हैलो परमेश्वर! मैं फ्लोरी शोर हूँ
परिचय
डिब्ले की पादरी, युके टी.वी. सिटकॉम की प्रस्तुती, जिसमें डॉन फ्रेंच एक महिला पादरी के अभिनय में हैं, जो कि प्रथम महिला पादरी के जीवन पर आधारित हैं – जॉय कॅरोल वॅलीस. कुछ सालों पहले हम जॉय से मिले। उन्होंने हमें एक कहानी बताई जब वह ब्रिक्सटन, लंडन में एक एंज्लिकन प्रीस्ट थी।
सभा की एक सदस्य सत्तासी वर्षीय महिला बहुत ही भक्तिमय थी, उनका नाम फ्लोरी शोर था, जिन्हें सर्जरी करवानी पड़ी थी। फ्लोरी को बताया गया था कि उनके बचने की उम्मीद बहुत कम है।
धन्यवाद हो परमेश्वर का, सर्जरी के बाद वह जीवित थी। जैसे ही उन्होंने अपनी आँखे खोली, तो सबसे पहली चीज जो उन्होंने देखी, वह था सफेद जॅकेट पहने हुए, उनके डॉक्टर का धुँधला चित्र।
उन्होंने मुस्कुराकर कहा, ' हैलो परमेश्वर! मैं फ्लोरी शोर हूँ।'
जॉय ने बताया कि यह दो चीजों को दिखाता है। पहली, इसने फ्लोरी की दीनता को दिखाया। उन्होंनें परमेश्वर से आशा नहीं कि उन्हें मेरा नाम पता होना चाहिए। दूसरा, पुनरुत्थान और जहाँ पर वह जा रही थी, उसके विषय में इसने उनके पूर्ण आश्वासन को दिखाया।
पुनरुत्थान के विषय में उनका आश्वासन मसीहत के सिरे के पत्थर पर आधारित थाः पहले ईस्टर के दिन यीशु मसीह का पुनरुत्थान। वही सामर्थ जिसने यीशु को मरे हुओं में से जिलाया अब आपमें पवित्र आत्मा के द्वारा रहता है (इफिसीयो 1:18-23)।
भजन संहिता 49:1-20
कोरह की संतानो का संगीत निर्देशक के लिए एक पद।
49विभिन्न देशों के निवासियों, यह सुनो।
धरती के वासियों यह सुनो।
2 सुनो अरे दीन जनो, अरे धनिकों सुनो।
3 मैं तुम्हें ज्ञान
और विवेक की बातें बताता हूँ।
4 मैंने कथाएँ सुनी हैं,
मैं अब वे कथाएँ तुमको निज वीणा पर सुनाऊँगा।
5 ऐसा कोई कारण नहीं जो मैं किसी भी विनाश से डर जाऊँ।
यदि लोग मुझे घेरे और फँदा फैलाये. मुझे डरने का कोई कारण नहीं।
6 वे लोग मूर्ख हैं जिन्हें अपने निज बल
और अपने धन पर भरोसा है।
7 तुझे कोई मनुष्य मित्र नहीं बचा सकता।
जो घटा है उसे तू परमेश्वर को देकर बदलवा नहीं सकता।
8 किसी मनुष्य के पास इतना धन नहीं होगा कि
जिससे वह स्वयं अपना निज जीवन मोल ले सके।
9 किसी मनुष्य के पास इतना धन नहीं हो सकता
कि वह अपना शरीर कब्र में सड़ने से बचा सके।
10 देखो, बुद्धिमान जन, बुद्धिहीन जन और जड़मति जन एक जैसे मर जाते हैं,
और उनका सारा धन दूसरों के हाथ में चला जाता है।
11 कब्र सदा सर्वदा के लिए हर किसी का घर बनेगा,
इसका कोई अर्थ नहीं कि वे कितनी धरती के स्वामी रहे थे।
12 धनी पुरूष मूर्ख जनों से भिन्न नहीं होते।
सभी लोग पशुओं कि तरह मर जाते हैं।
13 लोगों कि वास्तविक मुर्खता यह हाती है कि
वे अपनी भूख को निर्णायक बनाते हैं, कि उनको क्या करना चाहिए।
14 सभी लोग भेड़ जैसे हैं।
कब्र उनके लिये बाडा बन जायेगी।
मृत्यु उनका चरवाहा बनेगी।
उनकी काया क्षीण हो जायेंगी
और वे कब्र में सड़ गल जायेंगे।
15 किन्तु परमेश्वर मेरा मूल्य चुकाएगा और मेरा जीवन कब्र की शक्ति से बचाएगा।
वह मुझको बचाएगा।
16 धनवानों से मत डरो कि वे धनी हैं।
लोगों से उनके वैभवपूर्ण घरों को देखकर मत डरना।
17 वे लोग जब मरेंगे कुछ भी साथ न ले जाएंगे।
उन सुन्दर वस्तुओं में से कुछ भी न ले जा पाएंगे।
18 लोगों को चाहिए कि वे जब तक जीवित रहें परमेश्वर की स्तुति करें।
जब परमेश्वर उनके संग भलाई करे, तो लोगों को उसकी स्तुति करनी चाहिए।
19 मनुष्यों के लिए एक ऐसा समय आएगा
जब वे अपने पूर्वजों के संग मिल जायेंगे।
फिर वे कभी दिन का प्रकाश नहीं देख पाएंगे।
20 धनी पुरूष मूर्ख जनों से भिन्न नहीं होते। सभी लोग पशु समान मरते हैं।
समीक्षा
कब्र के परे जीवन
परमेश्वर के बिना जीवन, और परमेश्वर के साथ जीवन के बीच में एक बड़ा अंतर है।
- परमेश्वर के बिना जीवन
जो लोग परमेश्वर के बिना जीते हैं वे या तो धन में विश्वास करते हैं (व.6अ) या अपने आपमें (व.13अ)। इस भरोसे में वह समाजिक प्रतिष्ठा को पाने की कोशिश करते हैं। धनी शायद 'अपनी विशाल संपत्ति पर घमंड करे' (व.6ब) और दूसरों को अपनी संपत्ति से रिझाने के लिए अपने पैसे का इस्तेमाल करें (व.16)। हो सकता है कि वह अपनी भूमि का नाम अपने नाम पर रखें (व.11अ)।
उन्हें दूसरों की प्रशंसा में आनंद आता है (व.18ब) और वे 'अपने आपको धन्य' समझते हैं (व.18अ)। हो सकता है कि वे अपनी ही मृत्यु को 'खरीदने के लिए' अपनी संपत्ति का इस्तेमाल करें (व.7)। फिर भी कितना भी ज्यादा पैसा हो, काफी नहीं है (व.8)। अंत में, यह सब क्षण भर के लिए है क्योंकि धन को दूसरों के लिए छोड़ देना पड़ता है (व.10ब)। इसलिए उन लोंगो से मोहित मत होईये जो अमीर हैं और अपने लिए यश और संपत्ति को बटोरते हैं। 'वह इसे अपने साथ लेकर नहीं जा सकते हैं' (वव.16-17अ, एम.एस.जी)। इन सब से क्या लाभ होगा, यदि हम 'कब्र में सड़ेंगे'? (व.14)।
- परमेश्वर के साथ जीवन
इसके विपरीत, यदि आप परमेश्वर के साथ एक जीवन जीएँगे तो आपको प्रतिष्ठा को खोजने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। क्योंकि आपकी सफलता धन-संपत्ति को इकट्ठा करने से निर्धारित नहीं होती है, लेकिन अपने सृजनहार को जानने से और आप उसके लिए कितने मूल्यवान हैं यह जानने से निर्धारित होती है।
आपकी छुड़ौती को चुका दिया गया है (व.7ब) और आप छुड़ाए गए हैं – आपका भविष्य सुरक्षित हैः 'लेकिन मैं?' परमेश्वर मेरे प्राण को अधोलोक के वश से छुड़ा लेगा, क्योंकि वही मुझे ग्रहण करके अपनाएगें' (व.15,एम.एस.जी.)।
परमेश्वर के साथ एक जीवन का अर्थ है 'आप सर्वदा जीवित रहेंगे और कब्र की सड़न को नहीं देखेंगे' (व.9)। भजनसंहिता के लेखक कहते हैं, 'मैं क्यों डरूँ' (व.5)। डर एक स्वाभाविक मानवीय भावना है। लेकिन, परमेश्वर के साथ आप निभीकतापूर्वक अपने डरों का सामना कर सकते हैं क्योंकि आप इस जीवन के लिए और आने वाले जीवन के लिए परमेश्वर में पूरा भरोसा रखने में सक्षम हैं।
यहाँ पर पुराने नियम में मृत्यु के बाद जीवन के विषय में कुछ संकेत लिखे गए हैं। लेखक इस बात के प्रति आश्वस्त हैं कि 'परमेश्वर कब्र में से मेरे जीवन को छुड़ाएंगे; वह निश्चित ही मुझे अपने पास लें लेंगे' (व.15)। परमेश्वर के साथ जीवन- मृत्यु के साथ समाप्त नहीं होता है, किंतु अनंतता तक बना रहता है। भजनसंहिता के लेखक इस बात के प्रति निश्चिंत थे, यद्पि वह नहीं जानते थे कि यह कैसे संभव है। यीशु के पुनरुत्थान के द्वारा इसका उत्तर प्रगट हुआ।
प्रार्थना
परमेश्वर, आपके पुनरुत्थान की सामर्थ के लिए आपका धन्यवाद, जोकि अब मुझमें रहती है। आपका धन्यवाद क्योंकि आप मुझे मृत्यु के वश से छुड़ा लेंगे और मुझे अपने पास ले लेंगे।
लूका 20:27-21:4
यीशु को पकड़ने के लिये सदूकियों की चाल
27 अब देखो कुछ सदूकी उसके पास आये। (ये सदूकी वे थे जो पुनरुत्थान को नहीं मानते।) उन्होंने उससे पूछते हुए कहा, 28 “गुरु, मूसा ने हमारे लिये लिखा है कि यदि किसी का भाई मर जाये और उसके कोई बच्चा न हो और उसकी पत्नी हो तो उसका भाई उस विधवा से ब्याह करके अपने भाई के लिये, उससे संतान उत्पन्न करे। 29 अब देखो, सात भाई थे। पहले भाई ने किसी स्त्री से विवाह किया और वह बिना किसी संतान के ही मर गया। 30 फिर दूसरे भाई ने उसे ब्याहा, 31 और ऐसे ही तीसरे भाई ने। सब के साथ एक जैसा ही हुआ। वे बिना कोई संतान छोड़े मर गये। 32 बाद में वह स्त्री भी मर गयी। 33 अब बताओ, पुनरुत्थान होने पर वह किसकी पत्नी होगी क्योंकि उससे तो सातों ने ही ब्याह किया था?”
34 तब यीशु ने उनसे कहा, “इस युग के लोग ब्याह करते हैं और ब्याह करके विदा होते हैं। 35 किन्तु वे लोग जो उस युग के किसी भाग के योग्य और मरे हुओं में से जी उठने के लिए ठहराये गये हैं, वे न तो ब्याह करेंगे और न ही ब्याह करके विदा किये जायेंगे। 36 और वे फिर कभी मरेंगे भी नहीं, क्योंकि वे स्वर्गदूतों के समान हैं, वे परमेश्वर की संतान हैं क्योंकि वे पुनरुत्थान के पुत्र हैं। 37 किन्तु मूसा तक ने झाड़ी से सम्बन्धित अनुच्छेद में दिखाया है कि मरे हुए जिलाए गये हैं, जबकि उसने कहा था प्रभु, ‘इब्राहीम का परमेश्वर है, इसहाक का परमेश्वर है और याकूब का परमेश्वर है।’ 38 वह मरे हुओं का नहीं, बल्कि जीवितों का परमेश्वर है। वे सभी लोग जो उसके हैं जीवित हैं।”
39 कुछ यहूदी धर्मशास्त्रियों ने कहा, “गुरु, अच्छा कहा।” 40 क्योंकि फिर उससे कोई और प्रश्न पूछने का साहस नहीं कर सका।
क्या मसीह दाऊद का पुत्र या दाऊद का प्रभु है?
41 यीशु ने उनसे कहा, “वे कहते हैं कि मसीह दाऊद का पुत्र है। यह कैसे हो सकता है? 42 क्योंकि भजन संहिता की पुस्तक में दाऊद स्वयं कहता है,
‘प्रभु परमेश्वर ने मेरे प्रभु से कहा:
मेरे दाहिने हाथ बैठ,
43 जब तक कि मैं तेरे विरोधियों को तेरे पैर रखने की चौकी न बना दूँ।’
44 इस प्रकार जब दाऊद मसीह को ‘प्रभु’ कहता है तो मसीह दाऊद का पुत्र कैसे हो सकता है?”
यहूदी धर्मशास्त्रियों के विरोध में यीशु की चेतावनी
45 सभी लोगों के सुनते उसने अपने अनुयायिओं से कहा, 46 “यहूदी धर्मशास्त्रियों से सावधान रहो। वे लम्बे चोगे पहन कर यहाँ-वहाँ घूमना चाहते हैं, हाट-बाजारों में वे आदर के साथ स्वागत-सत्कार पाना चाहते हैं। और यहूदी आराधनालयों में उन्हें सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण आसन की लालसा रहती है। दावतों में वे आदर-पूर्ण स्थान चाहते हैं। 47 वे विधवाओं के घर-बार लूट लेते हैं। दिखावे के लिये वे लम्बी-लम्बी प्रार्थनाएँ करते हैं। इन लोगों को कठिन से कठिन दण्ड भुगतना होगा।”
सच्चा दान
21यीशु ने आँखें उठा कर देखा कि धनी लोग दान पात्र में अपनी अपनी भेंट डाल रहे हैं। 2 तभी उसने एक गरीब विधवा को उसमें ताँबे के दो छोटे सिक्के डालते हुए देखा। 3 उसने कहा, “मैं तुमसे सत्य कहता हूँ कि दूसरे सभी लोगों से इस गरीब विधवा ने अधिक दान दिया है। 4 यह मैं इसलिये कहता हूँ क्योंकि इन सब ही लोगों ने अपने उस धन में से जिसकी उन्हें आवश्यकता नहीं थी, दान दिया था किन्तु उसने गरीब होते हुए भी जीवित रहने के लिए जो कुछ उसके पास था, सब कुछ दे डाला।”
समीक्षा
अनंत भुजाएँ
जब हम पुनर्रुत्थान और मृत्यु के बाद जीवन के विषय में सोचना शुरु करते हैं, तब यह कल्पना करना मुश्किल है कि यह कैसा होगा। लोग किस तरह से दिखाई देंगे? आपके पास किस प्रकार का शरीर होगा? आप एक दूसरे से कैसे संबंध रखेंगे?
कभी –कभी लोग इस तरह के प्रश्नों को पूछकर सुझाव देते हैं कि पुनरुत्थान का विचार काल्पनिक या हास्यास्पद बात है। सदुकी एक 'समूह से जुड़े हुए हैं जो पुनरुत्थान कि किसी भी संभावना को नकारते हैं' (20:27, एम.एस.जी.)। वे यीशु के पास यह प्रश्न लेकर आए कि एक महिला जिसके सात पति थे, ठट्ठा उड़ाते हुए पूछते हैं कि कैसे उन सभी का पुनरुत्थान होगा।
यीशु ने यह समझाते हुए उत्तर दिया कि उनका प्रश्न गलत था क्योंकि वे इस विश्व की मानसिकता के साथ काम कर रहे थे। पुनरुत्थान हमारे सभी मानवीय संबंधो को बदल देगा और परिवार के वंश को बढ़ाने के लिए विवाह की आवश्यकता को हटा दिया जाएगा (वव.34-36)।
यीशु प्रश्न का उत्तर देते हैं, लेकिन फिर असली मामलें को संबोधित करने लगते हैं। सदुकी पुराने नियम में पुनरुत्थान के विषय में संकेतो के द्वारा बुरा मान गए क्योंकि उन्होंने बाईबल की पहली पाँच किताबों पर अत्यधिक जोर दिया था.
यीशु उन्हें आगे लेकर जाते हैं, उनके कार्यक्षेत्र में, इन किताबों में से एक में से वचन दोहराते हुएः'मूसा ने दिखाया कि मरे हुए जी उठते हैं क्योंकि वह परमेश्वर को 'अब्राहम का परमेश्वर, और इसहाक का परमेश्वर, और याकूब का परमेश्वर कहते हैं।' वह मरे हुओं के परमेश्वर नहीं हैं, लेकिन जीवितों के परमेश्वर हैं, क्योंकि उसके लिए हम सभी जीते हैं (वव.37-38)।
यीशु पूरी तरह से स्पष्ट हैं कि वह ना केवल अपने पुनरुत्थान में विश्वास करते हैं, लेकिन एक बहुत ही व्यापक 'मरे हुओं में से जी उठने में' भी विश्वास करते हैं (व.35)। जो जी उठे 'अब वह नहीं मरेंगे'; क्योंकि वे स्वर्गदूत के समान हैं। वे परमेश्वर की संतान हैं, क्योंकि वह पुनरुत्थान की संतान हैं (व.36)।
निश्चित ही, यह सब यीशु पर आधारित है कि वह अपने विषय में क्या कहते हैं कि वह कौन हैं। यीशु बताते हैं कि वह ना केवल दाऊद के पुत्र हैं, वह दाऊद के प्रभु हैं (वव.41-44)। यदि यीशु प्रभु हैं, तो आप उनके आश्वासन में निश्चिंत हो सकते हैं कि 'मरे हुए जी उठते हैं' (व.37)।
यदि आप सच में पुनरुत्थान में विश्वास करते हैं तो यह जीवन में हर वस्तु के प्रति आपके व्यवहार को बदलता है, आपकी संपत्ति को भी। विधवा की तरह (21:1-4) आप उदारतापूर्वक देने के लिए चुनौती को पाते हैं, अपनी धन-संपत्ति को हल्के से पकड़ने के लिए और आखिरकार, इस जीवन में जो कुछ आपके पास है उसे छोड़ देने के लिए चुनौती पाते हैं।
इसके अतिरिक्त, इस जीवन के प्रति आपका दृष्टिकोण पूरी तरह से बदल जाता है। मृत्यु की दुखद घटना के सामने एक वास्तविक आशा है। यह जीवन केवल शुरुवात है।
प्रार्थना
परमेश्वर, आपका बहुत बहुत धन्यवाद मेरे लिए जान देने के लिए और इस अद्भुत आशा के लिए धन्यवाद जो आपके पुनरुत्थान के द्वारा मेरे पास है। आपका धन्यवाद क्योंकि वही सामर्थ जिसने यीशु को मरे हुओं मे से जीवित किया, वही सामर्थ हमें भी जीवित करेगी।
व्यवस्था विवरण 33:1-34:12
मूसा इस्राएल के लोगों को आशीर्वाद देता है
33मरने के पहले परमेश्वर के व्यक्ति मूसा ने इस्राएल के लोगों को यह आशीर्वाद दिया। 2 मूसा ने कहा:
“यहोवा सीनै से आया,
यहोवा सेईर पर प्रातःकालीन प्रकाश सा था।
वह पारान पर्वत से ज्योतित प्रकाश—सम था।
यहोवा दस सहस्त्र पवित्र लोगों (स्वर्गदूतों) के साथ आया।
उसकी दांयी ओर बलिष्ठ सैनिक थे।
3 हाँ, यहोवा प्रेम करता है लोगों से
सभी पवित्र जन उसके हाथों में हैं और चलते हैं
वह उसके पदचिन्हों पर हर एक व्यक्ति स्वीकारता उपदेश उसका!
4 मूसा ने दिये नियम हमें वे—जो हैं
याकूब के सभी लोगों के।
5 यशूरुन ने राजा पाया,
जब लोग और प्रमुख इकट्ठे थे।
यहोवा ही उसका राजा था!
रूबेन को आशीर्वाद
6 “रूबेन जीवित रहे, न मरे वह।
उसके परिवार समूह में जन अनेक हों!”
यहूदा को आशीर्वाद
7 मूसा ने यहूदा के परिवार समूह के लिए ये बातें कहीं
“यहोवा, सुने यहूदा के प्रमुख कि जब वह मांगे सहायता लाए उसे
अपने जनों में शक्तिशाली बनाए उसे,
करे सहायता उसकी शत्रु को हराने मे!”
लेवी को आशीर्वाद
8 मूसा ने लेवी के बारे में कहाः
“तेरा अनुयायी सच्चा लेवी धारण करता ऊरीम—तुम्मीम,
मस्सा पर तूने लेवी की परीक्षा की,
तेरा विशेष व्यक्ति रखता उन्हें।
लड़ा तू था उसके लिये मरीबा के जलाशयों पर।
9 लेवी ने बताया निज, माता—पिता के विषय में:
मैं न करता उनकी परवाह,
स्वीकार न किया उसने अपने भाई को,
या जाना ही अपने बच्चों को;
लेवीवंशियों ने पाला आदेश तेरा,
और निभायी वाचा तुझसे जो।
10 वे सिखायेंगे याकूब को नियम तेरे।
और इस्राएल को व्यवस्था जो तेरे।
वे रखेंगे सुगन्धि सम्मुख तेरे सारी होमबलि वेदी के ऊपर,
11 “यहोवा, लेवीवंशियों का जो कुछ हो,
आशीर्वाद दे उसे,
जो कुछ करे वह स्वीकार करे उसको।
नष्ट करे उसको जो आक्रमण करे उन पर।”
बिन्यामीन को आशीर्वाद
12 बिन्यामीन के विषय में मूसा ने कहाः
“यहोवा का प्यारा उसके साथ
सुरक्षित होगा।
यहोवा अपने प्रिय की रक्षा करता सारे दिन,
और बिन्यामीन की भूमि पर यहोवा रहता।”
यूसुफ को आशीर्वाद
13 मूसा ने यूसुफ के बारे में कहा:
“यहोवा दे आशीर्वाद उसके देश को स्वर्ग की
उत्तम वस्तुऐं जहाँ हों;
वह सम्पत्ति वहाँ हो जो धरती कर रही प्रतीक्षा।
14 सूरज का दिया उत्तम फल उसका हो
महीनों की उत्तम फ़सने उसकी हों।
15 प्राचीन पर्वतों की उतलेंम उपज उसकी हो—
शाश्वत पहाड़ियों की उत्तम चीज़ें भी।
16 आशीर्वाद सहित धरती की उत्तम भेंटें उसकी हों।
जलती झाड़ी का यहोवा उसका पक्षधर हो
यूसुफ के सिर पर वरदानों की वर्षा हो
यूसुफ के सिर के ऊपर भी जो सर्वाधिक महत्वपूर्ण उसके भ्राताओं में।
17 यूसुफ के झुण्ड का प्रथम साँड गौरव पाएगा।
इसकी सींगें सांड सी लम्बी होंगी।
यूसुफ का झुण्ड भगाएगा लोगों को।
पृथ्वी की अन्तिम छोर जहाँ तक जाती है।
हाँ, वे हैं दस सहस्त्र एप्रैम से
हाँ, वे हैं एक सहस्त्र मनश्शे से।”
जबूलून को आशीर्वाद
18 जबूलून के बारे में मूसा ने कहाः
“जबूलून, खुश होओ, जाओ जब बाहर,
और इस्साकार रहे तुम्हारे डेरों में।
19 वे लोगों का आहवान करेंगे अपने गिरि पर,
वहाँ करेंगे भेंट सभी सच्ची बलि क्यों?
क्योंकि वे लोग सागर से निकालते हैं धन
और पाएंगे बालू में छिपा हुआ जो धन है।”
गाद को आशीर्वाद
20 मूसा ने गाद के बारे में कहा:
“स्तुति करो परमेश्वर की जो बढ़ाता है गाद को!
गाद लेटा करता सिंह सदृश,
वह उखाड़ता भुजा, भंग करता खोपड़ियाँ।
21 अपने लिए चुनता है
वह सबसे प्रमुख हिस्सा और आता
वह लोगों के प्रमुखों के संग करता
वह इस्राएल के संग जो यहोवा की इच्छा होती है
और यहोवा के लिए न्याय करता है।”
दान को आशीर्वाद
22 दान के बारे में मूसा ने कहा:
“दान सिंह का बच्चा है जो बाशान में उछला करता।”
नप्ताली को आशीर्वाद
23 नप्ताली के बारे में मूसा ने कहाः
“नप्ताली, तुम लोगे बहुत सी अच्छी चीज़ों को,
यहोवा का आशीर्वाद तुम्हें पूरा है,
ले लो पश्चिम और दक्षिण प्रदेश।”
आशेर को आशीर्वाद
24 मूसा ने आशेर के बारे में कहाः
“आशेर को पुत्रों में सर्वाधिक है आशीर्वाद,
उसे निज भ्राताओं में प्रिय होने दो
और उसे अपने चरण तेल से धोने दो।
25 तुम्हारी अर्गलाएँ लोहे—काँसे होंगे शक्ति
तुम्हारी आजीवन रहेगी बनी।”
मूसा परमेश्वर की स्तुति करता है
26 “यशूरुन, परमेश्वर सम नहीं
दूसरा कोई परमेश्वर अपने गौरव मे चलता है चढ़ बादल पर,
आसमान से होकर आता करने मदद तुम्हें।
27 शाश्वत परमेश्वर तुम्हारी शरण सुरक्षित है।
और तुम्हारे नीचे शाश्वत भुजाऐं हैं
परमेश्वर जो बल से दूर हटाता शत्रु तुम्हारे,
कहता है वह ‘नष्ट करो शत्रु को!’
28 ऐसे इस्राएल रक्षित रहता है जो केवल
याकूब का जलस्रोत धरती में सुरिक्षत है।
अन्न और दाखमधु की सुभूमि में हाँ
उसका स्वर्ग वहाँ हिम—बिन्दु भेजता।
29 इस्राएलियो, तुम आशीषित हो यहोवा रक्षित राष्ट्र तुम,
न कोई तुम सम अन्य राष्ट्र।
यहोवा है तलवार विजय
तुम्हारी करने वाली।
तेरे शत्रु सभी तुझसे डरेगें,
और तुम रौंद दोगे उनके झूठे देवों की जगहों को।”
मूसा की मृत्यु
34मूसा मोआब के निचले प्रदेश से नबो पर्वत पर गया जो यरीहो के पार पिसगा की चोटी पर था। यहोवा ने उसे गिलाद से दान तक का सारा प्रदेश दिखलाया। 2 यहोवा ने उसे सारा नप्ताली, जो एप्रैम और मनश्शे का था, दिखाया। उसने भूमध्य सागर तक यहूदा के प्रदेश को दिखाया। 3 यहोवा ने मूसा को खजूर के पेड़ों के नगर सोअर से यरीहो तक फैली घाटी और नेगेव दिखाया। 4 यहोवा ने मूसा से कहा, “यह वह देश है जिसे मैंने इब्राहिम, इसहाक, और याकूब को वचन दिया था कि, ‘मैं इस देश को तुम्हारे वंशजों को दूँगा।’ मैंने तुम्हें इस देश को दिखाया। किन्तु तुम वहाँ जा नहीं सकते।”
5 तब यहोवा का सेवक मूसा मोआब देश में वहीं मरा। यहोवा ने मूसा से कहा था कि ऐसा होगा। 6 यहोवा ने बेतपोर के पार मोआब प्रदेश की घाटी में मूसा को दफनाया। किन्तु आज भी कोई नहीं जानता कि मूसा की कब्र कहाँ है। 7 मूसा जब मरा वह एक सौ बीस वर्ष का था। उसकी आँखें कमजोर नहीं थीं। वह तब भी बलवान था। 8 इस्राएल के लोग मूसा के लिए मोआब के निचले प्रदेश में तीस दिन तक रोते चिल्लाते रहे। यह शोक मनाने का पूरा समय था।
यहोशू मूसा का स्थान लेता है
9 तब नून का पुत्र यहोशू बुद्धिमानी की आत्मा से भरपूर था क्योंकि मूसा ने उस पर अपना हाथ रख दिया था। इस्राएल के लोगों ने यहोशू की बात मानी। उन्होंने वैसा ही किया जैसा यहोवा ने मूसा को आदेश दिया था।
10 किन्तु उस समय के बाद, मूसा की तरह कोई नबी नहीं हुआ। यहोवा परमेश्वर मूसा को प्रत्यक्ष जानता था। 11 किसी दूसरे नबी ने वे सारे चमत्कार और आश्चर्य नहीं दिखाए जिन्हें दिखाने के लिये यहोवा परमेश्वर ने मूसा को मिस्र में भेजा था। वे चमत्कार और आश्चर्य, फिरौन, उसके सभी सेवकों और मिस्र के सभी लोगों को दिखाए गए थे। 12 किसी दूसरे नबी ने कभी उतने शक्तिशाली और आश्चर्यजनक चमत्कार नहीं किए जो मूसा ने किए और जिन्हें इस्राएल के सभी लोगों ने देखा।
समीक्षा
अनंत भुजाएँ
यदि कभी किसी व्यक्ति का अंत अच्छा हुआ था, तो वह था मूसाः 'जब मूसा मरे तब उनकी आयु 120 वर्ष थी। उनकी नजरें तेज थी; वह अब भी अपने कदमो में उमंग के साथ चलते थे' (34:7, एम.एस.जी.)। उन्होंने परमेश्वर को 'आमने-सामने' जानने का एक जीवन जीया था (व.10)।
परमेश्वर ने महान रूप से मूसा का इस्तेमाल किया थाः'और उसने सारे इस्रालियों की दृष्टि में बलवंत हाथ और बड़े भय के काम कर दिखाए' (व.12)।
जीवन में सबसे बड़ी चुनौती है अच्छी रीति से समाप्त करना। अच्छी तरह से समाप्त करने का भाग है, उत्तराधिकारी की योजना बनाना।
मूसा ने अच्छा समापन किया। उन्होंने योजना बनाई कि यहोशू उनका उत्तराधिकारी ठहरेगाः 'और नून का पुत्र यहोशू बुद्धिमानी की आत्मा से परिपूर्ण था, क्योंकि मूसा ने अपने हाथ उस पर रखे थे; और इस्राएली उस आज्ञा के अनुसार जो यहोवा ने मूसा को दी थी उसको मानते रहे' (व.9)। यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक परमेश्वर के अभिषेक के स्थानांतरण के कुछ उदाहरणों में से एक है।
मरने से पहले, मूसा ने कुछ अद्भुत शब्दों के साथ सभी विभिन्न गोत्रों को आशीष दी। उदाहरण के लिए, बिन्यामीन के विषय में उन्होंने कहा, 'यहोवा का वह प्रिय जन, उसके पास निडर वास करेगा; और वह दिन भर उस पर छाया करेगा, और वह उसके कंधों के बीच रहा करता है' (33:12)।
जैसे ही वह अंत के पास आते हैं, हर गोत्र को आशीष देकर, वह कहते हैं, 'हे यशूरुन, ईश्वर के तुल्य और कोई नहीं है, वह तेरी सहायता करने को आकाश पर, और अपना प्रताप दिखाता हुआ आकाशमण्डल पर सवार होकर चलता है' (वव.26-27अ)।
शायद मूसा ने यह बात समझ ली थी कि मृत्यु अंत नहीं थी। उन्होंने अनंत परमेश्वर में भरोसा किया और वह जानते थे कि उनकी भुजाएँ अनंत थी।
यह पूरी तरह से मृत्यु के दर्द और दुख को नहीं हटाता है। जब मूसा मरे तब लोग रोए और विलाप किया (34:8अ)। यह स्वाभाविक और महत्वपूर्ण है कि हम शोक करें और महत्वपूर्ण है कि हम ऐसा करें। आपको भावनाएं परमेश्वर ने दी हैं और इसे दबाना नहीं चाहिए।
किंतु, बिना आशा के शोक और विश्वासी के शोक के बीच एक अंतर है, विश्वासी की पुनरुत्थान में आशा है (1 थिस्सलुनिकियों 4:13)।
मैं बहुत से दफनाने की विधी और स्मृति दिन की सभाओं में सालों से गया हूँ और अक्सर आरंभिक वचन ये महान, पुन: आश्वासन देने वाले, शांति देने वाले और शक्तिशाली शब्द होते हैं:'अनादि परमेश्वर तेरा गृहधाम है, और नीचे सनातन भुजाएँ हैं' (व्यवस्थाविवरण 33:27अ)।
प्रार्थना
परमेश्वर, ऐसा कीजिए कि मैं मूसा की तरह आपके साथ एक नजदीकी संबंध में जी सकूं और जान सकूं कि अनंत परमेश्वर मेरा शरणस्थान हैं और नीचे सनातन भुजाएँ हैं।
पिप्पा भी कहते है
व्यवस्थाविवरण 33:26-27अ
'हे यशूरुन, ईश्वर के तुल्य और कोई नहीं है, वह तेरी सहायता करने को आकाश पर, और अपना प्रताप दिखाता हुआ आकाशमण्डल पर सवार होकर चलता है। अनादि परमेश्वर तेरा गृहधाम है, और नीचे सनातन भुजाएँ हैं ' (वव.33:26-27अ)।
जब हम कठिन समय का सामना करते हैं तब शांति के वचन।

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संदर्भ
नोट्स:
जहाँ पर कुछ बताया न गया हो, उन वचनों को पवित्र बाइबल, न्यू इंटरनैशनल संस्करण एन्ग्लिसाइड से लिया गया है, कॉपीराइट © 1979, 1984, 2011 बिबलिका, पहले इंटरनैशनल बाइबल सोसाइटी, हूडर और स्टोगन पब्लिशर की अनुमति से प्रयोग किया गया, एक हॅचेट यूके कंपनी सभी अधिकार सुरक्षित। ‘एनआईवी’, बिबलिका यू के का पंजीकृत ट्रेडमार्क संख्या 1448790 है।
जिन वचनों को (एएमपी, AMP) से चिन्हित किया गया है उन्हें एम्प्लीफाइड® बाइबल से लिया गया है. कॉपीराइट © 1954, 1958, 1962, 1964, 1965, 1987 लॉकमैन फाउंडेशन द्वारा प्राप्त अनुमति से उपयोग किया गया है। (www.Lockman.org)
जिन वचनों को (एमएसजी MSG) से चिन्हित किया गया है उन्हें मैसेज से लिया गया है। कॉपीराइट © 1993, 1994, 1995, 1996, 2000, 2001, 2002. जिनका प्रयोग एनएवीप्रेस पब्लिशिंग ग्रुप की अनुमति से किया गया है।