दिन 19

आपका सबसे मूल्यवान अधिकार

बुद्धि भजन संहिता 11:1-7
नए करार मत्ती 13:36-58
जूना करार उत्पत्ति 38:1-39:23

परिचय

राज उन छ: बच्चों में से एक था, जो एक संपन्न ब्राह्मण परिवार में जन्में थे — भारत की जाति व्यवस्था में उच्चतम जाति।

23 वर्ष की उम्र में राज ने यीशु का दर्शन पाया। उसके परिवार ने उसे संपत्ति से वंचित कर दिया। उन्होंने उसे अलग कर दिया। उन्होंने यहाँ तक सोच लिया था कि वह मर चुका है। उन्होंने उसके लिए अंतिम संस्कार का भी आयोजन कर लिया था। न उसके माता-पिता ने और न ही उसके भाइयों और बहनों ने फिर कभी उससे बात की।

कई सप्ताह तक वह बैंगलौर की सड़कों पर घूमता रहा। उसके पास खाने के लिए कुछ नहीं था। वह दिन भर चलता रहा और रात में एक बगीचे में जाकर सो गया।

उसने नए जीवन की शुरुवात की। उसने अपने विश्वास के बारे में कहना आरंभ कर दिया। उसके द्वारा, हज़ारों लोगों ने यीशु का दर्शन पाया। वह 30 लाख लोगों की प्रार्थना - आंदोलन का नेतृत्व करता रहा। हम गौरानवित हुए, क्योंकि उसके बाद, वे कुछ वर्ष तक भारत में ‘अल्फा’ के राष्ट्रीय संचालक रहे। उन्होंने हाल ही में हम से कहा कि उनका जीवन आशीषित रहा और परमेश्वर के पास उनकी हानि की पूर्ति से भी बढ़कर है। हालाँकि उन्होंने ‘सब कुछ’ छोड़ दिया था, फिर भी उन्होंने यीशु में ‘बहूमूल्य... मोती पाई’ (मत्ती 13:45-46)।

‘संबंध’ आपकी सबसे मूल्यवान संपत्ति है। एक संबंध ऐसा भी है जिसके लिए आप सृजे गए हैं। यह सबसे मूल्यवान मोती है। इसे प्राप्त करने के लिए ‘सब कुछ’ बेचना पड़े तौभी कम है।

बुद्धि

भजन संहिता 11:1-7

संगित निर्देशक के लिये दाऊद का पद।

11मैं यहोवा पर भरोसा करता हूँ।
 फिर तू मुझसे क्यों कहता है कि मैं भाग कर कहीं जाऊँ?
 तू कहता है मुझसे कि, “पक्षी की भाँति अपने पहाड़ पर उड़ जा!”

2 दुष्ट जन शिकारी के समान हैं। वे अन्धकार में छिपते हैं।
 वे धनुष की डोर को पीछे खींचते हैं।
 वे अपने बाणों को साधते हैं और वे अच्छे, नेक लोगों के ह्रदय में सीधे बाण छोड़ते हैं।
3 क्या होगा यदि वे समाज की नींव को उखाड़ फेंके?
 फिर तो ये अच्छे लोग कर ही क्या पायेंगे?

4 यहोवा अपने विशाल पवित्र मन्दिर में विराजा है।
 यहोवा स्वर्ग में अपने सिंहासन पर बैठता है।
 यहोवा सब कुछ देखता है, जो भी घटित होता है।
 यहोवा की आँखें लोगों की सज्जनता व दुर्जनता को परखने में लगी रहती हैं।
5 यहोवा भले व बुरे लोगों को परखता है,
 और वह उन लोगों से घृणा करता है, जो हिसा से प्रीति रखते हैं।
6 वह गर्म कोयले और जलती हुई गन्धक को वर्षा की भाँति उन बुरे लोगों पर गिरायेगा।
 उन बुरे लोगों के भाग में बस झुलसाती पवन आयेगी
7 किन्तु यहोवा, तू उत्तम है। तुझे उत्तम जन भाते हैं।
 उत्तम मनुष्य यहोवा के साथ रहेंगे और उसके मुख का दर्शन पायेंगे।

समीक्षा

परमेश्वर की घनिष्ठ उपस्थिति

अपने जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी आप परमेश्वर की घनिष्ठ उपस्थिति को अनुभव कर सकते हैं। दाऊद संकट में था। उसे सलाह दी गई कि वह भागकर दूर पहाड़ों में छिप जाए। उसने जवाब में कहा, मैं पहले ही अपने जीवन के लिए परमेश्वर की बाँहों में जा चुका हूँ। तो अब मैं डरकर क्यों भागूँ? (पद - 1 एम.एस.जी.)

भजन संहिता की पुस्तक परमेश्वर के साथ संबंधों पर ध्यान केंद्रित करते हुए समाप्त होती है। इस वायदे के साथ कि सच्चे व्यक्ति ‘उनका मुख देखेंगे’, (पद - 7) परमेश्वर की घनिष्ठ उपस्थिति का चित्रण करने के लिए दाऊद अलंकारिक भाषा का प्रयोग करते हैं।

परमेश्वर के साथ अपने संबंध के लिए उसका अनुभव और उसकी इच्छाएँ भजन संहिता को आरंभ से अंत तक कोष्ठक में रखती हैं। यहाँ कोई सुरक्षित स्थान नहीं है; जीवन में अधिक मूल्यवान कुछ भी नहीं है और ऐसा कुछ भी नहीं है जो यह संसार देता है जिसकी तुलना परमेश्वर की घनिष्ठ उपस्थिति के साथ — यानि उनके मुख को निहारने के साथ कर सकें।

प्रार्थना

प्रभु मैं आज आप में शरण लेना चाहता हूँ। मैं आपके मुख को देखना चाहता हूँ। मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि आप अपनी घनिष्ठ उपस्थिति से मेरी गहरी लालसा को तृप्त कर दें।

नए करार

मत्ती 13:36-58

गेहूँ और खरपतवार के दृष्टान्त की व्याख्या

36 फिर यीशु उस भीड़ को विदा करके घर चला आया। तब उसके शिष्यों ने आकर उससे कहा, “खेत के खरपतवार के दृष्टान्त का अर्थ हमें समझा।”

37 उत्तर में यीशु बोला, “जिसने उत्तम बीज बोया था, वह है मनुष्य का पुत्र। 38 और खेत यह संसार है। अच्छे बीज का अर्थ है, स्वर्ग के राज्य के लोग। खरपतवार का अर्थ है, वे व्यक्ति जो शैतान की संतान हैं। 39 वह शत्रु जिसने खरपतवार बीजे थे, शैतान है और कटाई का समय है, इस जगत का अंत और कटाई करने वाले हैं स्वर्गदूत।

40 “ठीक वैसे ही जैसे खरपतवार को इकट्ठा करके आग में जला दिया गया, वैसे ही सृष्टि के अंत में होगा। 41 मनुष्य का पुत्र अपने दूतों को भेजेगा और वे उसके राज्य से सभी पापियों को और उनको, जो लोगों को पाप के लिये प्रेरित करते हैं, 42 इकट्ठा करके धधकते भाड़ में झोंक देंगे जहाँ बस दाँत पीसना और रोना ही रोना होगा। 43 तब धर्मी अपने परम पिता के राज्य में सूरज की तरह चमकेंगे। जो सुन सकता है, सुन ले!

धन का भण्डार और मोती का दृष्टान्त

44 “स्वर्ग का राज्य खेत में गड़े धन जैसा है। जिसे किसी मनुष्य ने पाया और फिर उसे वहीं गाड़ दिया। वह इतना प्रसन्न हुआ कि उसने जो कुछ उसके पास था, जाकर बेच दिया और वह खेत मोल ले लिया।

45 “स्वर्ग का राज्य ऐसे व्यापारी के समान है जो अच्छे मोतियों की खोज में हो। 46 जब उसे एक अनमोल मोती मिला तो जाकर जो कुछ उसके पास था, उसने बेच डाला, और मोती मोल ले लिया।

मछली पकड़ने का जाल

47 “स्वर्ग का राज्य मछली पकड़ने के लिए झील में फेंके गए एक जाल के समान भी है। जिसमें तरह तरह की मछलियाँ पकड़ी गयीं। 48 जब वह जाल पूरा भर गया तो उसे किनारे पर खींच लिया गया। और वहाँ बैठ कर अच्छी मछलियाँ छाँट कर टोकरियों में भर ली गयीं किन्तु बेकार मछलियाँ फेंक दी गयीं। 49 सृष्टि के अन्त में ऐसा ही होगा। स्वर्गदूत आयेंगे और धर्मियों में से पापियों को छाँट कर 50 धधकते भाड़ में झोंक देंगे जहाँ बस रोना और दाँत पीसना होगा।”

51 यीशु ने अपने शिष्यों से पूछा, “तुम ये सब बातें समझते हो?”

उन्होंने उत्तर दिया, “हाँ!”

52 यीशु ने अपने शिष्यों से कहा, “देखो, इसीलिये हर धर्मशास्त्री जो परमेश्वर के राज्य को जानता है, एक ऐसे गृहस्वामी के समान है, जो अपने कठोर से नई-पुरानी वस्तुओं को बाहर निकालता है।”

यीशु का अपने देश लौटना

53 इन दृष्टान्त कथाओं को समाप्त करके वह वहाँ से चल दिया। 54 और अपने देश आ गया। फिर उसने यहूदी आराधनालयों में उपदेश देना आरम्भ कर दिया। इससे हर कोई अचरज में पड़ कर कहने लगा, “इसे ऐसी सूझबूझ और चमत्कारी शक्ति कहाँ से मिली? 55 क्या यह वही बढ़ई का बेटा नहीं है? क्या इसकी माँ का नाम मरियम नहीं है? याकूब, यूसुफ, शमौन और यहूदा इसी के तो भाई हैं न? 56 क्या इसकी सभी बहनें हमारे ही बीच नहीं हैं? तो फिर उसे यह सब कहाँ से मिला?” 57 सो उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया।

फिर यीशु ने कहा, “किसी नबी का अपने गाँव और घर को छोड़ कर, सब आदर करते हैं।” 58 सो उनके अविश्वास के कारण उसने वहाँ अधिक आश्चर्य कर्म नहीं किये।

समीक्षा

परमेश्वर के पुत्र का जन्म

कुछ लोग व्याकुलता से यीशु को खोजते हैं और उन्हें यीशु मिल जाते हैं। और मेरे जैसे लोग लगभग ठोकर खाते हुए यीशु को ढूँढ़ते हैं। लेकिन जब आपने इस ख़ज़ाने को खोज लिया, तो इसे पाने के लिए सब कुछ दे देना योग्य है।

जंगली बीज के दृष्टांत और जाल के दृष्टांत के बीच, यीशु दो छोटे दृष्टांत कहते हैं (पद - 44-46)। दोनों दृष्टांतों के बीच केवल एक ही अंतर है एक व्यक्ति सक्रीयता से खोजता है (पद - 45) और दूसरा उसके आस-पास भटकता है (पद - 44)। दोनों में, कुछ बहुत ज़्यादा मूल्यवान है। (‘खोजना’ पद - 44, ‘अच्छे मोती’ पद - 45)। दोनों परिस्थिति में सब कुछ बेचकर भी इसे हासिल करना योग्य है (पद - 44,46)।

यह वह है जहाँ सच्चा ‘आनंद’ (पद - 44) वास्तविक ‘ख़ज़ाना’ (पद - 44) और ‘अत्यधिक मूल्यवान’ (पद - 46) पाया जाता है। स्वर्ग का राज्य राजा को जानने के विषय में है। यह यीशु के विषय में है और आप उनके प्रति कैसी प्रतिक्रिया करते हैं इस विषय में है। यह वह बहुमूल्य मोती है जिसे राज ने और उसके जैसे लाखों लोगों ने खोज निकाला।

जब आप संसार की सारी बुराइयों को देखते हैं, तो क्या आप कभी अचंभित होते हैं कि परमेश्वर इन बुराइयों को एक ही बार में दूर करके मुक्त क्यों नहीं करते? जंगली बीज के दृष्टांत में परमेश्वर सेवक रोकते हैं (पद - 28-29)। न्याय होने वाला है (पद - 36-43, 47-50)।

जिन्होंने पाप किया है और सब जो बुराई करते हैं उनके अंत के विषय में यीशु सावधान करते हैं (पद - 41, 49-50)। वे कहते हैं कि परमेश्वर जंगली बीज को नष्ट कर देंगे (पद - 41 एम.एस.जी.) और ‘निकम्मी मछलियों को चुनकर कूड़े में फेंक देंगे’ (पद - 49-50 एम.एस.जी.)। वे वायदा करते हैं कि उस दिन तुम जो ‘धर्मी’ हो, (यीशु के द्वारा परमेश्वर के साथ सही बनाए गए हो’) ‘अपने पिता के राज्य में सूर्य के समान चमकोगे’ (पद - 43)। आपका चमकना परमेश्वर के साथ आपके संबंध के कारण है, और इसका अर्थ यह है कि एक दिन आप परमेश्वर के राज्य में सूर्य के समान चमकेंगे।

लेकिन फिर भी परमेश्वर सारी बुराइयों को नाश करने की अनुमति नहीं देते। वे सारे गेहूँ को खलिहान में एकत्र करना चाहते हैं। परमेश्वर जान - बूझकर देरी करते हैं, जब तक ‘जगत का अंत न हो’ (पद - 39)। जिससे ज़्यादासे ज़्यादा लोग यीशु के सुसमाचार को ग्रहण कर पाएंगे और वे बहुमूल्य अधिकार को जानेंगे।

प्रार्थना

प्रभु, मैं आपका धन्यवाद करता हूँ, कि आपके साथ घनिष्ठ संबंध ही बहुमूल्य मोती है। मुझे अपने समीप रखिये और मेरी सहायता कीजिए कि जो कुछ मुझे उस संबंध से अलग करे, उस पर मैं ध्यान न दूँ।

जूना करार

उत्पत्ति 38:1-39:23

यहूदा और तामार

38उन्हीं दिनों यहूदा ने अपने भाईयों को छोड़ दिया और हीरा नामक व्यक्ति के साथ रहने चला गया। हीरा अदुल्लाम नगर का था। 2 यहूदा एक कनानी स्त्री से वहाँ मिला और उसने उससे विवाह कर लिया। स्त्री के पिता का नाम शूआ था। 3 कनानी स्त्री ने एक पुत्र को जन्म दिया। उन्होंने उसका नाम एर रखा। 4 बाद में उसने दूसरे पुत्र को जन्म दिया। उन्होंने लड़के का नाम ओनान रखा। 5 बाद में उसे अन्य पुत्र शेला नाम का हुआ। यहूदा तीसरे बच्चे के जन्म के समय कजीब में रहता था।

6 यहूदा ने अपने पुत्र एर के लिए पत्नी के रूप में एक स्त्री को चुना। स्त्री का नाम तामार था। 7 किन्तु एर ने बहुत सी बुरी बातें की। यहोवा उससे प्रसन्न नहीं था। इसलिए यहोवा ने उसे मार डाला। 8 तब यहूदा ने एर के भाई ओनान से कहा, “जाओ और मृत भाई की पत्नी के साथ सोओ तुम उसके पति के समान बनो। अगर बच्चे होंगे तो वे तुम्हारे भाई एर के होंगे।”

9 ओनान जानता था कि इस जोड़े से पैदा बच्चे उसके नहीं होंगे। ओनान ने तामार के साथ शारीरिक सम्बन्ध किया। किन्तु उसने उसे अपना गर्भधारण करने नहीं दिया। 10 इससे यहोवा क्रोधित हुआ। इसलिए यहोवा ने ओनान को भी मार डाला। 11 तब यहूदा ने अपनी पुत्रबधू तामार से कहा, “अपने पिता के घर लौट जाओ। वहीं रहो और तब तक विवाह न करो जब तक मेरा छोटा पुत्र शेला बड़ा न हो जाए।” यहूदा को डर था कि शेला भी अपने भाईयों की तरह मार डाला जाएगा। तामार अपने पिता के घर लौट गई।

12 बाद में शुआ की पुत्री यहूदा की पत्नी मर गई। यहूदा अपने शोक के समय के बाद अदुल्लाम के अपने मित्र हीरा के साथ तिम्नाथ गया। यहूदा अपनी भेड़ों का ऊन काटने तिम्नाथ गया। 13 तामार को यह मालुम हुआ कि उसके ससुर यहूदा अपनी भेड़ों का ऊन काटने तिम्नाथ जा रहा है। 14 तामार सदा ऐसे वस्त्र पहनती थी जिससे मालूम हो कि वह विधवा है। इसलिए उसने कुछ अन्य वस्त्र पहने और मुँह को पर्दे में ढक लिया। तब वह तिम्नाथ नगर के पास एनैम को जाने वाली सड़क के किनारे बैठ गई। तामार जानती थी कि यहूदा का छोटा पुत्र शेला अब बड़ा हो गया है। लेकिन यहूदा उससे उसके विवाह की कोई योजना नहीं बना रहा था।

15 यहूदा ने उसी सड़क से यात्रा की। उसने उसे देखा, किन्तु सोचा कि वह वेश्या है। (उसका मुख वेश्या की तरह ढका हुआ था।) 16 इसलिए यहूदा उसके पास गया और बोला, “मुझे अपने साथ शारीरिक सम्बन्ध करने दो।” (यहूदा नहीं जानता था कि वह उसकी पुत्र वधू तामार है।)

तामार बोली, “तुम मुझे कितना दोगे?”

17 यहूदा ने उत्तर दिया, “मैं अपनी रेवड़ से तुम्हें एक नयी बकरी भेजूँगा।”

उसने उत्तर दिया, “मैं इसे स्वीकार करती हूँ किन्तु पहले तुम मुझे कुछ रखने को दो जब तक तुम बकरी नहीं भेजते।”

18 यहूदा ने पूछा, “मैं बकरी भेजूँगा इसके प्रमाण के लिए तुम मुझ से क्या लेना चाहोगी?”

तामार ने उत्तर दिया, “मुझे विशेष मुहर और इसकी रस्सी, जो तुम अपने पत्रों के लिए प्रयोग करते हो, दो और मुझे अपने टहलने की छड़ी दो।” यहूदा ने ये चीजें उसे दे दीं। तब यहूदा और तामार ने शारीरिक सम्बन्ध किया और तामार गर्भवती हो गई। 19 तामार घर गई और मुख को ढकने वाले पर्दे को हटा दिया। तब उसने फिर अपने को विधवा बताने वाले विशेष वस्त्र पहन लिए।

20 यहूदा ने अपने मित्र हीरा को तामार के घर उसको वचन दी हुई बकरी देने के लिए भेजा। यहूदा ने हीरा से विशेष मुहर तथा टहलने की छड़ी भी उससे लेने के लिए कहा। किन्तु हीरा उसका पता न लगा सका। 21 हीरा ने एनैम नगर के कुछ लोगों से पूछा, “सड़क के किनारे जो वेश्या थी वह कहाँ है?”

लोगों ने कहा, “यहाँ कभी कोई वेश्या नहीं थी।”

22 इसलिए यहूदा का मित्र यहूदा के पास लौट गया और उससे कहा, “मैं उस स्त्री का पता नहीं लगा सका। जो लोग उस स्थान पर रहते हैं उन्होंने बताया कि वहाँ कभी कोई वेश्या नहीं थी।”

23 इसलिए यहूदा ने कहा, “उसे वे चीजें रखने दो। मैं नहीं चाहता कि लोग हम पर हँसे। मैंने उसे बकरी देनी चाही, किन्तु हम उसका पता नहीं लगा सके यही पर्याप्त है।”

तामार गर्भवती है

24 लगभग तीन महीने बाद किसी ने यहूदा से कहा, “तुम्हारी पुत्रवधु तामार ने वेश्या की तरह पाप किया है और अब वह गर्भवती है।”

तब यहूदा ने कहा, “उसे बाहर निकालो और मार डालो। उसके शरीर को जला दो।”

25 उसके आदमी तामार को मारने गए। किन्तु तामार ने अपने ससुर के पास सन्देश भेजा। तामार ने कहा, “जिस पुरुष ने मुझे गर्भवती किया है उसी की ये चीजें हैं। तब उसने उसे विशेष मुहर बाजूबन्द और टहलने की छड़ी दिखाई। इन चीजों को देखो। ये किसकी है? यह किस की विशेष मुहर, बाजूबन्द और रस्सी हैं? किसकी यह टहलने की छड़ी है?”

26 यहूदा ने उन चीजों को पहचाना और कहा, “यह ठीक कहती है। मैं गलती पर था। मैंने अपने वचन के अनुसार अपने पुत्र शेला को इसे नहीं दिया।” और यहूदा उसके साथ फिर नहीं सोया।

27 तामार के बच्चा देने का समय आया और उन्होंने देखा कि वह जुड़वे बच्चों को जन्म देगी। 28 जिस समय वह जन्म दे रही थी एक बच्चे ने बाहर हाथ निकाला। धाय ने हाथ पर लाल धागा बाँधा और कहा, “यह बच्चा पहले पैदा हुआ।” 29 लेकिन उस बच्चे ने अपना हाथ वापस भीतर खींच लिया। तब दूसरा बच्चा पहले पैदा हुआ। तब धाय ने कहा, “तुम ही पहले बाहर निकलने में समर्थ हुए।” इसलिए उन्होंने उसका नाम पेरेस रखा। (इस नाम का अर्थ “खुल पड़ना” या “फट पड़ना” है।) 30 इसके बाद दूसरा बच्चा उत्पन्न हुआ। यह बच्चा के हाथ पर लाल धागा था। उन्होंने उसका नाम जेरह रखा।

यूसुफ मिस्री पोतीपर को बेचा गया

39व्यापारी जिसने यूसुफ को खरीदा वह उसे मिस्र ले गए। उन्होंने फ़िरौन के अंगरक्षक के नायक के हाथ उसे बेचा। 2 किन्तु यहोवा ने यूसुफ की सहायता की। यूसुफ एक सफल व्यक्ति बन गया। यूसुफ अपने मिस्री स्वामी पोतीपर के घर में रहा।

3 पोतीपर ने देखा कि यहोवा यूसुफ के साथ है। पोतीपर ने यह भी देखा कि यहोवा जो कुछ यूसुफ करता है, उसमें उसे सफल बनाने में सहायक है। 4 इसलिए पोतीपर यूसुफ को पाकर बहुत प्रसन्न था। पोतीपर ने उसे अपने लिए काम करने तथा घर के प्रबन्ध में सहायता करने में लगाया। पोतीपर की अपनी हर एक चीज़ का यूसुफ अधिकारी था। 5 तब यूसुफ घर का अधिकारी बना दिया गया तब यहोवा ने उस घर और पोतीपर की हर एक चीज़ को आशीर्वाद दिया। यहोवा ने यह यूसुफ के कारण किया और यहोवा ने पोतीपर के खेतों में उगने वाली हर चीज़ को आशीर्वाद दिया। 6 इसलिए पोतीपर ने घर की हर चीज़ की जिम्मेदारी यूसुफ को दी। पोतीपर किसी चीज़ की चिन्ता नहीं करता था वह जो भोजन करता था एक मात्र उसकी उसे चिन्ता थी।

यूसुफ पोतीपर की पत्नी को मना करता है

यूसुफ बहुत सुन्दर और सुरूप था। 7 कुछ समय बाद यूसुफ के मालिक की पत्नी यूसुफ से प्रेम करने लगी। एक दिन उसने कहा, “मेरे साथ सोओ।”

8 किन्तु यूसुफ ने मना कर दिया। उसने कहा, “मेरा मालिक घर की अपनी हर चीज़ के लिए मुझ पर विश्वास करता है। उसने यहाँ की हर एक चीज़ की ज़िम्मेदारी मुझे दी है। 9 मेरे मालिक ने अपने घर में मुझे लगभग अपने बराबर मान दिया है। किन्तु मुझे उसकी पत्नी के साथ नहीं सोना चाहिए। यह अनुचित है। यह परमेश्वर के विरुद्ध पाप है।”

10 वह स्त्री हर दिन यूसुफ से बात करती थी किन्तु यूसुफ ने उसके साथ सोने से मना कर दिया। 11 एक दिन यूसुफ अपना काम करने घर में गया। उस समय वह घर में अकेला व्यक्ति था। 12 उसके मालिक की पत्नी ने उसका अंगरखा पकड़ा लिया और उससे कहा, “आओ और मेरे साथ सोओ।” किन्तु यूसुफ घर से बाहर भाग गया और उसने अपना अंगरखा उसके हाथ में छोड़ दिया।

13 स्त्री ने देखा कि यूसुफ ने अपना अंगरखा उसके हाथों में छोड़ दिया है और उसने जो कुछ हुआ उसके बारे में झूठ बोलने में निश्चय किया। वह बाहर दौड़ी। 14 और उसने बाहर के लोगों को पुकारा। उसने कहा, “देखो, यह हिब्रू दास हम लोगों का उपहास करने यहाँ आया था। वह अन्दर आया और मेरे साथ सोने की कोशिश की। किन्तु मैं ज़ोर से चिल्ला पड़ी। 15 मेरी चिल्लाहट ने उसे डरा दिया और वह भाग गया। किन्तु वह अपना अंगरखा मेरे पास छोड़ गया।” 16 इसलिए उसने यूसफ के मालिक अपने पति के घर लौटने के समय तक उसके अंगरखे को अपने पास रखा। 17 और उसने अपने पति को वही कहानी सुनाई। उसने कहा, “जिस हिब्रू दास को तुम यहाँ लाए उसने मुझ पर हमला करने का प्रयास किया। 18 किन्तु जब वह मेरे पास आया तो मैं चिल्लाई। वह भाग गया, किन्तु अपना अंगरखा छोड़ गया।”

19 यूसुफ के मालिक ने जो उसकी पत्नी ने कहा, उसे सुना और वह बहुत क्रोधित हुआ। 20 वहाँ एक कारागार था जिसमें राजा के शत्रु रखे जाते थे। इसलिए पोतीपर ने यूसुफ को उसी बंदी खाने में डाल दिया और यूसुफ वहाँ पड़ा रहा।

यूसुफ कारागार में

21 किन्तु यहोवा यूसुफ के साथ था। यहोवा उस पर कृपा करता रहा। 22 कुछ समय बाद कारागार के रक्षकों का मुखिया यूसुफ से स्नेह करने लगा। रक्षकों के मुखिया ने सभी कैदियों का अधिकारी यूसुफ को बनाया। यूसुफ उनका मुखिया था, किन्तु काम वही करता था जो वे करते थे। 23 रक्षकों का अधिकारी कारागार को सभी चीजों के लिए यूसुफ पर विश्वास करता था। यह इसलिए हुआ कि यहोवा यूसुफ के साथ था। यहोवा यूसुफ को, वह जो कुछ करता था, सफल करने में सहायता करता था।

समीक्षा

परमेश्वर की आशीषों को अनुभव करना

क्या आपकी परिस्थितियाँ आपके आदर्श से दूर हैं? क्या आप उनके द्वारा सीमित महसूस कर रहे हैं? क्या आपको ऐसा लगता है कि, काश आप अलग कार्य में, अलग स्थान में या अलग संबंध में होते? आपकी परिस्थितियाँ चाहें कैसी भी हों, यह पद्यांश दर्शाता है कि यदि आप परमेश्वर के लिए विश्वासयोग्य बने रहें, तो आप उनकी उपस्थिति को अनुभव कर सकते हैं, आप जहाँ हैं, वहीं उनका समर्थन और उनकी आशीषों को अनुभव कर सकते हैं।

हम यहाँ पर यहूदा की अविश्वसनीयता और दिखावा और यूसुफ की विश्वासयोग्यता के बीच एक अंतर देखते हैं, जब यूसुफ ने कामुकता के प्रलोभन का सामना किया था।

यहूदा अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद अति संवेदनशील हो गया था, जिससे वह पाप में गिर गया। उसकी बहू, तामार, ने एक वैश्या का रूप धरा और वह उसके साथ सोया। रेहन के तौर पर उसने उसके पास अपनी मुहर, बाजूबन्द और हाथ की छड़ी छोड़ दी थी। वह उसके द्वारा गर्भवती हुई। (पद - 38:1-18)

जब यहूदा ने सुना कि उसकी बहू ने व्यभिचार किया है और उसके परिणाम स्वरूप वह गर्भवती हुई है, यहूदा ने कहा, ‘उसे ले आओ कि जलाकर मार डाला जाए’ (पद - 24)। तब तामार ने उसके पास वे चीज़ें भेजीं जो वह उसके पास छोड़ आया था ‘मुहर, बाजूबन्द और छड़ी’ (पद - 25)। यहूदा पकड़ा गया क्योंकि वह जान गया था कि यह उसकी धोखेबाजी और पाप था (पद - 26)।

परमेश्वर का अनुग्रह असाधारण है। पेरेस इस घटना से जन्मा एक बेटा था, जिसका नाम यीशु की वंशावली में दर्ज किया गया है (मत्ती 1:3 देखें)। जिसे दुष्ट बुराई के लिए उपयोग करना चाहता था परंतु परमेश्वर उसे लेकर भलाई के लिए उपयोग करते हैं।

यहूदा का पाप, यूसुफ की धार्मिकता से भिन्न था। ‘परमेश्वर यूसुफ के साथ थे और वह सफल बना’ (उत्पत्ति 39:2)। पोतीफर ने देखा कि परमेश्वर यूसुफ के साथ हैं, और जो कुछ वह करता है उसमें परमेश्वर उसे सफलता देते हैं, उसने अपने घराने पर उसे प्रभु बनाया (पद - 4)। इसका परिणाम यह हुआ कि परमेश्वर ने पोतीफर के परिवार को आशीषित किया (पद - 5)।

परमेश्वर यूसुफ के साथ था, यह इस पद्यांश में 4 बार दर्शाया गया है: (39:23,3,21,23)। फिर भी, यह तथ्य कि परमेश्वर आपके साथ हैं, इसका मतलब यह नहीं कि आप प्रलोभन का सामना नहीं करेंगे। यूसुफ ने बहुत प्रलोभनों का सामना किया। पोतीफर की पत्नी ने यूसुफ को फुसलाने की कोशिश की, कि वह उसके साथ बिस्तर पर आए, लेकिन उसने इंकार कर दिया।

उसने देखा कि इस प्रलोभन में गिरना न केवल परमेश्वर के विरूद्ध बल्कि अपने स्वामी पोतीफर के विरुद्ध भी पाप है। मैं कैसे उसके विश्वास को तोड़ सकता हूँ और परमेश्वर के विरुद्ध पाप कर सकता हूँ? (पद - 9 एम.एस.जी.) उसने न केवल उसके साथ बिस्तर पर जाने से इंकार किया बल्कि वह इस प्रलोभन के पास भी नहीं गया (पद - 10)।

यूसुफ हमें एक बड़ा उदाहरण देते हैं कि प्रलोभन का सामना कैसे करना है। प्रलोभन से बचने का सबसे अच्छा तरीका इससे दूर भागना है (2 तिमुथियस 2:22)। यदि आप बहुत बड़े प्रलोभन का सामना कर रहे हैं तो महत्त्वपूर्ण कदम उठाएं। यूसुफ की तरह इससे दूर भागें।

पोतीफर की पत्नी ने यूसुफ के वस्त्र पकड़कर कहा, मेरे साथ बिस्तर पर चल, लेकिन वह अपना वस्त्र उसके हाथ में छोड़कर भागा और बाहर निकल गया (पद - 39:12)।

यहूदा की भिन्नता की ओर देखें: यहूदा ने अपनी मुहर, बाजूबन्द, और छड़ी तामार के हाथ छोड़ दी। यह सबूत है उसके अपराध का। यूसुफ ने अपने वस्त्र पोतीफर की पत्नी के हाथ छोड़ दिए, उसने उसका उपयोग यूसुफ के अपराध को साबित करने के लिए किया, लेकिन वास्तव में यह उसकी बेगुनाही का सबूत था।

इस वास्तविकता के कारण कि परमेश्वर यूसुफ के साथ था, वह प्रलोभन से बचा रहा, इसके बाद उसने भयंकर अन्याय का सामना किया (पद - 19 से आगे) और उसे कारागाह में बंद किया गया (पद - 20)। उसने अपना अधिकार खो दिया, लेकिन उसने अपनी स्वतंत्रता नहीं खोई।

यहाँ तक कि परमेश्वर कैद में भी उसके साथ थे। परमेश्वर ने उस पर अपनी कृपा - दृष्टि रखी और बंदीग्रह का दरोगा भी यूसुफ को समर्थन दे रहा था (पद - 21)। बंदीग्रह के मुख्य अधिकारी ने यूसुफ को कैदियों के ऊपर प्रभु ठहराया — ‘उसका समापन वहाँ की कार्यप्रणाली का प्रबंध करते हुए हुआ’ (पद - 22 एम.एस.जी.)। ‘परमेश्वर उसके साथ था और जो कुछ वह करता था उसमें वह उसे सफलता देता था’ (पद - 23)।

आपकी परिस्थितियाँ शायद आदर्श नहीं हैं। उदाहरण के लिए आप खुद को बंदीग्रह में महसूस कर रहे होंगे — अपने कार्य में, स्वास्थ के विषय में, संबंधों में या अन्य परिस्थिति में एक कैदी की तरह सीमित महसूस कर रहे हैं। फिर भी, इन सभी के बीच में यदि आप परमेश्वर के साथ विश्वासयोग्य बने रहें, तो आप भी उनकी उपस्थिती को अपने साथ अनुभव करेंगे। यह ‘बहुमूल्य.. मोती है’, (मत्ती 13:45-46)। यह आपका सबसे बहुमूल्य अधिकार है।

प्रार्थना

प्रभु, मैं धन्यवाद करता हूँ कि जब सब कुछ गलत हो रहा होता है और परीक्षा और प्रलोभन का सामना करना पड़ता है, तब मैं यह जानता हूँ कि परमेश्वर मेरे साथ हैं और आपकी आशीषों को अनुभव कर पाता हूँ।

पिप्पा भी कहते है

उत्पत्ति – 39:1-23

आप अच्छे व्यक्ति को गिरा नहीं सकते। परमेश्वर यूसुफ के साथ थे, बल्कि जब उसके साथ सब कुछ गलत हो रहा था। फिर भी उन्होंने उसे इन सबसे नहीं बचाया, बल्कि उन्होंने इसका उपयोग भलाई के लिए किया। परमेश्वर यूसुफ के चरित्र पर काम कर रहे थे। यह सब उसकी तैयारी का हिस्सा था।

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संदर्भ

नोट्स:

जहाँ पर कुछ बताया न गया हो, उन वचनों को पवित्र बाइबल, न्यू इंटरनैशनल संस्करण एन्ग्लिसाइड से लिया गया है, कॉपीराइट © 1979, 1984, 2011 बिबलिका, पहले इंटरनैशनल बाइबल सोसाइटी, हूडर और स्टोगन पब्लिशर की अनुमति से प्रयोग किया गया, एक हॅचेट यूके कंपनी सभी अधिकार सुरक्षित। ‘एनआईवी’, बिबलिका यू के का पंजीकृत ट्रेडमार्क संख्या 1448790 है।

जिन वचनों को (एएमपी) से चिन्हित किया गया है उन्हें एम्प्लीफाइड® बाइबल से लिया गया है. कॉपीराइट © 1954, 1958, 1962, 1964, 1965, 1987 लॉकमैन फाउंडेशन द्वारा प्राप्त अनुमति से उपयोग किया गया है। (www.Lockman.org)

एक साल में बाइबल

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