दिन 346

आप कैसे एक अंतर पैदा कर सकते हैं

बुद्धि भजन संहिता 140:6-13
नए करार प्रकाशित वाक्य 2:18-3:6
जूना करार एस्तेर 1:1-2:18

परिचय

टाईम मैग्जीन में एक बातचीत में, महान स्विस सिद्धांतवादी कार्ल बार्थ ने याद किया कि उन्होंने युवा सिद्धांतवादियों को सलाह दी, "अपनी बाईबल लो और अपना समाचार पत्र लो और दोनों को पढ़ो। लेकिन अपनी बाईबल से समाचार पत्र पढ़ो।"

जब हम समाचार पढ़ते हैं, देखते हैं या सुनते हैं तब निराश होना आसान बात है। कभी कभी ऐसा लगता है कि बुराई अच्छाई पर जीत रही है। "दुष्ट" की योजनाएं सफल होती हुई दिखाई देती हैं, जबकि दूसरे आंतकवाद, युद्ध, गरीबी और अन्याय की बरबादी के अधीन हैं।

यही कारण है कि हमें पवित्र आत्मा की आवाज को सुनने और परमेश्वर के वचन को सुनने की आवश्यकता है। जैसे ही हम वचनों का अध्ययन करते हैं, हम बुराई पर अच्छाई की विजय को देखते हैं। आज के हर लेखांश में हम देखते हैं कि बुराई अंत में विजय नहीं पायेगी। आखिर में, अच्छाई ही जीतती है। इसके अतिरिक्त, अच्छाई और बुराई की लड़ाई में, आप एक अंतर पैदा कर सकते हैं।

बुद्धि

भजन संहिता 140:6-13

6 हे यहोवा, तू मेरा परमेश्वर है।
 हे यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन।
7 हे यहोवा, तू मेरा बलशाली स्वामी है।
 तू मेरा उद्धारकर्ता है।
 तू मेरा सिर का कवच जैसा है।
 जो मेरा सिर युद्ध में बचाता है।

8 हे यहोवा, वे लोग दुष्ट हैं।
 उन की मनोकामना पूरी मत होने दे।
 उनकी योजनाओं को परवान मत चढने दे।
9 हे यहोवा, मेरे बैरियों को विजयी मत होने दे।
 वे बुरे लोग कुचक्र रच रहे हैं।
 उनके कुचक्रों को तू उन्ही पर चला दे।
10 उनके सिर पर धधकते अंगारों को ऊँडेल दे।
 मेरे शत्रुओं को आग में धकेल दे।
 उनको गक़े (कब्रों) में फेंक दे। वे उससे कभी बाहर न निकल पाये।
11 हे यहोवा, उन मिथ्यावादियों को तू जीने मत दे।
 बुरे लोगों के साथ बुरी बातें घटा दे।

12 मैं जानता हूँ यहोवा कंगालों का न्याय खराई से करेगा।
 परमेश्वर असहायों की सहायता करेगा।
13 हे यहोवा, भले लोग तेरे नाम की स्तुति करेंगे।
 भले लोग तेरी अराधना करेंगे।

समीक्षा

परमेश्वर की दुहाई दीजिए कि अच्छाई जय पाये

गरीबो और जरुरतमंदो के प्रति बहुत अन्याय वाले विश्व में, परमेश्वर गरीब के लिए न्याय को सुरक्षित रखेंगे और जरुरतमंद की जरुरत को पूरा करेंगे। हम आखिरकार जानते हैं कि सत्यनिष्ठ परमेश्वर के नाम की स्तुति करेगा और खरा व्यक्ति सर्वदा उनके सामने जीवित रहेगा (वव.12-13)।

दाऊद "परेशानी पैदा करने वालों" से घिरे हुए हैं (व.9, एम.एस.जी)। वे "घात करने वाले" और उपद्रवी हैं (व.11)। कुछ भौतिक प्रहार करते हैं, दूसरे शब्दों से प्रहार करते हैं। दोनों ही समान रूप से हानि पहुँचा सकते हैं। इसके बीच में दाऊद चिल्लाते हैं, " हे यहोवा, दुष्ट की इच्छा को पूरी न होने दे" (व.8)।

भजनसंहिता के अंत में भरोसे का एक उद्घोष है, " हे यहोवा, मुझे निश्चय है कि तू दीन जन का और दरिद्रों का न्याय चुकाएगा। नि:सन्देह सत्यनिष्ठ तेरे नाम का धन्यवाद करने पाएँगे; सीधे लोग तेरे सम्मुख वास करेंगे" (वव.12-13, एम.एस.जी)।

प्रार्थना

परमेश्वर, हम दुहाई देते हैं:" हे यहोवा, मैंने तुझ से कहा है कि तू मेरा परमेश्वर है; हे यहोवा, मेरे गिड़गिड़ाने की ओर कान लगा" (व.6)। हे यहोवा, दुष्ट की इच्छा को पूरी न होने दे, उसकी बुरी युक्ति को सफल न कर। हे यहोवा प्रभु, हे सारे सामर्थी उध्दारकर्ता, तू ने युध्द के दिन मेरे सिर की रक्षा की है (व.7)।

नए करार

प्रकाशित वाक्य 2:18-3:6

थूआतीरा की कलीसिया को मसीह का सन्देश

18 “थूआतीरा की कलीसिया के स्वर्गदूत के नाम:

“परमेश्वर का पुत्र, जिसके नेत्र धधकती आग के समान हैं, तथा जिसके चरण शुद्ध काँसे के जैसे हैं, इस प्रकार कहता है:

19 “मैं तेरे कर्मों, तेरे विश्वास, तेरी सेवा तथा तेरी धैर्यपूर्ण सहनशक्ति को जानता हूँ। मैं जानता हूँ कि अब तू जितना पहले किया करता था, उससे अधिक कर रहा है। 20 किन्तु मेरे पास तेरे विरोध में यह है: तू इजेबेल नाम की उस स्त्री को सह रहा है जो अपने आपको नबी कहती है। अपनी शिक्षा से वह मेरे सेवकों को व्यभिचार के प्रति तथा मूर्तियों का चढ़ावा खाने को प्रेरित करती है। 21 मैंने उसे मन फिराने का अवसर दिया है किन्तु वह परमेश्वर के प्रति व्यभिचार के लिए मन फिराना नहीं चाहती।

22 “इसलिए अब मैं उसे पीड़ा की शैया पर डालने ही वाला हूँ। तथा उन्हें भी जो उसके साथ व्यभिचार में सम्मिलित हैं। ताकि वे उस समय तक गहन पीड़ा का अनुभव करते रहें जब तक वे उसके साथ किए अपने बुरे कर्मों के लिए मन न फिरावें। 23 मैं महामारी से उसके बच्चों को मार डालूँगा और सभी कलीसियाओं को यह पता चल जाएगा कि मैं वही हूँ जो लोगों के मन और उनकी बुद्धि को जानता है। मैं तुम सब लोगों को तुम्हारे कर्मो के अनुसार दूँगा।

24 “अब मुझे थूआतीरा के उन शेष लोगों से कुछ कहना है जो इस सीख पर नहीं चलते और जो शैतान के तथा कथित गहन रहस्यों को नहीं जानते। मुझे तुम पर कोई और बोझ नहीं डालना है। 25 किन्तु जो तुम्हारे पास है, उस पर मेरे आने तक चलते रहो।

26 “जो विजय प्राप्त करेगा और जिन बातों का मैंने आदेश दिया है, अंत तक उन पर टिका रहेगा, मैं उन्हें जातियों पर अधिकार दूँगा। 27 तथा वह उन पर लोहे के डण्डे से शासन करेगा। वह उन्हें माटी के भाँड़ों की तरह चूर-चूर कर देगा। 28 यह वही अधिकार है जिसे मैंने अपने परम पिता से पाया है। मैं भी उस व्यक्ति को भोर का तारा दूँगा। 29 जिसके पास कान हैं, वह सुने कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कह रहा है।

सरदीस की कलीसिया के नाम मसीह का सन्देश

3“सरदीस की कलीसिया के स्वर्गदूत को इस प्रकार लिख:

“ऐसा वह कहता है जिसके पास परमेश्वर की सात आत्माएँ तथा सात तारे हैं,

“मैं तुम्हारे कर्मों को जानता हूँ, लोगों का कहना है कि तुम जीवित हो किन्तु वास्तव में तुम मरे हुए हो। 2 सावधान रह! तथा जो कुछ शेष है, इससे पहले कि वह पूरी तरह नष्ट हो जाए, उसे सुदृढ़ बना क्योंकि अपने परमेश्वर की निगाह में मैंने तेरे कर्मों को उत्तम नहीं पाया है। 3 सो जिस उपदेश को तूने सुना है और प्राप्त किया है, उसे याद कर। उसी पर चल और मनफिराव कर। यदि तू जागा नहीं तो अचानक चोर के समान मैं चला आऊँगा। मैं तुझे कब अचरज में डाल दूँ, तुझे पता भी नहीं चल पाएगा।

4 “कुछ भी हो सरदीस में तेरे पास कुछ ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपने को अशुद्ध नहीं किया है। वे श्वेत वस्त्र धारण किए हुए मेरे साथ-साथ घूमेंगे क्योंकि वे सुयोग्य हैं। 5 जो विजयी होगा वह इसी प्रकार श्वेत वस्त्र धारण करेगा। मैं जीवन की पुस्तक से उसका नाम नहीं मिटाऊँगा, बल्कि मैं तो उसके नाम को अपने परम पिता और उसके स्वर्गदूतों के सम्मुख मान्यता प्रदान करूँगा। 6 जिसके पास कान है, वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कह रही है।

समीक्षा

अच्छाई से बुराई पर जय पाने वाले बनिये

जैसे ही हम आज सात कलीसियाओं के लिए यीशु के वचनों को पढ़ते हैं, हम देखते हैं कि अच्छाई और बुराई के बीच लड़ाई ऐसी चीज नहीं है जो चर्च और विश्व के बीच में होती है, लेकिन यह चर्च के अंदर भी होती है। यीशु उनसे असाधारण और अद्भुत वायदा करते हैं जो बुराई पर जय पाते हैं।

  1. एक पवित्र जीवन जीएं

थुआतीरा में चर्च की स्तुति इसके प्रेम, विश्वास, सेवा, सहनशीलता और व्यक्तिगत वृद्धि के लिए की गई हैः" मैं तेरे कामों, तेरे प्रेम और विश्वास और सेवा और धीरज , को जानता हूँ और यह भी कि तेरे पिछले काम पहलों से बढ़कर हैं" (2:19)।

किंतु, यीशु चर्च को इसके धीरज के विषय में चुनौती देते हैं। आज, शब्द "धीरज" को महान गुण माना जाता है और इसे केवल सकारात्मक प्रकाश में देखा जाता है। धीरज एक बहुत ही महत्वपूर्ण गुण है। लेकिन, धीरज की सीमा है और कुछ प्रकार के धीरज अच्छे नहीं होते।

यीशु थुआतीरा चर्च की आलोचना करते हैं चर्च में व्यभिचार को सहने के कारण" मुझे तेरे विरुध्द यह कहना है कि तू उस स्त्री इजेबेल को रहने देता है जो अपने आप को भविष्यवक्तिन कहती है, और मेरे दासों को व्यभिचार करने और मूर्तियों के आगे चढ़ाई गई वस्तुएँ खाना सिखलाकर भरमाती है। मैं ने उसको मन फिराने के लिये अवसर दिया, पर वह अपने व्यभिचार से मन फिराना नहीं चाहती।" (वव.20-21)।

हम यौन-संबंध से भरी संस्कृति में रहते हैं जिसमें हमें उत्साहित किया जाता है और आशा की जाती है कि यौन-संबंध रूप से सक्रीय रहे और व्यक्तिगत "यौन-संबंध" की परिपूर्णता के खोजी रहें। बाईबल में यौन-संबंध का एक बहुत ही ऊँचा नजरिया है, इसमें आनंद लेने और सही संदर्भ में इसे उत्साहित करना – एक प्रेमी विवाह में। लेकिन कुछ भी जो इसके परे है, जैसे कि व्यभिचार या कामवासना, विनाशकारी और सहायताहीन है। हम नहीं जानते हैं कि इजेबेल का व्यभिचार क्या था – लेकिन ये वचन यौन-संबंध में शुद्धता के महत्व को स्मरण दिलाते हैं।

यीशु चेतावनी देते हैं कि यदि वे भी उसके कामों से मन न फिराएँगे तो मैं उन्हें बड़े क्लेश में डालूँगा (व.22ब)। परमेश्वर के पुत्र, " जिनकी आँखें आग की ज्वाला के समान, और जिनके पाँव उत्तम पीतल के समान हैं" (व.18), " मन का परखने वाला मैं ही हूँ, और मैं तुम में से हर एक को उसके कामों के अनुसार बदला दूँगा" (व.23)।

ये केवल दोष लगाने वाले वचन नहीं हैं, क्योंकि इसमें "मन फिराने" के लिए कहा गया है। असल में, यहाँ तक कि इजेबेल को मन फिराने का अवसर दिया गया (व.21)। जहाँ पर हमने यौन-संबंधित पाप किया है, यह स्मरण रखना बहुत ही महत्वपूर्ण है कि हमें क्षमा मिल सकती है –इस तरह के लेखांश के लिए हमारा उत्तर निराशाजनक नहीं होना चाहिए, बल्कि मन फिराने और धन्यवादिता का उत्तर होना चाहिए।

चर्च पवित्रता के लिए बुलाया गया है। यीशु वायदा करते हैं, " जो जय पाए और मेरे कामों के अनुसार अन्त तक करता रहे, मैं उसे जाति जाति के लोगों पर अधिकार दूँगा...मैंने भी ऐसा ही अधिकार अपने पिता से पाया है" (वव.26-27)। यीशु अपने वफादार जय पाने वाले लोगों के साथ अपने अधिकार को बाँटेंगे।

आप उनकी महिमा में भी सहभागी होंगेः" मैं उसे भोर का तारा दूँगा" (व.28)। यदि आप पाप के अंधकार की ओर अपनी पीठ मोड़ते हैं, तो आप यीशु मसीह के रूप में परमेश्वर की महिमा के प्रकाश को देखेंगे। पवित्रता की लड़ाई में आपका वर्तमान संघर्ष चाहे कितना अधिक हो, एक दिन इस तारे, यीशु के साथ, आप पूरी तरह से और अनंत रूप से संतुष्ट रहेंगे।

  1. प्रमाणिक रहें

पवित्रता का अर्थ सिद्ध होना नहीं है। इसका अर्थ है विश्वसनीयता का एक जीवन जीना। यह कपट का विपरीत है। इसका अर्थ है वास्तविक, ईमानदार और प्रमाणिक होना।

सरदीस की कलीसिया जो जीवित कहलाती है लेकिन असल में यह मरी हुई थी (3:1)। यह सक्रीय दिखती था। यह एक अच्छा चर्च लगता था। फिर भी यह आत्मसंतुष्ट हो गया था। यीशु उन्हें मन फिराने के लिए कहते हैं:" इसलिये स्मरण कर कि तू ने कैसी शिक्षा प्राप्त की और सुनी थी, और उसमें बना रह और मन फिरा" (व.3)। उन्होंने सुसमाचार को सुना था और पवित्र आत्मा ग्रहण किया था। स्मरण रखें कि ये असाधारण और अद्भुत सुविधाएँ क्या हैं, और उन्हें हल्के में मत लीजिए और आत्मसंतुष्ट न बनिए।

सरदीस के विरूद्ध दोष लगाया गया है कपट और अप्रमाणिकता का। वास्तविकता और प्रमाणिकता के लिए इसे पुकारा गया है। चर्च में " यहाँ कुछ ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपने – अपने वस्त्र अशुध्द नहीं किए" (व.4अ)। " वे श्वेत वस्त्र पहने हुए मेरे साथ घूमेंगे, क्योंकि वे इस योग्य हैं" (व.4ब)।

फिर से, यीशु जय पाने वालों से अद्भुत वायदा करते हैं:"जो जय पाए उसे इसी प्रकार श्वेत वस्त्र पहनाया जाएगा, और मैं उसका नाम जीवन की पुस्तक में से किसी रीति से न काटूँगा; पर उसका नाम अपने पिता और उसके स्वर्गदूतों के सामने मान लूँगा। जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है" (व.5)।

प्रार्थना

परमेश्वर, मुझे बुद्धि दीजिए कि धीरज की सीमा को जानूं। अपने जीवन में पाप पर जय पाने में मेरी सहायता कीजिए। होने दीजिए कि मैं आपके महान प्रेम के विषय में कभी आत्मसंतुष्ट न बनूं। मेरी सहायता कीजिए कि आपकी आज्ञा मानूं और अच्छाई से बुराई पर जय पाऊँ। होने दीजिए कि मेरा नाम "जीवन की पुस्तक" में अमिट रूप से रहे (व.5)।

जूना करार

एस्तेर 1:1-2:18

महारानी वशती द्वारा राजा की आज्ञा का उल्लंघन

1यह उन दिनों की बात है जब क्षयर्ष नाम का राजा राज्य किया करता था। भारत से लेकर कूश के एक सौ सत्ताईस प्रांतों पर उसका राज्य था। 2 महाराजा क्षयर्ष, शूशन नाम की नगरी, जो राजधानी हुआ करती थी, में अपने सिंहासन से शासन चलाया करता था।

3 अपने शासन के तीसरे वर्ष क्षयर्ष ने अपने अधिकारियों और मुखियाओं को एक भोज दिया। फारस और मादै के सेना नायक और दूसरे महत्वपूर्ण मुखिया उस भोज में मौजूद थे। 4 यह भोज एक सौ अस्सी दिन तक चला। इस समय के दौरान महाराजा क्षयर्ष अपने राज्य के विपुल वैभव का लगातार प्रदर्शन करता रहा। वह हर किसी को अपने महल की सम्पत्ति और उसका भव्य सौन्दर्य दिखाता रहा। 5 उसके बाद जब एक सौ अस्सी दिन का यह भोज समाप्त हुआ तो, महाराजा क्षयर्ष ने एक और भोज दिया जो सात दिन तक चला। इस भोज का आयोजन महल के भीतरी बगीचे में किया गया था। भोज में शूशन राजधानी नगरी के सभी लोगों को बुलाया गया था। इनमें महत्वपूर्ण से महत्वपूर्ण और जिनका कोई भी महत्व नहीं था, ऐसे साधारण लोग भी बुलाये गये थे। 6 उसके भीतरी बगीचे में सफेद और नीले रंग के कपड़े, कमरे के चारों ओर लगे थे। उन कपड़ों को सफेद सूत और बैंगनी रंग की डोरियों से चाँदी के छल्लों और संगमरमर के खम्भों पर टाँका गया था। वहाँ सोने और चाँदी की चौकियाँ थीं। ये चौकियाँ लाल और सफेद रंग की ऐसी स्फटिक की भूमितल में जड़ी हुई थीं जिसमें संगमरमर, प्रकेलास, सीप और दूसरे मूल्यवान पत्थर जड़े थे। 7 सोने के प्यालों में दाखमधु परोसा गया था। हर प्याला एक दूसरे से अलग था। वहाँ राजा का दाखमधु पर्याप्त मात्रा में था। कारण यह था कि वह राजा बहुत उदार था। 8 महाराजा ने अपने सेवकों को आज्ञा दे रखी थी कि हर किसी मेहमान को, जितना दाखमधु वह चाहे, उतना दिया जाये और दाखमधु परोसने वालों ने राजा के आदेश का पालन किया था।

9 राजा के महल में ही महारानी वशती ने भी स्त्रियों को एक भोज दिया।

10-11 भोज के सातवें दिन महाराजा क्षयर्ष दाखमधु पीने के कारण मग्न था। उसने उन सात खोजों को आज्ञा दी जो उसकी सेवा किया करते थे। इन खोजों के नाम थे: महूमान, बिजता, हबौना, बिगता, अबगता, जेतेर और कर्कस। उन सातों खोजों को महाराजा ने आज्ञा दी कि वे राजमुकुट धारण किये हुए महारानी वशती को उसके पास ले आयें। उसे इसलिए आना था कि वह मुखियाओं और महत्वपूर्ण लोगों को अपनी सुन्दरता दिखा सके। वह सचमुच बहुत सुन्दर थी।

12 किन्तु उन सेवकों ने जब राजा के आदेश की बात महारानी वशती से कही तो उसने वहाँ जाने से मना कर दिया। इस पर वह राजा बहुत क्रोधित हुआ। 13-14 यह एक परम्परा थी कि राजा को नियमों और दण्ड के बारे में विद्वानों की सलाह लेनी होती थी। सो महाराजा क्षयर्ष ने नियम को समझने वाले बुद्धिमान पुरुषों से बातचीत की। ये ज्ञानी पुरुष महाराजा के बहुत निकट थे। इनके नाम थे: कर्शना, शेतार, अदमाता, तर्शीश, मेरेस, मर्सना और ममूकान। ये सातों फारस और मादै के बहुत महत्वपूर्ण अधिकारी हुआ करते थे। इनके पास राजा से मिलने का विशेष अधिकार था। राज्य में ये अत्यन्त उच्च अधिकारी थे। 15 राजा ने उन लोगों से पूछा, “महारानी वशती के साथ क्या किया जाये इस बारे में नियम क्या कहता है? उसने महाराजा क्षयर्ष की उस आज्ञा को मानने से मना कर दिया जिसे खोजे उसके पास ले गये थे।”

16 इस पर अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में महाराजा से ममूकान ने कहा, “महारानी वशती ने अपराध किया है। महारानी ने महाराजा के साथ—साथ सभी मुखियाओं और महाराजा क्षयर्ष के सभी प्रदेशों के लोगों के विरुद्ध अपराध किया है। 17 मैं ऐसा इसलिये कहता हूँ कि दूसरी स्त्रियाँ जो महारानी वशती ने किया है, उसे जब सुनेंगी तो वे अपने पतियों की आज्ञा मानना बंद कर देंगी। वे अपने पतियों से कहेंगी, ‘महाराजा क्षयर्ष ने महारानी वशती को अपने पास लाने की आज्ञा दी थी किन्तु उसने आने से मना कर दिया।’

18 “आज फारस और मादै के मुखियाओं की पत्नियों ने, रानी ने जो किया था, सुन लिया है और देखो अब वे स्त्रियाँ भी जो कुछ महारानी ने किया है, उससे प्रभावित होंगी। वे स्त्रियाँ राजाओं के महत्वपूर्ण मुखियाओं के साथ वैसा ही करेंगी और इस तरह बहुत अधिक अनादर और क्रोध फैल जायेगा।

19 “सो यदि महाराजा को अच्छा लगे तो एक सुझाव यह है: महाराजा को एक राज—आज्ञा देनी चाहिए और उसे फारस तथा मादै के नियम में लिख दिया जाना चाहिए फारस और मादै का नियम बदला तो जा नहीं सकता है। राजा की आज्ञा यह होनी चाहिये कि महाराजा क्षयर्ष के सामने वशती अब कभी न आये। साथ ही महाराजा को रानी का पद भी किसी ऐसी स्त्री को दे देना चाहिए जो उससे उत्तम हो। 20 फिर जब राजा की यह आज्ञा उसके विशाल राज्य के सभी भागों में घोषित की जायेगी तो सभी स्त्रियाँ अपने पतियों का आदर करने लगेंगी। महत्वपूर्ण से महत्वपूर्ण और साधारण से साधारण सभी स्त्रियाँ अपने पतियों का आदर करने लगेंगी।”

21 इस सुझाव से महाराजा और उसके बड़े—बड़े अधिकारी सभी प्रसन्न हुए। सो महाराजा क्षयर्ष ने वैसा ही किया जैसा ममूकान ने सुझाया था। 22 महाराजा क्षयर्ष ने अपने राज्य के सभी भागों में पत्र भिजवा दिये। हर प्रांत में जो पत्र भेजा गया, वह उसी प्रांत की भाषा में लिखा गया था। हर जाति में उसने वह पत्र भिजवा दिया। यह पत्र उनकी अपनी भाषा में ही लिखे गये थे। जन सामान्य की भाषा में उन पत्रों में घोषित किया गया था कि अपने—अपने परिवार का हर व्यक्ति शासक है।

एस्तेर महारानी बनायी गयी

2आगे चलकर महाराजा क्षयर्ष का क्रोध शांत हुआ सो उसे वशती और वशती के कार्य याद आने लगे। वशती के बारे में उसने जो आदेश दिया था, वह भी उसे याद आया। 2 इसके बाद राजा के निजी सेवकों ने उसे एक सुझाव दिया। उन्होंने कहा, “राजा के लिए सुन्दर कुँवारी कन्याओं की खोज करो। 3 राजा को अपने राज्य के हर प्रांत में एक मुखिया का चुनाव करना चाहिए। फिर उन मुखियाओं को चाहिए कि वे हर कुँवारी कन्या को शूशन के राजधानी नगर में लेकर आयें। उन कन्याओं को राजा की स्त्रियों के समूह में रखा जाये। वे हेगे की देख—रेख में रखी जायेंगी। हेगे महाराजा का खोजा था, वह स्त्रियों का प्रबंधक था। फिर उन्हें सौन्दर्य प्रसाधन दिये जायें। 4 फिर वह लड़की जो राजा को भाये, वशती के स्थान पर राजा की नई महारानी बना दी जाये।” राजा को यह सुझाव बहुत अच्छा लगा। सो उसने इसे स्वीकार कर लिया।

5 अब देखो, बिन्यामीन परिवार समूह का मोर्दकै नाम का एक यहूदी वहाँ रहा करता था। जो शूशन राजधानी नगर का निवासी था। मोर्दकै याईर का पुत्र था और याईर शिमी का पुत्र था और शिमी कीश का पुत्र था। शूशन राजधानी नगर में रहता था। 6 उस को यरूशलेम से बाबेल का राजा नबूकदनेस्सर बंदी बना कर ले गया था। वह यहूदा के राजा यकोन्याह के साथ उस दल में था जिसे बंदी बना लिया गया था। 7 मोर्दकै के हदस्सा नाम की एक रिश्ते में बहन थी। वह अनाथ थी। न उसका बाप था, न माँ। सो मोर्दकै उसका ध्यान रखता था। मोर्दकै ने उसके माँ—बाप के मरने के बाद उसे अपनी बेटी के रूप में गोद ले लिया था। हदस्सा का नाम एस्तेर भी था। एस्तेर का मुख और उसकी शरीर रचना बहुत सुंदर थी।

8 जब राजा का आदेश सुनाया गया तो शूशन के राजधानी नगर में बहुत सी लड़कियों को लाया गया और उन्हें हेगे की देखभाल में रख दिया गया। एस्तेर इन्हीं लड़कियों में से एक थी। एस्तेर को राजा के महल में ले जाकर हेगे की देखभाल में रख दिया गया। हेगे राजा के रनवास का अधिकारी था। 9 हेगे को एस्तेर बहुत अच्छी लगी। वह उसकी कृपा पात्र बन गयी। सो हेगे ने एस्तेर को शीघ्र ही सौन्दर्य उपचार दिये और उसे विशेष भोजन प्रदान किया। हेगे ने राजा के महल से सात दासियाँ चुनीं और उन्हें एस्तेर को दे दिया। और इसके बाद हेगे ने एस्तेर और उसकी सातों दासियों को जहाँ राजघराने की स्त्रियाँ रहा करती थीं, वहाँ एक उत्तम स्थान में भेज दिया। 10 एस्तेर ने यह बात किसी को नहीं बताई कि वह एक यहूदी है। क्योंकि मोर्दकै ने उसे मना कर दिया था, इसलिए उसने अपने परिवार की पृष्ठभूमि के बारे में किसी को कुछ नहीं बताया। 11 मोर्दकै जहाँ रनवास की स्त्रियाँ रहा करती थीं, वहाँ आसपास और आगे पीछे घूमा करता था। वह यह पता लगाना चाहता था कि एस्तेर कैसी है और उसके साथ क्या कुछ घट रहा है? इसीलिये वह ऐसा करता था।

12 इससे पहले कि राजा क्षयर्ष के पास ले जाने के लिये किसी लड़की की बारी आती, उसे यह सब करना पड़ता था। बारह महीने तक उसे सौन्दर्य उपचार करना पड़ता था यानी छ: महीने तक उसे गंधरस का तेल लगाया जाता और छ: महीने तक सुगंधित द्रव्य और तरह—तरह की प्रसाधन सामग्रियों का उपयोग करना होता था। 13 राजा के पास जाने के लिये उन्हें यह सब करना होता था। रनवास से जो कुछ वह चाहती, उसे दिया जाता। 14 शाम के समय वह लड़की राजा के महल में जाती और प्रातःकाल रनवास के किसी दूसरे क्षेत्र में वह लौट आती। फिर उसे शाशगज नाम के व्यक्ति की देखरेख में रख दिया जाता। शाशगज राजा का खोजा था जो राजा की रखैलों का अधिकारी था। यदि राजा उससे प्रसन्न न होता, तो वह लड़की फिर कभी राजा के पास न जाती। और यदि राजा उससे प्रसन्न होता तो उसे राजा नाम लेकर वापस बुलाता।

15 जब एस्तेर की राजा के पास जाने की बारी आई तो उसने कुछ नहीं पूछा। उसने राजा के खोजे, हेगे से, जो रनवास का अधिकारी था, वह यह चाहा कि वह उसे बता दे कि वह अपने साथ क्या ले जाये? एस्तेर वह लड़की थी जिसे मोर्दकै ने गोद ले लिया था और जो उसके चाचा अबीहैल की पुत्री थी। एस्तेर को जो भी देखता, उसे पंसद करता था। 16 सो एस्तेर को महाराजा क्षयर्ष के महल में ले जाया गया। यह उस समय हुआ जब उसके राज्यकाल के सातवें वर्ष का तेबेत नाम का दसवाँ महीना चल रहा था।

17 राजा ने एस्तेर को किसी भी और लड़की से अधिक प्रेम किया और वह उसकी कृपा पायी। किसी भी दूसरी लड़की से अधिक, राजा को वह भा गयी। सो राजा क्षयर्ष ने एस्तेर के सिर पर मुकुट पहना कर वशती के स्थान पर नयी महारानी बना लिया। 18 एस्तेर के लिये राजा ने एक बहुत बड़ी भोज दी। यह भोज उसके महत्वपूर्ण व्यक्तियों और मुखियाओं के लिये थी। उसने सभी प्रातों में छुटटी की घोषणा कर दी। उसने लोगों को उपहार भिजवाये क्योंकि वह बहुत उदार था।

समीक्षा

बुराई पर परमेश्वर को जय पाते हुए देखिये

एक व्यक्ति अंतर पैदा कर सकता है। एस्तेर यहूदी देश की एक उद्धारकर्ता थी। वह एक अनाथ थी (2:7)। वह सुंदर थी (व.7) और आकर्षक थीः" जितनों ने एस्तेर को देखा, वे सब उससे प्रसन्न हुए" (व.15)। वह अपने दत्तक के लिए माता-पिता के प्रति आज्ञाकारी थीः" एस्तेर मोर्दकै की बात ऐसी मानती थी जैसे कि उसके यहाँ अपने पालन पोषण के समय मानती थी" (व.20)। उसकी बुलाहट इतनी महत्वपूर्ण थी कि इसमें तैयारी के लिए एक लंबे समय की आवश्यकता थी।

पुराने नियम में दो पुस्तकों में से एक एस्तेर है जिसका एक महिला नाम है (दूसरा है रुत)। पुराने नियम में यह उन दो पुस्तकों में से एक है जो परमेश्वर का नाम लेकर उन्हें नहीं पुकारते हैं (दूसरा है विलापगीत)। इसमें यहूदी पर्व पुरिम के उद्गम का वर्णन है। पर्सिया के राजा, ज़ेरक्सेस के राज्य के दौरान यह तैयार की गई (486-465बीसी)।

लगभग पैंतीस वर्ष की उम्र में, ज़ेरक्सेस ने बड़े साम्राज्य को उत्तराधिकार में पाया, जिसमें आधुनिक समय के इरान, इराक, मिस्र और इथीयोपिया, साथ ही भारत के भाग शामिल थे (1:1)।

एस्तेर की पुस्तक यहूदी लोगों के इतिहास में ऐसे एक समय का वर्णन है जब वे उन लोगों की चाल को निष्फल कर पाये जो उन्हें नष्ट करना चाहते थे।

जैसा कि यूजन पिटरसन लिखते हैं, "इससे अंतर नहीं पड़ता कि आप उनमें से कितनों को मार डालते हैं, आप परमेश्वर का सम्मान करने वाले, परमेश्वर की सेवा करने वाले, परमेश्वर की आराधना करने वाले समुदाय से छुटकारा नहीं पा सकते हैं जोकि सारी पृथ्वी में फैले हुए हैं। यह अब भी अंतिम और निश्चित शब्द है।"

अगले कुछ दिनों में हम ऐस्तर के असाधारण गुणों के विषय में और अधिक पढ़ेंगे। किंतु, आज के लेखांश में हम देखते हैं कि कैसे परमेश्वर का हाथ उसके ऊपर था। वह तैयारी कर रहे थे कि वह उसके शत्रु की योजना को निष्फल कर दे और बुराई पर अच्छाई को जय दिलाये।

जॉयस मेयर लिखती हैं, "मैं विश्वास करती हूँ कि परमेश्वर के पास आपके जीवन के लिए एक महान बुलाहट और उद्देश्य है जैसा कि एस्तेर के लिए उनके पास था। आपका कार्य शायद से देश का छुटकारा न हो, लेकिन जो कुछ करने के लिए परमेश्वर ने आपको बुलाया है, वह बहुत ही महत्वपूर्ण है। यह चाहे जो भी हो, इसमें आवश्यक तैयारी की प्रक्रिया को अपनाने में परिश्रमी रहें, ताकि आप अच्छी तरह से तैयार रहें जब आपके लिए कार्य करने का समय आता है।"

प्रार्थना

सार्वभौमिक परमेश्वर, आपका धन्यवाद कि आप मेरे जीवन और इतिहास के पूर्ण नियंत्रण में हैं। आपका धन्यवाद कि यीशु के द्वारा, मैं बुराई के ऊपर अच्छाई की विजय के प्रति आश्वस्त हूँ। अच्छाई के साथ बुराई पर जय पाने के लिए आपकी योजनाओं से एक अंतर पैदा करने में मेरी सहायता कीजिए।

पिप्पा भी कहते है

एस्तेर 1:1-2:28

यह विचित्र बात है कि पुरुष इस बात के प्रति कितने चिंतित थे कि कहीं उनकी पत्नियों पर से नियंत्रण को खो न दें। आदेश देने के बजाय सम्मान को जीतने के बेहतर तरीके अवश्य ही होने चाहिए। शायद से आत्मा के कुछ फलों को दिखाना अत्यधिक प्रभावी होगा!

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संदर्भ

जहाँ पर कुछ बताया न गया हो, उन वचनों को पवित्र बाइबल, न्यू इंटरनैशनल संस्करण एन्ग्लिसाइड से लिया गया है, कॉपीराइट ऊ 1979, 1984, 2011 बिबलिका, पहले इंटरनैशनल बाइबल सोसाइटी, हूडर और स्टोगन पब्लिशर की अनुमति से प्रयोग किया गया, एक हॅचेट यूके कंपनी सभी अधिकार सुरक्षित। ‘एनआईवी", बिबलिका यू के का पंजीकृत ट्रेडमार्क संख्या 1448790 है।

जिन वचनों को (एएमपी, AMP) से चिन्हित किया गया है उन्हें एम्प्लीफाइडऍ बाइबल से लिया गया है. कॉपीराइट ऊ 1954, 1958, 1962, 1964, 1965, 1987 लॉकमैन फाउंडेशन द्वारा प्राप्त अनुमति से उपयोग किया गया है। (www.Lockman.org)

जिन वचनों को (एमएसजी MSG) से चिन्हित किया गया है उन्हें मैसेज से लिया गया है। कॉपीराइट ऊ 1993, 1994, 1995, 1996, 2000, 2001, 2002. जिनका प्रयोग एनएवीप्रेस पब्लिशिंग ग्रुप की अनुमति से किया गया है।

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