दिन 73

जीवन के संघर्ष

बुद्धि भजन संहिता 33:12-22
नए करार लूका 1:26-38
जूना करार गिनती 1:1-2:9

परिचय

मसीही जीवन एक संघर्ष है. चालीस दशकों से मैं यीशु को मानता आ रहा हूँ. जब मैं इन वर्षों में पीछे देखता हूँ, तो ये वर्ष महान आशीषों के वर्ष रहे हैं – जितना मैंने मांगा था या जितनी मैंने कल्पना की थी उससे भी ज्यादा. इसके साथ-साथ, काफी चुनौतियाँ और रूकावटें भी आईं थीं. ऐसा बहुत कम समय रहा होगा जब मैंने किसी भी तरह के संघर्ष का सामना नहीं किया होगा.

इन संघर्षों के प्रकार काफी अलग-अलग थे. कुछ आंतरिक संघर्ष थे – गहन प्रलोभन, दुविधा, डर और निराशा का समय. काफी दु:ख, नुकसान और वियोग के समय भी आए थे. स्वास्थय, नींद, धन, काम और संबंधों के प्रति भी काफी संघर्ष करना पड़ा. काफी विरोध और अपमान का समय भी आया था.

रॅनीरो कॅन्टालमेसा, पॅपल घराने के प्रचारक, त्रि गठबंधन के विरोध में हमारे संघर्ष के बारे में कहते हैं: दुनिया ('हमारे आसपास के शत्रु), देह (हमारे अंदर के शत्रु), और शैतान (हमारे ऊपर के शत्रु).

जीवन के इन आत्मिक युद्ध को आप किस तरह से चला सकते हैं?

बुद्धि

भजन संहिता 33:12-22

12 धन्य हैं वे मनुष्य जिनका परमेश्वर यहोवा है।
 परमेश्वर ने उन्हें अपने ही मनुष्य होने को चुना है।
13 यहोवा स्वर्ग से नीचे देखता रहता है।
 वह सभी लोगों को देखता रहता है।
14 वह ऊपर ऊँचे पर संस्थापित आसन से
 धरती पर रहने वाले सब मनुष्यों को देखता रहता है।
15 परमेश्वर ने हर किसी का मन रचा है।
 सो कोई क्या सोच रहा है वह समझता है।

16 राजा की रक्षा उसके महाबल से नहीं होती है,
 और कोई सैनिक अपने निज शक्ति से सुरक्षित नहीं रहता।
17 युद्ध में सचमुच अश्वबल विजय नहीं देता।
 सचमुच तुम उनकी शक्ति से बच नहीं सकते।
18 जो जन यहोवा का अनुसरण करते हैं, उन्हें यहोवा देखता है और रखवाली करता है।
 जो मनुष्य उसकी आराधना करते हैं, उनको उसका महान प्रेम बचाता है।
19 उन लोगों को मृत्यु से बचाता है।
 वे जब भूखे होते तब वह उन्हें शक्ति देता है।

20 इसलिए हम यहोवा की बाट जोहेंगे।
 वह हमारी सहायता और हमारी ढाल है।
21 परमेश्वर मुझको आनन्दित करता है।
 मुझे सचमुच उसके पवित्र नाम पर भरोसा है।
22 हे यहोवा, हम सचमुच तेरी आराधना करते हैं!
 सो तू हम पर अपना महान प्रेम दिखा।

समीक्षा

परमेश्वर पर भरोसा रखें

यह अपने संघर्षों पर जय पाने की कुंजी है, दाऊद के अनुसार, अपनी शक्ति पर भरोसा न करें, बल्कि अपना भरोसा परमेश्वर पर रखें. यह दुनिया की सोच के विरूद्ध है, लेकिन दिन के अंत में मनुष्य का बल और सामर्थ पर्याप्त नहीं होता: ' कोई ऐसा राजा नहीं, जो सेना की बहुतायत के कारण बच सके; वीर अपनी बड़ी शक्ति के कारण छूट नहीं जाता। बच निकलने के लिये घोड़ा व्यर्थ है, वह अपने बड़े बल के द्वारा किसी को नहीं बचा सकता है' (वव.16-17).

बजाय इसके परमेश्वर उन लोगों को जय देते हैं जो उन पर भरोसा करते हैं: 'देखो, परमेश्वर की दृष्टि उसके डरवैयों पर और उन पर जो उसकी करूणा की आशा रखते हैं बनी रहती है, कि वह उनके प्राण को मृत्यु से बचाए, और अकाल के समय उन को जीवित रखे॥ हम यहोवा का आसरा देखते आए हैं; वह हमारा सहायक और हमारी ढाल ठहरा है' (वव.18-20).

प्रार्थना

अनुग्रहकारी प्रभु, यीशु के द्वारा दुनिया, शरीर और शैतान के प्रलोभन में स्थिर बने रहने के लिए और सच्चे हृदय और सच्चे मन से केवल परमेश्वर का अनुसरण करने के लिए अपने लोगों पर अनुग्रह कीजिये. (एन्जलीकन बुक ऑफ कॉमन प्रेयर से ली गई प्रार्थना).

नए करार

लूका 1:26-38

कुँवारी मरियम

26-27 इलीशिबा को जब छठा महीना चल रहा था, गलील के एक नगर नासरत में परमेश्वर द्वारा स्वर्गदूत जिब्राईल को एक कुँवारी के पास भेजा गया जिसकी यूसुफ़ नाम के एक व्यक्ति से सगाई हो चुकी थी। वह दाऊद का वंशज था। और उस कुँवारी का नाम मरियम था। 28 जिब्राईल उसके पास आया और बोला, “तुझ पर अनुग्रह हुआ है, तेरी जय हो। प्रभु तेरे साथ है।”

29 यह वचन सुन कर वह बहुत घबरा गयी, वह सोच में पड़ गयी कि इस अभिवादन का अर्थ क्या हो सकता है?

30 तब स्वर्गदूत ने उससे कहा, “मरियम, डर मत, तुझ से परमेश्वर प्रसन्न है। 31 सुन! तू गर्भवती होगी और एक पुत्र को जन्म देगी और तू उसका नाम यीशु रखेगी। 32 वह महान होगा और वह परमप्रधान का पुत्र कहलायेगा। और प्रभु परमेश्वर उसे उसके पिता दाऊद का सिंहासन प्रदान करेगा। 33 वह अनन्त काल तक याकूब के घराने पर राज करेगा तथा उसके राज्य का अंत कभी नहीं होगा।”

34 इस पर मरियम ने स्वर्गदूत से कहा, “यह सत्य कैसे हो सकता है? क्योंकि मैं तो अभी कुँवारी हूँ!”

35 उत्तर में स्वर्गदूत ने उससे कहा, “तेरे पास पवित्र आत्मा आयेगा और परमप्रधान की शक्ति तुझे अपनी छाया में ले लेगी। इस प्रकार वह जन्म लेने वाला पवित्र बालक परमेश्वर का पुत्र कहलायेगा। 36 और यह भी सुन कि तेरे ही कुनबे की इलीशिबा के गर्भ में भी बुढापे में एक पुत्र है और उसके गर्भ का यह छठा महीना है। लोग कहते थे कि वह बाँझ है। 37 किन्तु परमेश्वर के लिए कुछ भी असम्भव नहीं।”

38 मरियम ने कहा, “मैं प्रभु की दासी हूँ। जैसा तूने मेरे लिये कहा है, वैसा ही हो!” और तब वह स्वर्गदूत उसके पास से चला गया।

समीक्षा

राजा के आसपास इकठ्ठा हों

रॅनीरो कॅन्टालामेसा बताते हैं, 'मध्ययुगीन युद्ध की कहानियों में, हमेशा ऐसा समय भी आता था जब धनुर्धारी और अश्वारोही और बाकी के सभी दल टूट रहे थे और राजा के आसपास युद्ध करते वक्त ध्यान भटक रहा था. यहीं वह जगह है जहां युद्ध के अंतिम परिणाम का फैसला होता है. हमारे लिए भी, आज के दिन राजा के आसपास युद्ध छिड़ा हुआ है: यह स्वयं यीशु मसीह हैं जो कि असली मुद्दा हैं.'

इक्कीसवी सदी की सैद्धांतिक लड़ाई ग्यारहवी सदी की लड़ाई जैसी नहीं है, जिसने कैथोलिक और पुरातन चर्चों को अलग अलग कर दिया था. ना ही ये लड़ाइयाँ सोलहवी सदी के सुधार जैसी हैं. यह लड़ाइयाँ पहली सदी की लड़ाइयों जैसी हैं: क्या यीशु सार्वलौकिक उद्धारकर्ता हैं?

लूका सुसमाचार के आरंभ में ही यीशु के बारे में अनेक दावा करते हैं (वव.31-35).

1. उद्धारकर्ता

स्वर्गदूत ने मरियम से कहा, 'तू उसका नाम यीशु रखना' (व.31). यीशु का अर्थ है उद्धारकर्ता.

2. मसीहा

वह दाऊद के वंश के चिर प्रतिक्षित मसीहा हैं. स्वर्गदूत ने कहा, 'प्रभु परमेश्वर उसके पिता दाऊद का सिंहासन उस को देगा। और वह याकूब के घराने पर सदा राज्य करेगा; और उसके राज्य का अन्त न होगा' (वव.32-33).

3. परमेश्वर का पुत्र

स्वर्गदूत आगे कहता है, ' वह महान होगा; और परमप्रधान का पुत्र कहलाएगा' (व.32). यीशु का जन्म असाधारण था, जैसा कि स्वर्गदूत ने इन वचनों में समझाया है. मरियम कुआँरी थी, इसलिए सामान्य रूप से गर्भधारण करना असंभव था (व.34). बजाय इसके उसे कहा गया कि पवित्र आत्मा उस पर उतरेगा और परमप्रधान की सामर्थ तुझ पर छाया करेगी' (व.35अ). फिर स्वर्गदूत ने तुरंत समझाया कि यह महत्वपूर्ण क्यों है: ' वह पवित्र जो उत्पन्न होने वाला है, परमेश्वर का पुत्र कहलाएगा' (व.35ब). यहाँ हम देखते हैं कि किस प्रकार यीशु पूरी तरह से मनुष्य हैं (सामान्य रूप से जन्म लेने के कारण), फिर भी वह पूरी तरह से परमेश्वर हैं (पवित्र आत्मा द्वारा उत्पन्न होने के कारण).

सभी चर्चों– कैथलिक, ऑर्थोडोक्स, प्रोटेस्टेंट और पेन्टाकोस्टल - के मसीही लोग यह मानते हैं कि यीशु हमारे उद्धारकर्ता और मसीहा हैं और वह परमेश्वर के पुत्र हैं. यीशु को मानने वाले सभी लोग परमेश्वर की संतान हैं (यूहन्ना 1:12). यह हमें भाई और बहन बनाता है. इसके अलावा यदि हम मसीह के हैं, तो पवित्र आत्मा हम सभी में रहते हैं (रोमियों 8:9).

यह हमें मसीही के रूप में इकठ्ठा करता है. इसलिए मसीह में हमारे भाइयों और बहनों के बीच कभी भी संघर्ष नहीं होना चाहिये. संघर्ष हमारा ध्यान भटकाता है और हमारा नाश करता है. हमें असली संघर्ष पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिये, जो कि राजा के आसपास है.

मरियम ने सही व्यवहार का अद्भुत उदाहरण स्थापित किया है. मरियम के लिए, प्रभु उसके साथ हैं (लूका 1:28), उसके अंदर हैं (व.35), और उसके ऊपर हैं (व.38). जबकि मरियम, अवश्य ही, यीशु की माँ के रूप में असाधारण हैं, सभी विश्वासी प्रभु के साथ इसी तरह का संबंध जान सकते हैं.

हम प्रभु के त्रि गठबंधन के द्वारा शत्रु के त्रि गठबंधन से युद्ध करते हैं.

पहला, जैसा कि स्वर्गदूत ने मरियम से कहा था कि, 'प्रभु तुम्हारे साथ हैं' (व.28), वैसे ही अपने शिष्यों के लिए यीशु के अंतिम शब्द थे, 'मैं सदा तुम्हारे साथ हूँ' (मत्ती 28:20). आप चाहें किसी भी परिस्थिति का सामना क्यों न कर रहे हो, आपको डरने की जरूरत नहीं है. राजा आपके साथ हैं.

दूसरा, पवित्र आत्मा आपके अंदर हैं. जिस तरह से पवित्र आत्मा मरियम पर उतरे थे (लूका 1:35), शारीरिक रूप से जन्म लेने के लिए, उसी तरह से पवित्र आत्मा आप पर भी उतरेंगे, आपको आत्मिक जन्म देने के लिए. आप एक संतान हैं, 'न तो लहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं' (यूहन्ना 1:!3).

तीसरा, राजा आपके ऊपर हैं. आपको प्रभु का सेवक बनने के लिए बुलाया गया है. मरियम की प्रतिक्रिया एक तरह से शक्तिशाली, साहसी, निडर और अटल विश्वास की थी. वह विश्वास का आदर्श हैं. इतिहास के सबसे महान और सबसे निर्णयात्मक कार्य में उन्होंने खुद को एक कोरे कागज के रूप में परमेश्वर को समर्पित किया जिस पर वह जो चाहें लिख सकते थे. मुझे लिविंग बाइबल का यह अनुवाद पसंद है: 'मैं प्रभु की दासी हूँ, जैसा वह चाहते हैं मैं वैसा करने के लिए तैयार हूँ,' (लूका 1:38).

प्रार्थना

प्रभु, मुझे वास्तविक युद्ध पर ध्यान केन्द्रित करने और राजा के आसपास इकठ्ठा होने में मेरी मदद कीजिये: जो हमारे उद्धारकर्ता और मसीहा हैं और परमेश्वर के पुत्र हैं. मैं मरियम की तरह कहना चाहता हूँ कि, ''मैं प्रभु का दास हूँ, जैसा वह चाहते हैं मैं वैसा करने के लिए तैयार हूँ.'

जूना करार

गिनती 1:1-2:9

इस्राएल की गिनती की जाती है

1यहोवा ने मूसा से मिलापवाले तम्बू में बात की। यह सीनै मरुभूमि में हुई। यह बात इस्राएल के लोगों द्वारा मिस्र छोड़ने के बाद दूसरे वर्ष के दूसरे महीने के पहले दिन की थी। यहोवा ने मूसा से कहा: 2 “इस्राएल के सभी लोगों को गिनो। हर एक व्यक्ति की सूची उसके परिवार और उसके परिवार समूह के साथ बनाओ। 3 तुम तथा हारून इस्राएल के सभी पुरुषों को गिनोगे। उन पुरुषों को गिनो जो बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र के हैं। (ये वे हैं जो इस्राएल की सेना में सेवा करते हैं।) इनकी सूची इनके समुदाय के आधार पर बनाओ। 4 हर एक परिवार समूह से एक व्यक्ति तुम्हारी सहायता करेगा। यह व्यक्ति अपने परिवार समूह का नेता होगा। 5 तुम्हारे साथ रहने और तुम्हारी सहायता करने वाले व्यक्तियों के नाम ये हैं:

रूबेन परिवार समूह से शदेऊर का पुत्र एलीसूर;

6 शिमोन परिवार समूह से—सूरीशद्दै का पुत्र शलूमीएल;

7 यहूदा के परिवार समूह से—अम्मीनादाब का पुत्र नहशोन;

8 इस्साकार के परिवार समूह से सूआर का पुत्र नतनेल;

9 जवूलून के परिवार समूह से—हेलोन का पुत्र एलीआब;

10 यूसुफ के वंश से,

एप्रैम के परिवार समूह से—अम्मीहूद का पुत्र एप्रैम;

मनश्शे के परिवार समूह से—पदासूर का पुत्र गम्लीऐल;

11 बिन्यामीन के परिवार समूह से—गिदोनी का पुत्र अबीदान;

12 दान के परिवार समूह से—अम्मीशद्दै का पुत्र अहीएजेर;

13 आशेर के परिवार समूह से—ओक्रान का पुत्र पगीएल;

14 गाद के परिवार समूह से दूएल का पुत्र एल्यासाप;

15 नप्ताली के परिवार समूह से—एनाम का पुत्र अहीरा;

16 ये सभी व्यक्ति अपने लोगों द्वारा अपने परिवार समूह के नेता चुने गए। ये लोग अपने परिवार समूह के नेता हैं। 17 मूसा और हारून ने इन व्यक्तियों (और इस्राएल के लोगों) को एक साथ लिया जो नेता होने के लिये आये थे। 18 मूसा और हारून ने इस्राएल के सभी लोगों को बुलाया। तब लोगों की सूची उनके परिवार और परिवार समूह के अनुसार बनी। बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र के सभी व्यक्तियों की सूची बनी। 19 मूसा ने ठीक वैसा ही किया जैसा यहोवा का आदेश था।मूसा ने लोगों को तब गिना जब वे सीनै की मरुभूमि में थे।

20 रूबेन के परिवार समूह को गिना गया। (रूबेन इस्राएल का पहलौठा पुत्र था।) उन सभी पुरुषों की सूची बनी जो बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र के थे और सेना में सेवा करने योग्य थे। उनकी सूची उनके परिवार और उनके परिवार समूह के साथ बनी। 21 रूबेन के परिवार समूह से गिने गए पुरुषों की संख्या छियालीस हजार पाँच सौ थी।

22 शिमोन के परिवार समूह को गिना गया। बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र और सेना में सेवा करने योग्य सभी पुरुषों के नामों की सूची बनी। उनकी सूची उनके परिवार और उनके परिवार समूह के साथ बनी। 23 शिमोन के परिवार समूह को गिनने पर सारे पुरुषों की संख्या उनसठ हजार तीन सौ थी।

24 गाद के परिवार समूह को गिना गया। बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र और सेना में सेवा करने योग्य सभी पुरुषों के नामों की सूची बनी। उनकी सूची उनके परिवार और उनके परिवार समूह के साथ बनी। 25 गाद के परिवार समूह को गिनने पर पुरुषों की सारी संख्या पैंतालीस हजार छः सौ पचास थी।

26 यहूदा के परिवार समूह को गिना गया। बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र और सेना में सेवा करने योग्य सभी पुरुषों के नामों की सूची बनी। उनकी सूची उनके परिवार और उनके परिवार समूह के साथ बनी। 27 यहूदा के परिवार समूह को गिनने पर सारी संख्या चौहत्तर हजार छः सौ थी।

28 इस्साकार के परिवार समूह को गिना गया। बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र और सेना में सेवा करने योग्य सभी पुरुषों के नामों की सूची बनी। उनकी सूची उनके परिवार समूह के साथ बनी। 29 इस्साकार के परिवार समूह को गिनने पर पुरुषों की सारी संख्या चौवन हजार चार सौ थी।

30 जबूलून के परिवार समूह को गिना गया। बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र और सेना में सेवा करने योग्य सभी पुरुषों के नामों की सूची बनी। उनकी सूची उनके परिवार और उनके परिवार समूह के साथ बनी। 31 जबूलून के परिवार समूह को गिनने पर पुरुषों की सारी संख्या सत्तावन हजार चार सौ थी।

32 एप्रैम के परिवार समूह को गिना गया। बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र और सेना में सेवा करने योग्य सभी पुरुषों के नामों की सूची बनी। उनकी सूची उनके परिवार समूह के साथ बनी। 33 एप्रैम के परिवार समूह को गिनने पर सारी संख्या चालीस हजार पाँच सौ थी।

34 मनश्शे के परिवार समूह को गिना गया। बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र और सेना में सेवा करने योग्य सभी पुरुषों के नामों की सूची बनी। उनकी सूची उनके परिवार समूह के साथ बनी। 35 मनश्शे के परिवार समूह को गिनने पर पुरुषों की सारी संख्या बत्तीस हजार दो सौ थी।

36 बिन्यामीन के परिवार समूह को गिना गया। बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र और सेना में सेवा करने योग्य सभी पुरुषों के नामों की सूची बनी। उनकी सूची उनके परिवार और उनके परिवार समूह के साथ बनी। 37 बिन्यामीन के परिवार समूह को गिनने पर पुरुषों की सारी संख्या पैंतीस हजार चार सौ थी।

38 दान के परिवार समूह को गिना गया। बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र और सेना में सेवा करने योग्य सभी पुरुषों के नामों की सूची बनी। उनकी सूची उनके परिवार और उनके परिवार समूह के साथ बनी। 39 दान के परिवार समूह को गिनने पर सारी संख्या बासठ हजार सात सौ थी।

40 आशेर के परिवार समूह को गिना गया। बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र और सेना में सेवा करने योग्य सभी पुरुषों के नामों की सूची बनी। उनकी सूची उनके परिवार और उनके परिवार समूह के साथ बनी। 41 आशेर के परिवार समूह को गिनने पर पुरुषों की सारी संख्या एकतालीस हजार पाँच सौ थी।

42 नप्ताली के परिवार समूह को गिना गया। बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र और सेना में सेवा करने योग्य सभी पुरुष के नामों की सूची बनी। उनकी सूची उनके परिवार और उनके परिवार समूह के साथ बनी। 43 नप्ताली के परिवार समूह को गिनने पर पुरुषों की सारी संख्या तिरपन हजार चार सौ थी।

44 मूसा, हारून और इस्राएल के नेताओं ने इन सभी पुरुषों को गिना। वहाँ बारह नेता थे। (हर परिवार समूह से एक नेता था।) 45 इस्राएल का हर एक पुरुष जो बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र और सेना में सेवा करने योग्य था, गिना गया। इन पुरुषों की सूची उनके परिवार समूह के साथ बनी। 46 पुरुषों की सारी संख्या छः लाख तीन हजार पाँच सौ पचास थी।

47 लेवी के परिवार समूह से परिवारों की सूची इस्राएल के अन्य पुरुषों के साथ नहीं बनी। 48 यहोवा ने मूसा से कहा था: 49 “लेवी के परिवार समूह के पुरुषों को तुम्हें नहीं गिनना चाहिए। इस्राएल के अन्य पुरुषों के एक भाग के रुप में उनकी संख्या को मत जोड़ो। 50 लेवीवंश के पुरुषों से कहो कि वे साक्षीपत्र के पवित्र तम्बू के लिए उत्तरदायी हैं। वे उसकी और उसमें जो चीजें हैं, उनकी देखभाल करेंगे। वे मिलापवाले तम्बू और उसकी सभी चीजें लेकर चलेंगे।वे अपना डेरा उसके चारों ओर डालेंगे तथा उसकी देखभाल करेंगे। 51 जब कभी वह पवित्र तम्बू कहीं ले जाया जाएगा, तो लेवीवंश के पुरुषों को ही उसे उतारना होगा।जब कभी मिलापवाला तम्बू किसी स्थान पर लगाया जाएगा तो लेवीवंश के पुरुषों को ही यह करना होगा। वे ही ऐसे पुरुष हैं जो मिलापवाले तम्बू की देखभाल करते हैं। यदि कोई ऐसा अन्य पुरुष तम्बू के निकट आना चाहता है जो लेवी के परिवार समूह का नहीं है तो वह मार डाला जाएगा। 52 इस्राएल के लोग अपने डेरे अलग—अलग समूहों में लगाऐंगे। हर एक व्यक्ति को अपना डेरा अपने परिवार के झण्डे के पास लगाना चाहिए। 53 किन्तु लेवी के लोगों को अपना डेरा पवित्र तम्बू के चारों ओर डालना चाहिए। लेवीवंश के लोग साक्षीपत्र के पवित्र तम्बू की रक्षा करेंगे। वे पवित्र तम्बू की रक्षा करेंगे जिससे इस्राएल के लोगों का कुछ भी बुरा नहीं होगा।”

54 इसलिए इस्राएल के लोगों ने उन सभी बातों को माना जिसका आदेश यहोवा ने मूसा को दिया था।

डेरे की व्यवस्था

2यहोवा ने मूसा और हारून से कहाः 2 “इस्राएल के लोगों को मिलापवाले तम्बू के चारों ओर अपने डेरे लगाने चाहिए। हर एक समुदाय का अपना विशेष झण्डा होगा और हर एक व्यक्ति को अपने समूह के झण्डे के पास अपना डेरा लगाना चाहिए।

3 “यहूदा के डेरे का झण्डा पूर्व में होगा, जहाँ सूरज निकलता है।यहुदा के लोग वहीं डेरा लगाएंगे। यहूदा के लोगों का नेता अम्मीनादाब का पुत्र नहशोन है। 4 इस समूह में चौहत्तर हजार छः सौ पुरुष थे।

5 “इस्साकार का परिवार समूह यहूदा के लोगों के ठीक बाद में होगा। इस्साकार के लोगों का नेता सूआर का पुत्र नतनेल है। 6 इस समूह में चौवन हजार चार सौ पुरुष थे।

7 “जबूलून का परिवार समूह भी यहूदा के परिवार समूह से ठीक बाद में अपना डेरा लगाएगा। जबूलून के लोगों नेता हेलोन का पुत्र एलीआब है। 8 इस समूह में सत्तावन हजार चार सौ पुरुष थे।

9 “यहूदा के डेरे में एक लाख छियासी हजार चार सौ पुरुष थे। ये सभी अपने अलग अलग परिवार समूह में बंटे हुए हैं। यहूदा पहला समूह होगा जो उस समय आगे चलेगा जब लोग एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा करेंगे।

समीक्षा

परमेश्वर की सुनें

कोई जरूरी नहीं कि जीवन का संघर्ष आपको भयभीत करे. पूरे इतिहास में, परमेश्वर के लोगों ने कई बाधाओं और चुनौतियों का सामना किया है. गिनती की पुस्तक इस बारे में है कि परमेश्वर के लोगों ने किस तरह से संघर्ष के लिए खुद को तैयार किया.

निर्गमन में हम परमेश्वर के लोगों को छुड़ाये गए लोगों के रूप में देखते हैं. लैव्यव्यवस्था में हम उन्हें युद्ध के सैनिक के रूप में देखते हैं. आज के अध्याय में हम एक सेना के महत्व को देखते हैं जो पूरे पुस्तक के लिए रंगत स्थापित करता है.

जब हम इसे यीशु की दृष्टि से पढ़ते हैं, तो हम देखते हैं कि मसीही जीवन एक आत्मिक युद्ध है. प्रेरित पौलुस इसे स्वर्ग में दुष्ट आत्मिक शक्तियों के विरूद्ध युद्ध बतलाते हैं (इफीसियों 6:12). आप क्रूस के द्वारा आजाद किये गए हैं. जिस तरह से पुराने नियम में परमेश्वर के लोग अपने युद्ध की तैयारी कर रहे थे, वैसे ही आप भी तैयार रहें.

इस लेखांश में हम तीन कुंजियाँ देखते हैं:

1. परमेश्वर से निर्देश पाएं

'सिनाई के मरूस्थल में एक तंबू में बातचीत करते समय परमेश्वर ने मूसा से कहा (गिनतीयों 1:!). आपके जीवन के सबसे सूखे समय में या पूरी तरह से ईश्वरहीन स्थान में भी परमेश्वर आप से बात कर सकते हैं. अवश्य ही, परमेश्वर के केवल निर्देश सुनना पर्याप्त नहीं है – उन पर कार्य भी करना है. आरंभिक निर्देशों का यह सेट इस रिपोर्ट से समाप्त होता है कि परमेश्वर के लोगों ने उन्हीं आज्ञाओं के अनुसार किया जो परमेश्वर ने मूसा के द्वारा उन्हें दी थीं (व.54).

2. अच्छे लीडरों को तैयार करें

समाज में से लीडरों को नियुक्त किया गया (व.16) और इनका प्रतिनिधित्व किया गया (व.4), लेकिन अंत में इन्हें परमेश्वर के द्वारा चुना गया. समाज के हरएक स्तर और हिस्सों में लीडरशिप एक कुंजी है. घर में माता-पिता लीडर हैं. स्कूल में शिक्षक लीडर्स हैं. चर्च, बाजार, न्यायालय, सरकार, मीडिया, कला आदि में हमें अच्छे लीडरशिप की आवश्यकता है.

3. लोगों को संघटित करें

हर व्यक्ति को (एक एक करके नाम के द्वारा) सूचिबद्ध किया जाना चाहिये (व.2). इस लेखांश में यह अभिव्यक्ति बारबार उभर कर आती है. हरएक व्यक्ति परमेश्वर के लिए मायने रखता है और उसे उनकी योजनाओं में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होती है. जो पहले सूखे आंकड़े नजर आते थे वे परमेश्वर के लोगों को गतिशील करने और तैयार करने में महत्वपूर्ण साधन बने. युगर पीटरसन, इंट्रोडक्शन टू बुक ऑफ नम्बर्स में लिखते हैं, 'हमें सुव्यवस्थित मदद की जरूरत है. जब लोग समाज में एक साथ रहते हैं, तो उन्हें कार्य सौंपना चाहिये, लीडर्स को नियुक्त करना चाहिये, और विस्तृत सूची रखनी चाहिये. उनकी गणना करना और सूची बनाना और नामावली बनाना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना की परमेश्वर से प्रार्थना करना, न्याय करना और निर्देश देना महत्वपूर्ण है. सटीक हिसाब किताब करना परमेश्वर के जन बनने का एक महत्वपूर्ण पहलू है.

प्रार्थना

प्रभु, मैं प्रार्थना करता हूँ कि आप चर्च और समाज दोनों में अच्छे लीडर्स तैयार करेंगे और यह कि आने वाले युद्ध के लिए आप लोगों को पहले से ही तैयार करेंगे.

पिप्पा भी कहते है

लूका 1:26-38

मैं मरियम से बहुत ही प्रभावित हूँ. वह कितनी असाधारण महिला रही होंगी. यह बताया जाना कि तुम एक बच्चा जनोगी, एक अद्भुत अनुभव है. लेकिन जब आप जवान, और अविवाहित और कुआँरी हैं, तो यह बताया जाना कि 'तुम परम प्रधान के पुत्र को जनोगी' (व.32) असंभव और डरावना सा लगता है. कुआँरी होते हुए गर्भवती होना समाज में एक भयंकर बात थी. उनका संपूर्ण विश्वास और परमेश्वर की इच्छा पूरी करना एक असाधारण बात है. आप सोच रहे होंगे कि वह खुद की प्रतिष्ठा को लेकर चिंतित थीं. इस वजह से यूसुफ के साथ होने वाली उनकी शादी खतरे में पड़ सकती थी, और उनके परिवार को चोट पहुँच सकती थी और उनका जीवन खतरे में पड़ सकता था. लेकिन उन्होंने फिर भी कहा, 'मैं प्रभु की दासी हूँ..... मुझे तेरे वचन के अनुसार हो' (व.38).

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संदर्भ

नोट्स:

युगर पीटरसन, द मैसेज, (नॅवप्रेस पब्लिशिंग्ग्रुप, 2002) पन्ना 169

रॅनीरो कॅनाटालामेसा, कम क्रिएटर स्पिरिट: मेडिटेशन्स ऑन द वेनि क्रिएटर, (लिट्रुजिकल प्रेस, 2002) पन्ना 287

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जहाँ पर कुछ बताया न गया हो, उन वचनों को पवित्र बाइबल, न्यू इंटरनैशनल संस्करण एन्ग्लिसाइड से लिया गया है, कॉपीराइट © 1979, 1984, 2011 बिबलिका, पहले इंटरनैशनल बाइबल सोसाइटी, हूडर और स्टोगन पब्लिशर की अनुमति से प्रयोग किया गया, एक हॅचेट यूके कंपनी सभी अधिकार सुरक्षित। ‘एनआईवी’, बिबलिका यू के का पंजीकृत ट्रेडमार्क संख्या 1448790 है।

जिन वचनों को (एएमपी, AMP) से चिन्हित किया गया है उन्हें एम्प्लीफाइड® बाइबल से लिया गया है. कॉपीराइट © 1954, 1958, 1962, 1964, 1965, 1987 लॉकमैन फाउंडेशन द्वारा प्राप्त अनुमति से उपयोग किया गया है। (www.Lockman.org)

जिन वचनों को (एमएसजी MSG) से चिन्हित किया गया है उन्हें मैसेज से लिया गया है। कॉपीराइट © 1993, 1994, 1995, 1996, 2000, 2001, 2002. जिनका प्रयोग एनएवीप्रेस पब्लिशिंग ग्रुप की अनुमति से किया गया है।

संपादकीय नोट्स:

रॅनीरो कॅनाटालामेसा उद्धरण – (कम, क्रिएटर स्पिरिट, पन्ना 287)

'परम प्रधान परमेश्वर, हम प्रार्थना करते हैं, अपने नम्र सेवकों के दिल की इच्छाओं को देखिये, और प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमारे शत्रुओं से हमारी रक्षा करने के लिए अपना सामर्थी दाहिना हाथ फैलाइये. आमीन.' (द बुक ऑफ कॉमन प्रेयर से ली गई प्रार्थना).

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