दिन 275

कैसे एक आशीष देने वाले मशीन बने

बुद्धि भजन संहिता 115:12-18
नए करार फिलिप्पियों 2:12-30
जूना करार यिर्मयाह 2:31-4:9

परिचय

क्या आप कभी आश्चर्य करते हैं कि क्या आप अपने आस-पास के लोगों के जीवन में एक अंतर पैदा कर सकते हैं?

एक बार मैंने ‘द सीक्रेट मिलेनियर’ नामक एक टी.व्ही शो का एक धारावाहिक देखा। केविन ग्रीन –एक गुप्त अरबपति – ऐसे लोग उद्देश्य को खोजते थे जिन्हें मदद मिल पाये उनके द्वारा प्रदान की जाने वाली आर्थिक मदद से। उन्होंने लगभग 60000 पाउंड दिये, ऐसे लोगों को जो बेघर, नशे में फँसे किशोर और अपंग बच्चों के साथ काम करते थे। इन सभी लोगों की प्रतिक्रिया गहराई से छू लेने वाली थी। वे बहुत आभारी थे, और जिस उद्देश्य के लिए वे काम करते थे, उसे महान लाभ पहुँचा। वे आशीषित हुए और दूसरों को महान आशीष देने में सक्षम हुए।

किंतु, प्रोग्राम का सबसे दिलचस्प पहलू था केविन ग्रीन में बदलाव। उन्होंने एक नये तरीके से दूसरों को आशीष देने के आनंद का अनुभव किया था। उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप उनका जीवन बदल गया। यीशु के वचन सच हैं: ’लेने से देना अधिक धन्य है’ (प्रेरितों के काम 20:35)।

सेंट पीटर ब्राईटन के पादरी, आर्की कोट, चर्च को एक ‘आशीष मशीन’ कहते हैं। मसीहों के रूप में हम यही बनने के लिए बुलाए गए हैं - चर्च के रूप में और एक व्यक्ति के रूप में – और आप सच में एक आशीष मशीन बन सकते हैं।

बुद्धि

भजन संहिता 115:12-18

12 यहोवा हमें याद रखता है।
 यहोवा हमें वरदान देगा,
 यहोवा इस्राएल को धन्य करेगा।
 यहोवा हारून के घराने को धन्य करेगा।
13 यहोवा अपने अनुयायिओं को, बड़ोंको
 और छोटों को धन्य करेगा।

14 मुझे आशा है यहोवा तुम्हारी बढ़ोतरी करेगा
 और मुझे आशा है, वह तुम्हारी संतानों को भी अधिकाधिक देगा।
15 यहोवा तुझको वरदान दिया करता है!
 यहोवा ने ही स्वर्ग और धरती बनाये हैं!

16 स्वर्ग यहोवा का है।
 किन्तु धरती उसने मनुष्यों को दे दिया।
17 मरे हुए लोग यहोवा का गुण नहीं गाते।
 कब्र में पड़े लोग यहोवा का गुणगान नहीं करते।
18 किन्तु हम यहोवा का धन्यवाद करते हैं,
 और हम उसका धन्यवाद सदा सदा करेंगे!

यहोवा के गुण गाओ!

समीक्षा

परमेश्वर आशीष मशीन हैं

यह आपके जीवन पर परमेश्वर की आशीष है जो आपको दूसरों के जीवन में एक अंतर पैदा करने में सक्षम बनाती है। परमेश्वर सारी आशीष के स्त्रोत हैं । उन्हें आपको आशीष देना पसंद है। भजनसंहिता के लेखक बार-बार इसे दोहराते हैं। लगातार पाँच बार वह बताते हैं कि कैसे परमेश्वर हमें आशीष देंगे (वव.13ö15)।

परमेश्वर सिर्फ अरबपति नहीं हैं। वह ‘स्वर्ग और पृथ्वी के निर्माता हैं ..स्वर्ग परमेश्वर का है’ (वव.15ब-16अ)। उनकी असाधारण उदारता में, ‘पृथ्वी (हमें) दी गई है’ (व.16ब)।

परमेश्वर आशीष देने से प्रेम करते हैं। आशीष के लिए उचित उत्तर है आभार व्यक्त करनाः’ हम लोग याह को अब से लेकर सर्वदा तक धन्य कहते रहेंगे। याह की स्तुति करो।’ (व.18, एम.एस.जी)।

प्रार्थना

‘परमेश्वर की स्तुति हो’ (व.18क)। परमेश्वर मैं कभी भी आपकी पर्याप्त स्तुति नहीं कर पाऊँगा – आपने मुझे मसीह में सभी आत्मिक आशीष दी हैं (इफीसियो 1:3 देखें)।

नए करार

फिलिप्पियों 2:12-30

परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप बनो

12 इसलिए मेरे प्रियों, तुम मेरे निर्देशों का जैसा उस समय पालन किया करते थे जब मैं तुम्हारे साथ था, अब जबकि मैं तुम्हारे साथ नहीं हूँ तब तुम और अधिक लगन से उनका पालन करो। परमेश्वर के प्रति सम्पूर्ण आदर भाव के साथ अपने उद्धार को पूरा करने के लिये तुम लोग काम करते जाओ। 13 क्योंकि वह परमेश्वर ही है जो उन कामों की इच्छा और उन्हें पूरा करने का कर्म, जो परमेश्वर को भाते हैं, तुम में पैदा करता है।

14 बिना कोई शिकायत या लड़ाई झगड़ा किये सब काम करते रहो, 15 ताकि तुम भोले भाले और पवित्र बन जाओ। तथा इस कुटिल और पथभ्रष्ट पीढ़ी के लोगों के बीच परमेश्वर के निष्कलंक बालक बन जाओ। उन के बीच अंधेरी दुनिया में तुम उस समय तारे बन कर चमको 16 जब तुम उन्हें जीवनदायी सुसंदेश सुनाते हो। तुम ऐसा ही करते रहो ताकि मसीह के फिर से लौटने के दिन मैं यह देख कर कि मेरे जीवन की भाग दौड़ बेकार नहीं गयी, तुम पर गर्व कर सकूँ।

17 तुम्हारा विश्वास एक बलि के रूप में है और यदि मेरा लहू तुम्हारी बलि पर दाखमधु के समान उँडेल दिया भी जाये तो मुझे प्रसन्नता है। तुम्हारी प्रसन्नता में मेरा भी सहभाग है। 18 उसी प्रकार तुम भी प्रसन्न रहो और मेरे साथ आनन्द मनाओ।

तीमुथियुस और इपफ्रुदीतुस

19 प्रभु यीशु की सहायता से मुझे तीमुथियुस को तुम्हारे पास शीघ्र ही भेज देने की आशा है ताकि तुम्हारे समाचारों से मेरा भी उत्साह बढ़ सके। 20 क्योंकि दूसरा कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जिसकी भावनाएँ मेरे जैसी हों और जो तुम्हारे कल्याण के लिये सच्चे मन से चिंतित हो। 21 क्योंकि और सभी अपने-अपने कामों में लगे हैं। यीशु मसीह के कामों में कोई नहीं लगा है। 22 तुम उसके चरित्र को जानते हो कि सुसमाचार के प्रचार में मेरे साथ उसने वैसे ही सेवा की है, जैसे एक पुत्र अपने पिता के साथ करता है। 23 सो मुझे जैसे ही यह पता चलेगा कि मेरे साथ क्या कुछ होने जा रहा है मैं उसे तुम्हारे पास भेज देने की आशा रखता हूँ। 24 और मेरा विश्वास है कि प्रभु की सहायता से मैं भी जल्दी ही आऊँगा।

25 मैं यह आवश्यक समझता हूँ कि इपफ्रुदीतुस को तुम्हारे पास भेजूँ जो मेरा भाई है, साथी कार्यकर्ता है और सहयोगी कर्म वीर है तथा मुझे आवश्यकता पड़ने पर मेरी सहायता के लिये तुम्हारा प्रतिनिधि रहा है, 26 क्योंकि वह तुम सब के लिये व्याकुल रहा करता था और इससे बहुत चिन्तित था कि तुमने यह सुना था कि वह बीमार पड़ गया था। 27 हाँ, वह बीमार तो था, और वह भी इतना कि जैसे मर ही जायेगा। किन्तु परमेश्वर ने उस पर अनुग्रह किया (न केवल उस पर बल्कि मुझ पर भी) ताकि मुझे दुख पर दुख न मिले। 28 इसीलिए मैं उसे और भी तत्परता से भेज रहा हूँ ताकि जब तुम उसे देखो तो एक बार फिर प्रसन्न हो जाओ और मेरा दुःख भी जाता रहे। 29 इसलिए प्रभु में बड़ी प्रसन्नता के साथ उसका स्वागत करो और ऐसे लोगों का आधिकाधिक आदर करते रहो। 30 क्योंकि मसीह के काम के लिये वह लगभग मर गया था ताकि तुम्हारे द्वारा की गयी मेरी सेवा में जो कभी रह गई थी, उसे वह पूरा कर दे, इसके लिये उसने अपने प्राणों की बाजी लगा दी।

समीक्षा

दूसरों के लिए एक आशीष मशीन बनिये

कैसे आप अपने आस-पास के लोगों के जीवन में एक अंतर पैदा कर सकते हैं?

हम ‘परमेश्वर की संतान’ हैं (व.15)। आप अपने स्वर्गीय पिता की तरह बनने के लिए बुलाए गए हैं, जिन्हें आशीष देना पसंद है। आपके पास उत्तरदायित्व है कि अपने उद्धार पर काम करें (यह देखना कि परमेश्वर का अनुग्रह आपके जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित करता है), लेकिन ‘परमेश्वर ही हैं जिन्होंने अपनी सुइच्छा निमित्त तुम्हारे मन में इच्छा और काम, दोनों बातों के करने का प्रभाव डाला है ‘ (व.13)।

बहुत से लोग अपने भविष्य के लिए परमेश्वर पर भरोसा करने में अनिच्छुक हैं क्योंकि उन्हें डर है कि परमेश्वर उनसे वह करवायेंगे जो वह नहीं करना चाहते हैं, या वह जीवन को खराब कर देंगे। निश्चित ही, इन दोनों डर का कोई आधार नहीं है।

यदि आपकी इच्छा उनके प्रति समर्पित है, तो परमेश्वर आपको वह करने की इच्छा देंगे, जो करने के लिए वह आपको बुला रहे हैं। यदि वह आपको गरीबों के साथ एक बुलाहट में बुला रहे हैं, तो वहीं पर आपका हृदय होगा। यदि वह आपको सिखाने के लिए बुला रहे हैं, तो वह आपको सिखाने की इच्छा भी देंगे। यदि आप उनकी इच्छा के प्रति समर्पित होंगे, तो वह ‘अपने अच्छे उद्देश्य’ को पूरा करेंगे (व.13)।

आपके जीवन के लिए वह अच्छा चाहते हैं। यह आवश्यक रूप से सरल नहीं होगा, लेकिन आप उनकी योजना को और सुधार नहीं पायेंगे। उनकी इच्छा आपको वह ऊर्जा भी देती है जिसकी आपको जरुरत हैः ‘वह ऊर्जा परमेश्वर की ऊर्जा है, आपके अंदर एक ऊर्जा,परमेश्वर ही हैं जिन्होंने अपनी सुइच्छा निमित्त तुम्हारे मन में इच्छा और काम, दोनों बातों के करने का प्रभाव डाला है’ (व.13, एम.एस.जी)।

पौलुस एक ‘आशीष मशीन’ बनने के आनंद को जानते हैं। वह लिखते हैं,‘सब काम बिना कुड़कुड़ाए और बिना विवाद के किया करो, ताकि तुम निर्दोष और भोले होकर टेढ़े और हठीले लोगों के बीच परमेश्वर के निष्कलंक सन्तान बने रहो, जिनके बीच में तुम जीवन का वचन लिए हुए जगत में जलते दीपकों के समान दिखाई देते हो’ (वव.14-16अ, एम.एस.जी)।

आपके पास अनंत सुविधा है कि आप लोगों को – ना केवल पैसा – लेकिन ‘जीवन का वचन’ दे सकते हैं (व.16अ)। इससे बड़ा कोई आनंद नहीं कि आत्मिक रूप से मृत लोगों को यीशु के द्वारा जीवित होते हुए देखें।

इस सम्मान के लिए पौलुस आनंद के साथ अपना जीवन देने के लिए तैयार हैं:’यदि मुझे तुम्हारे विश्वास रूपी बलिदान और सेवा के साथ अपना लहू भी बहाना पड़े तब भी मैं आनन्दित हूँ और तुम सब के साथ आनन्द करता हूँ। वैसे ही तुम भी आनन्दित हो और मेरे साथ आनन्द करो’ (वव.17-18)।

फिर पौलुस अपने दो मित्रों का उदाहरण देते हैं, जिन्होंने दर्शाया कि कैसे एक ‘आशीष मशीन’ बनना हैः

  1. दूसरों में सच्ची दिलचस्पी रखो

तीमुथी पौलुस के नजदीकी मित्र थे, और अक्सर उनके पत्रों में उसका उल्लेख किया गया है। उनकी ईमानदारी और सहायता इतनी महान थी कि पौलुस इसका वर्णन ‘पिता के साथ एक पुत्र’ के समान करते हैं (व.22)।

पौलुस अपने मित्र की प्रशंसा करते हैं, ‘वह ईमानदार है, और सच में तुम्हारी चिंता करता है’ (व.20, एम.एस.जी)। पौलुस इसकी तुलना स्वयं में रूचि रखने के अभिशाप से करते हैं, यह कहते हुए, ‘ क्योंकि सब अपने स्वार्थ की खोज में रहते हैं’ (व.21, एम.एस.जी)।

तीमुथियुस एक ‘आशीष मशीन’ थे क्योंकि वह ‘परमेश्वर की संतान की कुशलता में ‘सच्ची दिलचस्पी’ रखते थे (व.20)। तीमुथियुस की दिलचस्पी पूरी तरह से सच्ची थीः ‘वास्तविक वस्तु’ (व.22, एम.एस.जी)। पौलुस कहते हैं कि उसने ‘सुसमाचार के कार्य में मेरे साथ सेवा की’ (व.22)।

  1. दूसरों के पक्ष में साहस दिखाईये

इपफ्रुदीतुस भी पौलुस और फिलिप्पियों का एक ईमानदार मित्र था। उनका सच्चा चरित्र बड़ी और छोटी दोनों ही चीजों में दिखाई देता है, और अक्सर यह छोटी चीजें होती हैं जो बहुत कुछ बताती हैं। गंभीरता से बीमार होने के कारण, यहाँ तक कि वे मरने पर थे, वह परेशान थे, इसलिए नहीं कि वह बीमार थे और मृत्यु के करीब थे, लेकिन इसलिए कि कही उन्हें इस बात के कारण दुख न हो। वह उन लोगों की तरह थे, जो जब बीमार होते थे, तब बीमारी के द्वारा इतने चिंतित नहीं होते थे, जितना कि इस तथ्य के द्वारा कि वह शायद से अपने परिवार या मित्रों के लिए एक बोझ बन जाएँगे।

पौलुस इपफ्रुदीतुस का वर्णन ‘ भाई और सहकर्मी और संगी योध्दा’ के रूप में करते हैं (व.25)। इपफ्रुदीतुस अपने मित्र पौलुस के लिए ‘अपना जीवन खतरे’ में डालने के लिए तैयार थे (व.30)। असल में इस भाव का अनुवाद अधिकाधिक शाब्दिक रूप में ‘अपने जीवन को दाँव पर लगाने’ के रूप में किया गया है।

आरंभिक कलीसिया में पुरुषों और महिलाओं का ऐसा समाज था, जो अपने आपको ‘जुआरी’ कहते थे, जो बीमारो और बंदीगृह में कैदियों की सुधि लेते थे। कार्थज के बिशप, सीप्रेन ने महामारी के दौरान उल्लेखनीय साहस दिखाया। जब हर कोई बीमार और मृतकों से दूर भाग रहा था, सीप्रेन और दूसरे मसीह मृतकों को दफना रहे थे, बीमारो की सेवा कर रहे थे और अपना जीवन दाँव पर लगाकर शहर को बचा रहे थे।

पौलुस के साथ जुड़ने के द्वारा इपफ्रुदीतुस ने अपने जीवन को दाँव पर लगा दिया, पौलुस को मृत्युदंड मिला था और वह बंदीगृह में थे, इसके द्वारा उन पर भी पौलुस के समान दंड का खतरा मंडराता था। पौलुस के लिए इपफ्रुदीतुस ने बहुत साहस दिखाया। वह भी एक ‘आशीष मशीन’ थे।

प्रार्थना

परमेश्वर, मेरी सहायता कीजिए कि हर काम बिना शिकायत या वाद-विवाद के करुँ और आज किसी को जीवन का वचन सुनाउँ।

जूना करार

यिर्मयाह 2:31-4:9

31 इस पीढ़ी के लोगों, यहोवा के सन्देश पर ध्यान दो:

“क्या मैं इस्राएल के लोगों के लिये मरुभूमि सा बन गया?
“क्या मैं उनके लिये अंधेरे और भयावने देश सा बन गया?
मेरे लोग कहते है, ‘हम अपनी राह जाने को स्वतन्त्र हैं,
यहोवा, हम फिर तेरे पास नहीं लौटेंगे!’
वे उन बातों को क्यों कहते हैं?
32 क्या कोई युवती अपने आभूषण भूलती है नहीं।
क्या कोई दुल्हन अपने श्रृंगार के लिए अपना टुपट्टा भूल जाती है नहीं।
किन्तु मेरे लोग मुझे अनगिनत दिनों से भूल गए हैं।

33 “यहूदा, तुम सचमुच प्रेमियों (झूठे देवताओं) के पीछे पड़ना जानते हो।
अत: तुमने पाप करना स्वयं ही सीख लिया है।
34 तुम्हारे हाथ खून से रंगे हैं! यह गरीब और भोले लोगों का खून है।
तुमने लोगों को मारा और वे लोग ऐसे चोर भी नहीं थे जिन्हें तुमने पकड़ा हो!
तुम वे बुरे काम करते हो!
35 किन्तु तुम फिर कहते रहते हो, ‘हम निरपराध हैं।
परमेश्वर मुझ पर क्रोधित नहीं है।’
अत: मैं तुम्हें झूठ बोलने वाला अपराधी होने का भी निर्णय दूँगा।
क्यों क्योंकि तुम कहते हो, “मैंने कुछ भी बुरा नहीं किया है।”
36 तुम्हारे लिये इरादे को बदलना बहुत आसान हैं।
अश्शूर ने तुम्हें हताश किया! अत: तुमने अश्शूर को छोड़ा और सहायता के लिये मिस्र पहुँचे।
मिस्र तुम्हें हताश करेगा।
37 ऐसा होगा कि तुम मिस्र भी छोड़ोगे
और तुम्हारे हाथ लज्जा से तुम्हारी आँखों पर होंगे।
तुमने उन देशों पर विश्वास किया।
किन्तु तुम्हें उन देशों में कोई सफलता नहीं मिलेगी।
क्यों क्योंकि यहोवा ने उन देशों को अस्वीकार कर दिया है।

3“यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी को तलाक देता है,
और वह पत्नी उसे छोड़ देती है तथा अन्य व्यक्ति से विवाह कर लेती है
तो क्या वह व्यक्ति अपनी पत्नी के पास फिर आ सकता है नहीं!
यदि वह व्यक्ति उस स्त्री के पास लौटेगा तो देश पूरी तरह गन्दा हो जाएगा।
यहूदा, तुमने वेश्या की तरह अनेक प्रेमियों (असत्य देवताओं) के साथ काम किये
और अब तुम मेरे पास लौटना चाहते हो!” यह सन्देश यहोवा का था।
2 “यहूदा, खाली पहाड़ी की चोटी को देखो।
क्या कोई ऐसी जगह है जहाँ तुम्हारा अपने प्रेमियों (असत्य देवताओं) के साथ शारीरिक सम्बन्ध न चला
तुम सड़क के किनारे प्रेमियों की प्रतीक्षा करती बैठी हो।
तुम वहाँ मरुभूमि में प्रतीक्षा करते अरब की तरह बैठी।
तुमने देश को गन्दा किया है!
कैसे तुमने बहुत से बुरे काम किये
और तुम मेरी अभक्त रही।
3 तुमने पाप किये अत: वर्षा नहीं आई!
बसन्त समय की कोई वर्षा नहीं हुई।
किन्तु अभी भी तुम लज्जित होने से इन्कार करती हो।
4 किन्तु अब तुम मुझे बुलाती हो।
‘मेरे पिता, तू मेरे बचपन से मेरे प्रिय मित्र रहा है।’
5 तुमने ये भी कहा,
‘परमेश्वर सदैव मुझ पर क्रोधित नहीं रहेगा।
परमेश्वर का क्रोध सदैव बना नहीं रहेगा।’

“यहूदा, तुम यह सब कुछ कहती हो,
किन्तु तुम उतने ही पाप करती हो जितने तुम कर सकती हो।”

6 उन दिनों जब योशिय्याह यहूदा राष्ट्र पर शासन कर रहा था। यहोवा ने मुझसे बातें की। यहोवा ने कहा, “यिर्मयाह, तुमने उन बुरे कामों को देखा जो इस्राएल ने किये तुमने देखा कि उसने कैसे मेरे साथ विश्वासघात किया। उसने हर एक पहाड़ी के ऊपर और हर एक हरे पेड़ के नीच झूठी मूर्तियों की पूजा करके व्यभिचार करने का पाप किया। 7 मैंने अपने से कहा, ‘इस्राएल मेरे पास तब लौटेगी जब वह इन बुरे कामों को कर चुकेगी।’ किन्तु वह मेरे पास लौटी नहीं और इस्राएल की अविश्वासी बहन यहूदा ने देखा कि उसने क्या किया है 8 इस्राएल विश्वासघातिनी थी और यहूदा जानती थी कि मैंने उसे क्यों दूर हटाया। यहूदा जानती थी कि मैंने उसको इसलिए अस्वीकृत किया कि उसने व्यभिचार का पाप किया था। किन्तु इसने उसकी विश्वासघाती बहन को डराया नहीं। यहूदा डरी नहीं। यहूदा भी निकल गई और उसने वेश्या की तरह काम किया। 9 यहूदा ने यह ध्यान भी नहीं दिया कि वह वेश्या की तरह काम कर रही है। अत: उसने अपने देश को ‘गन्दा’ किया। उसने लकड़ी और पत्थर की बनी देवमूर्तियों की पूजा करके व्यभिचार का पाप किया। 10 इस्राएल की अविश्वासी बहन (यहूदा) अपने पूरे हृदय से मेरे पास नहीं लौटी। उसने केवल बहाना बनाया कि वह मेरे पास लौटी है।” यह सन्देश यहोवा का था।

11 यहोवा ने मुझसे कहा, “इस्राएल मेरी भक्त नहीं रही। किन्तु उसके पास कपटी यहूदा की अपेक्षा अच्छा बहाना था। 12 यिर्मयाह, उत्तर की ओर देखो और यह सन्देश बोलो:

“‘अविश्वासी इस्राएल के लोगों तुम लौटो।’
यह सन्देश यहोवा का था।
‘मैं तुम पर भौहे चढ़ाना छोड़ दूँगा, मैं दयासागर हूँ।’
यह सन्देश यहोवा का था।
‘मैं सदैव तुम पर क्रोधित नहीं रहूँगा।’
13 तुम्हें केवल इतना करना होगा कि तुम अपने पापों को पहचानो।
तुम यहोवा अपने परमेश्वर के विरुद्ध गए, यह तुम्हारा पाप है।
तुमने अन्य राष्ट्रों के लोगों की देव मूर्तियों को अपना प्रेम दिया।
तुमने देव मूर्तियों की पूजा हर एक हरे पेड़ के नीचे की।
तुमने मेरी आज्ञा का पालन नहीं किया।”
यह सन्देश यहोवा का था।

14 “अभक्त लोगों, मेरे पास लौट आओ।” यह सन्देश यहोवा का था। “मैं तुम्हारा स्वामी हूँ। मैं हर एक नगर से एक व्यक्ति लूँगा और हर एक परिवार से दो व्यक्ति और तुम्हें सिय्योन पर लाऊँगा। 15 तब मैं तुम्हें नये शासक दूँगा। वे शासक मेरे भक्त होंगे। वे तुम्हारे मार्ग दर्शन ज्ञान और समझ से करेंगे। 16 उन दिनों तुम लोग बड़ी संख्या में देश में होगे।” यह सन्देश यहोवा का है।

“उस समय लोग फिर यह कभी नहीं कहेंगे, ‘मैं उन दिनों को याद करता हूँ जब हम लोगों के पास यहोवा का साक्षीपत्र का सन्दूक था।’ वे पवित्र सन्दूक के बारे में फिर कभी सोचेंगे भी नहीं। वे न तो इसे याद करेंगे और न ही उसके लिये अफसोस करेंगे। वे दूसरा पवित्र सन्दूक कभी नहीं बनाएंगे। 17 उस समय, यरूशलेम नगर ‘यहोवा का सिंहासन’ कहा जाएगा। सभी राष्ट्र एक साथ यरूशलेम नगर में यहोवा के नाम को सम्मान देने आएंगे। वे अपने हठी और बुरे हृदय के अनुसार अब कभी नहीं चलेंगे। 18 उन दिनों यहूदा का परिवार इस्राएल के परिवार के साथ मिल जायेगा। वे उत्तर में एक देश से एक साथ आएंगे। वे उस देश में आएंगे जिसे मैंने उनके पूर्वजों को दिया था।”

19-20 मैंने अर्थात् यहोवा ने अपने से कहा,

“मैं तुमसे अपने बच्चों का सा व्यवहार करना चाहता हूँ,
मैं तुम्हें एक सुहावना देश देना चाहता हूँ।
वह देश जो किसी भी राष्ट्र से अधिक सुन्दर होगा।
मैंने सोचा था कि तुम मुझे ‘पिता’ कहोगे।
मैंने सोचा था कि तुम मेरा सदैव अनुसरण करोगे।
किन्तु तुम उस स्त्री की तरह हुए जो पतिव्रता नहीं रही।
इस्राएल के परिवार, तुम मेरे प्रति विश्वासघाती रहे!”
यह सन्देश यहोवा का था।
21 तुम नंगी पहाड़ियों पर रोना सुन सकते हो।
इस्राएल के लोग कृपा के लिये रो रहे और प्रार्थना कर रहे हैं।
वे बहुत बुरे हो गए थे।
वे अपने परमेश्वर यहोवा को भूल गए थे।

22 यहोवा ने यह भी कहा:
“इस्राएल के अविश्वासी लोगों, तुम मेरे पास लौट आओ।
मेरे पास लौटो, और मैं तुम्हारे अविश्वासी होने के अपराध को क्षमा करूँगा।”

लोगों को कहना चाहिये, “हाँ, हम लोग तेरे पास आएँगे
तू हमारा परमेश्वर यहोवा है।
23 पहाड़ियों पर देवमूर्तियों की पूजा मूर्खता थी।
पर्वतों के सभी गरजने वाले दल केवल थोथे निकले।
निश्चय ही इस्राएल की मुक्ति,
यहोवा अपने परमेश्वर से है।
24 हमारे पूर्वजों की हर एक अपनी चीज बलिरूप में उस घृणित ने खाई है।
यह तब हुआ जब हम लोग बच्चे थे।
उस घृणित ने हमारे पूर्वजों के पशु भेड़, पुत्र, पुत्री लिये।
25 हम अपनी लज्जा में गड़ जायँ, अपनी लज्जा को हम कम्बल की तरह अपने को लपेट लेने दें।
हमने अपने परमेश्वर यहोवा के विरुद्ध पाप किया है।
बचपन से अब तक हमने और हमारे पूर्वजों ने पाप किये हैं।
हमने अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञा नहीं मानी है।”

4यह सन्देश यहोवा का है।
“इस्राएल, यदि तुम लौट आना चाहो,
तो मेरे पास आओ।
अपनी देव मूर्तियों को फेंको।
मुझसे दूर न भटको।
2 यदि तुम वे काम करोगे तो प्रतिज्ञा करने के लिये मेरे नाम का उपयोग करने योग्य बनोगे, तुम यह कहने योग्य होगे,
‘जैसा कि यहोवा शाश्वत है।’
तुम इन शब्दों का उपयोग सच्चे, ईमानदारी भरे और सही तरीके से करने योग्य बनोगे।
यदि तुम ऐसा करोगे तो राष्ट्र यहोवा द्वारा वरदान पाएगा
और वे यहोवा द्वारा किये गए कामों को गर्व से बखान करेंगे।”

3 यहूदा राष्ट्र के मनुष्यों और यरूशलेम नगर से, यहोवा जो कहता है, वह यह है:

“तुम्हारे खेतों में हर नहीं चले हैं।
खेतों में हल चलाओ।
काँटो में बीज न बोओ।
4 यहोवा के लोग बनो, अपने हृदय को बदलो।
यहूदा के लोगों और यरूशलेम के निवासियों, यदि तुम नहीं बदले, तो मैं बहुत क्रोधित होऊँगा।
मेरा क्रोध आग की तरह फैलेगा और मेरा क्रोध तुम्हें जला देगा
और कोई व्यक्ति उस आग को बुझा नहीं पाएगा।
यह क्यों होगा क्योंकि तुमने बुरे काम किये हैं।”
उत्तर दिशा से विध्वंस
5 यहूदा के लोगों में इस सन्देश की घोषणा करो:
यरूशलेम नगर के हर एक व्यक्ति से कहो, “सारे देश में तुरही बजाओ।”
जोर से चिल्लाओ और कहो,
“एक साथ आओ,
हम सभी रक्षा के लिये दृढ़ नगरों को भाग निकलें।”
6 सिय्योन की ओर सूचक ध्वज उठाओ, अपने जीवन के लिये भागो, प्रतीक्षा न करो।
यह इसलिये करो कि मैं उत्तर से विध्वंस ला रहा हूँ।
मैं भयंकर विनाश ला रहा हूँ।
7 एक सिंह अपनी गुफा से निकला है, राष्ट्रों का विध्वंसक तेज कदम बढ़ाना आरम्भ कर चुका है।
वह तुम्हारे देश को नष्ट करने के लिये अपना घर छोड़ चुका है।
तुम्हारे नगर ध्वस्त होंगे।
उनमें रहने वाला कोई व्यक्ति नहीं बचेगा।
8 अत: टाट के कपड़े पहनो, रोओ,
क्यों क्योंकि यहोवा हम पर बहुत क्रोधित है।
9 यह सन्देश यहोवा का है, “ऐसे समय यह होता है।
राजा और प्रमुख साहस खो बैंठेंगे,
याजक डरेंगे,
नबियों का दिल दहलेगा।”

समीक्षा

परमेश्वर की आशीष से दूर मत जाइए

यदि आप परमेश्वर के साथ एक नजदीकी संबंध में चलने की आशीष का अनुभव कर रहे हैं, तो आपके आस-पास के लोग ‘आशीष में जुड़ जाएँगे’ (4:2, एम.एस.जी)।

भविष्यवक्ता यिर्मयाह लोगों को चिताते हैं कि परमेश्वर की ओर फिर जाओ (व.1)। परमेश्वर आपको आशीष देना चाहते हैं। ‘ यदि तू घिनौनी वस्तुओं को मेरे सामने से दूर करे, तो तुझे आवारा फिरना न पड़ेगा, और यदि तू सच्चाई और न्याय और सत्यनिष्ठा से यहोवा के जीवन की शपथ खाए, तो जाति- जाति उसके कारण अपने आपको धन्य कहेंगी, और उसी पर घमण्ड करेंगी’ (वव.1ब-2अ, एम.एस.जी)।

परमेश्वर अपने लोगों और सभी देशों को आशीष देना चाहते थे, लेकिन वे उनकी आशीष से दूर चले गए। यिर्मयाह ने लोगों को परमेश्वर से मुड़कर झूठी मूर्तियों के पास जाने के खतरे के बारे में चेतावनी दी थीः’तू बहुत से लोगों को काटती और चोट पहुँचाती है’ (व.34, एम.एस.जी)। वे विश्वासघाती थे (3:1ब)।

बार-बार परमेश्वर उन्हें लौट आने के लिए चिताते हैं:’ हे भटकने वाली इस्राएल लौट आ...मैं करुणामय हूँ... ‘मै तुम्हें अपने मन के अनुकूल चरवाहे दूँगा, जो ज्ञान और बुध्दि से तुम्हें चराएँगे ... ‘मैंने सोचा था, मैं कैसे तुझे लड़कों में गिनकर वह मनभावना देश दूँ जो सब जातियों के देशों का शिरोमणि है। मैं ने सोचा कि तू मुझे पिता कहेगी, और मुझ से फिर न भटकेगी’ (वव.12,15,19)।

परमेश्वर आपके बाहरी रूप से अधिक आपके हृदय में रूचि रखते हैं। आप परमेश्वर के सामने ढ़ोंग नहीं कर सकते हैं:’’यहूदा पूर्ण मन से मेरी ओर नहीं फिरा, परन्तु कपट से’ (व.10)। परमेश्वर चिताते हैं, ‘ यहोवा के लिये अपना खतना करो; हाँ, अपने मन का खतना करो’ (4:4)। यहॉं तक कि पुराने नियम में, परमेश्वर ने कहा कि उन्हे एक खतना किया हुआ हृदय चाहिए (एक हृदय जो पूरी तरह से उनके प्रति कटिबद्ध है)।

यदि किसी तरह से, आप परमेश्वर से दूर चले गए थे, तो आज अपने पूरे हृदय से उनके पास लौट आईये।

प्रार्थना

परमेश्वर, आज मैं आपको वह सब देता हूँ जो मेरे पास है – संयम, पैसा, संपत्ति और बाकी सबकुछ। आपका धन्यवाद कि आप मुझे आशीष देना चाहते हैं और मेरे द्वारा दूसरों को आशीष देना चाहते हैं। आज मेरी सहायता कीजिए कि एक ‘आशीष मशीन’ बनूं।

पिप्पा भी कहते है

फिलिप्पियो 2:14

‘ सब काम बिना कुड़कुड़ाए और बिना विवाद के किया करो, ताकि तुम निर्दोष और भोले होकर टेढ़े और हठीले लोगों के बीच परमेश्वर की निष्कलंक सन्तान बने रहो, जिनके बीच में तुम जीवन का वचन लिए हुए जगत में जलते दीपकों के समान दिखाई देते हो’

थोड़ा भी कुड़कुड़ाना नहीं चलेगा। और ‘निष्कलंक होने ‘ के मामलें में ...मुझे कुछ चीजों पर काम करना पड़ेगा!

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संदर्भ

जहाँ पर कुछ बताया न गया हो, उन वचनों को पवित्र बाइबल, न्यू इंटरनैशनल संस्करण एन्ग्लिसाइड से लिया गया है, कॉपीराइट © 1979, 1984, 2011 बिबलिका, पहले इंटरनैशनल बाइबल सोसाइटी, हूडर और स्टोगन पब्लिशर की अनुमति से प्रयोग किया गया, एक हॅचेट यूके कंपनी सभी अधिकार सुरक्षित। ‘एनआईवी’, बिबलिका यू के का पंजीकृत ट्रेडमार्क संख्या 1448790 है।

जिन वचनों को (एएमपी, AMP) से चिन्हित किया गया है उन्हें एम्प्लीफाइड® बाइबल से लिया गया है. कॉपीराइट © 1954, 1958, 1962, 1964, 1965, 1987 लॉकमैन फाउंडेशन द्वारा प्राप्त अनुमति से उपयोग किया गया है। (www.Lockman.org)

जिन वचनों को (एमएसजी MSG) से चिन्हित किया गया है उन्हें मैसेज से लिया गया है। कॉपीराइट © 1993, 1994, 1995, 1996, 2000, 2001, 2002. जिनका प्रयोग एनएवीप्रेस पब्लिशिंग ग्रुप की अनुमति से किया गया है।

2011 नोट्स

जे.बी.लाईटफूट, फिलिप्पियों के लिए संत पौलुस की पत्री (जॉन्डर्वन, 1868), पी123

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