दिन 325

आप बुराई का सामना कर सकते हैं

बुद्धि नीतिवचन 28:7-17
नए करार याकूब 4:1-17
जूना करार यहेजकेल 38:1-39:29

परिचय

हाल ही में, आय.एस.आय.एस के उठने से, विश्व के लीडर्स ने हराने वाली बुराई के विषय में बहुत बातें की हैं। लेकिन, जैसा कि गार्जियन में एक लेखक ने बताया,"उनकी वाक्पटुता इस बात को प्रकट करती है कि वे नहीं स्वीकार कर रहे हैं कि क्रूरता और लड़ाई मूलभूत मानवीय गुण हैं।“ जैसा कि एल्बर्ट आइंस्टाईन् ने कहा,"मैं एटॉम बम की विस्फोटक सामर्थ से नहीं डरता। मैं मानवीय हृदय में छिपी बुराई की विस्फोटक सामर्थ से डरता हूँ।“

क्यों विश्व में बहुत अधिक बुराई है? हमारे अपने जीवन में बुराई के साथ इतनी लड़ाई क्यों है? आप कैसे बुराई का सामना कर सकते हैं? अंत में शैतान के साथ क्या होगा?

बुद्धि

नीतिवचन 28:7-17

7 जो व्यवस्था के विधानों का पालन करता है, वही है विवेकी पुत्र;
 किन्तु जो व्यर्थ के पेटुओं को बनाता साथी, वह पिता का निरादर करता है।

8 वह जो मोटा ब्याज वसूल कर निज धन बढ़ाता है,
 वह तो यह धन जोड़ता है किसी ऐसे दयालु के लिये जो गरीबों पर दया करता है।

9 यदि व्यवस्था के विधान पर कोई कान नहीं देता
 तो उसको विनतियाँ भी घृणा के योग्य होंगी।

10 वह तो अपने ही जाल में फंस जायेगा जो सीधे लोगों को बुरे मार्ग पर भटकाता है।
 किन्तु दोषरहित लोग उत्तम आशीष पायेगा।

11 धनी परुष निज आँखों में बुद्धिमान हो सकता है
 किन्तु वह गरीबजन जो बुद्धिमान होता है सत्य को देखता।

12 सज्जन जब जीतते हैं, तो सब प्रसन्न होते हैं।
 किन्तु जब दुष्ट को शक्ति मिल जाती है तो लोग छिप—छिप कर फिरते हैं।

13 जो निज पापों पर पर्दा डालता है, वह तो कभी नहीं फूलता—फलता है
 किन्तु जो निज दोषों को स्वीकार करता और त्यागता है, वह दया पाता है।

14 धन्य है, वह पुरुष जो यहोवा से सदा डरता है,
 किन्तु जो अपना मन कठोर कर लेता है, विपत्ति में गिरता है।

15 दुष्ट लोग असहाय जन पर शासन करते हैं।
 ऐसे जैसे दहाड़ता हुआ सिंह अथवा झपटता हुआ रीछ।

16 एक क्रूर शासक में न्याय को कमी होती है।
 किन्तु जो बुरे मार्ग से आये हुए धन से घृणा करता है, दीर्घ आयु भोगता है।

17 किसी व्यक्ति को दूसरे की हत्या का दोषी ठहराया हो
 तो उस व्यक्ति को शांति नहीं मिलेगी। उसे सहायता मत कर।

समीक्षा

बुराई को बताइए और इसे छोड़ दीजिए

हमारे अपने जीवन में बुराई के लिए यह उत्तर हैः "जो अपने अपराध छिपा रखता है, उसका कार्य सफल नहीं होता, परन्तु जो उनको मान लेता और छोड़ भी देता है, उस पर दया की जायेगी“ (व.13)।

नीतिवचन के लेखक विभिन्न प्रकार की बुराई के बारे में बताते हैं: हत्या (व.17), जो सीधे लोगों को भटकाकर कुमार्ग पर ले जाती है (व.10), जो अपना कान व्यवस्था सुनने से मोड़ लेता है (व.9), जो अपना धन ब्याज आदि बढ़ती से बढ़ाता है (व.8) और जो अपना मन कठोर कर लेता है (व.14)।

वह बुरे शासकों के बारे में भी बताते हैं:" जब सत्यनिष्ठ लोग जयवन्त होते हैं, तब बड़ी शोभा होती है; परन्तु जब दुष्ट लोग प्रबल हेते हैं, तब मनुष्य अपने आप को छिपाता है“ (व.12, एम.एस.जी)। " जो प्रधान मन्दबुध्दि का होता है, वही बहुत अन्धेर करता है“ (व.16अ, एम.एस.जी)। पिछले कुछ सालों में हमने इसे देखा है, उदाहरण के लिए, सीरिया, लिब्या, इराक, जिम्बाब्वे, नॉर्थ कोरिया, सूडान इत्यादि में। अच्छी लीडरशिप बहुत ही महत्वपूर्ण है।

वह कहते हैं कि एक बुरा लीडर " गरजने वाले सिंह और घूमने वाले रीछ के समान है“ (व.15)। पतरस प्रेरित ने शैतान का वर्णन इस तरह से किया है " गरजने वाले सिंह के समान इस खोज में रहता है कि किस को फाड़ खाए“ (1पतरस 5:8)।

प्रार्थना

जब आप अपने पाप को मान लेते हैं, तब परमेश्वर आप पर दया करते हैं। " जो अपने अपराध छिपा रखता है, उसका कार्य सफल नहीं होता, परन्तु जो उनको मान लेता और छोड़ भी देता है, उस पर दया की जायेगी“ (नीतिवचन 28:13, एम.एस.जी)। या जैसा कि संत यूहन्ना इसे बताते हैं," यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने और हमें सब बुराई से शुध्द करने में विश्वासयोग्य और सत्यनिष्ठ हैं“ (1यूहन्ना 1:9)।

नए करार

याकूब 4:1-17

परमेश्वर को समर्पित हो जाओ

4तुम्हारे बीच लड़ाई-झगड़े क्यों होते हैं? क्या उनका कारण तुम्हारे अपने ही भीतर नहीं है? तुम्हारी वे भोग-विलासपूर्ण इच्छाएँ ही जो तुम्हारे भीतर निरन्तर द्वन्द्व करती रहती हैं, क्या उन्हीं से ये पैदा नहीं होते? 2 तुम लोग चाहते तो हो किन्तु तुम्हें मिल नहीं पाता। तुम में ईर्ष्या है और तुम दूसरों की हत्या करते हो, फिर भी जो चाहते हो, प्राप्त नहीं कर पाते। और इसलिए लड़ते झगड़ते हो। अपनी इच्छित वस्तुओं को तुम प्राप्त नहीं कर पाते क्योंकि तुम उन्हें परमेश्वर से नहीं माँगते। 3 और जब माँगते भी हो तो तुम्हारा उद्देश्य अच्छा नहीं होता। क्योंकि तुम उन्हें अपने भोग-विलास में ही उड़ाने को माँगते हो।

4 ओ, विश्वास विहीन लोगो! क्या तुम नहीं जानते कि संसार से प्रेम करना परमेश्वर से घृणा करने जैसा ही है? जो कोई इस दुनिया से दोस्ती रखना चाहता है, वह अपने आपको परमेश्वर का शत्रु बनाता है। 5 अथवा क्या तुम ऐसा सोचते हो कि शास्त्र ऐसा व्यर्थ में ही कहता है कि, “परमेश्वर ने हमारे भीतर जो आत्मा दी है, वह ईर्ष्या पूर्ण इच्छाओं से भरी रहती है।” 6 किन्तु परमेश्वर ने हम पर अत्यधिक अनुग्रह दर्शाया है, इसलिए शास्त्र में कहा गया है, “परमेश्वर अभिमानियों का विरोधी है, जबकि दीन जनों पर अपनी अनुग्रह दर्शाता है।”

7 इसलिए अपने आपको परमेश्वर के अधीन कर दो। शैतान का विरोध करो, वह तुम्हारे सामने से भाग खड़ा होगा। 8 परमेश्वर के पास आओ, वह भी तुम्हारे पास आएगा। अरे पापियों! अपने हाथ शुद्ध करो और अरे सन्देह करने वालों, अपने हृदयों को पवित्र करो। 9 शोक करो, विलाप करो और दुःखी होओ। हो सकता है तुम्हारे ये अट्टहास शोक में बदल जाए और तुम्हारी यह प्रसन्नता विषाद में बदल जाए। 10 प्रभु के सामने दीन बनो। वह तुम्हें ऊँचा उठाएगा।

न्यायकर्ता तुम नहीं हो

11 हे भाईयों, एक दूसरे के विरोध में बोलना बंद करो। जो अपने ही भाई के विरोध में बोलता है, अथवा उसे दोषी ठहराता है, वह व्यवस्था के ही विरोध में बोलता है और व्यवस्था को दोषी ठहराता है। और यदि तुम व्यवस्था पर दोष लगाते हो तो व्यवस्था के विधान का पालन करने वाले नहीं रहते वरन् उसके न्यायकर्त्ता बन जाते हो। 12 व्यवस्था के विधान को देने वाला और उसका न्याय करने वाला तो बस एक ही है। और वही रक्षा कर सकता है और वही नष्ट करता है। तो फिर अपने साथी का न्याय करने वाले तुम कौन होते हो?

अपना जीवन परमेश्वर को चलाने दो

13 ऐसा कहने वालो सुनो, “आज या कल हम इस या उस नगर में जाकर साल-एक भर वहाँ व्यापार में धन लगा बहुत सा पैसा बना लेंगे।” 14 किन्तु तुम तो इतना भी नहीं जानते कि कल तुम्हारे जीवन का क्या बनेगा! देखो, तुम तो उस धुंध के समान हो जो थोड़ी सी देर को उठती है और फिर खो जाती है। 15 सो इसके स्थान पर तुम्हें तो सदा यही कहना चाहिए, “यदि प्रभु ने चाहा तो हम जीयेंगे और यह या वह करेंगे।” 16 किन्तु स्थिति तो यह है कि तुम तो अपने आडम्बरों के लिए स्वयं पर गर्व करते हो। ऐसे सभी गर्व बुरे हैं। 17 तो फिर यह जानते हुए भी कि यह उचित है, उसे नहीं करना पाप है।

समीक्षा

शैतान का सामना करिए

क्यों विश्व में इतनी फूट पड़ी है? याकूब एक असुविधाजनक उत्तर देते हैं:" तुम में लड़ाइयाँ और झगड़े कहाँ से आ गए? क्या उन सुख – विलासों से नहीं जो तुम्हारे अंगों में लड़ते – भिड़ते हैं?“ (व.1, एम.एस.जी)। बाईबल बुराई के मानवीय स्रोतों को पहचानती है, लेकिन इससे भी गहरे स्रोत की ओर इशारा करती है।

सभी मनुष्यों में बुराई की प्रवृत्ति है। यह अध्याय बुराई के विरूद्ध लड़ाई में युद्ध भूमि पर केंद्रित है – हम खुद। बुराई का अवश्य ही सामना किया जाना चाहिए। आप कैसे इस लड़ाई को जीत सकते हैं?

पहली परेशानी जो याकूब बताते हैं, वह है कि जब हमें कुछ चाहिए, तब हम जाकर इसके लिए लड़ना शुरु कर देते हैं, परमेश्वर से माँगने के बजाय"तुम लालसा रखते हो, और तुम्हें मिलता नहीं; इसलिये तुम हत्या करते हो। तुम डाह करते हो, और कुछ प्राप्त नहीं कर पाते; तो तुम झगड़ते और लड़ते हो। तुम्हें इसलिये नहीं मिलता कि माँगते नहीं“ (व.2, एम.एस.जी)।

इस विश्व की लालसा का प्रलोभन बहुत ही मजबूत है। लेकिन परमेश्वर चाहते हैं कि हम उनके प्रति वफादार बने। जब हम इस विश्व की लालसाओं के पीछे जाते हैं, तब हम परमेश्वर के साथ हमारे संबंध में व्यभिचारी बन जाते हैं:" तुम माँगते हो और पाते नहीं, इसलिये कि बुरी इच्छा से माँगते हो, ताकि अपने भोग – विलास में उड़ा दो“ (व.3)।

वह आगे कहते हैं," हे व्यभिचारणियो, क्या तम नहीं जानतीं कि संसार से मित्रता करना परमेश्वर से बैर रखना है? अत: जो कोई संसार का मित्र होना चाहता है, वह अपने आप को परमेश्वर का बैरी बनाता है“ (व.4, एम.एस.जी)। वह पवित्र आत्मा को दुखी करता हैः" क्या तुम यह समझते हो कि पवित्रशास्त्र व्यर्थ कहता है, "जिस आत्मा को उसने हमारे भीतर बसाया है, क्या वह ऐसी लालसा करता है जिसका प्रतिफल डाह हो“?“ (व.5)। हम पवित्र आत्मा को दुखी करते हैं जब हम दूसरे ईश्वरों के पीछे जाते हैं।

कुछ न करने के द्वारा भी पाप करना संभव है। पाप केवल वह करना नहीं है जो हम जानते हैं कि गलत है, यह वह नहीं करना भी है जो हम जानते हैं कि सही हैः"इसलिये जो कोई भलाई करना जानता है और नहीं करता, उसके लिये यह पाप है“ (व.17, एम.एस.जी)।

आप अपने आपसे बुराई पर जय नहीं पा सकते हैं। फिर भी, यहाँ पर उल्लेखनीय वस्तु हैः"वह हमें और अधिक अनुग्रह देते हैं“ (व.6अ)। परमेश्वर आप पर दोष नहीं लगाते हैं। "परमेश्वर अभिमानियों का विरोध करते हैं, पर दीनों पर अनुग्रह करते हैं“ (व.6ब)। वह आपको बुराई पर जय पाने के लिए और अधिक अनुग्रह देते हैं।

दीनता से अपने आपको परमेश्वर के लिए समर्पित करोः" शैतान का सामना करो, तो वह तुम्हारे पास से भाग जायेगा। परमेश्वर के निकट आइए तो वह भी आपके निकट आएंगे“ (व.7-8अ, एम.एस.जी)।

आप यह कैसे करते हैं? वह आगे समझाते हैं," हे पापियो, अपने हाथ शुध्द करो“ (व.8, एम.एस.जी)। यह अच्छा विचार नहीं है कि आप पवित्र जीवन जीते हुए अपने जीवन में थोड़ा पाप रख सकते हैं। " हे दुचित्ते लोंगो, अपने हृदय को पवित्र करो। दुःखी हो, और शोक करो, और रोओ। तुम्हारी हँसी शोक में और तुम्हारा आनन्द उदासी में बदल जाए। प्रभु के सामने दीन बनिए तब वह तुम्हें शिरोमणि बनाएंगे“ (वव.8ब-10, एम.एस.जी)।

जैसे ही हम अपनी गलतियों को मानते हैं, हम समझते हैं कि हम दूसरों पर दोष नहीं लगा सकते हैं। दूसरों की गलतियों को भूलने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है अपनी गलतियों का याद करना। क्योंकि हम खुद व्यवस्था को तोड़ते हैं, हम कौन हैं जो दूसरो पर दोष लगा सकते हैं (व.11)? केवल एक हैं जो न्याय करने के योग्य हैं:" व्यवस्था देने वाले और हाकिम तो एक ही हैं, जो बचाने और नाश करने में समर्थी हैं। पर तू कौन है, जो अपने पड़ोसी पर दोष लगाता है?“ (व.12)।

दुसरी बुराई है स्वयं को महत्व देना," अब तुम अपनी डींग मारने पर घमण्ड करते हो“ (व.16, एम.एस.जी)। तुम जो यह कहते हो, "आज या कल हम किसी और नगर में जाकर वहाँ एक वर्ष बिताएँगे, और व्यापार करके लाभ कमाएँगे“ (व.13, एम.एस.जी)।

आगे की योजना बनाना अच्छी बात है, लेकिन अंत में," यह नहीं जानते कि कल क्या होगा“ (व.14, एम.एस.जी.)। आप पूरी तरह से परमेश्वर पर निर्भर हैं। इसके विपरीत तुम्हें यह कहना चाहिए, "यदि प्रभु चाहे तो हम जीवित रहेंगे, और यह या वह काम भी करेंगे।“ (वव.15, एम.एस.जी)। यह भाव "परमेश्वर चाहें तो“ एक औपचारिकता नहीं होनी चाहिए। इसके बजाय, इसे हृदय की वास्तविकता को व्यक्त करना चाहिए जो कि पहचानता है कि परमेश्वर नियंत्रण में हैं नाकि आप। आपके हृदय की प्रार्थना होनी चाहिए,"आपकी इच्छा पूरी हो।“

प्रार्थना

परमेश्वर, हमारे पाप क्षमा कीजिए जैसे ही हम उन्हें क्षमा करते हैं जो हमारे विरूद्ध पाप करते हैं। हमें परीक्षा में न डालिये, बल्कि हमें बुराई से बचाईये।

जूना करार

यहेजकेल 38:1-39:29

गोग के विरुद्ध सन्देश

38यहोवा का सन्देश मुझे मिला। उसने कहा, 2 “मनुष्य के पुत्र, मागोग प्रदेश में गोग पर ध्यान दो। वह मेशेक और तूबल राष्ट्रों का सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रमुख है। गोग के विरुद्ध मेरे लिये कुछ कहो। 3 उससे कहो कि स्वामी यहोवा यह कहता है, गोग तुम मेशेक और तूबल राष्ट्रों के सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रमुख हो! किन्तु मैं तुम्हारे विरुद्ध हूँ। 4 मैं तुम्हें पकड़ूँगा और तुम्हारी पूरी सेना के साथ वापस लाऊँगा। मैं तुम्हारी सेना के सभी पुरुषों को वापस लाऊँगा। मैं सभी घोड़ों और घुड़सवारों को वापस लाऊँगा। मैं तुम्हारे मुँह में नकेल डालूँगा और तुम सभी को वापस लाऊँगा। सभी सैनिक अपनी सभी तलवारों और ढालों के साथ अपनी सैनिक पोशाक में होंगे। 5 फारस, कूश और पूत के सैनिक उनके साथ होंगे। वे सभी अपनी ढालें तथा सिर के कवच धारण किये होंगे। 6 वहाँ अपने सैनिकों के सभी समूहों के साथ गोमेर भी होगा। वहाँ दूर उत्तर से अपने सैनिकों के सभी समूहों के साथ तोगर्मा का राष्ट्र भी होगा। उस बन्दियों को पंक्ति में वहाँ बहु संख्यक लोग होंगे।

7 “‘तैयार हो जाओ। हाँ, अपने को तैयार करो और अपने साथ मिलने वाली सेना को भी। तुम्हें निगरानी रखनी चाहिए और तैयार रहना चाहिए। 8 बहुत लम्बे समय के बाद तुम काम पर बुलाये जाओगे। आगे आने वाले वर्षों में तुम उस प्रदेश में आओगे जो युद्ध के बाद पुन: निर्मित होगा। उस देश में लोग इस्राएल के पर्वत पर आने के लिये बहुत से राष्ट्रों से इकट्ठे किये जाएंगे। अतीत में इस्राएल का पर्वत बार—बार नष्ट किया गया था। किन्तु ये लोग उन दूसरे राष्ट्रों से वापस लौटे होंगे। वे सभी सुरक्षित रहेंगे। 9 किन्तु तुम उन पर आक्रमण करने आओगे। तुम तूफान की तरह आओगे। तुम देश को ढकते हुए गरजते मेघ की तरह आओगे। तुम और बहुत से राष्ट्रों के तुम्हारे सैनिकों के समूह, इन लोगों पर आक्रमण करने आएंगे।’”

10 मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है: “उस समय तुम्हारे मस्तिष्क में एक विचार उठेगा। तुम एक बुरी योजना बनाना आरम्भ करोगे। 11 तुम कहोगे, ‘मैं उस देश पर आक्रमण करने जाऊँगा जिसके नगर बिना दीवार के हैं (इस्राएल) वे लोग शान्तिपूर्वक रहते हैं। वे समझते हैं कि वे सुरक्षित हैं। उनकी रक्षा के लिये उनके नगरों के चारों ओर कोई दीवार नहीं है। उनके दरवाजों में ताले नहीं है, उनके दरवाजे भी नहीं हैं! 12 मैं इन लोगों को हराऊँगा और उनकी सभी कीमती चीजें उनसे ले लूँगा। मैं उन स्थानों के विरुद्ध लड़ूँगा जो नष्ट हो चुके थे, किन्तु अब लोग उनमें रहने लगे हैं। मैं उन लोगों (इस्राएल) के विरुद्ध लड़ूँगा जो दूसरे राष्ट्रों से इकट्ठे हुए थे। अब वे लोग मवेशी और सम्पत्ति वाले हैं। वे संसार के चौराहे पर रहते हैं जिस स्थान में से शक्तिशाली देशों को अन्य शक्तिशाली सभी देशों तक जाने के लिये यात्रा करनी पड़ती है।’

13 “शबा, ददान और तर्शीश के व्यापारी और सभी नगर जिनके साथ वे व्यापार करते हैं, तुमसे पूछेंगे, ‘क्या तुम कीमती चीजों पर अधिकार करने आये हो क्या तुम अपने सैनिकों के समूहों के साथ, उन अच्छी चीजों को हड़पने और चाँदी, सोना मवेशी तथा सम्पत्ति ले जाने आए थे? क्या तुम उन सभी कीमती चीजों को लेने आये थे?’

14 परमेश्वर ने कहा, “मनुष्य के पुत्र, मेरे लिये गोग से कहो। उससे कहो कि स्वामी यहोवा यह कहता है, ‘तुम हमारे लोगों पर तब आक्रमण करने आओगे जब वे शान्तिपूर्वक और सुरक्षित रह रहे हैं। 15 तुम दूर उत्तर के अपने स्थान से आओगे और तुम बहुसंख्यक लोगों को साथ लाओगे। वे सभी घुड़सवार होंगे। तुम एक विशाल और शक्तिशाली सेना होगे। 16 तुम मेरे लोग इस्राएल के विरुद्ध लड़ने आओगे। तुम देश को गरजते मेघ की तरह ढकने वाले होगे। मैं बाद में, अपने देश के विरुद्ध लड़ने के लिये तुम्हें लाऊँगा। तब गोग, राष्ट्र जानेंगे कि मैं कितना शक्तिशाली हूँ। वे मेरा सम्मान करेंगे और समझेंगे कि मैं पवित्र हूँ। वे देखेंगे कि मैं तुम्हारे विरुद्ध क्या करूँगा!’”

17 यहोवा यह कहता है, “उस समय लोग याद करेंगे कि मैंने अतीत में तुम्हारे बारे में जो कहा। वे याद करेंगे कि मैंने अपने सेवकों इस्राएल के नबियों का उपयोग किया। वे याद करेंगे कि इस्राएल के नबियों ने मेरे लिये अतीत में बातें कीं और कहा कि मैं तुमको उनके विरुद्ध लड़ने के लिये लाऊँगा।”

18 मेरे स्वामी यहोवा ने कहा, “उस समय, गोग इस्राएल देश के विरुद्ध लड़ने आएगा। मैं अपना क्रोध प्रकट करूँगा। 19 क्रोध और उत्तेजना में मैं यह प्रतिज्ञा करता हूँ, मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि इस्राएल में एक प्रबल भूकम्प आएगा। 20 उस समय सभी सजीव प्राणी भय से काँप उठेंगे। समुद्र में मछलियाँ, आकाश में पक्षी, खेतों में जंगली जानवर और वे सभी छोटे प्राणी जो धरती पर रेंगते हैं, भय से काँप उठेंगे। पर्वत गिर पड़ेंगे और शिखर ध्वस्त होंगी। हर एक दीवार धरती पर आ गिरेगी!”

21 मेरा स्वामी यहोवा कहता है, “इस्राएल के पर्वतों पर, मैं गोग के विरुद्ध हर प्रकार का भय उत्पन्न करुँगा। उसके सैनिक इतने भयभीत होंगे कि वे एक दूसरे पर आक्रमण करेंगे और अपनी तलवार से एक दूसरे को मार डालेंगे। 22 मैं गोग को रोग और मृत्यु का दण्ड दूँगा। मैं गोग और बुहत से राष्ट्रों के सैनिकों के ऊपर ओले, आग और गंधक की वर्षा करूँगा। 23 तब मैं दिखाऊँगा कि मैं कितना महान हूँ, मैं प्रमाणित करूँगा कि मैं पवित्र हूँ। बहुत से राष्ट्र मुझे ये काम करते देखेंगे और वे जानेंगे कि मैं कौन हूँ। तब वे जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ।

गोग और उसकी सेना की मृत्यु

39“मनुष्य के पुत्र, गोग के विरुद्ध मेरे लिये कहो। उससे कहो कि स्वामी यहोवा यह कहता है, ‘गोग, तुम मेशेक और तूबल देशों के सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रमुख हो! किन्तु मैं तुम्हारे विरुद्ध हूँ। 2 मैं तुम्हें पकड़ूँगा और वापस लाऊँगा। मैं तुम्हें सुदूर उत्तर से लाऊँगा। मैं तुम्हें इस्राएल के पर्वतों के विरुद्ध युद्ध करने के लिये लाऊँगा। 3 किन्तु मैं तुम्हारा धनुष तुम्हारे बायें हाथ से झटक कर गिरा दूँगा। मैं तुम्हारे दायें हाथ से तुम्हारे बाण झटक कर गिरा दूँगा। 4 तुम इस्राएल के पर्वतों पर मारे जाओगे। तुम, तुम्हारे सैनिक समूह और तुम्हारे साथ के अन्य सभी राष्ट्र युद्ध में मारे जाएंगे। मैं तुमको हर एक प्रकार के पक्षियों, जो माँसभक्षी हैं तथा सभी जंगली जानवरों को भोजन के रूप में दूँगा। 5 तुम नगर में प्रवेश नहीं करोगे। तुम खुले मैंदानों में मारे जाओगे। मैंने यह कह दिया है!’” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा।

6 परमेश्वर ने कहा, “मैं मागोग और उन व्यक्तियों के, जो समुद्र—तट पर सुरक्षित रहते हैं, विरुद्ध आग भेजूँगा। तब वे जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ। 7 मैं अपना पवित्र नाम अपने इस्राएल लोगों में विदित करूँगा। भविष्य में, मैं अपने पवित्र नाम को, लोगों द्वारा और अधिक बदनाम नहीं करने दूँगा। राष्ट्र जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ। वे समझेंगे कि मैं इस्राएल में परम पवित्र हूँ। 8 वह समय आ रहा है! यह घटित होगा!” यहोवा ने ये बातें कहीं! “यह वही दिन है जिसके बारे में मैं कह रहा हूँ।

9 “उस समय, इस्राएल के नगरों में रहने वाले लोग उन खेतों में जाएंगे। वे शत्रु के अस्त्र—शस्त्रों को इकट्ठा करेंगे और उन्हें जला देंगे। वे सभी ढालों, धनुषों और बाणों, गदाओं और भालों को जलाएंगे। वे उन अस्त्र—शस्त्रों का उपयोग सात वर्ष तक ईंधन के रूप में करेंगे। 10 उन्हें मैंदानों से लकड़ी इकट्ठी नहीं करनी पड़ेगी या जंगलों से ईंधन नहीं काटना पड़ेगा, क्योंकि वे अस्त्र—शस्त्रों का उपयोग ईंधन के रूप में करेंगे। वे कीमती चीजों को सैनिकों से छीनेंगे जिसे वे उनसे चुराना चाहते थे। वे सैनिकों से अच्छी चीजें लेंगे जिन्होंने उनसे अच्छी चीजें ली थीं।” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा।

11 परमेश्वर ने कहा, “उस समय में गोग को दफनाने के लिये इस्राएल में एक स्थान चुनूँगा। वह मृत सागर के पूर्व में यात्रियों की घाटी में दफनाया जाएगा। यह यात्रियों के मार्ग को रोकेगा। क्यों क्योंकि गोग और उसकी सारी सेना उस स्थान में दफनायी जाएगी। लोग इसे ‘गोग की सेना की घाटी’ कहेंगे। 12 इस्राएल का परिवार देश को शुद्ध करने के लिये सात महीने तक उन्हें दफनाएगा। 13 देश के साधारण लोग शत्रु के सैनिकों को दफनाएंगे। इस्राएल के लोग उस दिन प्रसिद्ध होंगे जिस दिन मैं अपने लिए सम्मान पाऊँगा।” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा।

14 परमेश्वर ने कहा, “लोग मजदूरों को, उन मरे सैनिकों को दफनाने के लिये पूरे समय की नौकरी देंगे। इस प्रकार वे देश को पवित्र करेंगे। वे मजदूर सात महीने तक कार्य करेंगे। वे शवों को ढूँढते हुए चारों ओर जाएंगे। 15 वे मजदूर चारों ओर ढूँढते फिरेंगे। यदि उनमें कोई एक हड्डी देखेगा तो वह उसके पास एक चिन्ह बना देगा। चिन्ह वहाँ तब तक रहेगा जब तक कब्र खोदने वाला आता नहीं और गोग की सेना की घाटी में उस हड्डी को दफनाता नहीं। 16 वह मृतक लोगों का नगर (कब्रिस्तान) हमोना कहलाएगा। इस प्रकार वे देश को शुद्ध करेंगे।”

17 मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा, “मनुष्य के पुत्र, मेरे लिये पक्षियों और जंगली जानवरों से कुछ कहो। उनसे कहो, ‘यहाँ आओ! यहाँ आओ! एक स्थान पर इकट्ठे हो। यह बलि जो मैं तुम्हारे लिये तैयार कर रहा हूँ उसके लिए आओ, उसे खाओ। इस्राएल के पर्वतों पर एक विशाल बलिदान होगा। आओ, माँस खाओ और खून पिओ। 18 तुम शक्तिशाली सैनिकों के शरीर का माँस खाओगे। तुम संसार के प्रमुखों का खून पीओगे। वे बाशान के मेढ़ों, मेमनों, बकरों और मोटे बैलों के समान होंगे। 19 तुम जितनी चाहो, उतनी चर्बी खा सकते हो और तुम खून तब तक पी सकते हो जब तक तुम्हारे पेट न भरे। तुम मेरी बलि से खाओगे और पीओगे जिसे मैंने तुम्हारे लिये मारा। 20 मेरी मेज पर खाने को तुम बहुत सा माँस पा सकते हो। वहाँ घोड़े और रथ सारथी, शक्तिशाली सैनिक और अन्य सभी लड़ने वाले व्यक्ति होंगे।’” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा।

21 परमेश्वर ने कहा, “मैं अन्य राष्ट्रों को दिखाऊँगा कि मैंने क्या किया है। वे राष्ट्र मेरा सम्मान करना आरम्भ करेंगे! वे मेरी वह शक्ति देखेंगे जो मैंने शत्रु के विरुद्ध उपयोग की। 22 तब, उस दिन के बाद, इस्राएल का परिवार जानेगा कि मैं उनका परमेश्वर यहोवा हूँ। 23 राष्ट्र यह जान जाएंगे कि इस्राएल का परिवार क्यों दूसरे देशों में बन्दी बनाकर ले जाया गया था। वे जानेंगे कि मेरे लोग मेरे विरुद्ध हो उठे थे। इसलिए मैं उनसे दूर हट गया था। मैंने उनके शत्रुओं को उन्हें हराने दिया। अत: मेरे लोग युद्ध में मारे गए। 24 उन्होंने पाप किया और अपने को गन्दा बनाया। अत: मैंने उन्हें उन कामों के लिये दण्ड दिया जो उन्होंने किये। अत: मैंने उनसे अपना मुँह छिपाया है और उनको सहायता देने से इन्कार किया।”

25 अत: मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, “अब मैं याकूब के परिवार को बन्धुवाई से निकालूँगा। मैंने पूरे इस्राएल के परिवार पर दया की है। मैं अपने पवित्र नाम के लिये विशेष भावना प्रकट करूँगा। 26 लोग अपनी लज्जा और मेरे विरुद्ध विद्रोह के सारे समय को भूल जायेंगे। वे अपने देश में सुरक्षा के साथ रहेंगे। कोई भी उन्हें भयभीत नहीं करेगा। 27 मैं अपने लोगों को अन्य देशों से वापस लाऊँगा। मैं उन्हें उनके शत्रुओं के देशों से इकट्ठा करुँगा। तब बहुत से राष्ट्र समझेंगे कि मैं कितना पवित्र हूँ। 28 वे समझेंगे कि मैं यहोवा उनका परमेश्वर हूँ। क्यों क्योंकि मैंने उनसे उनका घर छुड़वाया और अन्य देशों में बन्दी के रूप में भिजवाया और तब मैंने उन्हें एक साथ इकट्ठा किया और उनके अपने देश में वापस लाया। 29 मैं इस्राएल के परिवार में अपनी आत्मा उतारूँगा और उसके बाद, मैं फिर अपने लोगों से दूर नहीं हटूँगा।” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा था।

समीक्षा

भलाई की विजय में निर्भीक हो जाईये

बुराई अंत तक बनी नहीं रहेगी। परमेश्वर आखिर में विजयी होंगे। परमेश्वर सार्वभौमिक हैं। जैसा कि सेंट थॉमस अक्नास कहते हैं,"परमेश्वर इतने शक्तिशाली हैं कि वह किसी भी बुराई को भलाई में बदल सकते हैं।“

यहेजकेल भविष्यवाणी करते हैं," मागोग देश के गोग ... हे गोग मैं तेरे विरुध्द हूँ “ (38:2-3)। गोग और मागोग का परिचय रहस्यमय लगता है,लेकिन यहेजकेल उनका इस्तेमाल आदिरूप शत्रुओं को दर्शाने के लिए करते हैं जो परमेश्वर के लोगों के विरूद्ध "बुरी युक्ति निकालते हैं“ (व.10, एम.एस.जी)।

प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में इनकी पहचान स्पष्ट हो जाती है (प्रकाशितवाक्य 19:11-20:10), जो कि विश्व के अंत और शैतान के विनाश का वर्णन करता है। गोग और मागोग शैतान के साथ पहचाने जाते हैं, और पृथ्वी के सभी बुरे बलों और लोगों को दर्शाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। प्रकाशितवाक्य और यहेजकेल दोनों का संदेश स्पष्ट हैः परमेश्वर जीतते हैं!

यह महत्वपूर्ण रूप से आशा का एक संदेश है। परमेश्वर कहते हैं," मैं मरी और खून के द्वारा उस से मुकद्दमा लडूँगा ... इस प्रकार मैं अपने को महान और पवित्र ठहराउँगा और बहुत सी जातियों के सामने अपने को प्रकट करूँगा। तब वे जान लेंगी कि मैं यहोवा हूँ“ (यहेजकेल 38:22-23)।

यहेजकेल का संदर्भ है कि लोग निर्वासित थे क्योंकि उन्होंने परमेश्वर के विरूद्ध विश्वासघात किया था। इसलिए उन्होंने उनसे अपना मुख छिपा लिया और उन्हें शत्रु को सौंप दिया (39:23-24)। अब वह वायदा करते हैं कि एक दिन आएगा जब बुराई का अंत होगा (वव.4-5)। परमेश्वर की महिमा होगीः " जिस समय मेरी महिमा होगी, उस समय उनका भी नाम बड़ा होगा“ (व.13)।

वह वायदा करते हैं कि वह उन पर दया करेंगेः " इस्राएल के सारे घराने पर दया करूँगा ... जब मैं उनको जाति –जाति के बीच से लौटा लाउँगा, और उन शत्रुओं के देशों से इकट्ठा करूँगा, तब बहुत जातियों की दृष्टि में उनके द्वारा पवित्र ठहरूँगा ... और उन से अपना मुँह फिर कभी न मोड़ूंगा, क्योंकि मैं ने इस्राएल के घराने पर अपना आत्मा उण्डेला है“ (वव.25-29, एम.एस.जी)।

ये अद्भुत वायदें हैं। शैतान हारा हुआ शत्रु है। उसका अंत आएगा। आप अभी उस विजय का अनुभव करना शुरु कर सकते है।

प्रार्थना

परमेश्वर, आपका धन्यवाद कि बुराई की सामर्थ हरा दी गई है। अपनी आत्मा को महान रूप से ऊँडेलिये ताकि हर कोई जान ले कि आप हमारे प्रभु परमेश्वर हैं।

पिप्पा भी कहते है

याकूब 4:7-8

" शैतान का सामना करो, तो वह तुम्हारे पास से भाग निकलेगा। परमेश्वर के निकट आइए तो वह भी आपके निकट आएंगे।”

शक्तिशाली वचन जिन्हें मैंने बहुत सी बार दोहराया है जब डर या निराशा के द्वारा मुझ पर प्रहार किया गया जैसा मैं महसूस कर रही थी।

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संदर्भ

एल्बर्ट आइंस्टाईन, सिटेड इन एडिथ ड्रपर, ड्रपर बुक ऑफ कोटेशन फोर द क्रिश्चन वर्ल्ड (टिंडाले हाउस पब, 1992)

जॉन ग्रे,"बुराई के विषय में सच्चाई,“ द गार्जियन (21 अक्तूबर 2014)

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