही की जा रही हैं, ताकि अधिक से अधिक लोगों में फैलती जा रही परमेश्वर का अनुग्रह, परमेश्वर को महिमा मण्डित करने वाले आधिकाधिक धन्यवाद देने में प्रतिफलित हो सके।

विश्वास से जीवन

16 इसलिए हम निराश नहीं होते। यद्यपि हमारे भौतिक शरीर क्षीण होते जा रहे हैं, तो भी हमारी अंतरात्मा प्रतिदिन नयी से नयी होती जा रही है। 17 हमारा पल भर का यह छोटा-मोटा दुःख एक अनन्त अतुलनीय महिमा पैदा कर रहा है। 18 जो कुछ देखा जा सकता है, हमारी आँखें उस पर नहीं टिकी हैं, बल्कि अदृश्य पर टिकी हैं। क्योंकि जो देखा जा सकता है, वह विनाशी है, जबकि जिसे नहीं देखा जा सकता, वह अविनाशी है।

समीक्षा

आंतरिक और अदृश्य खजाना

हमारे पास विश्व का सबसे शक्तिशाली संदेश है। यीशु में विश्वास पूरी तरह से बदलाव लाता है, अभी और अनंतता में। ' क्योंकि हम जानते हैं कि जिसने प्रभु यीशु को जिलाया, वही हमें भी यीशु में भागी जानकर जिलाएंगे, और तुम्हारे साथ अपने सामने उपस्थित करेंगे' (व.14)। आप सर्वदा जीएँगे।

हम सभी 'मिट्टी के बर्तन 'हैं (व.7)। अंदर 'खजाना' है (व.7), जो कि आंतरिक और 'अदृश्य' है (व.18)। खजाना यीशु का संदेश है। परमेश्वर की दया से यह दिया गया है (व.1)।

यह जीवन का अंत नहीं है, क्योंकि जो दिखाई देता है वह क्षणिक है, लेकिन जो दिखाई नहीं देता है वह अनंत हैः 'जो चीजे हम अभी नहीं देखते हैं वह सर्वदा बनी रहेंगी' (व.18, एम.एस.जी)।

लौकिकता विश्व में आ गई है – और अब चर्च भी - 'अनंतता' के विषय में भूल रहा है। हम उन चीजों पर ध्यान देते और उसे महत्व देते हैं, जिसे हम देख सकते हैं और छू सकते है। 'अनंतता' संदेश का एक महत्वपूर्ण भाग है।

यीशु के विषय में संदेश को सुनाने में, चार चीजें हैं जिन्हें हमें अवश्य ही 'ना' कहना हैः

  1. कोई रहस्य नहीं

'हमने गुप्त...मार्गें को बता दिया' (व.2)। 'हमने मुखौटा नहीं पहना' (व.2अ, एम.एस.जी.)। जो कुछ हम करते हैं उसमें खुलेपन की आवश्यकता हैः' और न चतुराई से चलते, और न परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं; परन्तु सत्य को प्रकट करके ' (व.2ब, एम.एस.जी)।

  1. कोई शर्म नहीं

'हम ने लज्जा के गुप्त कामों को त्याग दिया ' (व.2)। हमें ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए, जिसके पता लगने पर, शायद से हम लज्जित महसूस करें।

  1. कोई धोखा नहीं

'हम धोखा नहीं देते' (व.2)। 'हम पीछे से चाले नहीं चलते हैं' (व.2, एम.एस.जी)।

  1. कोई मिलावट नहीं

'हम परमेश्वर के वचन में मिलावट नहीं करते हैं' (व.2)। 'हमें अच्छा जान पडे इसलिए हम परमेश्वर के वचन में मिलावट नहीं करते हैं' (व.2, एम.एस.जी)। इसे और अधिक स्वीकारयोग्य बनाने के लिए हमें अवश्य ही संदेश को नहीं बदलना है। इसके विपरीत, पौलुस लिखते हैं कि वह सत्य को 'स्पष्ट रूप से' प्रकट करते हैं (व.2)।

क्योंकि सुसमाचार अदृश्य और आंतरिक है, इसलिए हर कोई इसे नहीं देखता है। ' यदि हमारे सुसमाचार पर परदा पड़ा है, तो यह नष्ट होने वालों ही के लिये पड़ा है। और उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुध्दि इस संसार के ईश्वर ने अंधी कर दी है, ताकि मसीह जो परमेश्वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके' (वव.3-4)। मैं इस तरह से था। मैंने संदेश को सुना, लेकिन मैं इसे समझ नहीं पाया।

केवल तभी जब परमेश्वर हमारे हृदय में अपना प्रकाश चमकाते हैं, तब हम ' परमेश्वर की महिमा की पहचान की ज्योति यीशु मसीह के चेहरे से प्रकाशमान होते हैं' (व.6)।

संदेश यीशु के विषय में हैः 'मसीह, जो हमें परमेश्वर का सर्वश्रेष्ठ चित्र प्रदान करते हैं' (व.4, एम.एस.जी)। 'याद रखिये, हमारा संदेश हमारे विषय में नहीं है; हम स्वामी, यीशु मसीह का प्रचार करते हैं' (व.5, एम.एस.जी)।

हम, यीशु के सेवक, मिट्टी के बर्तन हैं जिनमें विश्व का सबसे महान खजाना है। परमेश्वर ने सोच समझकर मिट्टी के बर्तनों में खजाना रखा हैः ' हमारे पास वह धन मिट्टी के बरतनों में रखा है कि यह असीम सामर्थ हमारी ओर से नहीं, वरन् परमेश्वर ही की ओर से ठहरे' (व.7, एम.एस.जी)।

' इसलिये हम हिम्मत नहीं हारते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्व नष्ट होता जाता है, तब भी हमारा भीतरी मनुष्यत्व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है' (व.16, एम.एस.जी)। शायद से आर्थिक और दूसरे दबावों के द्वारा हम 'दबाये जाए', और उन चीजों से हैरान हो जाएँ जो हमारे साथ होती हैं। शायद से हमारी निंदा हो और 'सताव' हो और 'गिराए जाए' (वव.8-9)।

परंतु ' हमारा पल भर का हल्का सा क्लेश हमारे लिये बहुत ही महत्वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है' (वव.16-17)। 'यें कठिन समय, आने वाले अच्छे समय, हमारे लिए तैयार किए गए उत्सव की तुलना में छोटे आलू की तरह हैं' (व.17, एम.एस.जी)।

इसलिए पौलुस लिखते हैं, ' हम तो देखी हुई वस्तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्तुओं को देखते रहते हैं; क्योंकि देखी हुई वस्तुएँ थोड़े ही दिन की हैं, परन्तु अनदेखी वस्तुएँ सदा बनी रहती है ' (व.18)। जैसा कि फादर रेनियरो कॅन्टालमेसा लिखते हैं, 'माप का एक नया स्तर बता दिया गया है जो क्रूस और परीक्षाओं को हल्का और क्षणिक बनाता हैः अनंतता।'

प्रार्थना

परमेश्वर आपका धन्यवाद क्योंकि आपने हमें यीशु में अनंत जीवन दिया है। मेरी सहायता कीजिए कि उन चीजों पर ध्यान न दूं जो दिखाई देती हैं, बल्कि उन चीजों पर जो दिखाई नहीं देती हैं।

जूना करार

मीका 1:1-4:13

शोमरोन और इस्राएल को दण्ड दिया जायेगा

1यहोवा का वह वचन जो राजा योताम, आहाज और हिजकिय्याह के समय में मीका को प्राप्त हुआ। ये पुरूष यहूदा के राजा थे। मीका मोरेशेती से था। मीका ने शोमरोन और यरूशलेम के बारे में ये दर्शन देखे।

2 हे लोगों, तुम सभी सुनो!
 हे धरती और जो कुछ भी धरती पर है, सुन।
 मेरा स्वामी यहोवा इस पवित्र मन्दिर से जायेगा।
 मेरा स्वामी तुम्हारे विरोध में एक साक्षी के रूप में आयेगा।
3 देखो, यहोवा अपने स्थान से बाहर जा रहा है।
 वह धरती के ऊँचे स्थानों पर चलने के लिये उतर कर नीचे आ रहा है।
4 परमेश्वर यहोवा के पांव तले पहाड़ पिघल जायेंगे,
 घाटियाँ चरमरा जायेंगी।
 जैसे आग के सामने मोम पिघल जाता है,
 जैसे ढलान से पानी उतरता हुआ बहता है।
5 ऐसा क्यों होगा यह इसलिये होगा कि याकूब ने पाप किया है।
 क्योंकि इस्राएल के वंश ने पाप किया है।

शोमरोन, पाप का कारण

 याकूब से किसने पाप मानने से मना करवाया है
 वह तो शोमरोन है!
 यहूदा में और कौन ऊँचा स्थान है
 यह तो यरूशलेम है!
6 इसलिये मैं शोमरोन को खाली मैदान के खण्डहरों का ढ़ेर बनाऊँगा।
 वह ऐसा स्थान हो जायेगा जिसमें अंगूर लगाये जाते हैं।
 मैं शोमरोन के पत्थरों को घाटी में नीचे उखाड़ फेंकूँगा
 और मैं उसकी नीवों को बर्बाद करदूँगा!
7 उसके सारे मूर्ति टुकड़ों मे तोड़ दिये जायेंगे।
 सारा धन, जो भी इसने कमाया है, आग से भस्म होगा
 और मैं इसके झूठे देवताओं की मूर्तियों को नष्ट कर दूँगा
 क्योंकि शोमरोन से ये वस्तुएँ मेरे प्रति सच्चा न रहकर के पाई।
 सो ये सारी वस्तुएँ दूसरों के पास चली जायेंगी।
 ऐसे लोगों के पास जो मेरे प्रति सच्चे नहीं हैं।

मीका का महान दु:ख

8 मैं इस शीघ्र आने वाले विनाश के कारण व्याकुल होऊँगा और हाय—हाय करूँगा।
 मैं जूते न पहनूँगा और न वस्त्र धारण करूँगा।
 गीदड़ों के जैसे मैं जोर से चिल्लाऊँगा।
 मैं विलाप करूँगा जैसे शुतुर्मुर्ग करते हैं।
9 शोमरोन का घाव नहीं भर सकता है।
 उसकी व्याधी (पाप) यहूदा तक फैल गया है।
 यह मेरे लोगों के नगर—द्वार तक पहुँच गया
 बल्कि यह यरूशलेम तक आ गया है।
10 इसकी बात गात की नगरी में मत करो।
 अको में मत रोओ।
 विलाप करो
 और बेत—आप्रा को मिट्टी में लोटों।
11 हे शापीर की निवासिनी,
 तू अपनी राह नंगी चली जा और लज्जाहीन हो कर चली जा।
 वे लोग, जो सानान के निवासी हैं,
 बाहर नहीं निकलेंगे।
 बेतेसेल के लोग रोये बिलखायेंगे
 और तुम से इसका सहारा लेंगे।
12 ऐसा वह व्यक्ति जो मारोत का निवासी है,
 सुसमाचार आने को बाट जोहता हुआ दुर्बल हुआ जा रहा है।
 क्यों? क्योंकि यहोवा से नीचे यरूशलेम के नगर द्वार पर
 विपत्ती के उतरी है।
13 हे लाकीश के निवासियों,
 तुम वेगवान घोड़ो को रथ में जोतो।
 सिय्योन के पाप लाकीश में शुरू हुए थे।
 क्यों क्योंकि तू इस्राएल के पापों का अनुसरण करती है।
14 सो तुझे गात में मोरेशेत को
 विदा के उपहार देने हैं।
 इस्राएल के राजा को
 अकजीव के घराने छलेंगे।
15 हे मारेशा के निवासियों,
 तेरे विरूद्ध मैं एक व्यक्ति को लाऊँगा
 जो तेरी सब वस्तुओं को छींन लेगा।
 इस्राएल की महिमा (परमेश्वर) अदुल्लाम में आयेगी।
16 इसलिये तू अपने बाल काट ले और तू गंजा बन जा।
 क्यों? क्योंकि तू अपने बच्चों के लिये जिनसे तू प्यार करता था
 रोये चिल्लायेगा और तू शोक दर्शाने के लिये गंजा गिद्ध बन जा।
 क्यों क्योंकि वे तुझको छोड़ने को और बाहर निकल जाने को विवश हो जायेंगे।

लोगों की बुरी योजनाएँ

2ऐसे उन लोगों पर विपत्तियाँ गिरेंगी, जो पापपूर्ण योजना बनाते हैं।
 ऐसे लोग बिस्तर में सोते हुए षड़यन्त्र रचते हैं
 और पौ फटते ही वे अपने षड़यन्त्रों पर चलने लगते हैं।
 क्यों क्योकि उन के पास उन्हें पूरा करने की शक्ति है।
2 उन्हें खेत चाहिये सो वे उनको ले लेते हैं।
 उनको घर चाहिये सो वे उनको ले लेते हैं।
 वे किसी व्यक्ति को छलते हैं और उसका घर छींन लेते हैं।
 वे किसी व्यक्ति को छलते हैं और वे उससे उसकी वस्तुएँ छीन लेते हैं।

लोगों को दण्ड देने की योहोवा की योजनाएँ

3 इसलिये यहोवा ये बातें कहता है,
“देखो, मैं इस परिवार पर विपत्तियाँ ढाने की योजना रच रहा हूँ।
 तुम अपनी सुरक्षा नहीं कर पाओगे।
 इस जुए के बोझ से तुम सिर ऊँचा करके नहीं चल पाओगे।
 क्यों क्योंकि यह एक बुरा समय होगा।
4 उस समय लोग तेरी हँसी उड़ाएँगे।
 तेरे बारे मे लोग करूण गीत गायेंगे और वे कहेंगे:
‘हम बर्बाद हो गये!
 यहोवा ने मेरे लोगों की धरती छीन ली है और उसे दूसरे लोगों को दे दिया है।
 हाँ उसने मेरी धरती को मुझसे छीन लिया है।
 यहोवा ने हमारी धरती हमारे शत्रुओं के बीच बाँट दी है।
5 तेरी भूमि कोई व्यक्ति नाप नहीं पायेगा।
 यहोवा के लोगों में भूमि को बाँटने के लिये लोग पासे नहीं डालेंगे।’”

मीका को उपदेश देने को मना करना

6 लोग कहा करते हैं, “तू हमको उपदेश मत दे।
उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिये,
हम पर कोई भी बुरी बात नहीं पड़ेगी।”

7 हे याकूब के लोगों,
किन्तु मुझे यह बातें कहनी है,
जो काम तूने किये हैं,
यहोवा उनसे क्रोधित हो रहा है।
यदि तुम लोग उचित रीति से जीवन जीते तो
मैं तुम्हारे लिये अच्छे शब्द कहता।
8 किन्तु अभी हाल में, मेरे ही लोग मेरे शत्रु हो गये हैं।
तुम राहगीरों के कपड़े उतारते हो।
जो लोग सोचते हैं कि वे सुरक्षित हैं,
किन्तु तुम उनसे ही वस्तुएँ छींनते हो जैसे वे युद्धबन्दी हो।
9 मेरे लोगों की स्त्रियों को तुमने उनके घर से निकल जाने को विवश किया
जो घर सुन्दर और आराम देह थे।
तुमने मेरी महिमा को उनके नन्हे बच्चों से
सदा—सदा के लिये छीन लिया है।
10 उठो और यहाँ से भागो!
यह विश्राम का स्थान नहीं है।
क्योंकी यह स्थान पवित्र नहीं है, यह नष्ट हो गया!
यह भयानक विनाश है!

11 सम्भव है, कोई झूठा नबी आये और वह झूठ बोले।
सम्भव है, वह कहे, “ऐसा समय आयेगा जब दाखमधु बहुत होगा,
जब मन्दिर बहुतायत में होगी
और फिर इस तरह वह उसका नबी बन जायेगा।”

यहोवा अपने लोगों को एकत्र करेगा

12 हाँ, हे याकूब के लोगों, मैं तुम सब को ही इकट्ठा करूँगा।
मैं इस्राएल के बचे हुए लोगों को एकत्र करूँगा।
जैसे बाड़े में भेड़े इकट्ठी की जाती हैं,
वैसे ही मैं उनको एकत्र करूँगा
जैसे किसी चरागाह में भेड़ों का झुण्ड।
फिर तो वह स्थान बहुत से लोगों के शोर से भर जायेगा।
13 उनमें से कोई मुक्तिदाता उभरेगा।
प्राचीर तोड़ता वहाँ द्वार बनाता, वह अपने लोगों के सामने आयेगा।
वे लोग मुक्त होकर उस नगर को छोड़ निकलेंगे।
उनके सामने उनका राजा चलेगा।
लोगों के सामने उनका यहोवा होगा।

इस्राएल के मुखिया बुराई के अपराथी हैं

3फिर मैंने कहा, “हे याकूब के मुखियाओं, अब सुनो।
हे इस्राएल के प्रजा के शासकों, अब सुनो।
तुमको जानना चाहिये कि न्याय क्या होता है!
2 किन्तु तुमको नेकी से घृणा है
और तुम लोगों की खाल तक उतार लेते हो।
तुम लोगों की हड्डियों से माँस नोंच लेते हो!
3 तुम मेरे लोगों को नष्ट कर रहे हो!
तुम उनकी खाल तक उनसे उतार रहे हो और उनकी हड्डियाँ तोड़ रहे हो।
तुम उनकी हड्डियाँ ऐसे तोड़ रहे हो जैसे हांडी में माँस चढ़ाने के लिये।
4 तुम यहोवा से विनती करोगे
किन्तु वह तुम्हें उत्तर नहीं देगा।
नहीं, यहोवा अपना मुख तुमसे छुपायेगा।
क्यों क्योंकि तुमने बुरे कर्म किये हैं।”

झूठे नबी

5 झूठे नबी यहोवा के लोगों को जीवन की उलटी रीति सीखाते हैं। यहोवा उन झूठे नबियों के विषय में यह कहता है:

“यदि लोग इन नबियों को खाने को देते हैं,
तो वे चिल्लाकर कहते हैं, तुम्हारे संग शान्ति हो,
किन्तु यदि लोग उन्हें खाने को नहीं देते तो वे सेना को उनके विरूद्ध युद्ध करने को प्रेरित करते हैं।

6 “इसलिये यह तुम्हारे लिये रात सा होगा।
तुम कोई दर्शन नहीं देख पाओगो।
भविष्य के गर्त में जो छिपा है, तुम बता नहीं पाओगे।
इसलिये यह तुमको अन्धेरे जैसा लगेगा।
नबियों पर सूर्य छिप जायेगा
और उनके ऊपर दिन काला पड़ जायेगा।
7 “भविष्य के दृष्टा लज्जित हो जायेंगे।
वे लोग, जो भविष्य देखते हैं, उनके मुँह काले हो जायेंगे।
हाँ, वे सभी अपना मुँह बन्द कर लेंगे।
क्यों क्योंकि वहाँ परमेश्वर की ओर से कोई उत्तर नहीं होगा!”

मीका परमेश्वर का सच्चा नबी है

8 किन्तु यहोवा की आत्मा ने मुझको शक्ति, नेकी,
और सामर्थ्य से भर दिया था।
मैं याकूब को उसके पाप बतलाऊँगा।
हाँ, मैं इस्राएल को उसके पापों के विषय में कहूँगा!

इस्राएल के मुखिया दोषी हैं

9 हे याकूब के मुखियाओं, इस्राएल के शासकों तुम मेरी बात सुनो!
तुम खरी राहों से घृणा करते हो!
यदि कोई वस्तु सीधी हो तो
तुम उसे टेढ़ी कर देते हो!
10 तुमने सिय्योन का निर्माण लोगों की हत्या करके किया।
तुमने यरूशलेम को पाप के द्वारा बनाया था!
11 यरूशलेम के न्यायाधीश उनके पक्ष में जो न्यायालय में जीतेगा,
निर्णर्य देने के लिए घूस लिया करते हैं।
यरूशलेम के याजकों को धन देना पड़ता है,
इसके पहले कि वे लोगों को सीख दें।
लोगों को नबियों को धन देना पड़ता है।
इसके पहले कि वे भविष्य में झाँकें और फिर भी वे मुखिया सोचते हैं
कि उन पर कोई दण्ड नहीं पड़ सकता।
वे सोचा करते हैं, यहोवा उनको बचा लेगा और वे कहते हैं, “यहोवा हमारे बीच रहता है।
इसलिए हमारे साथ कोई बुरी बात घट नहीं सकती है।”

12 हे मुखियाओं, तुम्हारे ही कारण सिय्योन का विनाश होगा।
यह किसी जुते हुए खेत सा सपाट हो जायेगा।
यरूशलेम पत्थरों का टीला बन जाएगा
और मन्दिर का पर्वत झाड़ियों से ढ़का हुआ एक सूनी पहाड़ी होगा।

व्यवस्था यरूशलेम से आयेगी

4आगे आने वाले समय में यह घटना घटेगी यहोवा के मन्दिर का पर्वत
सभी पर्वतों में अत्यन्त ही महत्वपूर्ण हो जायेगा।
उसे पहाड़ों के ऊपर उठा दिया जायेगा।
दूसरे देशों के लोग इसकी ओर उमड़ पड़ेंगे।
2 अनेक जातियाँ यहाँ आ कर कहेंगी,
“आओ! चलो, यहोवा के पहाड़ के ऊपर चलें।
याकूब के परमेश्वर के मन्दिर चलें।
फिर परमेश्वर हमको अपनी राह सिखायेगा
और फिर हम उसके पथ में बढ़ते चले जायेंगे।”

क्यों क्योंकि परमेश्वर की शिक्षाएँ सिय्योन से आयेंगी
और यहोवा का वचन यरूशलेम से आयेगा।
3 परमेश्वर बहुत सी जातियों का न्याय करेगा।
परमेश्वर उन सशक्त देशों के फैसले करेगा,
जो बहुत—बहुत दूर हैं और फिर वे देश अपनी तलवारें गलाकर
और पीटकर हल की फाली में बदल लेंगे।
वे देश अपने भालो को पीटकर ऐसे औजारों मे बदल लेंगे, जिनसे पेड़ों की कांट—छाँट हुआ करती है।
देश तलवारें उठाकर आपस में नहीं लड़ेंगे।
अब वे युद्ध की विद्याएँ और अधिक नहीं सीखेंगे।
4 किन्तु हर कोई अपने अंगूरों की बेलों तले
और अंजीर के पेड़ के नीचे बैठा करेगा।
कोई भी व्यक्ति उन्हें डरा नहीं पायेगा!
क्यों क्योंकि सर्वशक्तिमान यहोवा ने यह कहा है!
5 दूसरे देशों के सभी लोग अपने देवताओं का अनुसरण करते हैं।
किन्तु हम अपने परमेश्वर यहोवा के नाम में सदा—सर्वदा जिया करेंगे!

वह राज्य जिसे वापस लाना है

6 होवा कहता है,
“यरूशलेम पर प्रहार हुआ और वह लंगड़ा हो गया।
यरूशलेम को फेंक दिया गया था।
यरूशलेम को हानि पहुँचाई गई और उसको दण्ड दिया।
किन्तु मैं उसको फिर अपने पास वापस ले आऊँगा।

7 “उस ‘ध्वस्त’ नगरी के लोग विशेष वंश होंगे।
उस नगर के लोगों को छोड़कर भाग जाने को
विवश किया गया था।
किन्तु मैं उनको एक सुदृढ़ जाति के रूप में बनाऊँगा।”
यहोवा उनका राजा होगा
और वह सिय्योन के पहाड़ पर से सदा शासन करेगा।
8 हे रेवड़ के मीनार,
हे ओपेल, सिय्योन की पहाड़ी!
जैसा पहले राज्य हुआ करता था,
तू वैसा ही राज्य बनेगी।
हाँ, हे सिय्योन की पुत्री!
वह राज्य तेरे पास आयेगा।

इस्राएलियों को बाबुल के पास निश्चय ही क्यों जाना चाहिए

9 अब तुम क्यों इतने ऊँचे स्वर में पुकार रहे हो?
क्या तुम्हारा राजा जाता रहा है?
क्या तुमने अपना मुखिया खो दिया है?
तुम ऐसे तड़प रहे हो जैसे कोई स्त्री प्रसव के काल में तड़पती है।
10 सिय्योन की पुत्री, तू पीड़ा को झेल।
तू उस स्त्री जैसी हो जो प्रसव की घड़ी में बिलखती है।
क्योंकि अब तुझको नगर (यरूशलेम) त्यागना है।
तुझको खुले मैदान में रहना है।
तुझे बाबुल जाना पड़ेगा
किन्तु उस स्थान से तेरी रक्षा हो जायेगी।
यहोवा वहाँ जायेगा
और वह तुझको तेरे शत्रुओं से वापस ले आयेगा।

दूसरी जातियों को यहोवा नष्ट करेगा

11 तुझसे लड़ने के लिये अनेक जातियाँ आयीं।
वे कहती हैं, “सिय्योन को देखो!
उस पर हमला करो!”

12 लोगों की उनकी अपनी योजनाएँ हैं
किन्तु उन्हें ऐसी उन बातों का पता नहीं जिनके विषय में यहोवा योजना बना रहा है।
यहोवा उन लोगों को किसी विशेष प्रयोजन के लिये यहाँ लाया।
वे लोग वैसे कुचल दिये जायेंगे जैसे खलिहान में अनाज की पूलियाँ कुचली जाती हैं।

इस्राएल अपने शत्रुओं को पराजित कर विजयी होगा

13 हे सिय्योन की पुत्री, खड़ी हो और तू उन लोगों को कुचल दे!
मैं तुम्हें बहुत शक्तिशाली बनाऊँगा।
तू ऐसी होगी जैसे तेरे लोहे के सींग हो।
तू ऐसी होगी जैसे तेरे काँसे के खुर हो।
तू मार—मार कर बहुत सारे लोगों की धज्जियाँ उड़ा देगी।
“तू उनके धन को यहोवा को अर्पित करेगी।
तू उनके खजाने, सारी धरती के यहोवा को अर्पित करेगी।”

समीक्षा

आंतरिक और अदृश्य सामर्थ

आप परमेश्वर के द्वारा महान रूप से इस्तेमाल हो सकते हैं। अपने जीवन के लिए बड़ा दर्शन रखिये क्योंकि आप परमेश्वर की सामर्थ से भरे हुए हैं।

भविष्यवक्ता मीका जो कहते हैं वह हम सभी के लिए सच हो सकती है, ' मैं तो यहोवा की आत्मा से शक्ति,न्याय और पराक्रम पाकर परिपूर्ण हूँ' (3:8अ)। सामर्थ, पवित्र आत्मा के आंतरिक और अदृश्य काम से आती है।

मीका ने महान सामर्थ के साथ बात की। उन्होंने दरिद्रो के लिए उद्देश्य को पूरा किया। जैसा कि योना के साथ हुआ था, मीका की चेतावनी सुनी गई और विपत्ति को रोक दिया गया (यिर्मयाह 26:18 देखे)।

अन्याय और लालच के विरूद्ध मीका ने कहा। बहुत से पापों की तरह, यह आंतरिक और अदृश्य योजनाओं से शुरु होता हैः'हाय उन पर, जो बिछौनों पर पड़े हुए बुराइयों की कल्पना करते और दुष्ट कर्म की इच्छा करते हैं' (मीका 2:1अ)।

वे विचारों को बोते और कार्य को काटते हैं। ' वे खेतों का लालच करके उन्हें छीन लेते हैं, और घरों का लालच करके उन्हें भी ले लेते हैं; और उसके घराने समेत पुरुष पर, और उसके निज भाग समेत किसी पुरुष पर अन्धेर और अत्याचार करते हैं' (वव.1ब -2)। (यह एक असाधारण सटीक वर्णन है जिसे हम अब 'भूमि को लूटना' कहेंगे।)

मीका के शब्द विशेष रूप से 'लीडर्स' के लिए कहे गए थे (3:1अ)। 'क्या तुम न्याय नहीं चाहते, तुम जो भलाई से नफरत करते हो और बुराई से प्रेम करते हो' (वव.1ब -2अ)। लोगों के साथ जानवरों जैसा बर्ताव करने के कारण वह उन पर दोष लगाते हैं (वव.2-3)। वह उन्हें चेतावनी देते हैं कि यदि वे गरीबों के साथ अन्याय करेंगे, तो परमेश्वर उनकी प्रार्थनाओं को नही सुनेंगे (व.4)।

पैसा अन्याय की जड़ है। अक्सर, यह लालच है जो अन्याय लाता हैः ' उसके प्रधान घूस ले लेकर विचार करते, और याजक दाम ले लेकर व्यवस्था देते हैं, और भविष्यवक्ता रुपये के लिये भावी कहते हैं; तब भी वे यह कहकर यहोवा पर भरोसा रखते हैं, 'यहोवा हमारे बीच में हैं, इसलिये कोई विपत्ति हम पर न आएगी।' (व.11, एम.एस.जी)।

एक दिन, परमेश्वर चीजों को सही कर देंगे। परमेश्वर 'बहुत से लोगों का न्याय करेंगे और झगड़े सुलझा देंगे' (व.3)। वहाँ पर शांति होगी। तब एक जाति दूसरी जाति के विरुध्द तलवार फिर न चलाएगी; और लोग आगे को युद्ध विद्या न सीखेंगे' (व.3ब)। वहाँ पर न्याय भी होगा। भूमि का उचित बँटवारा होगाः' वे अपनी अपनी दाखलता और अंजीर के पेड़ तले बैठा करेंगे' (व.4अ)।

आखिरकार, परमेश्वर के आंतरिक और अदृश्य विचार महत्वपूर्ण हैं, ' वे यहोवा की कल्पनाएँ नहीं जानते, न उनकी युक्ति समझते हैं ' (व.12)।

प्रार्थना

परमेश्वर, आपका धन्यवाद कि एक दिन आप सभी गलत चीजों को सही कर देंगे और अनंत शांति लायेंगे। इस दौरान, होने दीजिए कि ' मैं यहोवा की आत्मा से शक्ति,न्याय और पराक्रम पाकर परिपूर्ण हो जाऊँ' (3:8)।

पिप्पा भी कहते है

2कुरिंथियो 4:7

'हमारे पास यह खजाना मिट्टी के बर्तनों में रखा हुआ है।'

'मिट्टी का एक बर्तन' होने के कारण मैं बहुत सचेत हूँ। मेरा बर्तन पुराना हो रहा है, टूट रहा है!

शायद से मुझमें दरार आ जाए, लेकिन परमेश्वर की 'सामर्थ' अब भी मुझमें है।

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संदर्भ

जहाँ पर कुछ बताया न गया हो, उन वचनों को पवित्र बाइबल, न्यू इंटरनैशनल संस्करण एन्ग्लिसाइड से लिया गया है, कॉपीराइट ऊ 1979, 1984, 2011 बिबलिका, पहले इंटरनैशनल बाइबल सोसाइटी, हूडर और स्टोगन पब्लिशर की अनुमति से प्रयोग किया गया, एक हॅचेट यूके कंपनी सभी अधिकार सुरक्षित। ‘एनआईवी', बिबलिका यू के का पंजीकृत ट्रेडमार्क संख्या 1448790 है।

जिन वचनों को (एएमपी, AMP) से चिन्हित किया गया है उन्हें एम्प्लीफाइडऍ बाइबल से लिया गया है. कॉपीराइट ऊ 1954, 1958, 1962, 1964, 1965, 1987 लॉकमैन फाउंडेशन द्वारा प्राप्त अनुमति से उपयोग किया गया है। (www.Lockman.org)

जिन वचनों को (एमएसजी MSG) से चिन्हित किया गया है उन्हें मैसेज से लिया गया है। कॉपीराइट ऊ 1993, 1994, 1995, 1996, 2000, 2001, 2002. जिनका प्रयोग एनएवीप्रेस पब्लिशिंग ग्रुप की अनुमति से किया गया है।

जिन वचनों को (एएमपी) से चिन्हित किया गया है उन्हें एम्प्लीफाइड® बाइबल से लिया गया है. कॉपीराइट © 1954, 1958, 1962, 1964, 1965, 1987 लॉकमैन फाउंडेशन द्वारा प्राप्त अनुमति से उपयोग किया गया है। (www.Lockman.org)

जिन वचनों को (MSG) से चिन्हित किया गया है उन्हें मैसेज से लिया गया है। कॉपीराइट © 1993, 1994, 1995, 1996, 2000, 2001, 2002. जिनका प्रयोग एनएवीप्रेस पब्लिशिंग ग्रुप की अनुमति से किया गया है।

जहाँ पर कुछ बताया न गया हो, उन वचनों को पवित्र बाइबल, न्यू इंटरनैशनल संस्करण एन्ग्लिसाइड से लिया गया है, कॉपीराइट © 1979, 1984, 2011 बिबलिका, पहले इंटरनैशनल बाइबल सोसाइटी, हूडर और स्टोगन पब्लिशर की अनुमति से प्रयोग किया गया, एक हॅचेट यूके कंपनी सभी अधिकार सुरक्षित। ‘एनआईवी’, बिबलिका यू के का पंजीकृत ट्रेडमार्क संख्या 1448790 है।

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