दिन 267

यीशु क्या अंतर पैदा करते हैं?

बुद्धि भजन संहिता 110:1-7
नए करार इफिसियों 2:1-22
जूना करार यशायाह 55:1-57:13

परिचय

'मेरा जीवन पूरी तरह से बदल गया है। मैं अब अलग नजरिये से विश्व को देखता हूँ... मैं सभी के प्रति प्रेम महसूस करता हूँ और आंतरिक शांति महसूस करता हूँ जिसे मैं पहले कभी नहीं करता था।'

'मैं अंधकार में जीवन जी रहा था, मैं अपने कंधो पर एक बड़े बोझ को लेकर जा रहा था...वह बोझ चला गया है...और मैं महान आशा, आनंद, उत्साह और प्रेम से भरा हुआ हूँ, और मैं मसीह की सेवा करना चाहता हूँ, जिस किसी तरह से वह चाहते हैं।'

'मुझे लगता है कि मैंने प्रेम पा लिया और एक दिन में मृत्यु पर जय पा ली है।'

मैंने विश्वभर में सैकड़ो लोगों से बातचीत की है, जो यीशु में विश्वास करने लगे थे। प्रश्न जो मैं बार-बार पूछता हूँ, वह है,'यीशु ने क्या अंतर पैदा किया है? और ऊपर दिए गए सच्चे उत्तर नमूने का रूप है। जो अंतर यीशु बनाते हैं वह व्यापक, अनंत, और पूरी तरह से समझना असंभव है।

बुद्धि

भजन संहिता 110:1-7

दाऊद का एक स्तुति गीत।

110यहोवा ने मेरे स्वामी से कहा,
 “तू मेरे दाहिने बैठ जा,
 जब तक कि मैं तेरे शत्रुओं को
 तेरे पाँव की चौकी नहीं कर दूँ।”

2 तेरे राज्य के विकास में यहोवा सहारा देगा। तेरे राज्य का आरम्भ सिय्योन पर होगा,
 और उसका विकास तब तक होता रहेगा, जब तक तू अपने शत्रुओं पर उनके अपने ही देश में राज करेगा।
3 तेरे पराक्रम के दिन तेरी प्रजा के लोग स्वेच्छा वलि बनेंगे।
 तेरे जवान पवित्रता से सुशोभित
 भोर के गर्भ से जन्मी
 ओस के समान तेरे पास है।

4 यहोवा ने एक वचन दिया, और यहोवा अपना मन नहीं बदलेगा: “तू नित्य याजक है।
 किन्तु हारून के परिवार समूह से नहीं।
 तेरी याजकी भिन्न है।
 तू मेल्कीसेदेक के समूह की रीति का याजक है।”

5 मेरे स्वामी, तूने उस दिन अपना क्रोध प्रकट किया था।
 अपने महाशक्ति को काम में लिया था और दूसरे राजाओं को तूने हरा दिया था।
6 परमेश्वर राष्ट्रों का न्याय करेगा।
 परमेश्वर ने उस महान धरती पर शत्रुओं को हरा दिया।
 उनकी मृत देहों से धरती फट गयी थी।

7 राह के झरने से जल पी के ही राजा अपना सिर उठायेगा
 और सचमुच बलशाली होगा!

समीक्षा

अस्थायी क्षमा

यीशु ने हमारे पापो के लिए एक सिद्ध बलिदान के द्वारा क्षमा पाना संभव बनाया। 'राजाओं के राजा' और 'महायाजक' के रूप में, वह ऐसा करने में अद्वितीय रूप से सक्षम थे।

यीशु ने स्पष्ट रूप से दाऊद के इस राजसी भजन को देखा कि यह उनके विषय में बात करता है (व.1, मत्ती 22:42-45; लूका 20:42-44 देखें)। यह नये नियम में अधिकतर दोहराया गया वचन है। पुराने नियम की भविष्यवाणी की दो रेखाएँ इस भजन में एक साथ आती हैं।

  1. राजाओं के राजा

यद्यपि यह एक मानवीय राजा के विषय में है, यह एक दैवीय राजा की ओर संकेत करता है जो सारी वस्तुओं के ऊपर राजा होंगे (भजनसंहिता 110:5)।

  1. महायाजक

इब्रानियों के लेखक ने इस भजन को दोहराया यीशु को संबोधित करते हुए (इब्रानियों 7:17-22 देखें) वह जो मेल्कीसेदेक की रीति पर सर्वदा का याजक है (भजनसंहिता 110:4)। ना तो मेल्कीसेदेक नाही यीशु लेवी थे, लेकिन दोनों याजक थे – वंशावाली के अनुसार नहीं, बल्कि अविनाशी जीवन की सामर्थ के आधार पर (इब्रानियो 7:16)।

जबकि पुराने नियम के याजक स्थायी थे, यीशु का याजकीयपन अस्थायी हैः ' उन्होंने अपने आप को बलिदान चढ़ाकर उसे एक ही बार में पूरा कर दिया' (व.27)। 'आप सर्वदा के लिए याजक हैं' (भजनसंहिता 110:4, एम.एस.जी)।

प्रार्थना

“जितने हथियार तेरी हानि के लिये बनाए जाएं, उन में से कोई सफल न होगा, और, जितने लोग मुद्दई हो कर तुझ पर नालिश करें उन सभों से तू जीत जाएगा। यहोवा के दासों का यही भाग होगा, और वे मेरे ही कारण धर्मी ठहरेंगे, यहोवा की यही वाणी है॥“

नए करार

इफिसियों 2:1-22

मृत्यु से जीवन की ओर

2एक समय था जब तुम लोग उन अपराधों और पापों के कारण आध्यात्मिक रूप से मरे हुए थे 2 जिनमें तुम पहले, संसार के बुरे रास्तों पर चलते हुए और उस आत्मा का अनुसरण करते हुए जीते थे जो इस धरती के ऊपर की आत्मिक शक्तियों का स्वामी है। वही आत्मा अब उन व्यक्तियों में काम कर रही है जो परमेश्वर की आज्ञा नहीं मानते। 3 एक समय हम भी उन्हीं के बीच जीते थे और अपनी पापपूर्ण प्रकृति की भौतिक इच्छाओं को तृप्त करते हुए अपने हृदयों और पापपूर्ण प्रकृति की आवश्यकताओं को पूरा करते हुए संसार के दूसरे लोगों के समान परमेश्वर के क्रोध के पात्र थे।

4 किन्तु परमेश्वर करुणा का धनी है। हमारे प्रति अपने महान् प्रेम के कारण 5 उस समय अपराधों के कारण हम आध्यात्मिक रूप से अभी मरे ही हुए थे, मसीह के साथ साथ उसने हमें भी जीवन दिया (परमेश्वर के अनुग्रह से ही तुम्हारा उद्धार हुआ है।) 6 और क्योंकि हम यीशु मसीह में हैं इसलिए परमेश्वर ने हमें मसीह के साथ ही फिर से जी उठाया और उसके साथ ही स्वर्ग के सिंहासन पर बैठाया। 7 ताकि वह आने वाले हर युग में अपने अनुग्रह के अनुपम धन को दिखाये जिसे उसने मसीह यीशु में अपनी दया के रूप में हम पर दर्शाया है।

8 परमेश्वर के अनुग्रह द्वारा अपने विश्वास के कारण तुम्हारा उद्धार हुआ है। यह तुम्हें तुम्हारी ओर से प्राप्त नहीं हुआ है, बल्कि यह तो परमेश्वर का वरदान है। 9 यह हमारे किये कर्मों का परिणाम नहीं है कि हम इसका गर्व कर सकें। 10 क्योंकि परमेश्वर हमारा सृजनहार है। उसने मसीह यीशु में हमारी सृष्टि इसलिए की है कि हम नेक काम करें जिन्हें परमेश्वर ने पहले से ही इसलिए तैयार किया हुआ है कि हम उन्हीं को करते हुए अपना जीवन बितायें।

मसीह में एक

11 इसलिए याद रखो, वे लोग, जो अपने शरीर में मानव हाथों द्वारा किये गये ख़तने के कारण अपने आपको “ख़तना युक्त” बताते हैं, विधर्मी के रूप में जन्मे तुम लोगों को “ख़तना रहित” कहते थे। 12 उस समय तुम बिना मसीह के थे, तुम इस्राएल की बिरादरी से बाहर थे। परमेश्वर ने अपने भक्तों को जो वचन दिए थे उन पर आधारित वाचा से अनजाने थे। तथा इस संसार में बिना परमेश्वर के निराश जीवन जीते थे। 13 किन्तु अब तुम्हें, जो कभी परमेश्वर से बहुत दूर थे, मसीह के बलिदान के द्वारा मसीह यीशु में तुम्हारी स्थिति के कारण, परमेश्वर के निकट ले आया गया है।

14 यहूदी और ग़ैर यहूदी आपस में एक दूसरे से नफ़रत करते थे और अलग हो गये थे। ठीक ऐसे जैसे उन के बीच कोई दीवार खड़ी हो। किन्तु मसीह ने स्वयं अपनी देह का बलिदान देकर नफ़रत की उस दीवार को गिरा दिया। 15 उसने ऐसा तब किया जब अपने समूचे नियमों और व्यवस्थाओं के विधान को समाप्त कर दिया। उसने ऐसा इसलिए किया कि वह अपने में इन दोनों को ही एक में मिला सकें। और इस प्रकार मिलाप करा दे। क्रूस पर अपनी मृत्यु के द्वारा उसने उस घृणा का अंत कर दिया। और उन दोनों को परमेश्वर के साथ उस एक देह में मिला दिया। 16 और क्रूस पर अपनी मृत्यु के द्वारा वैर भाव का नाश करके एक ही देह में उन दोनों को संयुक्त करके परमेश्वर से फिर मिला दे। 17 सो आकर उसने तुम्हें, जो परमेश्वर से बहुत दूर थे और जो उसके निकट थे, उन्हें शांति का सुसमाचार सुनाया। 18 क्योंकि उसी के द्वारा एक ही आत्मा से परम पिता के पास तक हम दोनों की पहुँच हुई।

19 परिणामस्वरूप अब तुम न अनजान रहे और न ही पराये। बल्कि अब तो तुम संत जनों के स्वदेशी संगी-साथी हो गये हो। 20 तुम एक ऐसा भवन हो जो प्रेरितों और नबियों की नींव पर खड़ा है। तथा स्वयं मसीह यीशु जिसका अत्यन्त महत्त्वपूर्ण कोने का पत्थर है। 21-22 मसीह में स्थित एक ऐसे स्थान की रचना के रूप में दूसरे लोगों के साथ तुम्हारा भी निर्माण किया जा रहा है, जहाँ आत्मा के द्वारा स्वयं परमेश्वर निवास करता है।

समीक्षा

शांति और सामंजस्य

'शांति' एक शब्द है जो उन सभी आशीषों को समाविष्ट करती है जो यीशु हमारे जीवन में लाते हैं। मसीह आये और सभी को 'शांति' की संभावना का समाचार सुनाया (व.17)।

अपने पुनरुत्थान के बाद, यीशु परमेश्वर के दाहिनी ओर जा बैठे हैं, जैसा कि आज के भजन में भविष्यवाणी की गई है (भजनसंहिता 110:1)। बैठना विश्राम और शांति को बताता है। आप मसीह के साथ मर गए, उनके साथ गाड़े गए और उनके साथ जी उठे और अब स्वर्गीय स्थानों में उनके साथ बैठे हुए हैं (इफीसियो 2:6)। आप उनकी शांति और विश्राम का आनंद ले सकते हैं जैसे ही आप प्रतिदिन जीते हैं।

पौलुस इन तरीको से मसीह के बिना जीवन का वर्णन करते हैं:

  • 'अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे' (व.1)

  • 'इस संसार की रीति पर चलते थे' (व.2)

  • 'अपने शरीर की लालसाओं में दिन बिताते थे, और शरीर और मन की इच्छाएँ पूरी करते थे' (व.3अ)

  • 'स्वभाव ही से क्रोध की सन्तान थे ' (व.3ब)

  • 'मसीह से अलग थे' (व.12अ)

  • 'परमेश्वर के मार्गों पर नहीं चलते थे' (व.11 एम.एस.जी)

  • 'प्रतिज्ञा की वाचाओं के भागी नहीं थे ' (व.12ब)

  • 'आशाहीन ' (व.12क)

  • 'जगत में ईश्वररहित थे ' (व.12क)

  • 'दूर थे ' (व.13)

  • 'अलग करने वाली दीवार ' के द्वारा अलग थे (व.14ब)

-'विदेशी और मुसाफिर ' (व.19, एम.एस.जी)

  • इन विपरीत शब्दों में पौलुस उस अंतर का वर्णन करते हैं जो यीशु हमारे जीवन में लाते हैं:

  • 'मसीह यीशु में उनके साथ उठाया गया ' (व.6)

  • 'स्वर्गीय स्थानों में उनके साथ बैठाया ' (व.6)

  • 'परमेश्वर की कार्य कुशलता' (व.10, एन.एल.टी)

  • 'मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहले से हमारे करने के लिये तैयार किया' (व.10)

  • 'मसीह के लहू के द्वारा निकट हो गए हो।' (व.13)

  • 'क्रूस के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल में आ गए' (व.16)

  • 'एक आत्मा में पिता के पास पहुँच होती है' (व.18)

  • 'पवित्र लोगों के संगी स्वदेशी' (व.19)

  • 'परमेश्वर के घराने के हो गए '(व.19)

  • 'परमेश्वर का निवासस्थान बन गए' (व.22)।

पहले वाला अलगाव – अपने आपसे और परमेश्वर से – और शांति और मेलमिलाप जो यीशु लाते हैं, इनके बीच अंतर बड़ा नहीं हो सकता है। यह यीशु हैं जो अंतर पैदा करते हैं। आप मसीह के साथ जिलाए गए (व.5)। आप मसीह के साथ उठाये गए (व.6)। मसीह में विश्वास के द्वारा आपका उद्धार हुआ (व.8)। यीशु के द्वारा एक आत्मा में पिता के पास आप पहुँचते हैं (व.18)। स्वयं यीशु मसीह नये मंदिर, चर्च के सिरे का पत्थर हैं।

इस लेखांश में पौलुस एकमात्र आदेश देते हैं कि इस अद्भुत बदलाव को 'याद रखो' जो यीशु आपके जीवन में लाते हैं (वव.12-13)। अक्सर हम भूल सकते हैं कि मसीह बनना इस विषय में है कि यीशु ने हमारे लिए क्या किया, और जो हम कर रहे हैं उसमें व्यस्त हो सकते हैं। यह भजन आपकी सहायता करता है कि रुके, याद करे और उन सभी चीजों के लिए अपने अद्भुत उद्धारकर्ता को धन्यवाद दे जो कुछ उन्होंने आपके लिए किया है।

प्रार्थना

परमेश्वर, मेरे लिए आपके महान प्रेम के लिए आपका धन्यवाद। आपका धन्यवाद क्योंकि आप मेरे जीवन में महान बदलाव लाते हैं।

जूना करार

यशायाह 55:1-57:13

परमेश्वर ऐसा भोजन देता है जिससे सच्ची तृप्ति मिलती है

55“हे प्यासे लोगों, जल के पास आओ।
 यदि तुम्हारे पास धन हीं है तो इसकी चिन्ता मत करो।
 आओ, खाना लो और खाओ।
 आओ, भोजन लो।
 तुम्हें इसकी कीमत देने की आवश्यकता नहीं है।
 बिना किसी कीमत के दूध और दाखमधु लो।
2 व्यर्थ ही अपना धन ऐसी किसीवस्तु पर क्यों बर्बाद करते हो जो सच्चा भोजन नहीं है
 ऐसी किसी वस्तु के लिये क्यों श्रम करते हो जो सचमुच में तुम्हें तृप्त नहीं करती
 मेरी बात ध्यान से सुनो। तुम सच्चा भोजन पाओगे।
 तुम उस भोजन का आनन्द लोगे।जिससे तुम्हारा मन तृप्त हो जायेगा।
3 जो कुछ मैं कहता हूँ, ध्यान से सुनो।
 मुझ पर ध्यान दो कि तुम्हारा प्राण सजीव हो।
 तुम मेरे पास आओ और मैं तुम्हारे साथ एक वाचा करूँगा जो सदा—सदा के लिये बना रहेगा।
 यह वाचा वैसी ही होगी जैसी वाचा दाऊद के संग मैंने की थी।
 मैंने दाऊद को वचन दिया था कि मैं उस पर सदा करूणा करूँगा
 और तुम उस वाचा के भरोसे रह सकते हो।
4 मैंने अपनी उस शक्ति का दाऊद को साक्षी बनाया था जो सभी राष्ट्रों के लिये थी।
 मैंने दाऊद का बहुत देशों का प्रशासक और उनका सेनापति बनाया था।” 5 अनेक अज्ञात देशों में अनेक अनजानी जातियाँ हैं।
 तू उन सभी जातियों को बुलायेगा, जो जातियाँ तुझ से अपरिचित हैं
 किन्तु वे भागकर तेरे पास आयेंगी। ऐसा घटेगा क्योंकि तेरा परमेश्वर यहोवा ऐसा ही चाहता है।
 ऐसा घटेगा क्योंकि वह इस्राएल का पवित्र तुझको मान देता है।

6 सो तुम यहोवा को खोजो।
 कहीं बहुत देर न हो जाये।
 अब तुम उसको पुकार लो जब तक वह तुम्हारे पास है।
7 हे पापियों! अपने पापपूर्ण जीवन को त्यागो।
 तुमको चाहिये कि तुम बुरी बातें सोचना त्याग दो।
 तुमको चाहिये कि तुम यहोवा के पास लौट आओ।
 जब तुम ऐसा करोगे तो यहोवा तुम्हें सुख देगा।
 उन सभी को चाहिये कि वे यहोवा की शरण में आयें क्योंकि परमेश्वर हमें क्षमा करता है।

लोग परमेश्वर को नहीं समझ पायेंगे

8 यहोवा कहता है, “तुम्हारे विचार वैसे नहीं, जैसे मेरे हैं।
 तुम्हारी राहें वैसी नहीं जैसी मेरी राहें हैं।
9 जैसे धरती से ऊँचे स्वर्ग हैं वैसे ही तुम्हारी राहों से मेरी राहें ऊँची हैं
 और मेरे विचार तुम्हारे विचारों से ऊँचे हैं।”
 ये बातें स्वयं यहोवा ने ही कहीं हैं।

10 “आकाश से वर्षा और हिम गिरा करते हैं
 और वे फिर वहीं नहीं लौट जाते जब तक वे धरती को नहीं छू लेते हैं
 और धरती को गीला नहीं कर देते हैं।
 फिर धरती पौधों को अंकुरित करती है
 और उनको बढ़ाती है और वे पौधे किसानों के लिये बीज को उपजाते हैं
 और लोग उन बीजों से खाने के लिये रोटियाँ बनाते हैं।
11 ऐसे ही मेरे मुख में से मेरे शब्द निकलते हैं
 और जब तक घटनाओं को घटा नहीं लेते, वे वापस नहीं आते हैं।
 मेरे शब्द ऐसी घटनाओं को घटाते हैं जिन्हें मैं घटवाना चाहता हूँ।
 मेरे शब्द वे सभी बातें पूरी करा लेते हैं जिनको करवाने को मैं उनको भेजता हूँ।

12 “जब तुम्हें आनन्द से भरकर शांति और एकता के साथ में उस धरती से छुड़ाकर ले जाया जा रहा होगा जिसमें तुम बन्दी थे, तो तुम्हारे सामने खुशी में पहाड़ फट पड़ेंगे और थिरकने लगेंगे।
 पहाड़ियाँ नृत्य में फूट पड़ेंगी।
 तुम्हारे सामने जंगल के सभी पेड़ ऐसे हिलने लगेंगे जैसे तालियाँ पीट रहे हो।
13 जहाँ कंटीली झाड़ियाँ उगा करती हैं वहाँ देवदार के विशाल वृक्ष उगेंगे।
 जहाँ खरपतवार उगा करते थे, वहाँ हिना के पेड़ उगेंगे।
 ये बातें उस यहोवा को प्रसिद्ध करेंगी।
 ये बातें प्रमाणित करेंगी कि यहोवा शक्तिपूर्णहै।
 यह प्रमाण कभी नष्ट नहीं होगा।”

सभी जातियाँ यहोवा का अनुसरण करेंगी

56यहोवा ने यें बातें कही थीं, “सब लोगों के साथ वही काम करो जो न्यायपूर्ण हों! क्यों क्योंकि मेरा उद्धार शीघ्र ही तुम्हारे पास आने को है। सारे संसार में मेरा छुटकारा शीघ्र ही प्रकट होगा।”

2 ऐसा व्यक्ति जो सब्त के दिन—सम्बन्धी परमेश्वर के नियम का पालन करता है, धन्य होगा और वह वक्ति जो बुरा नहीं करेगा, प्रसन्न रहेगा। 3 कुछ ऐसे लोग जो यहूदी नहीं हैं, अपने को यहोवा से जोड़ेंगे। ऐसे व्यक्तियों को यह नहीं कहना चाहिये: “यहोवा अपने लोगों में मुझे स्वीकार नहीं करेगा।” किसी हिजड़े को यह नहीं कहना चाहिये: “मैं लकड़ी का एक सूखा टुकड़ा हूँ। मैं किसी बच्चे को जन्म नहीं दे सकता।”

4 इन हिजड़ों को एसी बातें नहीं कहनी चाहिये क्योंकि यहोवा ने कहा है “इनमें से कुछ हिजड़े सब्त के नियमों का पालन करते हैं और जो मैं चाहता हूँ, वे वैसा ही करना चाहते हैं। वे सच्चे मन से मेरी वाचा का पालन करते हैं। 5 इसलिये मैं अपने मन्दिर में उनके लिए यादगार का एक पत्थर लगाऊँगा। मेरे नगर में उनका नाम याद किया जायेगा। हाँ! मैं उन्हें पुत्र—पुत्रियों से भी कुछ अच्छा दूँगा। उन हिजड़ों को मैं एक नाम दूँगा जो सदा—सदा बना रहेगा। मेरे लोगों से वे काट कर अलग नहीं किये जायेंगे।”

6 “कुछ ऐसे लोग जो यहूदी नहीं हैं, अपने आपको यहोवा से जोड़ेंगे। वे ऐसा इसलिये करेंगे कि यहोवा की सेवा और यहोवा के नाम को प्रेम कर पायें। यहोवा के सेवक बनने के लिये वे स्वयं को उससे जोड़ लेंगे। वे सब्त के दिन को उपासना के एक विशेष दिन के रूप में माना करेंगे और वे मेरी वाचा (विधान) का गम्भीरता से पालन करेंगे। 7 मैं उन लोगों को अपने पवित्र पर्वत पर लाऊँगा। अपने प्रार्थना भवन में मैं उन्हें आनन्द से भर दूँगा। वे जो भेंट और बलियाँ मुझे अर्पित करेंगे, मैं उनसे प्रसन्न होऊँगा। क्यों क्योंकि मेरा मन्दिर सभी जातियों का प्रार्थना का गृह कहलायेगा।” 8 परमेश्वर ने इस्राएल के देश निकाला दिये इस्राएलियों को परस्पर इकट्ठा किया।

मेरा स्वामी यहोवा जिसने यह किया, कहता है, “मैंने जिन लोगों को एक साथ इकट्ठा किया, उन लोगों के समूह में दूसरे लोगों को भी इकट्ठा करूँगा।”

9 हे वन के पशुओं!
तुम सभी खाने पर आओ।
10 ये धर्म के रखवाले (नबी) सभी नेत्रहीन हैं।
उनको पता नहीं कि वे क्या कर रहे हैं।
वे उस गूँगे कुत्ते के समान हैं
जो नहीं जानता कि कैसे भौंका जाता है वे धरती पर लोटते हैं
और सो जाते हैं। हाय!
उनको नींद प्यारी है।
11 वे लोग ऐसे हैं जैसे भूखें कुत्ते हों।
जिनको कभी भी तृप्ति नहीं होती।
वे ऐसे चरवाहे हैं जिनको पता तक नहीं कि वे क्या कर रहे हैं
वे उस की अपनी उन भेड़ों से हैं जो अपने रास्ते से भटक कर कहीं खो गयी।
वे लालची हैं उनको तो बस अपना पेट भरना भाता है।
12 वे कहा करते हैं,
“आओ थोड़ी दाखमधु ले
और उसे पीयें यव सुरा भरपेट पियें।
हम कल भी यही करेंगे,
कल थोड़ी और अधिक पियेंगे।”

इस्राएल परमेश्वर की नहीं मानता है

57अच्छे लोग चले गये किन्तु
इस पर तो ध्यान किसी ने नहीं दिया।
लोग समझते नहीं हैं कि क्या कुछ घट रहा है।
भले लोग एकत्र किये गये।

लोग समझते नहीं कि विपत्तियाँ आ रही हैं।
उन्हें पता तक नहीं हैं कि भले लोग रक्षा के लिये एकत्र किये गये।
2 किन्तु शान्ति आयेगी
और लोग आराम से अपने बिस्तरों में सोयेंगे और लोग उसी तरह जीयेंगे जैसे परमेश्वर उनसे चाहता है।

3 “हे चुड़ैलों के बच्चों, इधर आओ।
तुम्हारा पिता व्यभिचार का पापी है।
तुम्हारी माता अपनी देह यौन व्यापार में बेचा करती है।
इधर आओ!
4 हे विद्रोहियों और झूठी सन्तानों,
तुम मेरी हँसी उड़ाते हो।
मुझ पर अपना मुँह चिढ़ाते हो।
तुम मुझ पर जीभ निकालते हो।
5 तुम सभी लोग हरे पेड़ों के तले झूठे देवताओं के कारण
कामातुर होते हो।
हर नदी के तीर पर तुम बाल वध करते हो
और चट्टानी जगहों पर उनकी बलि देते हो।
6 नदी की गोल बट्टियों को तुम पूजना चाहते हो।
तुम उन पर दाखमधु उनकी पूजा के लिये चढ़ाते हो।
तुम उन पर बलियों को चढ़ाया करते हो किन्तु तुम उनके बदले बस पत्थर ही पाते हो।
क्या तुम यह सोचते हो कि मैं इससे प्रसन्न होता हूँ नहीं! यह मुझको प्रसन्न नहीं करता है।
तुम हर किसी पहाड़ी और हर ऊँचे पर्वत पर अपना बिछौना बनाते हो।
7 तुम उन ऊँची जगहों पर जाया करते हो
और तुम वहाँ बलियाँ चढ़ाते हो।
8 और फिर तुम उन बिछौने के बीच जाते हो
और मेरे विरूद्ध तुम पाप करते हो।
उन देवों से तुम प्रेम करते हो।
वे देवता तुमको भाते हैं।
तुम मेरे साथ में थे किन्तु उनके साथ होने के लिये तुमने मुझको त्याग दिया।
उन सभी बातों पर तुमने परदा डाल दिया जो तुम्हें मेरी याद दिलाती हैं।
तुमने उनको द्वारों के पीछे और द्वार की चौखटों के पीछे छिपाया
और तुम उन झूठे देवताओं के पास उन के संग वाचा करने को जाते हो।
9 तुम अपना तेल और फुलेल लगाते हो
ताकि तुम अपने झूठे देवता मोलक के सामने अच्छे दिखो।
तुमने अपने दूत दूर—दूर देशों को भेजे हैं
और इससे ही तुम नरक में, मृत्यु के देश में गिरोगे।
10 इन बातों को करने में तूने परिश्रम किया है।
फिर भी तू कभी भी नहीं थका।
तुझे नई शक्ति मिलती रही
क्योंकि इन बातों में तूने रस लिया।
11 तूने मुझको कभी नहीं याद
किया यहाँ तक कि तूने मुझ पर ध्यान तक नहीं दिया!
सो तू किसके विषय में चिन्तित रहा करता था
तू किससे भयभीत रहता था
तू झूठ क्यों कहता था
देख मैं बहुत दिनों से चुप रहता आया हूँ
और फिर भी तूने मेरा आदर नहीं किया।
12 तेरी ‘नेकी’ का मैं बखान कर सकता था और तेरे उन धार्मिक कर्मों का जिनको तू करता है, बखान कर सकता था।
किन्तु वे बातें अर्थहीन और व्यर्थ हैं!
13 जब तुझको सहारा चाहिये तो तू उन झूठे देवों को जिन्हें तूने अपने चारों ओर जुटाया है,
क्यों नहीं पुकारता है।
किन्तु मैं तुझको बताता हूँ कि उन सब को आँधी उड़ा देगी।
हवा का एक झोंका उन्हें तुम से छीन ले जायेगा।
किन्तु वह व्यक्ति जो मेरे सहारे है, धरती को पायेगा।
ऐसा ही व्यक्ति मेरे पवित्र पर्वत को पायेगा।”

समीक्षा

उद्देश्य और अर्थ

बाईबल एक लंबा निमंत्रण है कि परमेश्वर के पास आ जाओ। यह आदम के लिए परमेश्वर की पुकार के साथ शुरु होता है, प्रेम और वेदना से भरा हुआ,'तुम कहां हो?' (उत्पत्ति 3:9)। इसका अंत आत्मा के निमंत्रण और दुल्हन से होता है, जो कहती है,'आओ' (प्रकाशितवाक्य 22:17)।

यीशु ने अक्सर लोगों को आमंत्रित कियाः'मेरे पास आओ' (मत्ती 11:28),'विवाह के दावत में आओ' (22:4),'मेरे पास आओ और पीओ' (यूहन्ना 7:37)। इस अध्याय में, परमेश्वर फिर एक बार आने का आमंत्रण देते हैं।

'आओ सब प्यासे लोगो, पानी के पास आओ; और जिनके पास रुपया न हो, तुम भी आकर मोल लो और पीओ! दाखमधु और दूध बिन रुपए और बिना दाम ही आकर ले लो।' (यशायाह 55:1, एम.एस.जी)।

निमंत्रण तत्पर और यूनिवर्सल है। नया नियम इसे हमारे लिए यीशु के निमंत्रण के रूप में देखता है (प्रेरितों के काम 13:34-35 देखें)। यहाँ पर चार कारण हैं क्योंकि आपको उनके पास आना चाहिएः

  1. केवल यीशु आपके हृदय की भूख को तृप्त कर सकते हैं

यीशु के बिना हम प्यासे हैं (यशायाह 55:1)। हम उनके लिए परिश्रम करते हैं जो तृप्त नहीं करती है (व.2)। आरंभिक वचन उन लोगों की चिल्लाहट को बताता है जो बेबीलोन में अपना माल बेच रहे हैं, प्राचीन विश्व में व्यापार केंद्र। संदेश यह हैः भौतिक चीजें तृप्त नहीं करती हैं। परमेश्वर के बिना हम हमेशा आधे खाली हैं, परिपूर्णता की कमी और असंतुष्टि के एहसास को महसूस करते हुए।

यीशु का प्रस्ताव मुफ्त है। यह आपके लिए है 'जिसके पास पैसा नहीं है' (व.1)। प्रतिज्ञा यह है कि जैसे ही आप यीशु के पास आते हैं,'तुम्हारा प्राण संतुष्ट हो जाता है...तुम जीवित हो जाते हो' (वव.2-3)। जो उनके पास आते हैं वह गहराई से तृप्त हो जाते हैं। परमेश्वर आपको कूड़ा नहीं खिलाते हैं, बल्कि दावत देते हैं। उनका वचन 'जीवन-देने वाला' और 'जीवन को पोषित करने वाला' है (व.2, एम.एस.जी)।

  1. यीशु का प्रेम और दया महान है

परमेश्वर की उपस्थिति का पूरी तरह से आनंद लेने के लिए पश्चाताप आवश्यक है (वव.6-9)। पाप से दूर हो जाईयेः'दुष्ट अपनी चालचलन और अनर्थकारी अपने सोच विचार छोड़कर यहोवा ही की ओर फिरे' (व.7अ)। पछतावे के लिए मुझे चाल्ड की परिभाषा पसंद हैः'रुकने के लिए पर्याप्त क्षमाप्रार्थी होना।'

पश्चाताप में परमेश्वर की ओर फिरना भी शामिल हैः'यहोवा ही की ओर फिरें, वह उन पर दया करेंगे, अपने परमेश्वर की ओर फिरे और वह पूरी रीति से आपको क्षमा करेंगे' (व.7ब)। इससे अंतर नहीं पड़ता है कि आप कितना नीचे गिर गए हैं, परमेश्वर आपको क्षमा करेंगे। वह 'क्षमा करने में उदार' हैं (व.7, एम.एस.जी)।

  1. यीशु जीवन बदलने वाले हैं

'क्योंकि तुम आनन्द के साथ निकलोगे, और शान्ति के साथ पहुँचाए जाओगे; तुम्हारे आगे आगे पहाड़ और पहाड़ियाँ गला खोलकर जयजयकार करेंगी, और मैदान के सब पेड़ आनन्द के मारे ताली बजाएँगे। तब भटकटैयों के बदले सनौवर उगेंगे; और बिच्छू पेड़ों के बदले मेंहदी उगेगी ' (वव.12-13)।

इस लेखांश का अर्थ था बेबीलोन से यहूदियों का निकलना। इस्राएल को बेबीलोन से 'बाहर निकलना' था और 'आनंद' और 'शांति' में यरूशलेम में लौटना था।

किंतु, यीशु मसीह के आगमन तक भविष्यवाणी पूरी नहीं होगी। तब, प्रकृति नई बन जाएगी और सुधर जाएगी। इस जीवन में अब हमारे पास इसकी एक झलक है, लेकिन यें वचन पूरे होंगे जब यीशु नये स्वर्ग और नई पृथ्वी के साथ वापस आयेंगे।

बाईबल केवल मानव जाति की कहानी नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण सृष्टि की कहानी है, जिसमें मानवजाति एक मुख्य और महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

यीशु के पास आपके जीवन के लिए एक उद्देश्य है

परमेश्वर की आशीषें कभी भी स्वार्थी तरीके से आनंद मनाने के लिए नहीं दी गई थी (वव.3ब-5)। वे दूसरों को देने के लिए थी। आप दूसरों को वह नहीं दे सकते हैं जो आपने ग्रहण नहीं किया है। लेकिन जब आपने एक आशीष का आनंद लिया है, तो इसे दूसरों को दीजिए।

जैसा कि पौलुस आज के नये नियम के लेखांश में बताते हैं, आप 'परमेश्वर की कार्यकुशलता' हैं। ' हम उनके बनाए हुए हैं, और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए हैं जिन्हें परमेश्वर ने पहले से हमारे करने के लिये तैयार किया' (इफीसियो 2:10, एन.एल.टी. देखें)। आपके जीवन का एक उद्देश्य है। आपकी कहानी महत्वपूर्ण है। आपके सपने जरुरी हैं। आपकी आवाज से अंतर पड़ता है। आप एक प्रभाव बनाने के लिए पैदा हुए थे।

प्रार्थना

परमेश्वर, आपका धन्यवाद कि आप मुझे जीवन का जल पीने के लिए बुलाते हैं। आपका धन्यवाद उस व्यापक बदलाव के लिए जो आप मेरे जीवन में लाते हैं, अब और अनंतता में।

पिप्पा भी कहते है

इफीसियो 2:10

' हम उनके बनाए हुए हैं, और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहले से हमारे करने के लिये तैयार किया।'

हम भलें कामों को करने के लिए सृजे गए थे। मैं आश्चर्य करती हूँ कि आज परमेश्वर ने मेरे करने के लिए क्या 'पहले से तैयार किया' है।

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संदर्भ

जहाँ पर कुछ बताया न गया हो, उन वचनों को पवित्र बाइबल, न्यू इंटरनैशनल संस्करण एन्ग्लिसाइड से लिया गया है, कॉपीराइट © 1979, 1984, 2011 बिबलिका, पहले इंटरनैशनल बाइबल सोसाइटी, हूडर और स्टोगन पब्लिशर की अनुमति से प्रयोग किया गया, एक हॅचेट यूके कंपनी सभी अधिकार सुरक्षित। ‘एनआईवी’, बिबलिका यू के का पंजीकृत ट्रेडमार्क संख्या 1448790 है।

जिन वचनों को (एएमपी, AMP) से चिन्हित किया गया है उन्हें एम्प्लीफाइड® बाइबल से लिया गया है. कॉपीराइट © 1954, 1958, 1962, 1964, 1965, 1987 लॉकमैन फाउंडेशन द्वारा प्राप्त अनुमति से उपयोग किया गया है। (www.Lockman.org)

जिन वचनों को (एमएसजी MSG) से चिन्हित किया गया है उन्हें मैसेज से लिया गया है। कॉपीराइट © 1993, 1994, 1995, 1996, 2000, 2001, 2002. जिनका प्रयोग एनएवीप्रेस पब्लिशिंग ग्रुप की अनुमति से किया गया है।

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