यीशु को फोलो करें
परिचय
आखिरकार पीपा और मैंने ट्वीटर की दुनिया में प्रवेश किया. यह एक ऐसी दुनिया है जहाँ आप लोगों को फोलो करते हैं और कुछ लोग आपको फोलो करते हैं.
कॅटी पेरी और जस्टीन बीबर के अब 75 मिलियन से भी ज्यादा फोलोअर हैं. लोग उनके जीवन, शब्द, जीवनशैली, आहार और फैशन की पसंद को फोलो करते हैं. वे उनके बारे में सबकुछ जानना चाहते हैं और उन्हें पसंद करते हैं. वे उनके साथ घनिष्ठ बनते हैं. सहज रूप से इसमें कुछ भी गलत नहीं है. जिनकी हम प्रशंसा करते हैं उन्हें फोलो करना स्वाभाविक है. ट्वीटर पर प्रसिद्ध लोगों को फोलो करने में बल्कि उनकी जानकारी लेने में मजा आता है.
मगर ट्वीटर पर लोगों को फोलो करना एक बात है; और किसी का सच में अनुसरण करना एक बिल्कुल अलग बात है. इसका मतलब है उनके जीवन से घनिष्ठ होना और वही करना जो वह हमें करने के लिए कहते हैं. अनुसरण करने के लिए सही लोगों का चयन करें. ट्वीटर के विपरीत, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किसका अनुसरण करते हैं. उदाहरण के लिए लाखों लोग हिटलर, स्टॅलिन और पॉल पॉट का अनुसरण करते हैं. आज भी, लाखों लोग दुष्ट तानाशाहों, आतंकवादियों और गैंग लीडर्स का अनुसरण करते हैं.
कुछ लोग परंपरा और संस्थाओं के बारे में सन्देहवादी हैं और यह नहीं जानते कि किसका अनुसरण किया जाए. पारंपरिक आदर्श, जो अक्सर हमारे परिवारों, संस्थानों और राजनीतिक लीडरों से होते हैं या वे विजेता होते हैं, तो कुछ हद तक उन्हें टूटना जरूरी है. इससे कई लोग अनिश्चित हो जाते हैं कि किसका अनुसरण किया जाए.
यीशु ने कई बार कहा है, 'मेरे पीछे हो लो.' अब तक जीवित सभी लोगों में से यीशु के फोलोअर्स सबसे ज्यादा हैं. आज दुनिया में 2400 मिलियन से भी ज्यादा लोग यीशु को फोलो करने का दावा करते हैं. यीशु के फोलोअर्स उनके बारे में जानना चाहते हैं और उनके जैसा बनना चाहते हैं. आज के हरएक लेखांश में हम देखेंगे कि यीशु को फोलो करने का मतलब क्या है.
भजन संहिता 40:1-8
संगीत निर्देशक के लिये दाऊद का एक पद पुकारा मैंने यहोवा को।
40यहोवा को मैंने पुकारा। उसने मेरी सुनी।
उसने मेरे रुदन को सुन लिया।
2 यहोवा ने मुझे विनाश के गर्त से उबारा।
उसने मुझे दलदली गर्त से उठाया,
और उसने मुझे चट्टान पर बैठाया।
उसने ही मेरे कदमों को टिकाया।
3 यहोवा ने मेरे मुँह में एक नया गीत बसाया।
परमेश्वर का एक स्तुति गीत।
बहुतेरे लोग देखेंगे जो मेरे साथ घटा है।
और फिर परमेश्वर की आराधना करेंगे।
वे यहोवा का विश्वास करेंगे।
4 यदि कोई जन यहोवा के भरोसे रहता है, तो वह मनुष्य सचमुच प्रसन्न होगा।
और यदि कोई जन मूर्तियों और मिथ्या देवों की शरण में नहीं जायेगा, तो वह मनुष्य सचमुच प्रसन्न होगा।
5 हमारे परमेश्वर यहोवा, तूने बहुतेरे अद्भुत कर्म किये हैं।
हमारे लिये तेरे पास अद्भुत योजनाएँ हैं।
कोई मनुष्य नहीं जो उसे गिन सके!
मैं तेरे किये हुए कामों को बार बार बखानूँगा।
6 हे यहोवा, तूने मुझको यह समझाया है:
तू सचमुच कोई अन्नबलि और पशुबलि नहीं चाहता था।
कोई होमबलि और पापबलि तुझे नहीं चाहिए।
7 सो मैंने कहा, “देख मैं आ रहा हूँ!
पुस्तक में मेरे विषय में यही लिखा है।”
8 हे मेरे परमेश्वर, मैं वही करना चाहता हूँ जो तू चाहता है।
मैंने मन में तेरी शिक्षओं को बसा लिया।
समीक्षा
यीशु के आदर्शों का अनुसरण करें
जब आप मुश्किल दौर से गुजरते हैं, तो पिछली आशीषों को और जिस समय परमेश्वर ने आपको छुड़ाया था उसे याद करने से आपको ताकत मिलती है.
दाऊद उस समय के बारे में लिखते हैं जब वह 'सत्यानाश के गढहे और दलदल की कींच में थे' (व.2अ). वह पाप, बीमारी या गहरी निराशा का वर्णन कर रहे थे. पर कोरी टेन बूम कहते हैं, 'परमेश्वर के प्यार से ज्यादा गहरा कोई गढ्ढा नहीं है.'
'निराशा का गढ्ढा' एक भयंकर स्थान हो सकता है. ऐसे समय में हम अपनी असफलताओं और निराशा को याद करते हैं. हम ऐसा सोचने लगते हैं कि हमारे साथ कुछ भी अच्छा नहीं हो सकता. हम निराश और असहाय महसूस करने लगते हैं. और ऐसा सोचने लगते हैं कि हम अपनी परेशानियों से कभी ऊपर नहीं उठ सकेंगे और अपने जीवन में परमेश्वर की बुलाहट को कभी पूरा नहीं कर पाएंगे.
ऐसे असहाय समय में दाऊद कहते हैं, 'वह परमेश्वर का इंतजार करते रहे. और अंत में परमेश्वर ने उसे सत्यानाश के गडहे और दलदल की कीच में से उबारा' (वव.1-2अ).
जब परमेश्वर ने उसे सत्यानाश के गडहे से उबारा, तो उसके बाद उन्होंने 'मुझे चट्टान पर खड़ा करके मेरे पैरों को दृढ़ किया' (व.2ब). परमेश्वर ने दाऊद को एक नया गीत सिखाया जो उनकी स्तुती का है और बहुत लोग यह देखकर डर गए और प्रभु पर भरोसा करने लगे' (व.3).
दाऊद मिथ्या और अभिमानियों की ओर मुंह न फेरने और प्रभु पर भरोसा रखने की आशीषों का वर्णन करते हैं (व.4). 'क्या ही धन्य है वह पुरूष जो प्रभु पर भरोसा करता है, जो कल्पनाएं उन्होंने हमारे लिए की हैं उसकी गिनती कोई नहीं कर सकता; मैं तो चाहता हूँ कि खुलकर उनकी चर्चा करूँ, परंतु उनकी गिनती नहीं हो सकती' (वव.4-5).
दाऊद लिखते हैं, 'तू ने मेरे कान खोदकर खोले हैं' (व.6). दाऊद की सफलता का राज सुनना और आज्ञा का पालन करना था.
दाऊद परमेश्वर की अनंत इच्छा को पूरा करने के लिए खुद को समर्पित करते हैं. वह कहते हैं, 'देख, मैं आया हूँ, क्योंकि पुस्तक में मेरे विषय में ऐसा ही लिखा हुआ है. हे मेरे परमेश्वर मैं तेरी इच्छा पूरी करने से प्रसन्न होता हूँ, और तेरी इच्छा मेरे अंत:करण में बनी है.' (वव.7-8).
यीशु की सफलता का राज भी यही था. इब्रानियों के लेखक के अनुसार ये वचन यीशु में सिद्ध रूप से पूरे हुए हैं. वह हमें बताते हैं कि यीशु ने स्वयं इस भजन से 6-8 वचनों का उद्धरण किया था (इब्रानियों 10:5-10 देखें). यीशु ने प्रार्थना की और आज्ञा का पालन किया. उन्होंने कहा था, 'हे परमेश्वर, मैं तेरी इच्छा पूरी करने आया हूँ' (व.7). इब्रानियों के लेखक आगे लिखते हैं, , ‘उसी इच्छा से हम यीशु मसीह की देह की एक ही बार बलि चढ़ाए जाने के द्वारा पवित्र किये गए' (v.10).
यीशु के उदाहरण का अनुसरण करें और परमेश्वर की इच्छा पूरी करने के लिए खुद को समर्पित कर दें. दाऊद कहते हैं धन्य है वह पुरूष जो परमेश्वर पर भरोसा करते हैं. 'जो आश्चर्यकर्म (भजन संहिता 40:5) और कल्पनाएं तू हमारे लिए करता है वह बहुत सी हैं' (व.5).
प्रार्थना
प्रभु आपको उस समय के लिए धन्यवाद जब आपने मुझे सत्यानाश के गडहे में से निकाला और दलदल की कींच में से उबारा था, और मुझे चट्टान पर खड़ा करके मेरे पैरों को दृढ़ किया था, और मेरे मुंह में स्तुती का नया गीत डाला था और मुझे आपका गवाह बनने में मदद की थी ताकि मुझे देखकर दूसरे आप पर भरोसा कर सकें. मुझे प्रार्थना करने में और आपकी आज्ञा का पालन करने में आज मेरी मदद कीजिये.
लूका 8:40-9:9
रोगी स्त्री का अच्छा होना और मृत लड़की को जीवनदान
40 अब देखो जब यीशु लौटा तो जन समूह ने उसका स्वागत किया क्योंकि वे सभी उसकी प्रतीक्षा में थे। 41 तभी याईर नाम का एक व्यक्ति वहाँ आया। वह वहाँ के यहूदी आराधनालय का मुखिया था। वह यीशु के चरणों में गिर पड़ा और उससे अपने घर चलने की विनती करने लगा। 42 क्योंकि उसके बारह साल की एक एकलौती बेटी थी, वह मरने वाली थी।
सो यीशु जब जा रहा था तो भीड़ उसे कुचले जा रही थी। 43 वहीं एक स्त्री थी जिसे बारह साल से खून बह रहा था। जो कुछ उसके पास था, उसने चिकित्सकों पर खर्च कर दिया था, पर वह किसी से भी ठीक नहीं हो पायी थी। 44 वह उसके पीछे आयी और उसने उसके चोगे की कन्नी छू ली। और उसका खून जाना तुरन्त रुक गया। 45 तब यीशु ने पूछा, “वह कौन है जिसने मुझे छुआ है?”
जब सभी मना कर रहे थे, पतरस बोला, “स्वामी, सभी लोगों ने तो तुझे घेर रखा है और वे सभी तो तुझ पर गिर पड़ रहे है।”
46 किन्तु यीशु ने कहा, “किसी ने मुझे छुआ है क्योंकि मुझे लगा है जैसे मुझ में से शक्ति निकली हो।” 47 उस स्त्री ने जब देखा कि वह छुप नहीं पायी है, तो वह काँपती हुई आयी और यीशु के सामने गिर पड़ी। वहाँ सभी लोगों के सामने उसने बताया कि उसने उसे क्यों छुआ था। और कैसे तत्काल वह अच्छी हो गयी। 48 इस पर यीशु ने उससे कहा, “पुत्री, तेरे विश्वास ने तेरा उद्धार किया है। चैन से जा।”
49 वह अभी बोल ही रहा था कि यहूदी आराधनालय के मुखिया के घर से वहाँ कोई आया और बोला, “तेरी बेटी मर चुकी है। सो गुरु को अब और कष्ट मत दे।”
50 यीशु ने यह सुन लिया। सो वह उससे बोला, “डर मत! विश्वास रख। वह बच जायेगी।”
51 जब यीशु उस घर में आया तो उसने अपने साथ पतरस, यूहन्ना, याकूब और बच्ची के माता-पिता को छोड़ कर किसी और को अपने साथ भीतर नहीं आने दिया। 52 सभी लोग उस लड़की के लिये रो रहे थे और विलाप कर रहे थे। यीशु बोला, “रोना बंद करो। यह मरी नहीं है, बल्कि सो रही है।”
53 इस पर लोगों ने उसकी हँसी उड़ाई। क्योंकि वे जानते थे कि लड़की मर चुकी है। 54 किन्तु यीशु ने उसका हाथ पकड़ा और पुकार कर कहा, “बच्ची, खड़ी हो जा!” 55 उसकी आत्मा लौट आयी, और वह तुरंत उठ बैठी। यीशु ने आज्ञा दी, “इसे कुछ खाने को दिया जाये।” 56 इस पर लड़की के माता पिता को बहुत अचरज हुआ किन्तु यीशु ने उन्हें आदेश दिया कि जो घटना घटी है, उसे वे किसी को न बतायें।
यीशु द्वारा बारह शिष्यों का भेजा जाना
9फिर यीशु ने बारहों शिष्यों को एक साथ बुलाया और उन्हें दुष्टात्माओं से छुटकारा दिलाने का अधिकार और शक्ति प्रदान की। उसने उन्हें रोग दूर करने की शक्ति भी दी। 2 फिर उसने उन्हें परमेश्वर के राज्य का सुसमाचार सुनाने और रोगियों को चंगा करने के लिये बाहर भेजा। 3 उसने उनसे कहा, “अपनी यात्रा के लिये वे कुछ साथ न लें: न लाठी, न झोला, न रोटी, न चाँदी और न कोई अतिरिक्त वस्त्र। 4 तुम जिस किसी घर के भीतर जाओ, वहीं ठहरो। और जब तक विदा लो, वहीं ठहरे रहो। 5 और जहाँ कहीं लोग तुम्हारा स्वागत न करें तो जब तुम उस नगर को छोड़ो तो उनके विरुद्ध गवाही के रूप में अपने पैरों की धूल झाड़ दो।”
6 सो वहाँ से चल कर वे हर कहीं सुसमाचार का उपदेश देते और लोगों को चंगा करते सभी गाँवों से होते हुए यात्रा करने लगे।
हेरोदेस की भ्रान्ति
7 अब जब एक चौथाई देश के राजा हेरोदेस ने, जो कुछ हुआ था, उसके बारे में सुना तो वह चिंता में पड़ गया क्योंकि कुछ लोगों के द्वारा कहा जा रहा था, “यूहन्ना को मरे हुओं में से जिला दिया गया है।” 8 दूसरे कह रहे थे, “एलिय्याह प्रकट हुआ है।” कुछ और कह रहे थे, “पुराने युग का कोई नबी जी उठा है।” 9 किन्तु हेरोदेस ने कहा, “मैंने यूहन्ना का तो सिर कटवा दिया था, फिर यह है कौन जिसके बारे में मैं ऐसी बातें सुन रहा हूँ?” सो हेरोदेस उसे देखने का जतन करने लगा।
समीक्षा
यीशु के निर्देशों का पालन करें
यीशु के पास सोशल मीडिया, प्रसारण क्षमता, बड़े स्क्रीन या साधारण माइक्रोफोन भी नहीं थे जिसकी सहायता से वह संदेश दे सकें. उन्हें इनकी जरूरत भी नहीं थी. उनके पास 'सामर्थ और अधिकार' था. जिसे उन्होंने उन पर विश्वास करने वालों को दिया (9:1).
जबकि हम हरएक उपलब्ध साधनों का उपयोग करते हुए यीशु के संदेश का प्रचार करते हैं, हमें प्रसारण के आधुनिक साधनों में इतना मशगूल नहीं होना चाहिये कि हम इसके मुख्य उद्देश्य को भूल जाएं. हमें यीशु के आदर्शों और उनके निर्देशों का पालन करना चाहिये, जिसके बारे में हम आज के लेखांश में पढ़ेंगे.
यीशु ने उस स्त्री को चंगा किया जिसे लहू बहने की बीमारी थी और उन्होंने यईर की बेटी को फिर से जीवित किया था. यईर और वह स्त्री अलग-अलग चरित्र हैं: पहला पुरूष और दूसरी स्त्री; पहला अकेले में, दूसरा भीड़ में; पहला प्रभावशाली, और दूसरा अमहत्वपूर्ण नजर आने वाला; पहले ने यीशु को अपनी बेटी के बारे में बताया, दूसरे को यीशु ने बुलाया था; पहला स्वस्थ था और दूसरी बीमार.
फिर भी दोनों यीशु के सामर्थ और अधिकार पर निर्भर थे, और दोनों ने यीशु के पास पहुँचने पर उसी तरह से प्रतिक्रिया की. यईर आकर यीशु के पैरों पर गिर गया (8:41) और वह स्त्री कांपते हुए यीशु के पास आई और उनके पैरों पर गिर गई' (व.47).
दोनों ने यीशु की सही प्रतिक्रिया की. वे उनकी सामर्थ को जान गए और वे उनके निर्देशों का पालन करने और यह विश्वास करने को तैयार थे कि यीशु के पास चंगा करने की सामर्थ है. यीशु ने उस स्त्री से कहा: 'बेटी, तेरे विश्वास ने तुझे चंगा किया है. शांति से जा' (व.48). और उन्होंने यईर से कहा: 'मत डर; विश्वास रख और वह ठीक हो जाएगी' (व.50). ये दोनों कहानियाँ असाधारण सामर्थ और असाधारण करूणा की हैं.
यीशु के बारे में कहा गया है, 'जितनों ने उन्हें स्पर्श किया वे चंगे हो गए' (मरकुस 6:56). जब उस स्त्री ने उन्हें छुआ जिसे बारह साल से लहू बहने की बीमारी थी, तो उन्होंने कहा, 'किसी ने मुझे छुआ है; मुझे पता चला कि मुझ में से सामर्थ बही है' (लूका 8:46). वह 'तुरंत ठीक हो गई' (व.47). फिर यीशु ने यईर की बेटी को मरे हुओं में जिलाया. लोग अचंभित हो गए (व.56). यीशु ने महान सामर्थ और अधिकार से सेविकाई की.
यह और भी विस्मयकारी है कि उन्होंने इसे आपको दे दिया है. सामर्थ और अधिकार ऐसे दो शब्द हैं जो यीशु की सेविकाई के साथ सही रीति से जुड़े हुए हैं. फिर भी, ये यीशु के लिए अनोखे नहीं हैं. यीशु ने अपने शिष्यों को एकसाथ बुलाया और 'उन्हें परमेश्वर के राज्य का प्रचार करने और बीमारों को चंगा करने का... सामर्थ और अधिकार दिया' (मत्ती 28:18-20). उनकी सामर्थ और अधिकार आज भी आपके लिए उपलब्ध हैं.
प्रार्थना
प्रभु, मुझे आपके निर्देशों का पालन करने – परमेश्वर के राज्य का प्रचार करने और बीमारों को चंगा करने में मेरी मदद कीजिये. मुझे आपके आदर्शों का घनिष्ठता से अनुसरण करने में और सामर्थ तथा अधिकार से सेविकाई करने के लिए सीखने में मेरी मदद कीजिये.
गिनती 31:25-32:42
25 उसके बाद तुम डेरे में आ सकते हो। तब यहोवा ने मूसा से कहा, 26 “मूसा तुम्हें याजक एलीआज़ार और सभी नेताओं को चाहिए कि तुम उन बन्दियों, जानवरों और सभी चीज़ों को गिनो जिन्हें सैनिक युद्ध से लाऐ हों। 27 तब उन चीज़ों को युद्ध में भाग लेने वाले सैनिकों और शेष इस्राएल के लोगों में बाँट देना चाहिए। 28 जो सैनिक युद्ध में भाग लेने गये थे उनसे उन चीज़ों का आधा लो। वह हिस्सा यहोवा का होगा। हर एक पाँच सौ चीजों में से एक यहोवा का हिस्सा होगा। इसमें व्यक्ति मवेशी, गधे और भेड़ें सम्मिलित हैं। 29 सैनिकों ने युद्ध में जो चीज़ें प्राप्त कीं उनका आधा हर एक से लो। तब उन चीज़ों को (प्रत्येक पाँच सौ में से एक) याजक एलीआज़ार को दो। वह भाग यहोवा का होगा 30 और तब बाकी के लोगों के आधे में से हर एक पचास चीज़ों में से एक चीज़ लो। इसमें व्यक्ति, मवेशी, गधा, भेड़ या कोई अन्य जानवर शामिल हैं। यह हिस्सा लेविवंशी को दो। क्यों क्योंकि लेवीवंशी यहोवा के पवित्र तम्बू की देखभाल करते हैं।”
31 इस प्रकार मूसा और याजक एलीआज़ार ने वही किया जो मूसा को यहोवा का आदेश था। 32 सैनिकों ने छः लाख पचहत्तर हजार भेड़ें, 33 बहत्तर हजार मवेशी, 34 एकसठ हजार गधे, 35 बत्तीस हजार स्त्रियाँ लूटी थीं। (ये ऐसी स्त्रियाँ थीं जिनका किसी पुरुष के साथ यौन सम्बन्ध नहीं हुआ था।) 36 जो सैनिक युद्ध में गए थे उन्होंने अपने हिस्से की तीन लाख सैंतीस हजार पाँच सौ भेड़ें प्राप्त कीं। 37 उन्होंने छः सौ पचहत्तर भेड़ें यहोवा को दीं। 38 सैनिकों को छत्तीस हजार मवेशी मिले। उन्होंने बहत्तर यहोवा को दिए। 39 सैनिकों ने साढ़े तीस हजार गधे प्राप्त किये। उन्होंने यहोवा को एकसठ गधे दिये। 40 सैनिकों को सोलह हजार स्त्रियाँ मिलीं। उन्होंने बत्तीस स्त्रियाँ यहोवा को दीं। 41 यहोवा के आदेश के अनुसार मूसा ने यहोवा के लिए दी गई उन सारी भेटों को याजक एलीआज़ार को दे दिया।
42 तब मूसा ने लोगों को प्राप्त आधे हिस्से को गिना। यह वह हिस्सा था जिसे मूसा ने युद्ध में भाग लेने वाले सैनिकों से लिया था। 43 लोगों ने तीन लाख सैंतीस हजार पाँच सौ भेड़ें, 44 छत्तीस हजार मवेशी, 45 तीस हजार पाँच सौ गधे 46 और सोलह हजार स्त्रियाँ प्राप्त कीं। 47 मूसा ने हर एक पचास चीज़ों पर एक चीज़ यहोवा के लिए ली। इसमें जानवर और व्यक्ति दोनों शामिल थे। तब उन चीज़ों को उसने लेवीवंशी को दे दिया। क्यों क्योंकि वे यहोवा के पवित्र तम्बू की देखभाल करते थे। मूसा ने यह यहोवा के आदेश के अनुसार किया।
48 तब सेना के संचालक (एक हजार सैनिकों के सेनापति तथा एक सौ सैनिकों के सेनापति) मूसा के पास गए। 49 उन्होंने मूसा से कहा, “तेरे सेवक हम लोगों ने अपने सभी सैनिकों को गिना है। हम लोगों में से कोई भी कम नहीं है। 50 इसलिए हम लोग हर एक सैनिक से यहोवा की भेंट ला रहे हैं। हम लोग सोने की चीज़ें बाजूबन्द, शुजबन्द, अंगूठी, कान की बालियाँ और हार ला रहे हैं। यहोवा को ये भेंटें हमारे पापों के भुगतान के लिए हैं।”
51 इसलिए मूसा ने वे सभी सोने की चीज़ें लीं और याजक एलीआज़ार को उन्हें दिया। 52 एक हजार सैनिकों और सौ सैनिकों के सेनापतियों ने जो सोना एकत्र किया और यहोवा को दिया उसका वजन लगभग चार सौ बीस पौंड था। 53 प्रत्येक सैनिक ने युद्ध में प्राप्त चीज़ों का अपना हिस्सा अपने पास रख लिया। 54 मूसा और एलीआज़ार ने एक हजार सैनिकों और एक सौ सैनिकों के सेनापतियों से सोना लिया। तब उन्होंने सोने को मिलापवाले तम्बू में रखा। यह भेंट एक यादगार के रूप में इस्राएल के लोगों के लिए यहोवा के सामने थी।
यरदन नदी के पूर्व के परिवार समूह
32रूबेन और गाद के परिवार समूहों के पास भारी संख्या में मवेशी थे। उन लोगों ने याजेर और गिलाद के समीप की भूमि को देखा। उन्होंने सोचा कि वह भूमि उनके मवेशियों के लिए ठीक है। 2 इसलिए रूबेन और गाद परिवारसमूह के लोग मूसा के पास आए। उन्होंने मूसा, याजक एलीआज़ार तथा लोगों के नेताओं से बात की। 3-4 उन्होंने कहा, “तेरे सेवक, हम लोगों के पास भारी संख्या में मवेशी हैं और वह भूमि जिसे यहोवा ने इस्राएल के लोगों को युद्ध में दिया है, मवेशियों के लिए ठीक है। इस प्रदेश में अतारोत, दीबोन याजेर, निम्रा, हेशबोन, एलाले, सबाम नबो और बोन शामिल हैं। 5 यदि तेरी स्वीकृति हो तो हम लोग चाहेंगे कि यह प्रदेश हम लोगों को दिया जाए। हम लोगों को यरदन नदी की दूसरी ओर न ले जाए।”
6 मूसा ने रूबेन और गाद के परिवार समूह से पूछा, “क्या तुम लोग यहाँ बसोगे और अपने भाईयों को यहाँ से जाने और युद्ध करने दोगे? तुम लोग इस्राएल के लोगों को निरूत्साहित क्यों करना चाहते हो? 7 तुम लोग उन्हें नदी पार करने की सोचने नहीं दोगे और जो प्रदेश यहोवा ने उन्हें दिया है उसे नहीं लेने दोगे। 8 तुम्हारे पिताओं ने मेरे साथ ऐसा ही किया। कादेशबर्ने से मैंने जासूसों को प्रदेश की छान—बीन करने के लिए भेजा। 9 वे लोग एश्कोल घाटी तक गए। उन्होंने प्रदेश को देखा और उन लोगों ने इस्राएल के लोगों को उस धरती पर जाने को निरूत्साहित किया। उन लोगों ने इस्राएल के लोगों को उस प्रदेश में जाने की इच्छा नहीं करने दी जिसे यहोवा ने उनको दे दिया था। 10 यहोवा लोगों पर बहुत क्रोधित हुआ। यहोवा ने यह निर्णय सुनायाः 11 ‘मिस्र से आने वाले लोगों और बीस वर्ष या उससे अधिक उम्र का कोई भी व्यक्ति इस प्रदेश को नहीं देख पाएगा। मैंने इब्राहीम, इसहाक और याकूब को यह वचन दिया था। मैंने यह प्रदेश इन व्यक्तियों को देने का वचन दिया था। किन्तु इन्होंने मेरा अनुसरण पूरी तरह नहीं किया। इसलिए वे इस प्रदेश को नहीं पाएंगे। 12 केवल कनजी यपुन्ने के पुत्र कालेब और नून के पुत्र यहोशू ने यहोवा का पूरी तरह अनुसरण किया।’
13 “यहोवा इस्राएल के लोगों के विरुद्ध बहुत क्रोधित था। इसलिए यहोवा ने लोगों को चालीस वर्ष तक मरुभूमि में रोके रखा। यहोवा ने उनको तब तक वहाँ रोके रखा जब तक वे लोग, जिन्होंने यहोवा के विरुद्ध पाप किए थे, मर न गए 14 और अब तुम लोग वही कर रहे हो जो तुम्हारे पूर्वजों ने किया। अरे पापियो! क्या तुम चाहते हो कि यहोवा इस्राएल के लोगों के विरुद्ध और अधिक क्रोधित हो 15 यदि तुम लोग यहोवा का अनुसरण करना छोड़ोगे तो यहोवा इस्राएल को और अधिक समय तक मरुभूमि में ठहरा देगा। तब तुम इन सभी लोगों को नष्ट कर दोगे!”
16 किन्तु रूबेन और गाद परिवार समूहों के लोग मूसा के पास गए। उन्होंने कहा, “यहाँ हम लोग अपने बच्चों के लिए नगर और अपने जानवरों के लिए बाड़े बनाएंगे। 17 तब हमारे बच्चे उन अन्य लोगों से सुरक्षित रहेंगे जो इस प्रदेश में रहते हैं। किन्तु हम लोग प्रसन्नता से आगे बढ़कर इस्राएल के लोगों की सहायता करेंगे। हम लोग उन्हें उनके प्रदेश में ले जाएंगे। 18 हम लोग तब तक घर नहीं लौटेंगे जब तक हर एक व्यक्ति इस्राएल में अपनी भूमि का हिस्सा नहीं पा लेता। 19 हम लोग यरदन नदी के पश्चिम में कोई भूमि नहीं लेंगे। नहीं। हम लोगों की भूमि का भाग यरदन नदी के पूर्व ही है।”
20 मूसा ने उनसे कहा, “यदि तुम लोग यह सब करोगे तो यह भूमि तुम लोगों की होगी। किन्तु तुम्हारे सैनिक यहोवा के सामने युद्ध में जाने चाहिए। 21 तुम्हारे सैनिकों को यरदन नदी पार करनी चाहिए और शत्रु को उस देश को छोड़ने के लिए विवश करना चाहिए। 22 जब हम सभी को भूमि प्राप्त कराने में यहोवा सहायता कर चुके तब तुम घर वापस जा सकते हो। तब यहोवा और इस्राएल तुमको अपराधी नहीं मानेंगे। तब यहोवा तुमको यह प्रदेश लेने देगा। 23 किन्तु यदि तुम ये बातें पूरी नहीं करते हो, तो तुम लोग यहोवा के विरुद्ध पाप करोगे और यह गाँठ बांधो कि तुम अपने पाप के लिए दण्ड पाओगे। 24 अपने बच्चों के लिए नगर और अपने जानवरों के लिए बाड़े बनाओ। किन्तु उसके बाद उसे पूरा करो जिसे करने का तुमने वचन दिया है।”
25 तब गाद और रूबेन परिवार समूह के लोगों ने मूसा से कहा, “हम तेरे सेवक हैं। तू हमारा स्वामी है। इसलिए हम लोग वही करेंगे जो तू कहता है। 26 हमारी पत्नियाँ, बच्चे और हमारे जानवर गिलाद नगर में रहेंगे। 27 किन्तु तेरे सेवक, हम यरदन नदी को पार करेंगे। किन्तु हम लोग यहोवा के सामने अपने स्वामी के कथनानुसार युद्ध में कूद पड़ेंगे।”
28 मूसा ने याजक एलीआज़ार, नून के पुत्र यहोशू और इस्राएल के परिवार समूह के सभी नेताओं को उनके बारे में आज्ञा दी। 29 मूसा ने उनसे कहा, “गाद और रूबेन के पुरुष यरदन नदी को पार करेंगे। वे यहोवा के आगे युद्ध में धावा बोलेंगे। वे देश जीतने में तुम्हारी सहायता करेंगे और तुम लोग गिलाद का प्रदेश उनके हिस्से के रूप में उन्हें दोगे। 30 वे वचन देते हैं कि वे कनान देश को जीतने में तुम्हारी सहायता करेंगे।”
31 गाद और रूबेन के लोगों ने उत्तर दिया, “हम लोग वही करने का वचन देते हैं जो यहोवा का आदेश है। 32 हम लोग यरदन नदी पार करेंगे और कनान देश पर यहोवा के सामने धावा बोलेंगे और हमारे देश का भाग यरदन नदी के पूर्व की भूमि होगी।”
33 इस प्रकार मूसा ने उस प्रदेश को गाद, रूबेन और मनश्शे परिवार समूह के आधे लोगों को दिया। (मनश्शे यूसुफ का पुत्र था।) उस प्रदेश में एमोरियों के राजा सीहोन का राज्य और बाशान के राजा ओग का राज्य शामिल थे। उस प्रदेश में उस क्षेत्र के चारों ओर के नगर भी शामिल थे।
34 गाद के लोगों ने दीबोन, अतारोत, अरोएर, 35 अत्रौत, शोपान, याजेर, योगबहा, 36 बेतनिम्रा और बेथारान नगरों को बनाया। उन्होंने मजबूत चाहारदीवारों के साथ नगरों को बनाया और अपने जानवरों के लिए बाड़े बनाए।
37 रूबेन के लोगों ने हेसबोन, एलाले, किर्यातैम, 38 नबो, बालमोन, मूसा — बॉथ और तित्पा नगर बनाए। उन्होंने जिन नये नगरों को फिर से बनाया उनके पुराने नामों का ही उपयोग किया गया किन्तु नबो और बालमोन को नये नाम दिये गए।
39 मनश्शे परिवार समूह की सन्तान माकीर से उत्पन्न लोग गिलाद को गए। उन्होंने नगर को हराया। उन्होंने उन एमोरी को हराया जो वहाँ रहते थे। 40 इसलिए मनश्शे के परिवार समूह के माकीर को मूसा ने गिलाद दिया। इसलिए उसका परिवार वहाँ बस गया। 41 मनश्शे की सन्तान याईर ने वहाँ के छोटे नगरों को हराया। तब उसने उन्हें याईर के नगर नाम दिया। 42 नोबह ने कनात और उसके पास के छोटे नगरों को हराया। तब उसने उस स्थान का नाम अपने नाम पर नोबह रखा।
समीक्षा
संपूर्ण दिल से यीशु का अनुसरण करें
परमेश्वर की सामर्थ और अधिकार उन्हें दिया जाएगा जो पूरे दिल से प्रभु का अनुसरण करते हैं (32:22). कालेब और यहोशू को इस्रालियों में चुना गया क्योंकि उनमें से केवल दो लोगों ने पूरे दिल से प्रभु पर भरोसा किया था (व.12). परमेश्वर के लोगों को ऐसा ही करने के लिए बुलाया गया है.
मूसा ने लोगों को चिताया था कि 'तुम उसके पीछे चलने से फिर जाओ' (व.15). उसने उन्हें चिताया था कि व्यवस्था के विरूद्ध पाप न करो: 'यदि तुम ऐसा करो, तो यहोवा के विरुद्ध पापी ठहरोगे; और जान रखो कि तुम को तुम्हारा पाप लगेगा' (व.23). पवित्र शास्त्र हमें लगातार कहता है कि हमें पूरे दिल से प्रभु का अनुसरण करना चाहिये और पाप में डूबना नहीं चाहिये.
इसे नये नियम की दृष्टि से पढ़ा जाए तो 'प्रभु का अनुसरण करने' का मतलब है 'यीशु का अनुसरण करना', जो कि नये नियम का मुख्य केंद्र है. (उदाहरण के लिए रोमियों 10:9 देखें).
इन लेखांशों में हम देखते हैं कि जो पूरे दिल से यीशु का अनुसरण करते हैं, उन पर अपना विश्वास रखते हैं और उन पर भरोसा करते हैं और उनकी इच्छा पूरी करने के लिए खुद को समर्पित करते हैं, उनके लिए कितना कुछ उपलब्ध है. जब आप ऐसा करेंगे तो यीशु आपको सामर्थ और अधिकार के साथ प्रचार करने और बीमारों को चंगा करने के लिए दुनिया में भेजेंगे.
प्रार्थना
प्रभु, मैं कालेब और यहोशू जैसा बनना चाहता हूँ और पूरे दिल से आपका अनुसरण करना चाहता हूँ. आज मैं आपके आदर्शों का पालन करना और आपकी इच्छा पर खुद को समर्पित करना चाहता हूँ. सामर्थ और अधिकार से सेविकाई करने, सुसमाचार का प्रचार करने और बीमारों को चंगा करने में मेरी मदद कीजिये.
पिप्पा भी कहते है
लूका 9:2-3
यीशु ने 'उन्हें परमेश्वर के राज्य का प्रचार करने, और बीमारों को अच्छा करने के लिये भेजा। और उस ने उससे कहा, मार्ग के लिये कुछ न लेना: न तो लाठी, न झोली, न रोटी, न रूपये और न दो दो कुरते.'
जब हम अलग-अलग देशों में जाते हैं, तो आपको ध्यान देना कि हम अपने साथ क्या ले जाते हैं. ऐसा लगता है कि हमें हल्के रहना यानि असक्षम होना है! मैं यह बताना चाहूँगी कि ऐसा नहीं लगता कि वे अपने साथ स्क्वॅश रैकेट ले जाते थे!

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संदर्भ
नोट्स:
कार्टून © Charlie Mackesy
कोरी टेन बूम, द हाइडिंग प्लेस, (होडर एंड स्टटन, 2004) प. 196
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