दिन 310

परमेश्वर के वायदे

बुद्धि भजन संहिता 119:161-168
नए करार इब्रानियों 6:13-7:10
जूना करार यहेजकेल 7:1-9:11

परिचय

1794 में जन्मे, बिली ब्रे कार्नवाल से एक मजदूर थे। वह एक शराबी थे। वह घर में हमेशा लड़ते और विवाद करते थे। उन्तीस वर्ष की उम्र में उनकी मुलाकात यीशु से हुई। वह घर गए और अपनी पत्नी से कहा, 'परमेश्वर की सहायता से तुम फिर कभी मुझे शराब पीते हुए नहीं देखोगी।' उन्होंने उन्हें फिर कभी पीते हुए नहीं देखा।

उनके वचनो में, उनकी आवाज की सुर और उनके चेहरे में आकर्षित करने वाली सामर्थ थी। ऐसा था जैसे उन्हें दैवीय विद्युतीय ऊर्जा दी गई हो। मिल के मजदूर आते थे और उन्हें प्रचार करते हुए सुनते थे। बहुतों ने विश्वास किया और वहाँ पर उल्लेखनीय चंगाईयाँ हुई। वह बाईबल से प्रेम करते थे और उन्होंने कहा, 'परमेश्वर के वायदें किसी दिन में तैयार पैसे जितने ही अच्छे होते हैं।'

परमेश्वर, वायदे के परमेश्वर हैं। विश्वास में परमेश्वर के वायदे पर भरोसा करना शामिल है। परमेश्वर वायदा करते हैं; विश्वास इसे मानता है, आशा इसकी प्रत्याशी करती है, धीरज शांति से इसका इंतजार करता है।

बुद्धि

भजन संहिता 119:161-168

शाईन्

161 शक्तिशाली नेता मुझ पर व्यर्थ ही वार करते हैं,
 किन्तु मैं डरता हूँ और तेरे विधान का बस मैं आदर करता हूँ।
162 हे यहोवा, तेरे वचन मुझ को वैसे आनन्दित करते हैं,
 जैसा वह व्यक्ति आनन्दित होता है, जिसे अभी—अभी कोई महाकोश मिल गया हो।
163 मुझे झूठ से बैर है! मैं उससे घृणा करता हूँ!
 हे यहोवा, मैं तेरी शिक्षाओं से प्रेम करता हूँ।
164 मैं दिन में सात बार तेरे उत्तम विधान के कारण
 तेरी स्तुति करता हूँ।
165 वे व्यक्ति सच्ची शांती पायेंगे, जिन्हें तेरी शिक्षाएँ भाती हैं।
 उसको कुछ भी गिरा नहीं पायेगा।
166 हे यहोवा, मैं तेरी प्रतीक्षा में हूँ कि तू मेरा उद्धार करे।
 मैंने तेरे आदेशों का पालन किया है।
167 मैं तेरी वाचा पर चलता रहा हूँ।
 हे यहोवा, मुझको तेरे विधान से गहन प्रेम है।
168 मैंने तेरी वाचा का और तेरे आदेशों का पालन किया है।
 हे यहोवा, तू सब कुछ जानता है जो मैंने किया है।

समीक्षा

परमेश्वर के वायदे में आनंद, संतुष्टि और शांति पाइए

भजनसंहिता के लेखक कहते हैं, 'तेरी व्यवस्था से प्रीति रखने वालों को बड़ी शान्ति मिलती है; और उनको ठोकर नहीं लगती' (व.165)। मुझे याद है एक युवा नास्तिक जो अल्फा में आयी और कहा कि वह अपने जीवन में खालीपन और व्यर्थता को महसूस करती है। मसीहों के विषय में उसने इस बात पर ध्यान दिया था कि उनके पास महान शांति थी। उसने पहचाना कि यह विश्वास से आया था।

अंतिम स्थान जहाँ से लोग शांति, संतुष्टि और आनंद को पाने की आशा करते हैं, वह है बाईबल के वचन। तब भी भजनसंहिता के लेखक कहते हैं, 'जैसे कोई बड़ी लूट पाकर हर्षित होता है, वैसे ही मैं तेरे वचन के कारण हर्षित हूँ' (व.162)।

परमेश्वर के वचन का वर्णन करने के लिए भजनसंहिता के लेखक बहुत से विभिन्न वचनों का इस्तेमाल करते हैं। वह कहते हैं 'तेरा वचन' (व.161), 'तेरा नियम' (वव.163,165), 'तेरी आज्ञाएँ' (व.166), 'तेरे उपदेश' (वव.167,168) और 'तेरी चितौनियाँ' (व.168)। लेकिन यहाँ पर वह परमेश्वर के वचन को 'तेरा वायदा' कहते हैं (व.162)।

परमेश्वर का वचन आपके लिए उनका वायदा है। उन्हें पाना एक बड़े खजाने को पाने जैसा है। जैसे ही आप निरंतर इसमें खोदते रहते हैं, वैसे ही आप और अधिकाधिक अद्भुत और सुंदर खजानों को पायेंगे। इसके कारण भजनसंहिता के लेखक कहते हैं, 'मैं प्रतिदिन सात बार तेरी स्तुति करता हूँ' (व.164)।

प्रार्थना

प्रभु, मैं आपकी स्तुति करता हूँ उन महान खजानों के लिए जो आपके वचनों में हैं। कृपया आज मुझे शांति दीजिए जैसे ही मैं आपके वायदे पर भरोसा करता हूँ।

नए करार

इब्रानियों 6:13-7:10

13 जब परमेश्वर ने इब्राहीम से प्रतिज्ञा की थी, तब स्वयं उससे बड़ा कोई और नहीं था, जिसकी शपथ ली जा सके, इसलिए अपनी शपथ लेते हुए वह 14 कहने लगा, “निश्चय ही मैं तुझे आशीर्वाद दूँगा तथा मैं तुझे अनेक वंशज दूँगा।” 15 और इस प्रकार धीरज के साथ बाट जोहने के बाद उसने वह प्राप्त किया, जिसकी उससे प्रतिज्ञा की गयी थी।

16 लोग उसकी शपथ लेते हैं, जो कोई उनसे महान होता है और वह शपथ सभी तर्क-वितर्को का अन्त करके जो कुछ कहा जाता है, उसे पक्का कर देती है। 17 परमेश्वर इसे उन लोगों के लिए, पूरी तरह स्पष्ट कर देना चाहता था, जिन्हें उसे पाना था, जिसे देने की उसने प्रतिज्ञा की थी कि वह अपने प्रयोजन को कभी नहीं बदलेगा। इसलिए अपने वचन के साथ उसने अपनी शपथ को जोड़ दिया। 18 तो फिर यहाँ दो बातें हैं-उसकी प्रतिज्ञा और उसकी शपथ-जो कभी नहीं बदल सकतीं और जिनके बारे में परमेश्वर कभी झूठ नहीं कह सकता।

इसलिए हम जो परमेश्वर के निकट सुरक्षा पाने को आए हैं और जो आशा उसने हमें दी है, उसे थामे हुए हैं, अत्यधिक उत्साहित हैं। 19 इस आशा को हम आत्मा के सुदृढ़ और सुनिश्चित लंगर के रूप में रखते हैं। यह परदे के पीछे भीतर से भीतर तक पहुँचती है। 20 जहाँ यीशु ने हमारी ओर से हम से पहले प्रवेश किया। वह मिलिकिसिदक की परम्परा में सदा सर्वदा के लिए प्रमुख याजक बन गया।

याजक मिलिकिसिदक

7यह मिलिकिसिदक सालेम का राजा था और सर्वोच्च परमेश्वर का याजक था। जब इब्राहीम राजाओं को पराजित करके लौट रहा था तो वह इब्राहीम से मिला और उसे आशीर्वाद दिया। 2 और इब्राहीम ने उसे उस सब कुछ में से जो उसने युद्ध में जीता था उसका दसवाँ भाग प्रदान किया।

उसके नाम का पहला अर्थ है, “धार्मिकता का राजा” और फिर उसका यह अर्थ भी है, “सालेम का राजा” अर्थात् “शांति का राजा।” 3 उसके पिता अथवा उसकी माँ अथवा उसके पूर्वजों का कोई इतिहास नहीं मिलता है। उसके जन्म अथवा मृत्यु का भी कहीं कोई उल्लेख नहीं है। परमेश्वर के पुत्र के समान ही वह सदा-सदा के लिए याजक बना रहता है।

4 तनिक सोचो, वह कितना महान था। जिसे कुल प्रमुख इब्राहीम तक ने अपनी प्राप्ति का दसवाँ भाग दिया था। 5 अब देखो व्यवस्था के अनुसार लेवी वंशज जो याजक बनते हैं, लोगों से अर्थात् अपने ही बंधुओं से दसवाँ भाग लें। यद्यपि उनके वे बंधु इब्राहीम के वंशज हैं। 6 फिर भी मिलिकिसिदक ने, जो लेवी वंशी भी नहीं था, इब्राहीम से दसवाँ भाग लिया। और उस इब्राहीम को आशीर्वाद दिया जिसके पास परमेश्वर की प्रतिज्ञाएँ थीं। 7 इसमें कोई सन्देह नहीं है कि जो आशीर्वाद देता है वह आशीर्वाद लेने वाले से बड़ा होता है।

8 जहाँ तक लेवियों का प्रश्न है, उनमें दसवाँ भाग उन व्यक्तियों द्वारा इकट्ठा किया जाता है, जो मरणशील हैं किन्तु मिलिकिसिदक का जहाँ तक प्रश्न है दसवाँ भाग उसके द्वारा एकत्र किया जाता है जो शास्त्र के अनुसार अभी भी जीवित है। 9 तो फिर कोई यहाँ तक कह सकता है कि वह लेवी जो दसवाँ भाग एकत्र करता है, उसने इब्राहीम के द्वारा दसवाँ भाग प्रदान कर दिया। 10 क्योंकि जब मिलिकिसिदक इब्राहीम से मिला था, तब भी लेवी अपने पूर्वजों के शरीर में वर्तमान था।

समीक्षा

परमेश्वर के वायदे पर भरोसा कीजिए और धीरज के साथ इंतजार कीजिए

अब्राहम ने 25वर्ष इंतजार किया। युसूफ ने 13वर्ष इंतजार किया। मूसा ने 25 वर्ष इंतजार किया। यीशु ने 30 वर्ष इंतजार किया। यदि परमेश्वर आपसे इंतजार करवाते हैं तो आप अच्छे स्थान में हैं।

मैंने अक्सर पाया है कि परमेश्वर का वायदा और इसकी परिपूर्णता के बीच बहुत बड़ा समय होता है, मेरी आशा से भी अधिक। मैं और अधिक धैर्यवान होना सीख रहा हूँ। हमारे लिए परमेश्वर का वायदा हमारे प्राणों का लंगर है, जो स्थिर और दृढ़ है (6:19)। वे स्थिर और दृढ है। वह अपने वचन को पूरा करते हैं, यहाँ तक कि जब यह असंभव लगता है, यहाँ तक कि जब परिस्थितियाँ विपरीत लगती हैं। देरी परमेश्वर के वायदे को नकारात्मक नहीं बनाती है।

अब्राहम का वर्णन e'जिसे प्रतिज्ञाएँ मिली थी' के रूप में किया गया है (7:6)। जब परमेश्वर ने अब्राहम और सारा को बुलाया, तब उन्होंने वायदा किया कि उनसे एक महान जाति निकलेगी। उन्होंने उनसे संतान देने का वायदा किया। लेकिन वायदे के पूरा होने से पहले उन्हें सालों इंतजार करना पड़ा। वे इंतजार करते रहे। मानवीय माध्यम के द्वारा परमेश्वर के वायदे को पूरा करने के लिए वे गलत रास्ते पर चले गए। किंतु, आखिरकार, 'यहोवा ने जैसा कहा था वैसा ही सारा की सुधि ले कर उनके साथ अपने वचन के अनुसार किया' (उत्पत्ति 21:1)। अब्राहम सौ वर्ष का था! अंत में, परमेश्वर ने अपने वायदे को पूरा कियाः ' इस रीति से उसने धीरज धरकर प्रतिज्ञा की हुई बात प्राप्त की' (इब्रानियो 6:15)।

परमेश्वर के वायदे पूरी तरह से निश्चित हैं:'मनुष्य तो अपने से किसी बड़े की शपथ खाया करते हैं, और उनके हर एक विवाद का फैसला शपथ से पक्का होता है। इसलिये जब परमेश्वर ने प्रतिज्ञा के वारिसों पर और भी साफ रीति से प्रकट करना चाहा कि उनका उद्देश्य बदल नहीं सकता, तो शपथ को बीच में लाए' (वव.16-17, एम.एस.जी)।

हमारी आशा किसी अस्पष्ट आशावादीता या कामना पर आधारित नहीं है। यह परमेश्वर के न टूटने वाले वायदे पर भरोसा है। यह यीशु पर केंद्रित है, जो 'मलिकीसिदक की रीति पर सदा काल के महायाजक हैं' (व.20)। उत्पत्ति में पता नहीं कहाँ से मलिकीसिदक आ जाते हैं और हम नहीं जानते कि बाद में उनके साथ क्या हुआ। वह मसीह की परछाई थेः'जिसका न पिता, न माता, न वंशावली है, जिसके दिनों का न आदि है और न जीवन का अन्त है; परन्तु परमेश्वर के पुत्र के स्वरूप ठहर कर वह सदा के लिये याजक बने रहते हैं' (7:3, ए.एम.पी)।

लेखक किसी भी दूसरे याजक (लेवी) से बढ़कर यीशु (मलिकीसिदक) की वरिष्ठता को दर्शाते हैं (वव.1-10)।

मलिकीसिदक की रीति पर याजक, यीशु शांति के एक सत्यनिष्ठ राजा हैं। मलिकीसिदक नाम का अर्थ है 'सत्यनिष्ठा का राजा' और वह 'सालेम के राजा' भी थे, जिसका अर्थ है 'शांति के राजा' (व.2)।

यीशु की याजकीय सेवकाई सर्वदा बनी रहती है। मलिकीसिदक के 'जीवन का कोई अंत' लिखा हुआ नहीं है (वव.3,8)। इसी तरह से, यीशु सर्वदा के लिए एक जीवित याजक हैं। भजनसंहिता 110 भी घोषणा करता है कि प्रभु 'मलिकीसिदक की रीति पर सर्वदा के लिए एक याजक हैं' (व.4)।

यीशु ने (मलिकीसिदक) ने अब्राहम से दसमांश लिया (इब्रानियो 7:4)। अब्राहम के इस सहज उपहार ने दर्शाया कि वह मलिकीसिदक के सामने अपनी तुच्छता को समझते थे। लेवी अब्राहम के परपोते थे। बाईबल में एक वारिस को माना जाता है कि उसमें उसे सभी वंश होंगे (वव.9-10)। इसलिए, यीशु की याजकीय सेवकाई (मलिकीसिदक) लेवी याजकीय सेवकाई से बड़े दर्जे का आनंद लेता है।

मलिकीसिदक ने अब्राहम को एक आशीष दी (वव.6-7)। परमेश्वर ने वायदा किया था कि अब्राहम में विश्व के सभी देश आशीष पायेंगे (उत्पत्ति 22:18)। इसलिए, यदि मलिकीसिदक अब्राहम को आशीष दे सके, तो मलिकीसिदक अवश्य ही लेवी व्यवस्था से ऊपर थे (इब्रानियो 7:7)।

'मलिकीसिदक की रीति पर' यीशु की याजकीय सेवकाई हमें याद दिलाती है कि हम भरोसा कर सकते हैं कि परमेश्वर के वायदे पूरी तरह से सुरक्षित हैं। यीशु ने हमारे लिए उनकी गारंटी दी 'हमारे लिए' उस स्थान में जाकर जहाँ हम नहीं जा सकते थे। ' मलिकीसिदक की रीति पर सदा काल का महायाजक हैं' (6:20)।

प्रार्थना

परमेश्वर, आपका धन्यवाद कि कभी कभी मुझे धीरज से इंतजार करना पड़ता है, आप हमेशा अपने वायदे को पूरा करते हैं – वे स्थिर और सुरक्षित हैं – मेरे प्राणों का एक लंगर।

जूना करार

यहेजकेल 7:1-9:11

7तब यहोवा का वचन मुझे मिला। 2 उसने कहा, “मनुष्य के पुत्र, अब मेरे स्वामी यहोवा का यह सन्देश है। यह सन्देश इस्राएल देश के लिये है:

 “अन्त!
  अन्त आ गया है।
 पूरा देश नष्ट हो जायेगा।
3 अब तुम्हारा अन्त आ गया है!
 मैं दिखाऊँगा कि मैं तुम पर कितना क्रोधित हूँ।
  मैं तुम्हें उन बुरे कामों के लिये दण्ड दूँगा जो तुमने किये।
 जो भयंकर काम तुमने किये उनके लिए मैं तुमसे भुगतान कराऊँगा।
4 मैं तुम्हारे ऊपर तनिक भी दया नहीं करूँगा।
 मैं तुम्हारे लिये अफसोस नहीं करूँगा।
  मैं तुम्हें तुम्हारे बुरे कामों के लिये दण्ड दे रहा हूँ।
 तुमने भयानक काम किये हैं।
  अब तुम समझ जाओगे कि मैं यहोवा हूँ।”

5 मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कहीं। “एक के बाद एक विपत्तियाँ आयेंगी! 6 अन्त आ रहा है और यह बहुत जल्दी आयेगा! 7 इस्राएल के तुम लोगों, क्या तुमने सीटी सुनी है शत्रु आ रहा है। वह दण्ड का समय शीघ्र आ रहा है! शत्रुओं का शोरगुल पर्वतों पर अधिकाधिक बढ़ता जा रहा है। 8 मैं शीघ्र ही दिखा दूँगा कि मैं कितना क्रोधित हूँ। मैं तुम्हारे विरुद्ध अपने पूरे क्रोध को प्रकट करुँगा। मैं उन बुरे कामों के लिये दण्ड दूँगा जो तुमने किये। मैं उन सभी भयानक कामों के लिये तुमसे भुगतान कराऊँगा जो तुमने किये। 9 मैं तुम पर तनिक भी दया नहीं करूँगा मैं तुम्हारे लिये अफसोस नहीं करूँगा। मैं तुम्हें तुम्हारे बुरे कामों के लिये दण्ड दे रहा हूँ। तुमने जो भयानक काम किये है, अब तुम जानोगे कि मैं यहोवा हूँ और मैं दण्ड भी देता हूँ।

10 “दण्ड का वह समय आ गया। क्या तुम सीटी सुन रहे हो परमेश्वर ने संकेत दिया है। दण्ड आरम्भ हो रहा है। डाली अंकुरित होने लगी है। घमण्डी राजा (नबूकदनेस्सर) पहले से अधिक शक्तिशाली होता जा रहा था। 11 वह हिसंक व्यक्ति उन बुरे लोगों को दण्ड देने के लिये तैयार है। इस्राएल में लोगों की संख्या बहुत है, किन्तु वह उनमें से नहीं है। वह उस भीड़ का व्यक्ति नहीं है। वह उन लोगों में से कोई महत्वपूर्ण प्रमुख नहीं है।

12 “वह दण्ड का समय आ गया है। वह दिन आ पहुँचा। जो लोग चीजें खरीदते हैं, प्रसन्न नहीं होंगे और जो लोग चीजें बेचते हैं, वे उन्हें बेचने में बुरा नहीं मानेंगे। क्यों क्योंकि वह भयंकर दण्ड हर एक व्यक्ति के लिये होगा। 13 जो लोग अपनी स्थायी सम्पत्ति बेचेंगे वे उसे कभी नहीं पाएंगे। यदि कोई व्यक्ति जीवित भी बचा रहेगा तो भी वह अपनी स्थायी सम्पत्ति वापस नहीं पा सकता। क्यों क्योंकि यह दर्शन लोगों के पूरे समूह के लिये है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति जीवित भी बच निकलता है, तो भी लोग इससे अधिक संतुष्ट नहीं होंगे।

14 “वे लोगों को चेतावनी देने के लिये तुरही बजाएंगे। लोग युद्ध के लिये तैयार होंगे। किन्तु वे युद्ध करने के लिये नहीं निकलेंगे। क्यों क्योंकि मैं पूरे जन—समूह को दिखाऊँगा कि मैं कितना क्रोधित हूँ। 15 तलवार लिये हुए शत्रु नगर के बाहर हैं। रोग और भूख नगर के भीतर हैं। यदि कोई युद्ध के मैदान में जाएगा तो शत्रु के सैनिक उसे मार डालेंगे। यदि वह नगर में रहता हैं तो भूख और रोग उसे नष्ट करेंगे।

16 “किन्तु कुछ लोग बच निकलेंगे। वे बचे लोग भाग कर पहाड़ों में चल जाएंगे। किन्तु वे लोग सुखी नहीं होंगे। वे अपने पापों के कारण दुःखी होंगे। वे चिल्लायेंगे और कबूतरों की तरह दुःख—भरी आवाज़ निकालेंगे। 17 लोग इतने थके और खिन्न होंगे कि बाहें भी नहीं उठा पाएंगे। उनके पैर पानी की तरह ढीले होंगे। 18 वे शोक—वस्त्र पहनेंगे और भयभीत रहेंगे। तुम हर मुख पर ग्लानि पाओगे। वे (शोक प्रदर्शन के लिये) अपने बाल मुड़वा लेंगे। 19 वे अपनी चाँदी की देव मूर्तियों को सड़कों पर फेक देंगे। वे अपने सोने की देवमूर्तियों को गन्दे चीथड़ो की तरह समझेंगे! क्यों क्योंकि जब यहोवा ने अपना क्रोध प्रकट किया वे मूर्तियाँ उन्हें बचा न सकीं। वे मूर्तियाँ लोगों के लिए पतन (पाप) के जाल के अतिरिक्त अन्य कुछ नहीं थी। वे मूर्तियाँ लोगों को भोजन नहीं देंगी वे मूर्तियाँ उनके पेट में अन्न नहीं पहुँचायेंगी।

20 “उन लोगों ने अपने सुन्दर आभूषण का उपयोग किया और मूर्ति बनाई। उन्हें अपनी मूर्ति पर गर्व था। उन्होंने अपनी भयानक मूर्तियाँ बनाई। उन लोगों ने उन गन्दी चीजों को बनाया। इसलिये मैं (परमेश्वर) उन्हें गन्दें चिथड़े की तरह फेंक दूँगा। 21 मैं उन्हें अजनबियों को लेने दूँगा। वे अजनबी उनका मजाक उड़ाएंगे। वे अजनबी, उन लोगों में से कुछ को मारेंगे और कुछ को बन्दी बनाकर ले जाएंगे। 22 मैं उनसे अपना मुँह फेर लूँगा, मैं उनकी ओर नहीं देखूँगा। वे अजनबी मेरे मन्दिर को नष्ट करेंगे, वे उस पवित्र भवन के गोपनीय भागों में जाएंगे और उसे अपवित्र करेंगे।

23 “बन्दियों के लिये जंजीरें बनाओ! क्यों क्योंकि बहुत से लोग दूसरे लोगों को मारने के कारण दण्डित होंगे। नगर के हर स्थान पर हिंसा भड़केगी। 24 मैं अन्य राष्ट्रों से बुरे लोगों को लाऊँगा और वे लोग इस्राएल के लोगों के सभी घरों को ले लेंगे। मैं तुम शक्तिशाली लोगों को गर्वीला होने से रोक दूँगा। दूसरे राष्ट्रों के वे लोग तुम्हारे पूजा—स्थानों को ले लेंगे।

25 “तुम लोग भय से काँप उठोगे। तुम लोग शान्ति चाहोगे, किन्तु शान्ति नहीं मिलेगी। 26 तुम एक के बाद दूसरी दःख—कथा सुनोगे। तुम बुरी खबरों के अलावा कुछ नहीं सुनोगे। तुम नबी की खोज करोगे और उससे दर्शन पूछोगे। किन्तु कोई मिलेगा नहीं। याजक के पास तुम्हें शिक्षा देने को कुछ भी नहीं होगा और अग्रजों (प्रमुखों) के पास तुम्हें देने को कोई अच्छी सलाह नहीं होगी। 27 तुम्हारा राजा उन लोगों के लिये रोएगा, जो मर गए। प्रमुख शोक—वस्त्र पहनेंगे। साधारण लोग बहुत डर जाएंगे। क्यों क्योंकि मैं उसका बदला दूँगा जो उन्होंने किया। मैं उनका दण्ड निश्चित करूँगा। और मैं उन्हें दण्ड दूँगा। तब वे लोग समझेंगे कि मैं यहोवा हूँ।”

8एक दिन मैं (यहेजकेल) अपने घर में बैठा था और यहूदा के अग्रज (प्रमुख) वहाँ मेरे सामने बैठे थे। यह देश—निकाले के छठे वर्ष के छठे महीने (सितम्बर) के पाँचवें दिन हुआ। अचानक मेरे स्वामी यहोवा की शक्ति मुझमें उतरी। 2 मैंने कुछ देखा जो आग की तरह था। यह एक मनुष्य शरीर जैसा दिखाई पड़ता था। कमर से नीचे वह आग—सा था। कमर से ऊपर वह आग में तप्त—धातु की तरह चमकीला और कान्तिवाला था। 3 तब मैंने कुछ ऐसा देखा जो बाहु की तरह था। वह बाहु बाहर बढ़ी और उसने मेरे सिर के बालों से मुझे पकड़ लिया। तब आत्मा ने मुझे हवा में उठा लिया और परमेश्वर के दर्शन में वह मुझे यरूशलेम को ले गई। वह मुझे उत्तर की ओर के भीतर फाटक पर ले गई। वह देवमूर्ति, जिससे परमेश्वर को ईर्ष्या होती है, उस फाटक के सहारे है। 4 किन्तु इस्राएल के परमेश्वर का तेज वहाँ था। वह तेज वैसा ही दिखता था जैसा दर्शन मैंने घाटी के किनारे कबार नहर के पास देखा था।

5 परमेश्वर ने मुझसे कहा। उसने कहा, “मनुष्य के पुत्र, उत्तर की ओर देखो!” इसलिये मैंने उत्तर की ओर देखा। और वहाँ प्रवेश मार्ग के सहारे वेदी—द्वार के उत्तर में वह देवमूर्ति थी जिसके प्रति परमेश्वर की ईर्ष्या होती थी।

6 तब परमेश्वर ने मुझसे कहा, “मनुष्य के पुत्र, क्या तुम देखते हो कि इस्राएल के लोग कैसा भयंकर काम कर रहे हैं यहाँ उन्होंने उस चीज को मेरे मन्दिर के ठीक बगल में बनाया है। यदि तुम मेरे साथ आओगे तो तुम और भी अधिक भयंकर चीजें देखोगे!”

7 इसलिये मैं आंगन के प्रवेश—द्वार पर गया और मैंने दीवार में एक छेद देखा। 8 परमेश्वर ने मुझसे कहा, “मनुष्य के पुत्र! उस दीवार के छेद में से घुसो।” इसलिये मैं दीवार के उस छेद में से होकर गया और वहाँ मैंने एक दरवाजा देखा।

9 तब परमेश्वर ने मुझसे कहा, “अन्दर जाओ, और उन भयानक दुष्ट चीजों को देखो जिन्हें लोग यहाँ कर रहे हैं।” 10 इसलिये मैं अन्दर गया और मैंने देखा। मैंने हर एक प्रकार के रेंगनेवाले जन्तु और जानवरों की देवमूर्तियों को देखा जिनके बारे में सोचने से तुम्हें घृणा होती है। वे देवमूर्तियाँ गन्दी मूर्तियाँ थीं जिन्हें इस्राएल के लोग पूजते थे। वहाँ उन जानवरों के चित्र हर दीवार पर चारों ओर खुदे हुए थे!

11 तब मैंने इस पर ध्यान दिया कि शापान का पुत्र याजन्याह और इस्राएल के सत्तर अग्रज (प्रमुख) उस स्थान पर पूजा करने वालों के साथ थे। वहाँ पर वे, लोगों के ठीक सामने थे, और हर एक प्रभुख के हाथ में अपनी सुगन्धि का थाल था। जलती सुगन्धि का धुँआ हवा में उठ रहा था। 12 तब परमेश्वर ने मुझसे कहा, “मनुष्य के पुत्र, क्या तुम देखते हो कि इस्राएल के प्रमुख अंधेरे में क्या करते हैं हर एक व्यक्ति के पास अपने असत्य देवता के लिये एक विशेष कमरा है! वे लोग आपस में बातें करते हैं, ‘यहोवा हमें देख नहीं सकता। यहोवा ने इस देश को छोड़ दिया है।’” 13 तब परमेश्वर ने मुझसे कहा, “यदि तुम मेरे साथ आओगे तो तुम उन लोगों को और भी अधिक भयानक काम करते देखोगे!”

14 तब वह मुझे यहोवा के मन्दिर के प्रवेशद्वार पर ले गया। यह द्वार उत्तर की ओर था। वहाँ मैंने स्त्रियों को बैठे और रोते देखा। वे असत्य देवता तम्मूज के विषय में शोक मना रहीं थीं!

15 परमेश्वर ने मुझसे कहा, “मनुष्य के पुत्र, क्या तुम इन भयंकर चीजों को देखते हो मेरे साथ आओ और तुम इनसे भी बुरे काम देखोगे!” 16 तब वह मुझे मन्दिर के भीतरी आँगन में ले गया। उस स्थान पर मैंने पच्चीस व्यक्तियों को नीचे झुके हुए और पूजा करते देखा। वे बरामदे और वेदी के बीच थे, किन्तु वे गलत दिशा में मुँह किये खड़े थे! उनकी पीठ पवित्र स्थान की ओर थी! वे सूर्य की पूजा करने के लिये नीचे झुके थे!

17 तब परमेश्वर ने कहा, “मनुष्य के पुत्र, क्या तुम इसे देखते हो यहूदा के लोग मेरे मन्दिर को इतना महत्वहीन समझते हैं कि वे मेरे मन्दिर में यह भयंकर काम करते हैं। यह देश हिंसा से भरा हुआ है। वे लगातार मुझको पागल करने वाला काम करते हैं! देखो, उन्होंने अपने नाकों में असत्य देवता की तरह चन्द्रमा का सम्मान करने के लिये बालियाँ पहन रखी हैं। 18 मैं उन पर अपना क्रोध प्रकट करूँगा। मैं उन पर कोई दया नहीं करूँगा। मैं उनके लिये दुःख का अनुभव नहीं करूँगा। वे मुझे जोर से पुकारेंगे, किन्तु मैं उनको सुनने से इन्कार कर दूँगा!”

9तब परमेश्वर ने नगर को दण्ड देने के लिये उत्तरदायी प्रमुखों को जोर से पुकारा। हर एक प्रमुख के हाथ में उसका अपना विध्वंसक शस्त्र था। 2 तब मैंने ऊपरी द्वार से छ: व्यक्तियों को सड़क पर आते देखा। यह द्वार उत्तर की ओर है। हर एक व्यक्ति अपने घातक शस्त्र को अपने हाथ में लिये था। उन व्यक्तियों में से एक ने सूती वस्त्र पहन रखा था। उसके पास कमर में लिपिक की एक कलम और स्याही थी। वे लोग मन्दिर से काँसे की वेदी के पास गए और वहाँ खड़े हुए। 3 तब इस्राएल के परमेश्वर का तेज करुब (स्वर्गदूतों) के ऊपर से, जहाँ वह था, उठा। तब वह तेज मन्दिर के द्वार पर गया। जब वह डयोढ़ी पर पहुँचा तो वह रूक गया। तब उस तेज ने उस व्यक्ति को बुलाया जो सूती वस्त्र, कलम और स्याही धारण किये हुए था।

4 तब यहोवा ने उससे कहा, “यरूशलेम नगर से होकर निकलो। जो लोग उस नगर में लोगों द्वारा की गई भयंकर चीजों के विषय में दुःखी हैं और घबरायें हुए हैं, उन हर एक के ललाट पर एक चिन्ह अंकित करो।”

5-6 तब मैंने परमेश्वर को अन्य लोगों से कहते सुना, “मैं चाहता हूँ कि तुम लोग प्रथम व्यक्ति का अनुसरण करो। तुन उन सभी व्यक्तियों को मार डालो। जिनके ललाट पर चिन्ह नहीं है। तुम इस पर ध्यान नहीं देना कि वे अग्रज (प्रमुख) युवक, युवतियाँ, बच्चे, या मातायें हैं। तुम्हें अपने शस्त्रों का उपयोग करना है, उन हर एक को मार डालना है जिनके ललाट पर चिन्ह नहीं है। कोई दया न दिखाओ। किसी व्यक्ति के लिये अफसोस न करो। यहाँ मेरे मन्दिर से आरम्भ करो।” इसलिये उन्होंने मन्दिर के सामने के अग्रजों (प्रमुखों) से आरम्भ किया।

7 परमेश्वर ने उनसे कहा, “इस स्थान को अपवित्र बना दो! इस आंगन को शवों से भर दो!” इसलिये वे गए और उन्होंने नगर में लोगों को मार डाला।

8 जब वे लोग, लोगों को मारने गए, तो मैं वहीं रूका रहा। मैंने भूमि पर अपना माथा टेकते हुए कहा, “हे मेरे स्वामी यहोवा, यरूशलेम के विरुद्ध अपना क्रोध प्रकट करने के लिये, क्या तू इस्राएल में बचे हुये सभी लोगों को मार रहा है”

9 परमेश्वर ने कहा, “इस्राएल और यहूदा के परिवार ने अत्याधिक बुरे पाप किये हैं। इस देश में सर्वत्र लोगों की हत्यायें हो रही हैं और यह नगर अपराध से भरा पड़ा है। क्यों क्योंकि लोग स्वयं कहते हैं, ‘यहोवा ने इस देश को छोड़ दिया। वे उन कामों को नहीं देख सकता जिन्हें हम कर रहे हैं।’ 10 और मैं दया नहीं दिखाऊँगा। मैं उन लोगों के लिये अफसोस अनुभव नहीं करूँगा। उन्होंने स्वयं इसे बुलाया है, मैं इन लोगों को केवल दण्ड दे रहा हूँ जिसके ये पात्र हैं!”

11 तब सूती वस्त्र, लिपिक की कलम और स्याही धारण करने वाला व्यक्ति बोला। उसने कहा, “मैंने वह कर दिया जो तेरा आदेश था।”

समीक्षा

परमेश्वर के वायदे को सुनिये और उनका भोजन कीजिए

जो परमेश्वर के वायदे का भोजन करते हैं वे कभी भी आत्मिक रूप से भूखे नहीं रहते हैं। लेकिन बहुत से लोग गलत चीजों पर भरोसा करते हैं। कुछ लोग सुरक्षा के लिए पैसे पर भरोसा करते हैं। किंतु, परमेश्वर कहते हैं कि ' उनका सोना चाँदी उनको बचा न सकेगा' (7:19अ)। उनकी संपत्ति 'उनकी भूख को तृप्त नहीं करेगी' (व.19ब)।

विश्व के अमीर लोगों में से एक अरिस्टोल ओनासिस, ने अपने जीवन के अंत में कहाः लाखों रूपये हमेशा उस चीज की कमी को पूरा नहीं करते हैं जो एक मनुष्य जीवन से चाहता है।' बहुत से लोग अपने अंदर के खालीपन को उस तरह से भरने की कोशिश करते हैं जो आखिरकार उन्हें संतुष्ट नहीं करती है। वे गलत स्थानों में आनंद को खोज रहे हैं।

संपत्ति, संतुष्टि और आनंद को न लाकर, अकसर हमारे पास घमंड, पाप और मूर्तिपूजा को ला सकती है (वव.1-11)। इसके अतिरिक्त, संपत्ति कभी भी पूर्ण सुरक्षा नहीं प्रदान करेगी। बाजार में मंदी और बढ़ती हुई महँगाई पूरे देश को दिवालिया बना सकती है (वव.12-20)।

दूसरी ओर, परमेश्वर के वायदे मजबूत चट्टान हैं। जो परमेश्वर कहते हैं, वह वायदा करते हैं। यहेजकेल ने परमेश्वर के वायदे की घोषणा कीः'हे मनुष्य के सन्तान, प्रभु यहोवा यों कहता है...' (वव.1-2)। उनका संदेश है ' अन्त आ गया है' (व.2, एम.एस.जी)।

यहेजकेल परमेश्वर के न्याय का वायदा करते हैं। यह पूरी तरह से उचित होगाः ' मैं अपना कोप तुझ पर भड़का कर तेरे चालचलन के अनुसार तुझे दण्ड दूँगा; और तेरे सारे घिनौने कामों का फल तुझे दूँगा' (व.27: रोमियों 2:1 भी देखें)। यह उस दिन होगा ' जिस दिन परमेश्वर मेरे सुसमाचार के अनुसार यीशु मसीह के द्वारा मनुष्यों की गुप्त बातों का न्याय करेंगे' (रोमियो 2:16)।

यहेजकेल को उसकी एक झलक मिली जो विश्व का न्याय करेगाः ' तब मैं ने देखा कि आग का सा एक रूप दिखाई देता है; उसकी कमर से नीचे की ओर आग है, और उसकी कमर से ऊपर की ओर झलकाए हुए पीतल की झलक – सी कुछ है।' (यहेजकेल 8:2)। यह वर्णन प्रकाशितवाक्य 1:10-16 में यीशु के वर्णन जैसा है।

न्याय से बचने का एकमात्र तरीका है माथे पर एक निशान होना (यहेजकेल 9:4)। परमेश्वर ने कहा, ''इस यरूशलेम नगर के भीतर इधर उधर जाकर जितने मनुष्य उन सब घ्रणित कामों के कारण जो उसमें किए जाते हैं, साँसें भरते और दुःख के मारे चिल्लाते हैं, उनके माथों पर चिह्न लगा दे... परन्तु जिस किसी मनुष्य के माथे पर वह चिह्न हो, उसके निकट न जाना' (वव.4,6)।

जिस व्यक्ति के माथे पर एक निशान लगा हुआ था, वह सुरक्षा का एक चिह्न था, जैसे ही आने वाला न्याय निकट था। 'चिह्न' के लिए शब्द इब्रानी अक्षर 'तव' है। यह इब्रानी वर्णमालिका का अंतिम अक्षर है। उस समय अक्षर को ऐसे लिखा जाता था X -एक क्रूस। क्या यह एक संयोग है: या यहाँ पर इस तथ्य में कोई महत्व है कि जो सुरक्षित लोग थे उनके माथे पर क्रूस का चिह्न था:

प्रकाशितवाक्य में, हम पढते हैं कि स्वर्गदूत कहता है, ''जब तक हम अपने परमेश्वर के दासों के माथे पर मुहर न लगा दें, तब तक पृथ्वी और समुद्र और पेड़ों को हानि न पहुँचाना।' (प्रकाशितवाक्य 7:3; प्रकाशितवाक्य 9:4; 14:1 भी देखें)।

प्रार्थना

परमेश्वर, आपका धन्यवाद कि आपने क्रूस पर मेरे पाप और दंड को ले लिया। आपका धन्यवाद कि आपने मेरे माथे पर एक चिह्न लगाया है। आपका धन्यवाद कि भविष्य के लिए मैं आपके वायदे पर भरोसा कर सकता हूँ और मेरे प्राण के लंगर के रूप में यह आशा रख सकता हूँ।

पिप्पा भी कहते है

इब्रानियो 6:15

' और इस रीति से उसने धीरज धरकर प्रतिज्ञा की हुई बात प्राप्त की।'

किसी चीज का इंतजार करना मुश्किल है। अब्राहम का उदाहरण एक प्रोत्साहन है कि निरंतर प्रार्थना करते रहे, यहाँ तक कि जब ऐसा लगता है कि कुछ नहीं हो रहा है।

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संदर्भ

जॉन ब्लाँचर्ड, इकट्ठा सोना, (इवाँजलिकल प्रेस, 2000) पी.251

निकी गंबल, जीवन के प्रश्न (अल्फा इंटरनैशनल, 2011) पी.125

जहाँ पर कुछ बताया न गया हो, उन वचनों को पवित्र बाइबल, न्यू इंटरनैशनल संस्करण एन्ग्लिसाइड से लिया गया है, कॉपीराइट © 1979, 1984, 2011 बिबलिका, पहले इंटरनैशनल बाइबल सोसाइटी, हूडर और स्टोगन पब्लिशर की अनुमति से प्रयोग किया गया, एक हॅचेट यूके कंपनी सभी अधिकार सुरक्षित। ‘एनआईवी', बिबलिका यू के का पंजीकृत ट्रेडमार्क संख्या 1448790 है।

जिन वचनों को (एएमपी, AMP) से चिन्हित किया गया है उन्हें एम्प्लीफाइड® बाइबल से लिया गया है. कॉपीराइट © 1954, 1958, 1962, 1964, 1965, 1987 लॉकमैन फाउंडेशन द्वारा प्राप्त अनुमति से उपयोग किया गया है। (www.Lockman.org)

जिन वचनों को (एमएसजी MSG) से चिन्हित किया गया है उन्हें मैसेज से लिया गया है। कॉपीराइट © 1993, 1994, 1995, 1996, 2000, 2001, 2002. जिनका प्रयोग एनएवीप्रेस पब्लिशिंग ग्रुप की अनुमति से किया गया है।

1794 में जन्मे, बिली ब्रे कार्नवाल से एक मजदूर थे। वह एक शराबी थे। वह घर में हमेशा लड़ते और विवाद करते थे। उन्तीस वर्ष की उम्र में उनकी मुलाकात यीशु से हुई। वह घर गए और अपनी पत्नी से कहा, 'परमेश्वर की सहायता से तुम फिर कभी मुझे शराब पीते हुए नहीं देखोगी।' उन्हें फिर कभी उन्हें पीते नहीं देखा। उनके वचनों में, उनके आवाज की सूर और उनके चेहरे में आकर्षित करनेवाली सामर्थ थी। ऐसा था जैसे उन्हें दैविय विद्युतीय ऊर्जा दी गई हो। मिल के मजदूर आते थे और उन्हें प्रचार करते हुए सुनते थे। बहुतों ने विश्वास किया और वहाँ पर उल्लेखनीय चंगाईयाँ हुई।

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