आपका उदाहरण
परिचय
पोप फ्रांसिस एक क्षण के लिए रूक गए उनकी सामान्य मंडली के लिए प्रार्थना करने, गले लगाने और ऐसे एक व्यक्ति पर हाथ रखने के लिए जिसे तीक्ष्ण रोग था। मनुष्य का चेहरा ट्यूमर से ढँक गया था। सेंट पीटर स्क्वेअर में पोप के द्वारा उसे गले लगाने का चित्र सोशियल मीडिया में फैल गया, मसीह के प्रेम को दर्शाते हुए उनके हृदयस्पर्शी उदाहरण के द्वारा लाखों लोगों को उत्साहित करते हुए।
इस उदाहरण में एक महान सामर्थ है। यदि हमारे पास कोई आदर्श नहीं है जिसके पीछे हम चल सकते हैं, तो सुधरना कठिन बात है। एक अच्छा उदाहरण ना केवल उत्साहित करता है, यह हमें अनुकरण करने और इससे सीखने के लिए एक नमूना भी प्रदान करता है।
दूसरों के उदाहरण पर चलने के द्वारा ना केवल आप इससे अत्यधिक लाभ पाते हैं, लेकिन आपका उदाहरण महत्वपूर्ण है यदि आपको दूसरो पर प्रभाव बनाना है। एल्बर्ट स्केवेजर, फ्रेंच सिद्धांतवादी, फिलोसोफर और चिकित्सक ने कहा, " दूसरों को प्रभावित करने में उदाहरण मुख्य चीज नहीं है - यह एकमात्र चीज है।" यह आपकी बातचीत से अधिक आपके चालचलन पर निर्भर है, जो आप प्रचार करते हैं उससे अधिक जो आप अभ्यास करते हैं, जो आप कहते हैं उससे अधिक जो आप करते हैं।
जो लोग देखते हैं उससे ज्यादा महत्वपूर्ण है जो वे सुनते हैं। लोग वह करते हैं जो लोग देखते हैं। जैसा कि जॉन मॅक्सवेल लिखते हैं, "नव्वासी प्रतिशत लोग दिखने वाली प्रेरणा से सीखते हैं; दस प्रतिशत श्रवण प्रेरणा से और एक प्रतिशत लोग दूसरी इंद्रियों के द्वारा...जो वे सुनते हैं वे समझते हैं। जो वे देखते हैं वे विश्वास करते हैं!"
जैसा कि हमने कल पढ़ा, आप अपने जीवन में यीशु के उदाहरण के पीछे चलने के लिए बुलाए गए हैं (1पतरस 2:21)। आज हम इसके कुछ महत्व को देखेंगे।
नीतिवचन 28:18-28
18 यदि कोई व्यक्ति निष्कलंक हो तो वह सुरक्षित है।
यदि वह बुरा व्यक्ति हो तो वह अपनी सामर्थ खो बैठेगा।
19 जो अपनी धरता जोतता—बोता है और परिश्रम करता है,
उसके पास सदा भर पूर खाने को होगा। किन्तु जो सदा सपनों में खोया रहता है, सदा दरिद्र रहेगा।
20 परमेश्वर निज भक्त पर आशीष बरसाता है,
किन्तु वह मनुष्य जो सदा धन पाने को लालायित रहता है, बिना दण्ड के नहीं बचेगा।
21 किसी धन्यवान व्यक्ति का पक्षपात करना अच्छा नहीं होता तो
भी कुछ न्यायाधीश कभी कर जाते पक्षपात मात्र छोटे से रोटी के ग्रास के लिये।
22 सूम सदा धन पाने को लालायित रहता है
और नहीं जानता कि उसकी ताक में दरिद्रता है।
23 वह जो किसी जन को सुधारने को डांटता है,
वह अधिक प्रेम पाता है, अपेक्षा उसके जो चापलूसी करता है।
24 कुछ लोग होते हैं जो अपने पिता और माता से चुराते हैं।
वह कहते हैं, “यह बुरा नहीं है।” यह उस बुरा व्यक्ति जैसा है जो घर के भीतर आकर सभी वस्तुओं को तोड़ फोड़ कर देते हैं।
25 लालची मनुष्य तो मतभेद भड़काता,
किन्तु वह मनुष्य जिसका भरोसा यहोवा पर है फूलेगा—फलेगा।
26 मूर्ख को अपने पर बहुत भरोसा होता है।
किन्तु जो ज्ञान की राह पर चलता है, सुरक्षित रहता है।
27 जो गरीबों को दान देता रहता है उसको किसी बात का अभाव नहीं रहता।
किन्तु जो उनसे आँख मूँद लेता है, वह शाप पाता है।
28 जब कोई दुष्ट शक्ति पा जाता है तो सज्जन छिप जाने को दूर चले जाते हैं।
किन्तु जब दुष्ट जन का विनाश होता है तो सज्जनों को वृद्धि प्रकट होने लगती है।
समीक्षा
बुद्धि से चलिये
ज्ञान समानांतर है। बुद्धि खड़ी दिशा में है - यह ऊपर से आती है। यीशु के उदाहरण पर चलने का अर्थ है बुद्धि से चलना। अपने आरंभिक दिनों से यीशु बुद्धि से चलेः "वह बुद्धि से भरे हुए थे" (लूका 2:40)। "लोगों ने आश्चर्य किया, " यह कौन सा ज्ञान है जो उनको दिया गया है: " (मरकुस 6:2)।
बुद्धि से चलने का क्या अर्थ है: नीतिवचन के लेखक कहते हैं, " जो सीधाई से चलता है वह बचाया जाता है, परन्तु जो टेढ़ी चाल चलता है वह अचानक गिर पड़ता है" (नीतिवचन 28:18, एम.एस.जी)। वह आगे कहते हैं, " जो अपने ऊपर भरोसा रखता है, वह मूर्ख है; और जो बुद्धि से चलता है, वह बचता है" (व.26, एम.एस.जी)।
"कल्पनाओं के पीछे जाने" के बजाय कठिन परिश्रम करना बुद्धिमानी है (व.19): " जो अपनी भूमि को जोता बोया करता है, उसका तो पेट भरता है, परन्तु जो निकम्मे लोगों की संगति करता है वह कंगालपन से घिरा रहता है" (व.19, एम.एस.जी)।
" सच्चे मनुष्य पर बहुत आशीर्वाद होते रहते हैं, परन्तु जो धनी होने में उतावली करता है, वह निर्दोष नहीं ठहरता" (व.20)। उदार बनना बुद्धिमानी हैः" लोभी जन धन प्राप्त करने में उतावली करता है, और नहीं जानता कि वह घटी में पड़ेगा... जो निर्धन को दान देता है उसे घटी नहीं होती, परन्तु जो उससे दृष्टि फेर लेता है वह श्राप पर श्राप पाता है" (वव.22,27)।
कभी कभी सच बताना आवश्यक होता है। " जो किसी मनुष्य को डाँटता है वह अन्त में चापलूसी करने वाले से अधिक प्यारा हो जाता है" (व.23)। यीशु कभी भी सच को बताने में घबराये नहीं। "अंत में, चापलूसी करने से अधिक गंभीर रीति से डाँटे जाने की सराहना की जाएगी" (व.23, एम.एस.जी)।
परमेश्वर पर निरंतर भरोसा करते रहिए। जो परमेश्वर पर भरोसा करता है वह समृद्ध होगा (व.25ब) और " जो बुद्धि से चलता है, वह बचता है" (व.26ब)।
प्रार्थना
परमेश्वर, मेरी सहायता कीजिए कि बुद्धि से चलूं, आप पर भरोसा करते हुए।
1 पतरस 3:1-22
पत्नी और पति
3इसी प्रकार हे पत्नियों, अपने अपने पतियों के प्रति समर्पित रहो। ताकि यदि उनमें से कोई परमेश्वर के वचन का पालन नहीं करते हों तो तुम्हारे पवित्र और आदरपूर्ण चाल चलन को देखकर बिना किसी बातचीत के ही अपनी-अपनी पत्नियों के व्यवहार से जीत लिए जाएँ। 2 तुम्हारा साज-श्रृंगार दिखावटी नहीं होना चाहिए। 3 अर्थात् जो केशों की वेणियाँ सजाने, सोने के आभूषण पहनने और अच्छे-अच्छे कपड़ों से किया जाता है, 4 बल्कि तुम्हारा श्रृंगार तो तुम्हारे मन का भीतरी व्यक्तित्व होना चाहिए जो कोमल और शान्त आत्मा के अविनाशी सौन्दर्य से युक्त हो। परमेश्वर की दृष्टि में जो मूल्यवान हो।
5 क्योंकि बीते युग की उन पवित्र महिलाओं का, अपने आपको सजाने-सँवारने का यही ढंग था, जिनकी आशाएँ परमेश्वर पर टिकी हैं। वे अपने अपने पति के अधीन वैसे ही रहा करती थीं। 6 जैसे इब्राहीम के अधीन रहने वाली सारा जो उसे अपना स्वामी मानती थी। तुम भी बिना कोई भय माने यदि नेक काम करती हो तो उसी की बेटी हो।
7 ऐसे ही हे पतियों, तुम अपनी पत्नियों के साथ समझदारी पूर्वक रहो। उन्हें निर्बल समझ कर, उनका आदर करो। जीवन के वरदान में उन्हें अपना सह उत्तराधिकारी भी मानो ताकि तुम्हारी प्रार्थनाओं में बाधा न पड़े।
सतकर्मों के लिए दुःख झेलना
8 अन्त में तुम सब को समानविचार, सहानुभूतिशील, अपने बन्धुओं से प्रेम करने वाला, दयालु और नम्र बनना चाहिए। 9 एक बुराई का बदला दूसरी बुराई से मत दो। अथवा अपमान के बदले अपमान मत करो बल्कि बदले में आशीर्वाद दो क्योंकि परमेश्वर ने तुम्हें ऐसा ही करने को बुलाया है। इसी से तुम्हें परमेश्वर के आशीर्वाद का उत्तराधिकारी मिलेगा। 10 शास्त्र कहता है:
“जो जीवन का आनन्द उठाना चाहे
जो समय की सद्गति को देखना चाहे
वह अपने होठों को छल वाणी से रोके
11 उसे चाहिए वह मुँह फेरे उससे जो नेक नहीं होता वह उन कर्मों को सदा करे जो उत्तम हैं,
उसे चाहिए यत्नशील हो शांति पाने को उसे चाहिए वह शांति का अनुसरण करे।
12 प्रभु की आँखें टिकी हैं उन्हीं पर जो उत्तम हैं
प्रभु के कान लगे उनकी प्रार्थनाओं पर जो बुरे कर्म करते हैं,
प्रभु उनसे सदा मुख फेरता है।”
13 यदि जो उत्तम है तुम उसे ही करने को लालायित रहो तो भला तुम्हें कौन हानि पहुँचा सकता है। 14 किन्तु यदि तुम्हें भले के लिए दुःख उठाना ही पड़े तो तुम धन्य हो। “इसलिए उनके किसी भी भय से न तो भयभीत होवो और न ही विचलित।” 15 अपने मन में मसीह को प्रभु के रूप में आदर दो। तुम सब जिस विश्वास को रखते हो, उसके विषय में यदि कोई तुमसे पूछे तो उसे उत्तर देने के लिए सदा तैयार रहो। 16 किन्तु विनम्रता और आदर के साथ ही ऐसा करो। अपना हृदय शुद्ध रखो ताकि यीशु मसीह में तुम्हारे उत्तम आचरण की निन्दा करने वाले लोग तुम्हारा अपमान करते हुए लजायें।
17 यदि परमेश्वर की इच्छा यही है कि तुम दुःख उठाओ तो उत्तम कार्य करते हुए दुःख झेलो न कि बुरे काम करते हुए।
18 क्योंकि मसीह ने भी हमारे पापों
के लिए दुःख उठाया।
अर्थात् वह जो निर्दोष था
हम पापियों के लिये एक बार मर गया
कि हमें परमेश्वर के समीप ले जाये।
शरीर के भाव से तो वह मारा गया
पर आत्मा के भाव से जिलाया गया।
19 आत्मा की स्थिति में ही उसने जाकर उन स्वर्गीय आत्माओं को जो बंदी थीं उन बंदी आत्माओं को संदेश दिया 20 जो उस समय परमेश्वर की आज्ञा नहीं मानने वाली थी जब नूह की नाव बनायी जा रही थी और परमेश्वर धीरज के साथ प्रतीक्षा कर रह था उस नाव में थोड़े से अर्थात् केवल आठ व्यक्ति ही पानी से बच पाये थे। 21 यह पानी उस बपतिस्मा के समान है जिससे अब तुम्हारा उद्धार होता है। इसमें शरीर का मैल छुड़ाना नहीं, वरन एक शुद्ध अन्तःकरण के लिए परमेश्वर से विनती है। अब तो बपतिस्मा तुम्हें यीशु मसीह के पुनरुत्थान द्वारा बचाता है। 22 वह स्वर्ग में परमेश्वर के दाहिने विराजमान है, और अब स्वर्गदूत, अधिकारीगण और सभी शक्तियाँ उसके अधीन कर दी गयी है।
समीक्षा
वचनो के साथ या इसके बिना जय पाइए
मसीह जीवन जीना सबसे उचित तरीका है, उन लोगों को सुसमाचार बताने को, जो आपके बहुत निकट रहते हैं। यह निश्चित ही आपके परिवार पर, सहकर्मीयों और उन पर लागू होता है, जिनके साथ आप रहते हैं। अक्सर आप अपने होठों से अधिक अपने जीवन से एक बेहतर उपदेश सुना सकते हैं।
यह बहुत ही महत्वपूर्ण है यदि आपका पति या पत्नी मसीह नहीं है। पतरस मसीह पत्नियों को उत्साहित करते हैं कि यदि उनके पति वचन पर विश्वास नहीं करते हैं, " तब भी तुम्हारे भय सहित पवित्र चाल- चलन को देखकर बिना वचन के अपनी – अपनी पत्नी के चाल चलन के द्वारा खिंच जाएँ" (व.2)।
वे शायद से परमेश्वर के विषय में किसी वचन से सहमत न हो लेकिन वे "आपकी पवित्र सुंदरता के जीवन के द्वारा प्रभावित हो जाएंगे। आपके बाहरी रूप से नहीं..बल्कि आपके हृदय की दशा से अंतर पड़ता है" (वव.3-4, एम.एस.जी)। बाहरी सुंदरता से बढ़कर एक सुंदरता है, " वरन् तुम्हारा छिपा हुआ और गुप्त मनुष्यत्व, नम्रता और मन की दीनता की अविनाशी सजावट से सुसज्जित रहे, क्योंकि परमेश्वर की दृष्टि में इसका मूल्य बड़ा है" (व.4)।
यीशु की शिक्षा, और प्रेरितों की, पति के व्यवहार के बर्ताव के विषय में क्रांति लाने वाली है। ऐसे एक समाज में जहाँ केवल पत्नियों को कर्तव्य निभाना है और केवल पति के पास अधिकार है, पतरस कहते हैं कि दोनों को एक दूसरे के प्रति कर्तव्य निभाना है।
ठीक जैसे वह पत्नियों को "अच्छी पत्नी" बनने के लिए (व.1, एम.एस.जी) कहते हैं, वह पति को "अच्छा पति" बनने के लिए कहते हैं (व.6, एम.एस.जी)। ""वैसे ही हे पतियो, स्त्री को निर्बल पात्र जानकर उसका आदर करो, यह समझकर कि हम दोनों जीवन के वरदान के वारिस हैं, जिससे तुम्हारी प्रार्थनाएँ रुक न जाए" (व.7, एम.एस.जी)। वह कहते हैं पति को ध्यान रखना है और सम्मान करना है। जब तक आप इस संबंध को सही से नहीं निभायेंगे, आपकी प्रार्थनाएँ प्रभावी नहीं होगी (व.7)।
कौन सी जीवनशैली है जो बिना शब्दों के लोगों को जीतेगी: यह एक दूसरे के साथ मेल में जीना है, सांत्वना, प्रेम, करुणा और दीनता; " बुराई के बदले बुराई मत करो और न गाली के बदले गाली दो; पर इसके विपरीत आशीष ही दो, क्योंकि तुम आशीष के वारिस होने के लिये बुलाए गए हो" (व.9, एम.एस.जी)।
इसमें आपकी जीभ को नियंत्रित करना है, " अपनी जीभ को बुराई से, और अपने होंठों को छल की बातें करने से रोके रहो" (व.10, एम.एस.जी)। हमेशा सकारात्मक रूप से और सच्चाई से बोलने के लिए अपने आपको प्रशिक्षित करो। " वह बुराई का साथ छोड़ें, और भलाई ही करें; वह मेल मिलाप को ढूँढ़े, और उसके यत्न में रहे" (व.11, एम.एस.जी)। यह बिना डर का एक जीवन लायेगा (व.14), जहाँ पर यीशु आपके हृदय में प्रभु के रूप में हैं (व.15)।
"शब्दों के बिना" शायद से सबसे अच्छा आरंभिक तरीका है उन लोगों को जीतने के लिए जो आपके बहुत निकट हैं। किंतु, वचन भी बहुत महत्वपूर्ण है। बोलने में लज्जित मत होः " जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, उसे उत्तर देने के लिये सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ" (व.15)।
अक्खड़पन और कठोरता से आप शायद ही लोगों को कभी क्भी जीत पाएंगे। शब्दों से सुरक्षा के साथ-साथ, आपको नैतिक सुरक्षा की आवश्यकता है – एक स्पष्ट विवेक, ताकि लोग कह सकें कि वह आपके विषय में क्या पसंद करते हैं और इससे अंतर नहीं पड़ता है क्योंकि परमेश्वर सच्चाई को जानते हैं: " विवेक भी शुध्द रखिए, इसलिये कि जिन बातों के विषय में तुम्हारी बदमानी होती है उनके विषय में वे, जो मसीह में तुम्हारे अच्छे चाल - चलन का अपमान करते हैं, लज्जित हों" (व.16, एम.एस.जी)।
जैसा कि रिक वॉरन कहते हैं, "आप उन झूठ को नियंत्रित नहीं कर सकते हैं जो लोग आपके विषय में बोलते हैं, लेकिन आप सच्चाई को नियंत्रित कर सकते हैं..इस तरह से जीओ कि लोगों को बातें ना बनानी पड़े आप पर दोष लगाने के लिए।" क्रूस और पुनरुत्थान विवेक को शुद्ध करता है। यीशु ने एक ही बार में पापों के लिए जान दी...आपको परमेश्वर के पास लाने के लिए" (व.18)।
बपतिस्मा इसका प्रतीक हैः " इसमें शरीर के मैल को दूर करने का अर्थ नहीं है, परन्तु शुध्द विवेक से परमेश्वर के वश में हो जाने का अर्थ है" (व.21)।
प्रार्थना
परमेश्वर, एक स्पष्ट विवेक के साथ जीने में मेरी सहायता कीजिए।
यहेजकेल 45:1-46:24
पवित्र काम के उपयोग के लिये भूमि का बँटवारा
45“तुम इस्राएल के परिवार के लिये भूमि का विभाजन गोट डालकर करोगे। उस समय तुम भूमि का एक भाग अलग करोगे। वह यहोवा के लिये पवित्र हिस्सा होगा। भूमि पच्चीस हजार हाथ लम्बी और बीस हजार हाथ चौड़ी होगी। यह पूरी भूमि पवित्र होगी। 2 एक वर्गाकार पाँच सौ निनानवे हाथ क्षेत्र मन्दिर के लिये होगा। मन्दिर के चारों ओर एक खुला क्षेत्र पचास हाथ चौड़ा होगा। 3 अति पवित्र स्थान में तुम पच्चीस हजार हाथ लम्बा और दस हाजार चौड़ा नापोगे। मन्दिर इस क्षेत्र में होगा। मन्दिर का क्षेत्र सर्वाधिक पवित्र स्थान होगा।
4 “यह भूमि का पवित्र भाग मन्दिर के सेवक याजकों के लिये होगा जहाँ वे परमेश्वर के समीप सेवा करने आते हैं। यह याजकों के घरों और मन्दिर के लिये होगा। 5 दूसरा क्षेत्र पच्चीस हजार हाथ लम्बा और दस हजार हाथ चौड़ा उन लेविवंशियों के लिये होगा जो मन्दिर में सेवा करते हैं। यह भूमि भी लेविवंशियों की, उनके रहने के नगरों के लिये होगी।
6 “तुम नगर को पाँच हजार हाथ चौड़ा और पच्चीस हजार हाथ लम्बा क्षेत्र दोगे। यह पवित्र क्षेत्र के सहारे होगा। यह इस्राएल के पूरे परिवार के लिये होगा। 7 शासक पवित्र स्थान और नगर की अपनी भूमि के दोनों ओर की भूमि अपने पास रखेगा। यह पवित्र क्षेत्र और नगर के क्षेत्र के बीच में होगा। यह उसी चौड़ाई का होगा जो चौड़ाई परिवार समूह की भूमि की है। यह लगातार पश्चिमी सीमा से पूर्वी सीमा तक जाएगा। 8 यह भूमि इस्राएल में शासक की सम्पत्ति होगी। इस प्रकार शासक को मेरे लोगों के जीवन को भविष्य में कष्टकर बनाने की आवश्यकता नहीं होगी। किन्तु वे भूमि को इस्राएलियों के लिये उनके परिवार समूहों को देंगे।”
9 मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा, “इस्राएल के शासकों बहुत हो चुका! क्रूर होना और लोगों से चीजें चुराना, छोड़ो! न्यायी बनो और अच्छे काम करो। हमारे लोगों को अपने घरों से बाहर जाने के लिये बलपूर्वक विवश न करो!” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा।
10 “लोगों को ठगना बन्द करो। सही बाटों और मापों का उपयोग करो। 11 एपा (सूखी चीजों का बाट) और बथ (द्रव का मापक) एक ही समान होने चाहिएं। एक बथ और एपा दोनों 1/10 होमर के बराबर होने चाहिए। वे मापक होमर पर आधारित होंगे। 12 एक शेकेल बीस गेरा के बराबर होना चाहिए। एक मिना साठ शेकेल के बराबर होना चाहिए। यह बीस शेकेल जमा पच्चीस शेकेल जमा पन्द्रह शेकेल के बराबर होना चाहिए।
13 “यह विशेष भेंट है जिसे तुम्हें देना चाहिए:
1/6 एपा गेहूँ के हर एक होमर छ: बुशल गेहूँ के लिये।
1/6 एपा जौ के हर एक होमर छ: बुशल जौ के लिये।
14 1/10 बथ जैतून का तेल, हर एक कोर जैतून के तेल के लिये। (याद रखें: दस बथ का एक होमर दस बथ का एक कोर)
15 एक भेड़, दो सौ भेड़ों के लिये — इस्राएल में सिंचाई के लिये बने हर कुँए से।
“ये विशेष भेंटे अन्नबलि, होमबलि और मेलबलि के लिये हैं। ये भेंटे लोगों को पवित्र बनाने के लिये हैं।” मेरे स्वामी यहोवा ने यह कहा।
16 “देश का हर एक व्यक्ति इस्राएल के शासक के लिये यह भेंट देगा। 17 किन्तु शासक को विशेष पवित्र दिनों के लिये आवश्यक चीजें देनी चाहिए। शासक को होमबलि, अन्नबलि और पेय भेंट की व्यवस्था दावत के दिन, नवचन्द्र, सब्त और इस्राएल के परिवार के सभी विशेष दावतों के लिये करनी चाहिए। शासकों को सभी पापबलि, अन्नबलि, होमबलि, मेलबलि जो इस्राएल के परिवार को पवित्र करने के लिये उपयोग की जाती हैं, देना चाहिए।”
18 मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें बताई, “पहले महीने में, महीने के प्रथम दिन तुम एक दोष रहित नया बैल लोगे। तुम्हें उस बैल का उपयोग मन्दिर को पवित्र करने के लिये करना चाहिए। 19 याजक कुछ खून पाप के लिये भेंट से लेगा और इसे मन्दिर के द्वार—स्तम्भो और वेदी के किनारी के चारों कोनों और भीतरी आँगन के फाटक के स्तम्भों पर डालेगा। 20 तुम यही काम महीने के सातवें दिन उस व्यक्ति के लिये करोगे जिसने गलती से पाप कर दिया हो, या अनजाने में किया हो। इस प्रकार तुम मन्दिर को शुद्ध करोगे।”
फसह पर्व की दावत से समय भेंट
21 “पहले महीने के चौदहवें दिन तुम्हें फसह पर्व मनाना चाहिए। अखमीरी रोटी का यह उत्सव इस समय आरम्भ होता है। उत्सव सात दिन तक चलता है। 22 उस समय शासक एक बैल अपने लिए तथा इस्राएल के लोगों के लिए भेंट करेगा। बैल पापबलि के लिये होगा। 23 दावत के सात दिन तक शासक दोष रहित सात बैल और सात मेढ़े भेंट करेगा। वे यहोवा को होमबलि होंगे। शासक उत्सव के सात दिन हर रोज एक बैल भेंट करेगा और वह पाप बलि के लिये हर एक दिन एक बकरा भेंट करेगा। 24 शासक एक एपा जौ हर एक बैल के साथ अन्नबलि के रूप में, और एक एपा जौ हर एक मेढ़े के साथ भेंट करेगा। शासक को एक गैलन तेल हर एफा अन्न के लिये देना चाहिए। 25 शासक को यही काम उत्सव (शरण) के सात दिन तक करना चाहिए। यह उत्सव सातवें महीने के पन्द्रहवें दिन आरम्भ होता है। ये भेंटे पापबलि, होमबलि, अन्नबलियाँ और तेल—भेंट होंगी।”
शासक और त्यौहार
46मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, “भीतरी आँगन का पूर्वी फाटक काम के छ: दिनों में बन्द रहेगा। किन्तु यही सब्त के दिन और नवचन्द्र के दिन खुलेगा। 2 शासक फाटक के प्रवेश कक्ष से अन्दर आएगा और उस फाटक के स्तम्भ के सहारे खड़ा होगा। तब याजक शासक की होमबलि और मेलबलि चढ़ाएगा। शासक फाटक की देहली पर उपासना करेगा। तब वह बाहर जाएगा। किन्तु फाटक संध्या होने तक बन्द नहीं होगा। 3 देश के लोग भी यहोवा के सम्मुख जहाँ फाटक सब्त के दिन और नवचन्द्र के दिन खुलता है, वहीं उपासना करेंगे।
4 “शासक सब्त के दिन होमबलि चढ़ाएगा। उसे दोष रहित छ: मेमने और दोष रहित एक मेढ़ा देना चाहिए। 5 उसे एक एपा अन्नबलि मेढ़े के साथ देनी चाहिए। शासक उतनी अन्नबलि मेमनों के साथ देगा, जितनी वह दे सकता है। उसे एक हिन जैतून का तेल हर एक एपा अन्न के साथ देना चाहिए।
6 “नवचन्द्र के दिन उसे एक बैल भेंट करना चाहिए, जिसमें कोई दोष न हो। वह छ: मेमने और एक मेढ़ा, जिसमें कोई दोष न हो, भी भेंट करेगा। 7 शासक को बैल के साथ एक एपा अन्नबलि और एक एपा अन्नबलि मेढ़े के साथ देनी चाहिए। शासक को मेमनों के साथ तथा हर एक एपा अन्न के लिये एक हिन तेल के साथ, जितना हो सके देना चाहिए।
8 “शासक को पूर्वी फाटक के प्रवेश कक्ष से होकर मन्दिर के क्षेत्र में आना जाना चाहिए।
9 “जब देश के निवासी यहोवा से मिलने विशेष त्यौहार पर आएंगे तो जो व्यक्ति उत्तर फाटक से उपासना करने को प्रवेश करेगा, वह दक्षिण फाटक से जाएगा। जो व्यक्ति फाटक से प्रवेश करेगा वह उत्तर फाटक से जाएगा। कोई भी उसी मार्ग से नहीं लौटेगा जिससे उसने प्रवेश किया। हर एक व्यक्ति को सीधे आगे बढ़ना चाहिए। 10 जब लोग अन्दर जाएंगे तो शासक अन्दर जाएगा। जब वे बाहर आएंगे तब शासक बाहर जाएगा।
11 “दावतों, और विशेष बैठकों के अवसर पर एक एपा अन्नबलि हर नये बैल के साथ चढ़ाई जानी चाहिए। एक एपा अन्नबलि हर मेढ़े के साथ चढ़ाई जानी चाहिए और हर एक मेमने के साथ उसे जितना अधिक वह दे सके देना चाहिए। उसे एक दिन हिन तेल हर अन्न के एक एपा के लिये देना चाहिए।
12 “जब शासक यहोवा को स्वेच्छा भेंट देता है, यह होमबलि, मेलबलि या स्वेच्छा भेंट हो सकती है, चढ़ायेगा तो उसके लिये पूर्व का फाटक खुलेगा। तब वह अपनी होमबलि और अपनी मेलबलि को सब्त के दिन की तरह चढ़ाएगा। जब वह जाएगा उसके बाद फाटक बन्द होगा।
नित्य भेंट
13 “तुम दोष रहित एक वर्ष का एक मेमना दोगे। यह प्रतिदिन यहोवा को होमबलि के लिये होगा। प्रत्येक प्रात: तुम इसे दोगे। 14 तुम प्रत्येक प्रात: मेमने के साथ अन्नबलि भी चढ़ाओगे। तुम 1/6 एपा आटा और 1/3 हिन तेल अच्छे आटे को चिकना करने के लिये, दोगे। यह यहोवा को नित्य अन्नबलि होगी। 15 इस प्रकार वे सदैव मेमना, अन्नबलि और तेल, होम बलि के लिये हर प्रात: देते रहेंगे।”
अपनी सन्तान को शासक द्वारा भूमि देने के नियम
16 मेरा स्वामी यहोवा यह कहता है, “यदि शासक अपनी भूमि के किसी हिस्से को अपने पुत्रों को पुरस्कार के रूप में देगा तो वह पुत्रों की होगी। यह उनकी सम्पत्ति है। 17 किन्तु यदि कोई शासक अपनी भूमि के किसी भाग को अपने दास को पुरस्कार के रूप में देता है तो वह पुरस्कार उसके स्वतन्त्र होने की तिथि तक ही उसका रहेगा। तब पुरस्कार शासक को वापस हो जाएगा। केवल राजा के पुत्र ही उसकी भूमि के पुरस्कार को अपने पास रख सकते हैं 18 और शासक लोगों की भूमि का कोई भी हिस्सा नहीं लेगा और न ही उन्हें अपनी भूमि छोड़ने को विवश करेगा। उसे अपनी भूमि का कुछ भाग अपने पुत्रों को देना चाहिए। इस तरह से हमारे लोग अपनी भूमि से वंचित होने के लिये विवश नहीं किये जाएंगे।”
विशेष रसोईघर
19 वह व्यक्ति मुझे द्वार से फाटक की बगल में ले गया। वह मुझे याजकों के उत्तर में पवित्र कमरों की ओर ले गया। मैंने वहाँ बहुत दूर पश्चिम में एक स्थान देखा। 20 उस व्यक्ति ने मुझसे कहा, “यही वह स्थान है जहाँ याजक दोष बलि और पाप बलि को पकायेंगे। यहीं पर याजक अन्नबलि को पकायेंगे। क्यों क्योंकि जिससे उन्हें उन भेंटों को बाहरी आँगन में ले जाने की आवश्यकता न रहे। इस प्रकार वे उन पवित्र चीजों को बाहर नहीं लाएंगे जहाँ साधारण लोग होंगे।”
21 तब वह व्यक्ति मुझे बाहरी आँगन में लाया। वह मुझे आँगन के चारों कोनों में ले गया। आँगन के हर एक कोने में एक छोटा आँगन था। 22 आँगन के कोनों में छोटे आँगन थे। हर एक छोटा आँगन चालीस हाथ लम्बा और तीस हाथ चौड़ा था। चारों कोनों की नाप समान थी। 23 भीतर इन छोटे आँगनों के चारों ओर ईंटे की एक दीवार थी। हर एक दीवार में भोजन पकाने के स्थान बने थे। 24 उस व्यक्ति ने मुझसे कहा, “ये रसोईयाँ हैं जहाँ वे लोग जो मन्दिर की सेवा करते हैं, लोगों के लिये बलि पकायेंगे।”
समीक्षा
परमेश्वर के तरीके से आराधना कीजिए
दर्शन में, यहेजकेल "परमेश्वर के लिए एक पवित्र स्थान" को देखते है (45:1, एम.एस.जी)। संपूर्ण क्षेत्र पवित्र था (व.1), इसमें एक पवित्रस्थान था जहाँ पर याजक परमेश्वर के समीप सेवा – टहल करते थे (वव.2-4), और लेवियों, राजकुमारों और सभी लोगों के लिए संपत्ति। यह लोगों का एक दर्शन है जो अपने आपमें शांति में है, जिसमें समाज के सभी विभिन्न भाग और स्तर एक दूसरे के साथ मेल में रहते हैं और उचित रीति से रहते हैं।
लेकिन यह लोगों के द्वारा एक साथ अच्छी तरह से रहने के विषय में नहीं है - यह एक स्थान है जो "लोगों के लिए है..परमेश्वर की उपस्थिति में आराधना करने के लिए" (46:3)। लोगों के बीच में ताल-मेल परमेश्वर से आता है, और सबसे मुख्य चीज है आराधना।
परमेश्वर की रीति से आराधना करने में दो चीजों की आवश्यकता है। पहला है प्रायश्चित्त। लीडर्स के लिए ("इस्राएल के प्रधानों") परमेश्वर का संदेश है, " बस करो, उपद्रव और उत्पात को दूर करो, और न्याय और सत्यनिष्ठा के काम किया करो; मेरी प्रजा के लोगों को निकाल देना छोड़ दो, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।"तुम्हारे पास सच्चा तराजू, सच्चा एपा, और सच्ची बात रहे" (45:9-10, एम.एस.जी)।
दूसरा है प्रायश्चित (वव.15-17)। " फसह" " इस बात का प्रतीक है कि यीशु के बलिदान के कारण परमेश्वर आपके पाप को हटा देते हैं। लहू को दरवाजे पर लगाना था, मसीह के लहू को दर्शाते हुए।
नंबर सात सिद्ध नंबर हैः" महीने के सातवें दिन को भी इसी प्रकार ही करना.. वह सात दिन का पर्व हो .. पर्व के सातों दिन वह यहोवा के लिये होमबलि तैयार करें, अर्थात् हर एक दिन सात सात निर्दोष बछड़े और सात सात निर्दोष मेढ़े ... सातवें महीने के पन्द्रहवें दिन से लेकर सात दिन तक .." (वव.20,21,23,25)।
यह एक सिद्ध और सक्षम बलिदान और प्रायश्चित की ओर इशारा करता है जिसे यीशु ने आपके लिए किया, जो आपको परमेश्वर की उपस्थिति में आने के लिए सक्षम बनाता है और आराधना का एक जीवन जीने के लिए भी।
क्रूस और यीशु के पुनरुत्थान के मार्ग पर चलिए। ऐसा एक जीवन जीएं जो लोगों को जीत ले। स्पष्ट विवेक रखिए और बिना डर के जीएं। यीशु के सिद्ध उदाहरण के पीछे चलिए और आपका जीवन दूसरों के लिए एक उदाहरण होगा।
प्रार्थना
परमेश्वर आपका धन्यवाद कि आपने हमारे लिए अपनी जान दी, पापी के लिए सत्यनिष्ठ ने, ताकि मुझे परमेश्वर के निकट ले आये। मेरी सहायता कीजिए कि आराधना का एक जीवन जीऊँ, आपके सिद्ध उदाहरण के पीछे चलते हुए।
पिप्पा भी कहते है
1 पतरस 3:6 (आर.एस.व्ही)
" जैसे सारा अब्राहम की आज्ञा में रहती और उसे स्वामी कहती थी"
"कई बार मैंने निकी को "स्वामी" कहा – लेकिन गलती से। मैंने उन्हें "डैडी", शायद से "मम्मी" और इसके अलावा कुछ दूसरे नामों से पुकारा है।

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संदर्भ
जॉन सी मॅक्सवेल, आपके अंदर के लीडर को विकसित करना, (थॉमस नेल्सन पब्लिशिंग, 2012) पी.38
पोप फ्रांसिस फोटो लायसेंस्ड बाय एण्ड 1985-2015 एपा युरोपियन प्रेसफोटो एजेंसी
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जिन वचनों को (एमएसजी MSG) से चिन्हित किया गया है उन्हें मैसेज से लिया गया है। कॉपीराइट © 1993, 1994, 1995, 1996, 2000, 2001, 2002. जिनका प्रयोग एनएवीप्रेस पब्लिशिंग ग्रुप की अनुमति से किया गया है।
"नव्वासी प्रतिशत लोग दिखनेवाली प्रेरणा से सीखते है; दस प्रतिशत श्रवण प्रेरणा से और एक प्रतिशत लोग दूसरी इंद्रियों के द्वारा...जो वे सुनते है वे समझते है। जो वे देखते है वे विश्वास करते है!" (जॉन सी मॅक्सवेल, आपके अंदर के लीडर को विकसित करना, पी.38)