दिन 251

उदारतापूर्वक देने के दस कारण

बुद्धि भजन संहिता 106:1-15
नए करार 2 कुरिन्थियों 9:6-15
जूना करार यशायाह 14:1-16:14

परिचय

मिक हॉकिन्स सबसे उदार व्यक्ति थे जिनसे मैं कभी मिला। वह हमेशा देते थे और हमेशा सब चीजों के लिए दाम चुकाने के लिए तैयार थे। हमने सोचा कि अवश्य ही वह बहुत अमीर होंगे। वास्तव में, वह अमीर नहीं थे। वह केवल बहुत उदार थे। उनका जीवन परमेश्वर के अनुग्रह के लिए धन्यवादिता के साथ उमड़ रहा था। इसने उनके हृदय और उनकी जेब को इस तरह से खोला, जिसने उन सभी को उत्साहित किया जो उन्हें जानते थे।

मैं मिक की तरह बनना चाहता हूँ। मैं चाहता हूँ कि यीशु मसीह का चर्च ऐसे लोगों से भर जाएँ क्योंकि, जैसा कि हम आज के लेखांश में देखते हैं, अनुग्रह, धन्यवादिता और उदारता नजदीकी रूप से जुड़े हुए हैं।

बुद्धि

भजन संहिता 106:1-15

106यहोवा की प्रशंसा करो!

यहोवा का धन्यवाद करो क्योंकि वह उत्तम है!
 परमेश्वर का प्रेम सदा ही रहता है!

2 सचमुच यहोवा कितना महान है, इसका बखान कोई व्यक्ति कर नहीं सकता।
 परमेश्वर की पूरी प्रशंसा कोई नहीं कर सकता।
3 जो लोग परमेश्वर का आदेश पालते हैं, वे प्रसन्न रहते हैं।
 वे व्यक्ति हर समय उत्तम कर्म करते हैं।

4 यहोवा, जब तू निज भक्तों पर कृपा करे।
 मुझको याद कर। मुझको भी उद्धार करने को याद कर।
5 यहोवा, मुझको भी उन भली बातों में हिस्सा बँटाने दे
 जिन को तू अपने लोगों के लिये करता है।
 तू अपने भक्तों के साथ मुझको भी प्रसन्न होने दे।
 तुझ पर तेरे भक्तों के साथ मुझको भी गर्व करने दे।

6 हमने वैसे ही पाप किये हैं जैसे हमारे पूर्वजों ने किये।
 हम अधर्मी हैं, हमने बुरे काम किये है!
7 हे यहोवा, मिस्र में हमारे पूर्वजों ने
 आश्चर्य कर्मो से कुछ भी नहीं सीखा।
 उन्होंने तेरे प्रेम को और तेरी करूणा को याद नहीं रखा।
 हमारे पूर्वज वहाँ लाल सागर के किनारे तेरे विरूद्ध हुए।
8 किन्तु परमेश्वर ने निज नाम के हेतु हमारे पूर्वजों को बचाया था।
 परमेश्वर ने अपनी महान शक्ति दिखाने को उनको बचाया था।
9 परमेश्वर ने आदेश दिया और लाल सागर सूखा।
 परमेश्वर हमारे पूर्वजों को उस गहरे समुद्र से इतनी सूखी धरती से निकाल ले आया जैसे मरूभूमि हो।
10 परमेश्वर ने हमारे पूर्वजों को उनके शत्रुओं से बचाया!
 परमेश्वर उनको उनके शत्रुओं से बचा कर निकाल लाया।
11 और फिर उनके शत्रुओं को उसी सागर के बीच ढ़ाँप कर डुबा दिया।
 उनका एक भी शत्रु बच निकल नहीं पाया।
12 फिर हमारे पूर्वजों ने परमेश्वर पर विश्वास किया।
 उन्होंने उसके गुण गाये।

13 किन्तु हमारे पूर्वज उन बातों को शीघ्र भूले जो परमेश्वर ने की थी।
 उन्होंने परमेश्वर की सम्मति पर कान नहीं दिया।
14 हमारे पूर्वजों को जंगल में भूख लगी थी।
 उस मरूभूमि में उन्होंने परमेश्वर को परखा।
15 किन्तु हमारे पूर्वजों ने जो कुछ भी माँगा परमेश्वर ने उनको दिया।
 किन्तु परमेश्वर ने उनको एक महामारी भी दे दी थी।

समीक्षा

अपनी आराधना के द्वारा अनुग्रह के लिए परमेश्वर का धन्यवाद दीजिए

जब हम परमेश्वर के अनुग्रह का अनुभव करना शुरु करते हैं, तब आभार स्वाभाविक और उचित प्रतिक्रिया है। भजनसंहिता के लेखक आभार के द्वारा प्रभावित हैं और परमेश्वर की आराधना करते हैं, यह कहकर, 'याह की स्तुति करो! यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करुणा सदा की है' (व.1)।

वह आगे कहते हैं, ' हम ने तो अपने पुरखाओं के समान पाप किया है; हम ने कुटिलता की, हम ने दुष्टता की है' (वव.6-7, एम.एस.जी)। उन्होने परमेश्वर के विरूद्ध 'बलवा किया' (व.7ड)।

सालों पहले, इस भजन के द्वारा, मैंने अपनी बाईबल के मार्जिन में लिखाः 'कभी कभी मैं आश्चर्य करता हूँ कि क्या मैं दूसरे मसीह से अधिक पाप करता परमेश्वर निरंतर क्षमा कर सकते हैं?' यदि कभी कभी आप यह महसूस करते हैं, तो आप अकेले नहीं हैं।

लेकिन, अगले वचन की शुरुवात शब्द 'फिर भी' से होती है। यह अनुग्रह है। हर चीज के बावजूद

  • 'अपने नाम के कारण उसने उन्हे बचाया' (व.8अ)

  • 'उसने उनकी अगुवाई की' (व.9ब)

  • 'उसने उन्हें छुड़ाया' (व.10ब)।

परमेश्वर के अद्भुत अनुग्रह के परिणामस्वरूप, ' उन्होंने उनके वचनों पर विश्वास किया; और उनकी स्तुति गाने लगे' (व.12)। लेकिन ' वे झट उनके कामों को भूल गए; और उनकी युक्ति के लिये न ठहरे' (व.13)।

दोबारा, मैंने अपने मार्जिन में लिखाः 'यह मेरे मसीह जीवन का इतिहास है – एक या दो, या यहाँ तक कि एक सप्ताह या दो के लिए, मैं उनकी वाचाओं पर विश्वास करता हूँ और उनकी स्तुति गाता फिर मैं जल्द ही बाहर चला जाता हूँ और भूल जाता हूँ कि उसने क्या किया है और उनकी सलाह का इंतजार नहीं करता, या किसी वस्तु के विषय में उनकी सलाह नहीं मांगता।'

हम उनकी तरह न बने – जो हर जगह शिकायत कर रहे थे और हमेशा उसकी लालसा कर रहे थे जो उनके पास नहीं था (व.14)। वे 'अति लालसा' कर रहे थे (व.14, ए.एम.पी)। और परमेश्वर ने 'उन्हें मुँह माँगा वर तो दिया, परन्तु उनके प्राण को सुखा दिया' (व.15)। कभी कभी परमेश्वर कहते हैं, 'तुम्हारी इच्छा पूरी हो' और लोगो को वह देते हैं जो वे मांगते हैं, यहाँ तक कि यदि यह उनके लिए सर्वश्रेष्ठ वस्तु नहीं हैं तब भी। और अधिक के लिए लालसा करने के बजाय, आपके प्रति उनके अनुग्रह और दयालुता के द्वारा जो आपके पास है उसका आनंद लीजिए और परमेश्वर का धन्यवाद दीजिए।

प्रार्थना

परमेश्वर, आपके अद्भुत अनुग्रह और क्षमा के लिए आपका धन्यवाद – क्योंकि आपने मुझे छुड़ाया और आप मेरी अगुवाई करते हैं। मेरी सहायता कीजिए कि आपकी वाचाओं पर विश्वास करुँ, आपकी स्तुति गाउँ और वह ना भूलूं जो आपने मेरे लिए किया है।

नए करार

2 कुरिन्थियों 9:6-15

6 इसे याद रखो: जो थोड़ा बोता है, वह थोड़ा ही काटेगा और जिस कि बुआई अधिक है, वह अधिक ही काटेगा। 7 हर कोई बिना किसी कष्ट के या बिना किसी दबाव के, उतना ही दे जितना उसने मन में सोचा है। क्योंकि परमेश्वर प्रसन्न-दाता से ही प्रेम करता है। 8 और परमेश्वर तुम पर हर प्रकार के उत्तम वरदानों की वर्षा कर सकता है जिससे तुम अपनी आवश्यकता की सभी वस्तुओं में सदा प्रसन्न हो सकते हो और सभी अच्छे कार्यों के लिये फिर तुम्हारे पास आवश्यकता से भी अधिक रहेगा। 9 जैसा कि शास्त्र में लिखा है:

“वह मुक्त भाव से दीन जनों को देता है,
और उसकी चिरउदारता सदा-सदा को बनी रहती है।”

10 वह परमेश्वर ही बोने वाले को बीज और खाने वाले को भोजन सुलभ कराता है। वहाँ तुम्हें बीज देगा और उसकी बढ़वार करेगा, उसी से तुम्हारे धर्म की खेती फूलेगी फलेगी। 11 तुम हर प्रकार से सम्पन्न बनाये जाओगे ताकि तुम हर अवसर पर उदार बन सको। तुम्हारी उदारता परमेश्वर के प्रति लोगों के धन्यवाद को पैदा करेगी।

12 दान की इस पवित्र सेवा से न केवल पवित्र लोगों की आवश्यकताएँ पूरी होती हैं बल्कि परमेश्वर के प्रति अत्यधिक धन्यवाद का भाव भी उपजता है। 13 क्योंकि तुम्हारी इस सेवा से जो प्रमाण प्रकट होता है, उससे संत जन परमेश्वर की स्तुति करेंगे। क्योंकि यीशु मसीह के सुसमाचार में तुम्हारे विश्वास की घोषणा से उत्पन्न हुई तुम्हारी आज्ञाकारिता के कारण और अपनी उदारता के कारण उनके लिये तथा दूसरे सभी लोगों के लिये तुम दान देते हो। 14 और वे भी तुम्हारे लिए प्रार्थना करते हुए तुमसे मिलने की तीव्र इच्छा करेंगे। तुम पर परमेश्वर के असीम अनुग्रह के कारण 15 उस वरदान के लिये जिसका बखान नहीं किया जा सकता, परमेश्वर का धन्यवाद है।

समीक्षा

दान देने के द्वारा अनुग्रह के लिए परमेश्वर को धन्यवाद दिजिए

इस लेखांश में पौलुस हमें उदारता से देने के दस कारण बताते हैं:

  1. दान देना सबसे श्रेष्ठ निवेश है जो आप कर सकते हैं
  • जो थोड़ा बोता है, वह थोड़ा काटेगा भी; और जो बहुत बोता है, वह बहुत काटेगा (व.6): कंजूसी से बोनेवाले को कम जैसी फसल मिलेगीः उदारता से बोनेवाले को ज्यादा फसल मिलेगी (व.6, एम.एस.जी)।
  • यह जीवन में हर चीज पर लागू होता है। परमेश्वर को आप जो कुछ देते हैं, परमेश्वर उसे बढ़ा देते हैं – आपका समय, वरदान, महत्वाकांक्षाएँ और पैसा।
  1. खुशी से दान देना चाहिए
  • हर एक जन जैसा मन में ठाने वैसा ही दान करें; न कुढ़ कुढ़ के और न दबाव से, क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देनेवालों से प्रेम रखता है (व.7)। हर्ष के लिए ग्रीक शब्द है हिलारोस। एच.टी.बी. में हम हमेशा कहते हैं कि हमें आनंद से देना चाहिए! खुशी से देना चाहिए।
  1. दान देने से आर्थिक चिंता चली जाती है
  • पौलुस लिखते हैं, 'परमेश्वर सब प्रकार का अनुग्रह तुम्हें बहुतायत से दे सकता है जिस से हर बात में और हम समय, सब कुछ जो तुम्हें आवश्यक हो, तुम्हारे पास रहे; और हर एक भले काम के लिये तुम्हारे पास बहुत कुछ हो' (व.8)। दान देने का अर्थ अपने आर्थिक उत्तरदायित्व को परमेश्वर को सौंपना नहीं है – बल्कि इसका अर्थ है इसकी चिंता और बोझ परमेश्वर को सौंप देना।
  1. दान देना आपकी 'उन्नति' करता है
  • जब परमेश्वर आपको देने के लिए आमंत्रित करते हैं, तब वह ना केवल आपकी भावनाओं से विनती कर रहे हैं, बल्कि आपके कारण से भी विनती कर रहे हैः 'ताकि तुम हर बात में सब प्रकार की उदारता के लिये जो हमारे द्वारा परमेश्वर का धन्यवाद करवाती है, धनवान किए जाओ' (व.11, ए.एम.पी.)। भौतिक रूप से, उदातरतापूर्वक देने के लिए आपके पास बहुत होगा (व.11)। आपका चरित्र विकसित होगा (व.10)। परमेश्वर की स्तुति होगी (व.11)।
  1. देने से आपका चरित्र बदलता है
  • पौलुस 'आपके सत्यनिष्ठा के फल' के बारे में बताते हैं (व.10ब)। दान देना जीवन में चरित्र को नष्ट करनेवाली सांसारिकता की पकड़ से छुड़ाता है।
  1. दान देना दूसरों को उत्साहित करता है
  • 'तुम हर बात में सब प्रकार की उदारता के लिये जो हमारे द्वारा परमेश्वर का धन्यवाद करवाती है, धनवान किए जाओ क्योंकि इस सेवा को प्रमाण स्वीकार कर वे परमेश्वर की महिमा प्रगट करते हैं' (वव.11ब – 13अ)।
  1. दान देने से लोगों की जरुरत पूरी होती है
  • उदारतापूर्वक देने से दूसरों को आशीष मिलती है और परमेश्वर के लोगों की जरुरत पूरी होती है - 'इस सेवा के पूरा करने से पवित्र लोगों की ओर से परमेश्वर का भी बहुत धन्यवाद होता है' (व.12, एम.एस.जी)।
  1. दान देना सच्चे विश्वास का प्रमाण है
  • उदारतापूर्वक देना आज्ञाकारिता का कार्य है, जिसमें 'मसीह के सुसमाचार की आपकी घोषणा' होनी चाहिए (व.13)। देना भरोसे का एक कार्य है – ऐसा करने के द्वारा आप कह रहे हैं कि यह परमेश्वर हैं, ना कि आप या कोई दूसरा, जो आपकी जरुरतों को पूरा करते हैं।
  1. दान देना आपको चर्च में एक सहायता बना देता है
  • पौलुस कहते हैं 'उनकी और सब की सहायता करने में उदारता प्रगट करते रहते हो' (व.13ब)। उसी तरह से जब आप एक घर या अपार्टमेंट को दूसरों के साथ बाँटते हैं, आप बिलों को भी बाटते हैं, वैसे ही जब आप समुदाय की जरुरतों को पूरा करते हैं, तब आप उस समुदाय के लाभों को प्राप्त करते हैं। उदाहरण के लिए, जब कभी समुदाय के द्वारा कोई व्यक्ति मसीह में आता है, तब आप उस आशीष में सहभागी बनते हैं।
  1. देना, परमेश्वर द्वारा आपको दिए गए वरदान के प्रति एक उत्तर है
  • परमेश्वर ने आपसे इतना प्रेम किया की उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि आप अनंत जीवन पाएँ (यूहन्ना 3:16)। देना, परमेश्वर के अद्भुत अनुग्रह के प्रति हमारा एक उत्तर है। उनका 'अकथनीय वरदान' (2कुरिंथियों 9:15) उनके पुत्र का वरदान है। 'परमेश्वर का धन्यवाद हो, उसके उस दान के लिये जो वर्णन से परे है।' (व.15, एम.एस.जी)।

प्रार्थना

प्रभु, आपके पुत्र, यीशु मसीह के अकथनीय वरदान के लिए आपको धन्यवाद। मेरी सहायता किजिए की आपके अद्भुत अनुग्रह के प्रति उदारता से और अनुग्रह से उत्तर दूँ।

जूना करार

यशायाह 14:1-16:14

इस्राएल घर लौटेगा

14आगे चल कर, यहोवा याकूब पर फिर अपना प्रेम दर्शायेगा। यहोवा इस्राएल के लोगों को फिर चुनेगा। उस समय यहोवा उन लोगों को उनकी धरती देगा। फिर गैर यहूदी लोग, यहूदी लोगों के साथ अपने को जोड़ेंगे। दोनों ही जातियों के लोग एकत्र हो कर याकूब के परिवार के रूप में एक हो जायेंगे। 2 वे जातियाँ इस्राएल की धरती के लिये इस्राएल के लोगों को फिर वापस ले लेंगी। दूसरी जातियों के वे स्त्री पुरुष इस्राएल के दास हो जायेंगे। बीते हुए समय में उन लोगों ने इस्राएल के लोगों को बलपूर्वक अपना दास बनाया था। इस्राएल के लोग उन जातियों को हरायेंगे और फिर इस्राएल उन पर शासन करेगा। 3 यहोवा तुम्हारे श्रम को समाप्त करेगा और तुम्हें आराम देगा। पहले तुम दास हुआ करते थे, लोग तुम्हें कड़ी मेहनत करने को विवश करते थे किन्तु यहोवा तुम्हारी इस कड़ी मेहनत को अब समाप्त कर देगा।

बाबुल के राजा के विषय में एक गीत

4 उस समय बाबुल के राजा के बारे में तुम यह गीत गाने लगोगे:

वह राजा दुष्ट था जब वह हमारा शासक था
किन्तु अब उसके राज्य का अन्त हुआ।
5 यहोवा दुष्ट शासकों का राज दण्ड तोड़ देता है।
यहोवा उनसे उनकी शक्ति छीन लेता है।
6 बाबुल का राजा क्रोध में भरकर लोगों को पीटा करता है।
उस दुष्ट शासक ने लोगों को पीटना कभी बंद नहीं किया।
उस दुष्ट राजा ने क्रोध में भरकर लोगों पर राज किया।
उसने लोगों के साथ बुरे कामों का करना नहीं छोड़ा।
7 किन्तु अब सारा देश विश्राम में है।
देश में शान्ति है।
लोगों ने अब उत्सव मनाना शुरु किया है।
8 तू एक बुरा शासक था,
और अब तेरा अन्त हुआ है।
यहाँ तक की चीड़ के वृक्ष भी प्रसन्न हैं।
लबानोन में देवदार के वृक्ष मगन हैं।
वृक्ष यह कहते हैं, “जिस राजा ने हमें गिराया था।
आज उस राजा का ही पतन हो गया है,
और अब वह राजा कभी खड़ा नहीं होगा।”
9 अधोलोक, यानी मृत्यु का प्रदेश उत्तेजित है क्योंकि तू आ रहा है।
धरती के प्रमुखों की आत्माएँ जगा रहा है।
तेरे लिये अधोलोक है।
अधोलोक तेरे लिये सिंहासन से राजाओं को खड़ा कर रहा है।
तेरी अगुवायी को वे सब तैयार होंगे।
10 ये सभी प्रमुख तेरी हँसी उड़ायेंगे।
वे कहेंगे, “तू भी अब हमारी तरह मरा हुआ है।
तू अब ठीक हम लोगों जैसा है।”
11 तेरे अभिमान को मृत्यु के लोक में नीचे उतारा गया।
तेरे अभिमानी आत्मा की आने की घोषणा तेरी वीणाओं का संगीत करता है।
तेरे शरीर को मक्खियाँ खा जायेंगी।
तू उन पर ऐसे लेटेगा मानों वे तेरा बिस्तर हो।
कीड़े ऐसे तेरी देह को ढक लेंगे मानों कोई कम्बल हों।
12 तेरा स्वरुप भोर के तारे सा था, किन्तु तू आकाश के ऊपर से गिर पड़ा।
धरती के सभी राष्ट्र पहले तेरे सामने झुका करते थे।
किन्तु तुझको तो अब काट कर गिरा दिया गया।
13 तू सदा अपने से कहा करता था कि, “मैं सर्वोच्च परमेश्वर सा बनूँगा।
मैं आकाशों के ऊपर जीऊँगा।
मैं परमेशवर के तारों के ऊपर अपना सिंहासन स्थापित करुँगा।
मैं जफोन के पवित्र पर्वत पर बैठूँगा।
मैं उस छिपे हुए पर्वत पर देवों से मिलूँगा।
14 मैं बादलों के वेदी तक जाऊँगा।
मैं सर्वोच्च परमेश्वर सा बनूँगा।”

15 किन्तु वैसा नहीं हुआ। तू परमेश्वर के साथ ऊपर आकाश में नहीं जा पाया।
तुझे अधोलोक के नीचे गहरे पाताल में ले आया गया।
16 लोग जो तुझे टकटकी लगा कर देखा करते हैं, वे तुझे तेरे लिये सोचा करते हैं।
लोगों को आज यह दिखता है कि तू बस मरा हुआ है,
और लोग कहा करते हैं, “क्या यही वह व्यक्ति है
जिसने धरती के सारे राज्यों में भय फैलाया हुआ है,
17 क्या यह वही व्यक्ति है जिसने नगर नष्ट किये
और जिसने धरती को उजाड़ में बदल दिया
क्या यह वही व्यक्ति है जिसने लोगों को युद्ध में बन्दी बनाया
और उनको अपने घरों में नहीं जाने दिया”
18 धरती का हर राजा शान से मृत्यु को प्राप्त किया।
हर किसी राजा का मकबरा (घर) बना है।
19 किन्तु हे बुरे राजा, तुझको तेरी कब्र से निकाल फेंका दिया गया है।
तू उस शाखा के समान है जो वृक्ष से कट गयी और उसे काट कर दूर फेंक दिया गया।
तू एक गिरी हुई लाश है जिसे युद्ध में मारा गया,
और दूसरे सैनिक उसे रौंदते चले गये।
अब तू ऐसा दिखता है जैसे अन्य मरे व्यक्ति दिखते हैं।
तुझको कफन में लपेटा गया है।
20 बहुत से और भी राजा मरे।
उनके पास अपनी अपनी कब्र हैं।
किन्तु तू उनमें नहीं मिलेगा।
क्योंकि तूने अपने ही देश का विनाश किया।
अपने ही लोगों का तूने वध किया है।
जैसा विनाश तूने मचाया था।

21 उसकी सन्तानों के वध की तैयारी करो।
तुम उन्हें मृत्यु के घाट उतारो क्योंकि उनका पिता अपराधी है।
अब कभी उसके पुत्र नहीं होंगे।
उसकी सन्तानें अब कभी भी संसार को अपने नगरों से नहीं भरेंगी।
तेरी संतानें वैसा करती नहीं रहेगी।
तेरी संतानों को वैसा करने से रोक दिया जायेगा।

22 सर्वशक्तिमान यहोवा ने कहा, “मैं खड़ा होऊँगा और उन लोगों के विरुद्ध लडूँगा। मैं प्रसिद्ध नगर बाबुल को उजाड़ दूँगा। बाबुल के सभी लोगों को मैं नष्ट कर दूँगा। मैं उनकी संतानों, पोते—पोतियों और वंशजों को मिटा दूँगा।” ये सब बातें यहोवा ने स्वयं कही थी।

23 यहोवा ने कहा था, “मैं बाबुल को बदल डालूँगा। उस स्थान में पशुओं का वास होगा, न कि मनुष्यों का। वह स्थान दलदली प्रदेश बन जायेगा। मैं ‘विनाश की झाडू’ से बाबुल को बाहर कर दूँगा।” सर्वशक्तिमान यहोवा ने ये बातें कही थीं।

परमेश्वर अश्शूर को भी दण्ड देगा

24 सर्वशक्तिमान यहोवा ने एक वचन दिया था। यहोवा ने कहा था, “मैं वचन देता हूँ, कि यें बातें ठीक वैसे ही घटेंगी, जैसे मैंने इन्हें सोचा है। ये बातें ठीक वैसे ही घटेंगी जैसी कि मेरी योजना है। 25 मैं अपने देश में अश्शूर के राजा का नाश करुँगा अपने पहाड़ों पर मैं अश्शूर के राजा को अपने पावों तले कुचलूँगा। उस राजा ने मेरे लोगों को अपना दास बनाकर उनके कन्धों पर एक जूआ रख दिया है। यहूदा की गर्दन से वह जूआ उठा लिया जायेगा। उस विपत्ति को उठाया जायेगा। 26 मैं अपने लोगों के लिये ऐसी ही योजना बना रहा हूँ। सभी जातियों को दण्ड देने के लिए, मैं अपनी शक्ति का प्रयोग करुँगा।”

27 यहोवा जब कोई योजना बनाता है तो कोई भी व्यक्ति उस योजना को रोक नहीं सकता! यहोवा लोगों को दण्ड देने के लिये जब अपना हाथ उठाता है तो कोई भी व्यक्ति उसे रोक नहीं सकता।

पलिश्तियों को परमेश्वर का सन्देश

28 यह दुखद सन्देश उस वर्ष दिया गया था जब राजा आहाज की मृत्यु हुई थी।

29 हे, पलिश्तियों के प्रदेशों! तू बहुत प्रसन्न है क्योंकि जो राजा तुझे मार लगाया करता था, आज मर चुका है। किन्तु तुझे वास्तव में प्रसन्न नहीं होना चाहिये। यह सच है कि उसके शासन का अंत हो चुका है। किन्तु उस राजा का पुत्र अभी आकर राज करेगा और वह एक ऐसे साँप के समान होगा जो भयानक नागों को जन्म दिया करता है। यह नया राजा तुम लोगों के लिये एक बड़े फुर्तीले भयानक नाग के जैसा होगा। 30 किन्तु मेरे दीन जन सुरक्षा पूर्वक खाते पीते रह पायेंगे। उनकी संतानें भी सुरक्षित रहेंगी। मेरे दीन जन, सो सकेंगे और सुरक्षित अनुभव करेंगे। किन्तु तुम्हारे परिवार को मैं भूख से मार डालूँगा और तुम्हारे सभी बचे हुए लोग मर जायेंगे।

31 हे नगर द्वार के वासियों, रोओ!
नगर में रहने वाले तुम लोग, चीखो—चिल्लाओ!
पलिश्ती के तुम सब लोग भयभीत होंगे।
तुम्हारा साहस गर्म मोम की भाँति पिघल कर ढल जायेगा।

उत्तर दिशा की ओर देखो!
वहाँ धूल का एक बादल है! देखो,
अश्शूर से एक सेना आ रही है!
उस सेना के सभी लोग बलशाली हैं!
32 वह सेना अपने नगर में दूत भेजेंगे।
दूत अपने लोगों से क्या कहेंगे वे घोषणा करेंगे: “पलिश्ती पराजित हुआ,
किन्तु यहोवा ने सिय्योन को सुदृढ़ बनाया है, और उसके दीन जन वहाँ रक्षा पाने को गये।”

मोआब को परमेश्वर का सन्देश

15यह बुरा सन्देश मोआब के विषय में है।

एक रात मोआब में स्थित आर के नगर का धन सेनाओं ने लूटा।
उसी रात नगर को तहस नहस कर दिया गया।
एक रात मोआब का किर नाम का नगर सेनाओं ने लूटा।
उसी रात वह नगर तहस नहस किया गया।
2 राजा का घराना और दिबोन के निवासी अपना दु:ख रोने को ऊँचे पर पूजास्थलों में चले गये।
मोआब के निवासी नबो और मेदबा के लिये रोते हैं।
उन सभी लोगों ने अपनी दाढ़ी और सिर अपना शोक दर्शाने के लिये मुड़ाये थे।
3 मोआब में सब कहीं घरों और गलियों में,
लोग शोक वस्त्र पहनकर हाय हाय करते हैं।
4 हेशबोन और एलाले नगरों के निवासी बहुत ऊँचे स्वर में विलाप कर रहे हैं।
बहुत दूर यहस की नगरी तक वह विलाप सुना जा सकता है।
यहाँ तक कि सैनिक भी डर गये हैं। वे सैनिक भय से काँप रहे हैं।

5 मेरा मन दु:ख से मोआब के लिये रोता है।
लोग कहीं शरण पाने को दौड़ रहे हैं।
वे सुदूर जोआर में जाने को भाग रहे हैं।
लोग दूर के देश एग्लतशलीशिय्या को भाग रहे हैं।
लोग लूहीत की पहाड़ी चढ़ाई पर रोते बिलखाते हुए भाग रहे हैं।
लोग होरोनैम के मार्ग पर और वे बहुत ऊँचे स्वर में रोते बिलखते हुए जा रहे हैं।
6 किन्तु निम्रीम का नाला ऐसे सूख गया जैसे रेगिस्तान सूखा होता है।
वहाँ सभी वृक्ष सूख गये।
कुछ भी हरा नहीं हैं।
7 सो लोग जो कुछ उनके पास है उसे इकट्ठा करते हैं,
और मोआब को छोड़ते हैं।
उन वस्तुओं को लेकर वे नाले (पाप्लर या अराबा) से सीमा पार कर रहे हैं।

8 मोआब में हर कहीं विलाप ही सुनाई देता है।
दूर के नगर एगलैम में लोग बिलख रहे हैं।
बेरेलीम नगर के लोग विलाप कर रहे हैं।
9 दीमोन नगर का जल खून से भर गया है,
और मैं (यहोवा) दीमोन पर अभी और विपत्तियाँ ढाऊँगा।
मोआब के कुछ निवासी शत्रु से बच गये हैं।
किन्तु उन लोगों को खा जाने को मैं सिंहों को भेजूँगा।

16उस प्रदेश के राजा के लिये तुम लोगों को एक उपहार भेजना चाहिये। तुम्हें रेगिस्तान से होते हुए सिय्योन की पुत्री के पर्वत पर सेला नगर से एक मेमना भेजना चाहिये।

2 अरी ओ मोआब की स्त्रियों,
अर्नोन की नदी को पार करने का प्रयत्न करो।
वे सहारे के लिये इधर— उधर दौड़ रही हैं।
वे ऐसी उन छोटी चिड़ियों जैसी है जो धरती पर पड़ी हुई है जब उनका घोंसला गिर चुका।
3 वे पुकार रही हैं, “हमको सहारा दो!
बताओ हम क्या करें! हमारे शत्रुओं से तुम हमारी रक्षा करो।
तुम हमें ऐसे बचाओ जैसे दोपहर की धूप से धरती बचाती है।
हम शत्रुओं से भाग रहे हैं, तुम हमको छुपा लो।
हम को तुम शत्रुओं के हाथों में मत पड़ने दो।”
4 उन मोआब वासियों को अपना घर छोड़ने को विवश किया गया था।
अत: तुम उनको अपनी धरती पर रहने दो।
तुम उनके शत्रुओं से उनको छुपा लो।
यह लूट रुक जायेगी।
शत्रु हार जायेंगे और ऐसे पुरुष जो दूसरों की हानि करते हैं,
इस धरती से उखड़ेंगे।
5 फिर एक नया राजा आयेगा।
यह राजा दाऊद के घराने से होगा।

वह सत्यपूर्ण, करुण और दयालु होगा।
यह राजा न्यायी और निष्पक्ष होगा।
वह खरे और नेक काम करेगा।
6 हमने सुना है कि मोआब के लोग बहुत अभिमानी और गर्वीले हैं।
ये लोग हिंसक हैं और बड़ा बोले भी।
इनका बड़ा बोल सच्चा नहीं है।
7 समूचा मोआब देश अपने अभिमान के कारण कष्ट उठायेगा।
मोआब के सारे लोग विलाप करेंगे।
वे लोग बहुत दु:खी रहेंगे।
वे ऐसी वस्तुओं की इच्छा करेंगेजैसी उनके पास पहले हुआ करती थीं।
वे कीरहरासत में बने हुए अंजीर के पेंड़ों की इच्छा करेंगे।
8 वे लोग बहुत दु:खी रहा करेंगे क्योंकि हेशबोन के खेत और सिबमा की अँगूर की बेलों में अँगूर नहीं लगा पा रहे हैं।
बाहर के शासकों ने अँगूर की बेलों को काट फेंका है।
याजेर की नगरी से लेकर मरुभूमि में दूर—दूर तक शत्रु की सेनाएँ फैल गयी हैं।
वे समुद्र के किनारे तक जा पहुँची हैं।
9 मैं उन लोगों के साथ विलाप करुँगा जो याजेर और सिबमा के निवासी हैं
क्योंकि अंगूर नष्ट किये गये।
मैं हेशबोन और एलाले के लोगों के साथ शोक करुँगा
क्योंकि वहाँ फसल नहीं होगी।
वहाँ गर्मी का कोई फल नहीं होगा।
वहाँ पर आनन्द के ठहाके भी नहीं होंगे।
10 अंगूर के बगीचे में आनन्द नहीं होगा और न ही वहाँ गीत गाये जायेंगे।
मैं कटनी के समय की सारी खुशी समाप्त कर दूँगा।
दाखमधु बनने के लिये अंगूर तो तैयार है,
किन्तु वे सब नष्ट हो जायेंगे।
11 इसलिए मैं मोआब के लिये बहुत दु:खी हूँ।
मैं कीरहैरेम के लिये बहुत दु:खी हूँ।
मैं उन नगरों के लिये अत्याधिक दु:खी हूँ।
12 मोआब के निवासी अपने ऊँचे पूजा के स्थानों पर जायेंगे।
वे लोग प्रार्थना करने का प्रयत्न करेंगे।
किन्तु वे उन सभी बातों को देखेंगे जो कुछ घट चुकी है,
और वे प्रार्थना करने को दुर्बल हो जायेंगे।

13 यहोवा ने मोआब के बारे में पहले अनेक बार ये बातें कही थीं 14 और अब यहोवा कहता है, “तीन वर्ष में (उस रीति से जैसे किराये का मजदूर समय गिनता है) वे सभी व्यक्ति और उनकी वे वस्तुएँ जिन पर उन्हें गर्व था, नष्ट हो जायेंगी। वहाँ बहुत थोड़े से लोग ही बचेंगे, बहुत से नहीं।”

समीक्षा

अपने जीवन में परमेश्वर के अनुग्रह के लिए परमेश्वर को धन्यवाद दिजिए

दाएश की बुराई को हम कैसे समझाएँ – मसीहों और याज़िदी के सिर काट दिया जाना, क्रूस पर चढ़ा दिया जाना, महिलाओं और बच्चों को दासत्व में बेच दिया जाना? उदाहरण के लिए, विध्वंस, स्टेलिन का विनाश या रवान्डा में नरसंहार को कैसे समझाएँगे?

बाइबल के कुछ लेखांशों में से यह एक है जो शैतान और शैतानी ताकतों के उद्गम के बारे में बताता है।

मखमल के काले कपड़े पर रखने से एक हीरे की सुंदरता अच्छी तरह से दिखाई देती है। बुराई के अंधकार के विरूद्ध परमेश्वर के अनुग्रह की सुंदरता भी पूर्ण महिमा और चमक के साथ दिखाई देती है। भविष्यवक्ता यशायाह परमेश्वर की अद्भुत करुणा के बारे में बताते हैं (14:1)। अंधकारमय पीछे का दृश्य देशभर में होनेवाली बुराई है; विशेष रूप से बेबीलोन की क्रूरता, अत्याचार, सताव और गुलामों का व्यापार।

यशायाह बेबीलोन के पतन का वर्णन करते हैः 'मैं स्वर्ग पर चढूँगा; मैं अपने सिंहासन को ईश्वर के तारांगण से अधिक ऊँचा करूँगा; और उत्तर दिशा की छोर पर सभा के पर्वत पर विराजूँगा, मैं मेघों से भी ऊँचे ऊँचे स्थानों के ऊपर चढूँगा, मैं परमप्रधान के तुल्य हो जाऊँगा। परन्तु तू अधोलोक में उस गड़हे की तह तक उतारा जाएगा,' (वव.12-15)।

यीशु इसी तरह से शैतान के पतन का वर्णन करते हैं (लूका 10:38)। शायद से घमंड और अक्खड़पन के कारण आदम और हव्वा के पतन से पहले एक स्वर्गदूत का पतन हुआ।

लेकिन इस अंधकारमय दृश्य के विपरीत, एक सुंदर हिरे का चिह्न भी है।

'दाँत पीसनेवाला नहीं रहा,
लूट पाट फिर न होगी; क्योंकि देश में से अन्धेर करनेवाले नष्ट हो गए हैं।
 तब दया के साथ एक सिंहासन स्थिर किया जाएगा और उस पर दाऊद के तम्बू में सच्चाई के साथ
वह विराजमान होगा जो सोच विचार करके सच्चा न्याय करेगा और
सत्यनिष्ठा के काम पर तत्पर रहेगा' (यशायाह 16:4ब-5, एम.एस.जी)।

ऐतिहासिक घटनाऍं चाहें जो हों, एक व्यक्ति है जो सिद्ध रूप से इस वर्णन के योग्य है - यीशु मसीह, जो दाऊद के वंश में जन्मा था, जिसने परेमश्वर के प्रेम और उनके न्याय को लाया। शैतान की तरह, 'खुद की इच्छा को' नहीं (14:13,14), यीशु ने अपने आपको नकारा और कहा, 'मेरी इच्छा नहीं, पर आपकी इच्छा पूरी हो' (मत्ती 26:39)।

यीशु मसीह में प्रगट परमेश्वर के अद्भुत अनुग्रह के प्रति एकमात्र उचित उत्तर है - परमेश्वर को धन्यवाद देना अपनी आराधना से, दान से, और अपने संपूर्ण जीवन से और अपना जीवन परमेश्वर को समर्पित करके कहना, 'जो कुछ आप चाहते हैं, मैं वह करने के लिए तैयार हूँ।'

आप जिस किसी चीज का सामना कर रहे हैं, आप भरोसा कर सकते हैं कि परमेश्वर के उद्देश्य अंत में पूरे होंगेः 'क्योंकि सेनाओं के यहोवा ने युक्ति की है और कौन उसको टाल सकता है?' (यशायाह 14:27)।

प्रार्थना

प्रभु, आपको धन्यवाद कि हम प्रभु यीशु मसीह में आपके अद्भुत अनुग्रह, प्रेम और विश्वासयोग्यता का अनुभव करते हैं। आपको धन्यवाद कि वह न्याय करते हैं और सत्यनिष्ठा के काम को तेजी से बढ़ाते हैं। उनकी तरह, मेरी भी सहायता किजिए कि मैं 'गरीबों और जरुरतमंदो की चिंता करुँ' (व.30) और उदारतापूर्वक दूँ।

पिप्पा भी कहते है

2कुरिंथियों 9:6

'जो थोड़ा बोता है, वह थोड़ा काटेगा भी; और जो बहुत बोता है, वह बहुत काटेगा'।

ध्यान पूर्वक एक ही रेखा में एक के बाद एक बीज रखने और ध्यान न देते हुए हर जगह बीज को छितरा देने के बीच यही अंतर है।

मैं थोड़ा सावधानी बरतती हूँ और शायद मुझे और ज्यादा जोखिम उठाने की जरुरत है। मसीह की देह के द्वारा मैंने उद्भुत उदारता का अनुभव किया है कि यह लगातार मुझे चुनौती देता है और मुझे प्रभावित करता है।

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संदर्भ

जहाँ पर कुछ बताया न गया हो, उन वचनों को पवित्र बाइबल, न्यू इंटरनैशनल संस्करण एन्ग्लिसाइड से लिया गया है, कॉपीराइट © 1979, 1984, 2011 बिबलिका, पहले इंटरनैशनल बाइबल सोसाइटी, हूडर और स्टोगन पब्लिशर की अनुमति से प्रयोग किया गया, एक हॅचेट यूके कंपनी सभी अधिकार सुरक्षित। ‘एनआईवी’, बिबलिका यू के का पंजीकृत ट्रेडमार्क संख्या 1448790 है।

जिन वचनों को (एएमपी, AMP) से चिन्हित किया गया है उन्हें एम्प्लीफाइड® बाइबल से लिया गया है. कॉपीराइट © 1954, 1958, 1962, 1964, 1965, 1987 लॉकमैन फाउंडेशन द्वारा प्राप्त अनुमति से उपयोग किया गया है। (www.Lockman.org)

जिन वचनों को (एमएसजी MSG) से चिन्हित किया गया है उन्हें मैसेज से लिया गया है। कॉपीराइट © 1993, 1994, 1995, 1996, 2000, 2001, 2002. जिनका प्रयोग एनएवीप्रेस पब्लिशिंग ग्रुप की अनुमति से किया गया है।

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