दिन 38

इनका उपयोग करें या इन्हें गंवा दें

बुद्धि भजन संहिता 18:43-50
नए करार मत्ती 25:14-46
जूना करार अय्यूब 40:3-42:17

परिचय

माइरा हिन्डले बीसवी सदी के सबसे कुख्यात हत्यारों में से एक थी। उनके अपराध अविश्वसनीय रूप से भयानक थे। फिर भी जब वह कैद में थी तो एक व्यक्ति उससे नियमित रूप से मिला करता था।

लॉर्ड लॉन्गफोर्ड (1905-2001) एक विवादास्पद व्यक्ति थे जिन्होंने अपना पूरा जीवन कैदियों से मुलाकात करने में बिता दिया, जिसमें मायरा हिन्डले भी शामिल हैं। फिर भी परमेश्वर के प्रति और जिन कैदियों से वे मिले थे उनके प्रति उनकी दयालुता और उनकी विश्वासयोग्यता पर कोई भी शक नहीं कर सका।

जब उनका देहांत हुआ तो सैकड़ों कैदियों ने उनकी अंतिम विदाई में शोक व्यक्त किया जिन्होंने अपना पूरा जीवन समाज के बहिष्कृत लोगों लिए विश्वासयोग्यता से लड़ने में बिता दिया।

उन्हें आज के लेखांश में दिये गए यीशु के वचनों से प्रेरणा मिली थी। अपने मरणासन पर उन्होंने अपनी पत्नी से पूछा, 'क्या तुम्हें पता है बाइबल में सबसे महत्त्वपूर्ण उद्धरण कौन सा है? अपने प्रश्न के जवाब में उन्होंने यीशु के वचनों का उद्धरण करते हुए अपने आखिरी शब्द कहे, 'मैं बन्दीगृह में था, तुम मुझ से मिलने आए' (मत्ती 25:36)।

जीवन कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है जिसमें आपको जीतना ही है। यह कोई चूहे की दौड़ भी नहीं है। जीवन एक बड़ा सौभाग्य और अवसर है। परमेश्वर ने आपको वरदान और क्षमताएं दी हैं, और वह चाहते हैं कि आप उनका उपयोग करें। उनका उपयोग करें या उन्हें गंवा दें। वह हमारे प्रति विश्वासयोग्य हैं और वह चाहते हैं कि हम भी उनके प्रति विश्वासयोग्य बनें।

बुद्धि

भजन संहिता 18:43-50

43 मुझे उनसे बचा ले जो मुझसे युद्ध करते हैं।
 मुझे उन जातियों का मुखिया बना दे,
 जिनको मैं जानता तक नहीं हूँ ताकि वे मेरी सेवा करेंगे।
44 फिर वे लोग मेरी सुनेंगे और मेरे आदेशों को पालेंगे,
 अन्य राष्टों के जन मुझसे डरेंगे।
45 वे विदेशी लोग मेरे सामने झुकेंगे क्योंकि वे मुझसे भयभीत होंगे।
 वे भय से काँपते हुए अपने छिपे स्थानों से बाहर निकल आयेंगे।

46 यहोवा सजीव है!
 मैं अपनी चट्टान के यश गीत गाता हूँ।
 मेरा महान परमेश्वर मेरी रक्षा करता है।
47 धन्य है, मेरा पलटा लेने वाला परमेश्वर
 जिसने देश—देश के लोगों को मेरे बस में कर दिया है।
 48 यहोवा, तूने मुझे शत्रुओं से छुड़ाया है।
तूने मेरी सहायता की ताकि मैं उन लोगों को हरा सकूँ जो मेरे विरुद्ध खड़े हुए।
 तूने मुझे कठोर व्यक्तियों से बचाया है।
49 हे यहोवा, इसी कारण मैं देशों के बीच तेरी स्तुति करता हूँ।
 इसी कारण मैं तेरे नाम का भजन गाता हूँ।

50 यहोवा अपने राजा की सहायता बहुत से युद्धों को जीतने में करता है!
 वह अपना सच्चा प्रेम, अपने चुने हुए राजा पर दिखाता है।
 वह दाऊद और उसके वंशजों के लिये सदा विश्वास योग्य रहेगा!

समीक्षा

परमेश्वर की विश्वासयोग्यता

'दयालु बनें' दर्शनशास्त्री प्लेटो कहते हैं, 'क्योंकि जिससे भी आप मिलते हैं वह युद्ध में कड़ा संघर्ष कर रहा है।' हमें हमेशा दयालु बने रहने के लिए बाइबल हमेंशा ज़ोरदार कारण भी बताती है। परमेश्वर हम पर सदा दया करते हैं। अपनी विश्वासयोग्यता में वह हम पर 'युगानुयुग करूणा करता रहेगा' (पद - 50)।

दाऊद अपने जीवन में पीछे मुड़कर देख सकता था कि परमेश्वर ने उस पर किस तरह से 'अविरत करूणा' की है। 'परमेश्वर ने उसे प्रजा के झगड़ों से भी छुड़ाया' (पद - 43अ)। 'परमेश्वर ने उसे अन्यजातियों का प्रधान बनाया है; जिन लोगों को वह जानता भी न था वे उसके अधीन हो गये' (पद - 43ब)।

उन्होंने दाऊद को महान विजय दिलाई (पद - 50) और उसे उसके शत्रुओं से छुड़ाया है; परमेश्वर ने उसे उसके विरोधियों से ऊंचा किया (पद - 48)। दाऊद ने अपना भजन आराधना करने के रूप में लिखा ('तेरे नाम का भजन गाऊंगा' (पद - 49ब) अपने 'अभिषिक्त' दास के प्रति परमेश्वर की विश्वासयोग्यता का धन्यवाद करने के लिए (पद - 50ब)।

आप भी अभिषिक्त हैं (2कुरिंथियों 1:21-22; 1यूहन्ना 2:20)। परमेश्वर आप युगानुयुग करूणा करते रहेंगे (भजन संहिता 18:50)। वह युगानुयुग करूणा करते रहेंगे। और यदि आप उनके जैसा बनना चाहें, तो हमेशा दूसरों के प्रति दयालु बनने की कोशिश कीजिये।

प्रार्थना

प्रभु मेरे प्रति आपकी विश्वासयोग्यता के लिए आपको धन्यवाद, कि आप मुझ पर सदा करूणा करते हैं। मैं जिन लोगों से भी मिलूँ उनके प्रति दयालु रहने में मेरी मदद कीजिये।

नए करार

मत्ती 25:14-46

तीन दासों की दृष्टान्त कथा

14 “स्वर्ग का राज्य उस व्यक्ति के समान होगा जिसने यात्रा पर जाते हुए अपने दासों को बुला कर अपनी सम्पत्ति पर अधिकारी बनाया। 15 उसने एक को चाँदी के सिक्कों से भरी पाँच थैलियाँ दीं। दूसरे को दो और तीसरे को एक। वह हर एक को उसकी योग्यता के अनुसार दे कर यात्रा पर निकल पड़ा। 16 जिसे चाँदी के सिक्कों से भरी पाँच थैलियाँ मिली थीं, उसने तुरन्त उस पैसे को काम में लगा दिया और पाँच थैलियाँ और कमा ली। 17 ऐसे ही जिसे दो थैलियाँ मिली थी, उसने भी दो और कमा लीं। 18 पर जिसे एक मिली थीं उसने कहीं जाकर धरती में गक़ा खोदा और अपने स्वामी के धन को गाड़ दिया।

19 “बहुत समय बीत जाने के बाद उन दासों का स्वामी लौटा और हर एक से लेखा जोखा लेने लगा। 20 वह व्यक्ति जिसे चाँदी के सिक्कों की पाँच थैलियाँ मिली थीं, अपने स्वामी के पास गया और चाँदी की पाँच और थैलियाँ ले जाकर उससे बोला, ‘स्वामी, तुमने मुझे पाँच थैलियाँ सौंपी थीं। चाँदी के सिक्कों की ये पाँच थैलियाँ और हैं जो मैंने कमाई हैं!’

21 “उसके स्वामी ने उससे कहा, ‘शाबाश! तुम भरोसे के लायक अच्छे दास हो। थोड़ी सी रकम के सम्बन्ध में तुम विश्वास पात्र रहे, मैं तुम्हें और अधिक का अधिकार दूँगा। भीतर जा और अपने स्वामी की प्रसन्नता में शामिल हो।’

22 “फिर जिसे चाँदी के सिक्कों की दो थैलियाँ मिली थीं, अपने स्वामी के पास आया और बोला, ‘स्वामी, तूने मुझे चाँदी की दो थैलियाँ सौंपी थीं, चाँदी के सिक्कों की ये दो थैलियाँ और हैं जो मैंने कमाई हैं।’

23 “उसके स्वामी ने उससे कहा, ‘शाबाश! तुम भरोसे के लायक अच्छे दास हो। थोड़ी सी रकम के सम्बन्ध में तुम विश्वास पात्र रहे। मैं तुम्हें और अधिक का अधिकार दूँगा। भीतर जा और अपने स्वामी की प्रसन्नता में शामिल हो।’

24 “फिर वह जिसे चाँदी की एक थैली मिली थी, अपने स्वामी के पास आया और बोला, ‘स्वामी, मैं जानता हूँ तू बहुत कठोर व्यक्ति है। तू वहाँ काटता हैं जहाँ तूने बोया नहीं है, और जहाँ तूने कोई बीज नहीं डाला वहाँ फसल बटोरता है। 25 सो मैं डर गया था इसलिए मैंने जाकर चाँदी के सिक्कों की थैली को धरती में गाड़ दिया। यह ले जो तेरा है यह रहा, ले लो।’

26 “उत्तर में उसके स्वामी ने उससे कहा, ‘तू एक बुरा और आलसी दास है, तू जानता है कि मैं बिन बोये काटता हूँ और जहाँ मैंने बीज नहीं बोये, वहाँ से फसल बटोरता हूँ 27 तो तुझे मेरा धन साहूकारों के पास जमा करा देना चाहिये था। फिर जब मैं आता तो जो मेरा था सूद के साथ ले लेता।’

28 “इसलिये इससे चाँदी के सिक्कों की यह थैली ले लो और जिसके पास चाँदी के सिक्कों की दस थैलियाँ हैं, इसे उसी को दे दो। 29 “क्योंकि हर उस व्यक्ति को, जिसने जो कुछ उसके पास था उसका सही उपयोग किया, और अधिक दिया जायेगा। और जितनी उसे आवश्यकता है, वह उससे अधिक पायेगा। किन्तु उससे, जिसने जो कुछ उसके पास था उसका सही उपयोग नहीं किया, सब कुछ छीन लिया जायेगा। 30 सो उस बेकार के दास को बाहर अन्धेरे में धकेल दो जहाँ लोग रोयेंगे और अपने दाँत पीसेंगे।”

मनुष्य का पुत्र सबका न्याय करेगा

31 “मनुष्य का पुत्र जब अपनी स्वर्गिक महिमा में अपने सभी दूतों समेत अपने शानदार सिंहासन पर बैठेगा 32 तो सभी जातियाँ उसके सामने इकट्ठी की जायेंगी और वह एक को दूसरे से वैसे ही अलग करेगा, जैसे एक गडरिया अपनी बकरियों से भेड़ों को अलग करता है। 33 वह भेंड़ो को अपनी दाहिनी ओर रखेगा और बकरियों को बाँई ओर।

34 “फिर वह राजा, जो उसके दाहिनी ओर है, उनसे कहेगा, ‘मेरे पिता से आशीष पाये लोगो, आओ और जो राज्य तुम्हारे लिये जगत की रचना से पहले तैयार किया गया है उसका अधिकार लो। 35 यह राज्य तुम्हारा है क्योंकि मैं भूखा था और तुमने मुझे कुछ खाने को दिया, मैं प्यासा था और तुमने मुझे कुछ पीने को दिया। मैं पास से जाता हुआ कोई अनजाना था, और तुम मुझे भीतर ले गये। 36 मैं नंगा था, तुमने मुझे कपड़े पहनाए। मैं बीमार था, और तुमने मेरी सेवा की। मैं बंदी था, और तुम मेरे पास आये।’

37 “फिर उत्तर में धर्मी लोग उससे पूछेंगे, ‘प्रभु, हमने तुझे कब भूखा देखा और खिलाया या प्यासा देखा और पीने को दिया? 38 तुझे हमने कब पास से जाता हुआ कोई अनजाना देखा और भीतर ले गये या बिना कपड़ों के देखकर तुझे कपड़े पहनाए? 39 और हमने कब तुझे बीमार या बंदी देखा और तेरे पास आये?’

40 “फिर राजा उत्तर में उनसे कहेगा, ‘मैं तुमसे सत्य कह रहा हूँ जब कभी तुमने मेरे भोले-भाले भाईयों में से किसी एक के लिए भी कुछ किया तो वह तुमने मेरे ही लिये किया।’

41 “फिर वह राजा अपनी बाँई ओर वालों से कहेगा, ‘अरे अभागो! मेरे पास से चले जाओ, और जो आग शैतान और उसके दूतों के लिए तैयार की गयी है, उस अनंत आग में जा गिरो। 42 यही तुम्हारा दण्ड है क्योंकि मैं भूखा था पर तुमने मुझे खाने को कुछ नहीं दिया, 43 मैं अजनबी था पर तुम मुझे भीतर नहीं ले गये। मैं कपड़ों के बिना नंगा था, पर तुमने मुझे कपड़े नहीं पहनाये। मैं बीमार और बंदी था, पर तुमने मेरा ध्यान नहीं रखा।’

44 “फिर वे भी उत्तर में उससे पूछेंगे, ‘प्रभु, हमने तुझे भूखा या प्यासा या अनजाना या बिना कपड़ों के नंगा या बीमार या बंदी कब देखा और तेरी सेवा नहीं की।’

45 “फिर वह उत्तर में उनसे कहेगा, ‘मैं तुमसे सच कह रहा हूँ जब कभी तुमने मेरे इन भोले भाले अनुयायियों में से किसी एक के लिए भी कुछ करने में लापरवाही बरती तो वह तुमने मेरे लिए ही कुछ करने में लापरवाही बरती।’

46 “फिर ये बुरे लोग अनंत दण्ड पाएँगे और धर्मी लोग अनंत जीवन में चले जायेंगे।”

समीक्षा

विश्वासयोग्यता का जीवन

आप विश्वासयोग्य कैसे बन सकते हैं (पद - 21,23)।

  1. इनका उपयोग करें या इन्हें गंवा दें

परमेश्वर दयालु और करूणामयी हैं। वह हमें बहुत कुछ देते हैं। एक तोड़े में बहुत सारा धन होता है – शायद बीस वर्षों के वेतन के बराबर। बल्कि जिसके पास एक तोड़ा था उसे भी बहुत कुछ दिया गया। इस दृष्टांत में तोड़ा (जो अंग्रेजी में 'कौशल' शब्द का मूल है) केवल आपके धन को ही नहीं दर्शाता बल्कि वह आपके वरदान, उत्तम दान, समय, ताकत, शिक्षा, बुद्धि, विवेक, प्रभाव और अवसरों को भी दर्शाता है।

आपको जो भी दिया गया है उसके प्रति विश्वासयोग्य रहें। यह सोचकर कोई फायदा नहीं होगा कि आपको और दिया जाना चाहिये था। आपके पास जो भी है उसमें आपको सर्वोत्तम बनने के लिए बुलाया गया है।

विश्वासयोग्य बनने का मतलब है उन वरदानों का उपयोग करना जो परमेश्वर ने आपको दिया है। हम में से कई लोगों की इच्छा तीसरे दास के जैसे बनने की होती है, जिसने कहा, 'मैं डर गया था' (पद - 25)। हम अपने वरदानों को छिपाते हैं क्योंकि हम असफलता से डरते हैं और यह कि दूसरे हमारे बारे में क्या सोचेंगे या कठिन परिश्रम और ज़िम्मेदारी लेने से बचने के लिए।

ऐसा कहा गया है कि, 'आप अपने जीवन में लगातार डरते रहने की सबसे बड़ी गलती कर सकते हैं।'

जिस दास को पाँच तोड़े मिले थे और जिसे दो तोड़े मिले थे उन दोनों को इसे गंवा देने का जोखिम था। विश्वास से कदम उठाएं, अपने वरदानों का उपयोग करें और असफलता का जोखिम लें।

वास्तव में यीशु कहते हैं, 'इनका उपयोग करो या इन्हें गंवा दो' (पद - 28-30)। आपके पास जो भी है यदि उसके साथ आप सर्वोत्तम करेंगे, तो परमेश्वर आपको और भी देंगे और कहेंगे, 'विश्वासयोग्य दास, तुमने बहुत अच्छा किया! तुम थोड़े में विश्वासयोग्य रहे; मैं तुम्हें बहुत सी चीज़ों का अधिकारी बनाऊँगा। आओ और अपने स्वामी के साथ खुशियाँ मनाओ!' (पद - 21,23)।

  1. सबसे कमज़ोर और सबसे शक्तिहीन को देखें ये सब यीशु के भेष में हैं

यीशु ने कहा है, 'तुम ने जो मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों में से किसी एक के साथ किया, वह मेरे ही साथ किया' (पद - 40)। वह हम से कहते हैं कि उनके प्रति विश्वासयोग्यता हमारी दुनिया में सबसे कमज़ोर और सबसे ज़रूरतमंद लोगों के लिए हमारे द्वारा किये गए कार्यों से दर्शायी जाती है (पद - 35-36; 42-43)।

  • भूखे लोग

भूख से लाखों लोग मर रहे हैं। जब भी आप भूखों को खाना खिलाएंगे, आप यीशु से मिलेंगे। मदर टेरेसा ने कहा है, 'मर रहे अनचाहे और प्रेमरहित लोग – ये सब यीशु के भेष में हैं'

  • परदेशी

बेघर होना, शरणार्थी होना या अस्पताल में भर्ती होना जीवन के सबसे दर्दनाक अनुभव हैं। जब आप ऐसे लोगों से मिलते हैं जो 'अजनबी या परदेशी' हैं या जब आप बेघर लोगों को रहने का स्थान देते हैं और उन्हें अपने समाज के केन्द्र में आमंत्रित करते हैं, तब आप यीशु से मिलते हैं (पद - 35ब,38)।

  • कैदी

जितने भी कैदी हैं वे अक्सर 'अंतिम और तुच्छ' लोगों की श्रेणी में आते हैं। यीशु हमें उनपर कृपा दर्शाने और 'पापीयों' को अपनाने के लिए चुनौती देते हैं। हमें याद रखना ज़रूरी है कि हमें भी अपने पापों की क्षमा मिली है। कई कैदियों ने घोर अपराध किये हैं – पर फिर भी यीशु हमें उनसे प्यार करने के लिए कहते हैं और हमें उनसे प्यार करने के लिए बुलाते भी हैं।

कैदियों के पास जाना या उनका ख्याल करना और पूर्व - अपराधियों की सुरक्षा करना बड़े सौभाग्य की बात है। मुझे याद है कि बंदीगृह में सेवा करनेवाले पादरी कहा करते थे, कि जब वह पहली बार बंदीगृह में गए तो उन्होंने सोचा कि वह यीशु को साथ लेकर जाएंगे। जल्दी ही उन्होंने महसूस किया कि यीशु तो वहाँ पहले से ही मौजूद थे। उन्होंने कहा फिर वह वहाँ पर यीशु से मिलने जाया करते थे।

इन सभी क्षेत्रों में यीशु कहते हैं कि, 'तुम ने जो मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों में से किसी एक के साथ किया, वह मेरे ही साथ किया ' (पद - 40)। यीशु हम से कहते हैं कि जब वह महिमा में वापस आएंगे तब न्याय होगा (पद - 31-33) और इसमें तब लोगों को अलग - अलग किया जाएगा जिससे वे अचंभित होंगे (पद - 37,44)। हम यीशु से कैसी प्रतिक्रिया करते हैं इसका परिणाम अनंत काल तक होगा। (पद - 30,46)।

प्रार्थना

प्रभु, मेरी मदद कीजिये कि मैं विश्वासयोग्य बना रहूँ और उन वरदानों और क्षमताओं का उपयोग करूँ जो आपने मुझे दिया है। आपको धन्यवाद कि जब मैं आखिरी और निम्न श्रेणी के लोगों के पास जाता हूँ, तब मैं आपसे मुलाकात करता हूँ।

जूना करार

अय्यूब 40:3-42:17

3 इस पर अय्यूब ने उत्तर देते हुए परमेश्वर से कहा:

4 “मैं तो कुछ कहने के लिये बहुत ही तुच्छ हूँ।
 मैं तुझसे क्या कह सकता हूँ?
 मैं तुझे कोई उत्तर नहीं दे सकता।
 मैं अपना हाथ अपने मुख पर रख लूँगा।
5 मैंने एक बार कहा किन्तु अब मैं उत्तर नहीं दूँगा।
 फिर मैंने दोबारा कहा किन्तु अब और कुछ नहीं बोलूँगा।”

6 इसके बाद यहोवा ने आँधी में बोलते हुए अय्यूब से कहा:

7 अय्यूब, तू पुरुष की तरह खड़ा हो,
 मैं तुझ से कुछ प्रश्न पूछूँगा और तू उन प्रश्नों का उत्तर मुझे देगा।

8 अय्यूब क्या तू सोचता है कि मैं न्यायपूर्ण नहीं हूँ?
 क्या तू मुझे बुरा काम करने का दोषी मानता है ताकि तू यह दिखा सके कि तू उचित है?
9 अय्यूब, बता क्या मेरे शस्त्र इतने शक्तिशाली हैं जितने कि मेरे शस्त्र हैं?
 क्या तू अपनी वाणी को उतना ऊँचा गरजा सकता है जितनी मेरी वाणी है?
10 यदि तू वैसा कर सकता है तो तू स्वयं को आदर और महिमा दे
 तथा महिमा और उज्वलता को उसी प्रकार धारण कर जैसे कोई वस्त्र धारण करता है।
11 अय्यूब, यदि तू मेरे समान है, तो अभिमानी लोगों से घृणा कर।
 अय्यूब, तू उन अहंकारी लोगों पर अपना क्रोध बरसा और उन्हें तू विनम्र बना दे।
12 हाँ, अय्यूब उन अहंकारी लोगों को देख और तू उन्हें विनम्र बना दे।
 उन दुष्टों को तू कुचल दे जहाँ भी वे खड़े हों।
13 तू सभी अभिमानियों को मिट्टी में गाड़ दे
 और उनकी देहों पर कफन लपेट कर तू उनको उनकी कब्रों में रख दे।
14 अय्यूब, यदि तू इन सब बातों को कर सकता है
 तो मैं यह तेरे सामने स्वीकार करूँगा कि तू स्वयं को बचा सकता है।

15 “अय्यूब, देख तू, उस जलगज को
 मैंने (परमेश्वर) ने बनाया है और मैंने ही तुझे बनाया है।
 जलगज उसी प्रकार घास खाती है, जैसे गाय घास खाती है।
16 जलगज के शरीर में बहुत शक्ति होती है।
 उसके पेट की माँसपेशियाँ बहुत शक्तिशाली होती हैं।
17 जलगज की पूँछ दृढ़ता से ऐसी रहती है जैसा देवदार का वृक्ष खड़ा रहता है।
 उसके पैर की माँसपेशियाँ बहुत सुदृढ़ होती हैं।
18 जलगज की हड्‌डियाँ काँसे की भाँति सुदृढ़ होती है,
 और पाँव उसके लोहे की छड़ों जैसे।
19 जलगज पहला पशु है जिसे मैंने (परमेश्वर) बनाया है
 किन्तु मैं उस को हरा सकता हूँ।
20 जलगज जो भोजन करता है उसे उसको वे पहाड़ देते हैं
 जहाँ बनैले पशु विचरते हैं।
21 जलगज कमल के पौधे के नीचे पड़ा रहता है
 और कीचड़ में सरकण्ड़ों की आड़ में छिपा रहता है।
22 कमल के पौधे जलगज को अपनी छाया में छिपाते है।
 वह बाँस के पेड़ों के तले रहता हैं, जो नदी के पास उगा करते है।
23 यदि नदी में बाढ़ आ जाये तो भी जल गज भागता नहीं है।
 यदि यरदन नदी भी उसके मुख पर थपेड़े मारे तो भी वह डरता नहीं है।
24 जल गज की आँखों को कोई नहीं फोड़ सकता है
 और उसे कोई भी जाल में नहीं फँसा सकता।

41“अय्यूब, बता, क्या तू लिब्यातान (सागर के दैत्य) को
 किसी मछली के काँटे से पकड़ सकता है?
2 अय्यूब, क्या तू लिब्यातान की नाक में नकेल डाल सकता है?
 अथवा उसके जबड़ों में काँटा फँसा सकता है?
3 अय्यूब, क्या लिब्यातान आजाद होने के लिये तुझसे विनती करेगा
 क्या वह तुझसे मधुर बातें करेगा?
4 अय्यूब, क्या लिब्यातान तुझसे सन्धि करेगा,
 और सदा तेरी सेवा का तुझे वचन देगा?
5 अय्यूब, क्या तू लिब्यातान से वैसे ही खेलेगा जैसे तू किसी चिड़ियाँ से खेलता है?
 क्या तू उसे रस्से से बांधेगा जिससे तेरी दासियाँ उससे खेल सकें?
6 अय्यूब, क्या मछुवारे लिब्यातान को तुझसे खरीदने का प्रयास करेंगे?
 क्या वे उसको काटेंगे और उन्हें व्यापारियों के हाथ बेच सकेंगे?
7 अय्यूब, क्या तू लिब्यातान की खाल में और माथे पर भाले फेंक सकता है?

8 “अय्यूब, लिब्यातान पर यदि तू हाथ डाले तो जो भयंकर युद्ध होगा, तू कभी भी भूल नहीं पायेगा,
 और फिर तू उससे कभी युद्ध न करेगा।
9 और यदि तू सोचता है कि तू लिब्यातान को हरा देगा
 तो इस बात को तू भूल जा।
 क्योंकि इसकी कोई आशा नहीं है।
 तू तो बस उसे देखने भर से ही डर जायेगा।
10 कोई भी इतना वीर नहीं है,
 जो लिब्यातान को जगा कर भड़काये।

 तो फिर अय्यूब बता, मेरे विरोध में कौन टिक सकता है?
11 मुझ को (परमेश्वर को) किसी भी व्यक्ति कुछ नहीं देना है।
 सारे आकाश के नीचे जो कुछ भी है, वह सब कुछ मेरा ही है।

12 अय्यूब, मैं तुझको लिब्यातान के पैरों के विषय में बताऊँगा।
 मैं उसकी शक्ति और उसके रूप की शोभा के बारे में बताऊँगा।
13 कोई भी व्यक्ति उसकी खाल को भेद नहीं सकता।
 उसकी खाल दुहरा कवच के समान हैं।
14 लिब्यातान को कोई भी व्यक्ति मुख खोलने के लिये विवश नहीं कर सकता है।
 उसके जबड़े के दाँत सभी को भयभीत करते हैं।
15 लिब्यातान की पीठ पर ढालों की पंक्तियाँ होती है,
 जो आपस में कड़ी छाप से जुड़े होते हैं।
16 ये ढ़ाले आपस में इतनी सटी होती हैं
 कि हवा तक उनमें प्रवेश नहीं कर पाती है।
17 ये ढाले एक दूसरे से जुड़ी होती हैं।
 वे इतनी मजबूती से एक दूसरे से जुडी हुई है कि कोई भी उनको उखाड़ कर अलग नहीं कर सकता।
18 लिब्यातान जब छींका करता है तो ऐसा लगता है जैसे बिजली सी कौंध गई हो।
 आँखे उसकी ऐसी चमकती है जैसे कोई तीव्र प्रकाश हो।
19 उसके मुख से जलती हुई मशालें निकलती है
 और उससे आग की चिंगारियाँ बिखरती हैं।
20 लिब्यातान के नथुनों से धुआँ ऐसा निकलता है,
 जैसे उबलती हुई हाँडी से भाप निकलता हो।
21 लिब्यातान की फूँक से कोपले सुलग उठते हैं
 और उसके मुख से डर कर दूर भाग जाया करते हैं।
22 लिब्यातान की शक्ति उसके गर्दन में रहती हैं,
 और लोग उससे डर कर दूर भाग जाया करते हैं।
23 उसकी खाल में कही भी कोमल जगह नहीं है।
 वह धातु की तरह कठोर हैं।
24 लिब्यातान का हृदय चट्टान की तरह होता है, उसको भय नहीं है।
 वह चक्की के नीचे के पाट सा सुदृढ़ है।
25 लिब्यातान जागता है, बली लोग डर जाते हैं।
 लिब्यातान जब पूँछ फटकारता है, तो वे लोग भाग जाते हैं।
26 लिब्यातान पर जैसे ही भाले, तीर और तलवार पड़ते है
 वे उछल कर दूर हो जाते है।
27 लोहे की मोटी छड़े वह तिनसे सा
 और काँसे को सड़ी लकड़ी सा तोड़ देता है।
28 बाण लिब्यातान को नहीं भगा पाते हैं,
 उस पर फेंकी गई चट्टाने सूखे तिनके की भाँति हैं।
29 लिब्यातान पर जब मुगदर पड़ता है तो उसे ऐसा लगता है मानों वह कोई तिनका हो।
 जब लोग उस पर भाले फेंकते हैं, तब वह हँसा करता है।
30 लिब्यातान की देह के नीचे की खाल टूटे हुऐ बर्तन के कठोर व पैने टुकड़े सा है।
 वह जब चलता है तो कीचड़ में ऐसे छोड़ता है। मानों खलिहान में पाटा लगाया गया हो।
31 लिब्यातान पानी को यूँ मथता है, मानों कोई हँड़ियाँ उबलती हो।
 वह ऐसे बुलबुले बनाता है मानों पात्र में उबलता हुआ तेल हो।
32 लिब्यातान जब सागर में तैरता है तो अपने पीछे वह सफेद झागों जैसी राह छोड़ता है,
 जैसे कोई श्वेत बालों की विशाल पूँछ हो।
33 लिब्यातान सा कोई और जन्तु धरती पर नहीं है।
 वह ऐसा पशु है जिसे निर्भय बनाया गया।
34 वह अत्याधिक गर्वीले पशुओं तक को घृणा से देखता है।
 सभी जंगली पशुओं का वह राजा हैं।
 मैंने (यहोवा) लिब्यातान को बनाया है।”

अय्यूब का यहोवा को उत्तर

42इस पर अय्यूब ने यहोवा को उत्तर देते हुए कहा:

2 “यहोवा, मैं जानता हूँ कि तू सब कुछ कर सकता है।
 तू योजनाऐं बना सकता है और तेरी योजनाओं को कोई भी नहीं बदल सकता और न ही उसको रोका जा सकता है।
3 यहोवा, तूने यह प्रश्न पूछा कि “यह अबोध व्यक्ति कौन है जो ये मूर्खतापूर्ण बातें कह रहा है”
 यहोवा, मैंने उन चीजों के बारे में बातें की जिन्हें मैं समझता नहीं था।
 यहोवा, मैंने उन चीजों के बारे में बातें की जो मेरे समझ पाने के लिये बहुत अचरज भरी थी।

4 यहोवा, तूने मुझसे कहा, “हे अय्यूब सुन और मैं बोलूँगा।
  मैं तुझसे प्रश्न पूछूँगा और तू मुझे उत्तर देगा।”
5 यहोवा, बीते हुए काल में मैंने तेरे बारे में सुना था
  किन्तु स्वयं अपनी आँखों से मैंने तुझे देख लिया है।
6 अत: अब मैं स्वयं अपने लिये लज्जित हूँ।
  यहोवा मुझे खेद है
  धूल और राख में बैठ कर
  मैं अपने हृदय और जीवन को बदलने की प्रतिज्ञा करता हूँ।”

यहोवा का अय्यूब की सम्पत्ति को लौटाना

7 यहोवा जब अय्यूब से अपनी बात कर चुका तो यहोवा ने तेमान के निवासी एलीपज से कहा: “मैं तुझसे और तेरे दो मित्रों से क्रोधित हूँ क्योंकि तूने मेरे बारे में उचित बातें नहीं कही थीं। किन्तु अय्यूब ने मेरे बारे में उचित बातें कहीं थीं। अय्यूब मेरा दास है। 8 इसलिये अब एलीपज तुम सात सात बैल और सात भेड़ें लेकर मेरे दास अय्यूब के पास जाओ और अपने लिये होमबलि के रुप में उनकी भेंट चढ़ाओं। मेरा सेवक अय्यूब तुम्हारे लिए प्रार्थना करेगा। तब निश्चय ही मैं उसकी प्रार्थना का उत्तर दूँगा। फिर मैं तुम्हें वैसा दण्ड नहीं दूँगा जैसा दण्ड दिया जाना चाहिये था क्योंकि तुम बहुत मूर्ख थे। मेरे बारे मैं तुमने उचित बातें नहीं कहीं जबकि मेरे सेवक अय्यूब ने मेरे बारे में उचित बातें कहीं थीं।”

9 सो तेमान नगर के निवासी एलीपज और शूह गाँव के बिल्दद तथा नामात गाँव के निवासी सोपर ने यहोवा की आज्ञा का पालन किया। इस पर यहोवा ने अय्यूब की प्रार्थना सुन ली।

10 इस प्रकार जब अय्यूब अपने मित्रों के लिये प्रार्थना कर चुका तो यहोवा ने अय्यूब की फिर सफलता प्रदान की। परमेश्वर ने जितना उसके पास पहले था, उससे भी दुगुना उसे दे दिया। 11 अय्यूब के सभी भाई और बहनें अय्यूब के घर वापस आ गये और हर कोई जो अय्यूब को पहले जानता था, उसके घर आया। अय्यूब के साथ उन सब ने एक बड़ी दावत में खाना खाया। क्योंकि यहोवा ने अय्यूब को बहुत कष्ट दिये थे, इसलिये उन्होंने अय्यूब को सान्त्वना दी। हर किसी व्यक्ति ने अय्यूब को चाँदी का एक सिक्का और सोने की एक अंगूठी भेंट में दीं।

12 यहोवा ने अय्यूब के जीवन के पहले भाग से भी अधिक उसके जीवन के पिछले भाग को अपना आशीर्वाद प्रदान किया। अय्यूब के पास चौदह हजार भेड़ें छ: हजार ऊँट, दो हजार बैल तथा एक हजार गधियाँ हो गयीं। 13 अय्यूब के सात पुत्र और तीन पुत्रियाँ भी हो गयीं। 14 अय्यूब ने अपनी सबसे बड़ी पुत्री का नाम रखा यमीमा। दूसरी पुत्री का नाम रखा कसीआ। और तीसरी का नाम रखा केरेन्हप्पूक। 15 सारे प्रदेश में अय्यूब की पुत्रियाँ सबसे सुन्दर स्त्रियाँ थीं। अय्यूब ने अपने पुत्रों को साथ अपनी सम्पत्ति का एक भाग अपनी पुत्रियाँ को भी उत्तराधिकार में दिया।

16 इसके बाद अय्यूब एक सौ चालीस साल तक और जीवित रहा। वह अपने बच्चों, अपने पोतों, अपने परपोतों और परपोतों की भी संतानों यानी चार पीढ़ियों को देखने के लिए जीवित रहा। 17 जब अय्यूब की मृत्यु हुई, उस समय वह बहुत बूढ़ा था। उसे बहुत अच्छा और लम्बा जीवन प्राप्त हुआ था।

समीक्षा

अय्यूब की विश्वासयोग्यता

जब आप गर्भ में थे तब से परमेश्वर ने आपके लिए योजना बनाई है। अय्यूब के लिए भी उनके पास एक अच्छी योजना थी। आरंभ से ही उन्होंने अय्यूब के लिए पुनर्गठन और आशीष की योजना बनाई थी।

अय्यूब को उसकी विश्वासयोग्यता के कारण पूरे इतिहास में याद किया जाएगा। प्रेरित याकूब कहते हैं, 'तुम ने अय्यूब के धीरज के विषय में तो सुना ही है, और प्रभु की ओर से जो उसका प्रतिफल हुआ उसे भी जान लिया है, जिस से प्रभु की अत्यन्त करूणा और दया प्रगट होती है' (याकूब 5:11)।

एक बार फिर परमेश्वर ने अय्यूब से कई प्रश्न पूछते हैं उसे यह एहसास दिलाने के लिए कि 'अय्यूब को यह सब जानकर बेहद आश्चर्य होगा' (अय्यूब 42:3ब)। अय्यूब परमेश्वर की विश्वासयोग्यता पर भरोसा करता है, 'मैं जानता हूँ कि तू सब कुछ कर सकता है, और तेरी युक्तियों में से कोई रुक नहीं सकती' (पद - 2)। यह एक आश्चर्यजनक वायदा है जब आपके जीवन में चीज़ें आपकी योजना के अनुसार नहीं होतीं। आपके लिए परमेश्वर की एक अच्छी योजना है और यह कभी विफल नहीं होगी।

परमेश्वर हमें परेशानी मुक्त जीवन नहीं देते। वह हमारे सभी प्रश्नों का उत्तर नहीं देते। लेकिन वह हमें आश्वासन देते हैं कि दु:ख के समय में वह हमारे संग हैं।

अय्यूब कहते हैं कि वह अपने दोस्तों के लिए प्रार्थना करे जिसने उसे दु:खी किया था, नीचा दिखाया था, उस पर गलत दोष लगाया था, उसका न्याय किया था और उसकी निंदा की थी (पद - 7-8)। अय्यूब उन्हें क्षमा करता है और उनके लिए प्रार्थना करने के द्वारा यह दर्शाता है कि उसने उन्हें पूरी तरह से क्षमा कर दिया है। जब उसने उनके लिए मध्यस्थी की प्रार्थना की, तब परमेश्वर ने अय्यूब द्वारा अपने दोस्तों के लिए की गई प्रार्थना को न केवल सुना बल्कि, 'परमेश्वर ने उसका सारा दु:ख दूर किया, और जितना अय्यूब का पहिले था, उसका दुगना यहोवा ने उसे दे दिया' (पद - 10)।

जॉयस मेयर लिखती हैं कि, 'यदि आप चीज़ों को परमेश्वर की इच्छा के अनुसार करेंगे, तो वह आपकी परेशानी के मुकाबले आपको दोगुना देंगे।' 'और यहोवा ने अय्यूब के पिछले दिनों में उसको अगले दिनों से अधिक आशीष दी' (पद - 12)। जैसा कि दाऊद के साथ हुआ था, परमेश्वर ने अपनी दया उस पर और उसके वंशज पर की (पद - 16)।

दु:ख के समय में अय्यूब पर उसकी गंभीरता के विषय में दोष लगाया गया था (याकूब 5:10-11)। शैतान को यकीन था कि वह दु:ख अय्यूब को परमेश्वर से दूर कर देगा। अय्यूब की दृढ़ता ने यह दर्शा दिया कि शैतान गलत था। कभी - कभी अय्यूब, अच्छे समय में और भयंकर परीक्षा के समय में निरंतर रूप से परमेश्वर की आराधना बेहद ईमानदारी से नहीं कर पाया।

उसकी दृढ़ता हमारे लिए उदाहरण है कि दु:ख के समय में कैसे प्रतिक्रिया की जानी चाहिये। जब उसने दृढ़ विश्वासयोग्यता के साथ प्रतिक्रिया की तो शैतान हार गया। अय्यूब 'मसीह' का एक प्रकार है। क्रूस पर दु:ख उठाते समय यीशु के द्वारा विश्वसनीय दृढ़ता के कारण, शैतान हमेशा के लिए पूरी तरह पराजित हो गया।

प्रार्थना

प्रभु, अपने दोस्तों के लिए प्रार्थना करने में और अय्यूब की तरह दृढ़ बने रहने में मेरी मदद कीजिये।

पिप्पा भी कहते है

मत्ती 25:14-30

पहली नज़र में मुझे यह लेखांश ज़रा भी उचित नहीं लगा – उस व्यक्ति को और ज़्यादा देना जिसके पास पहले से ही बहुत ज़्यादा है। मुझे उस दास के लिए बुरा लगा जो अपने थोड़े का उपयोग करने के लिए डर गया था। मैं उसे संदर्भित कर सकती हूँ। मैं कई सभाओं में यह सोचते हुए बैठ चुकी हूँ, कि कुछ विचारों और प्रार्थनाओं के बारे में कहना सही होगा या नहीं, लेकिन मैं उनके बारे में नहीं कहती, क्योंकि हो सकता है कि मैं गलत दिशा में जा रही होऊँगी, या मैंने कुछ गलत समझ लिया होगा, जिसकी वजह से हमें बाद में विश्व में शांति के लिए प्रार्थना करनी पड़ सकती थी! क्या एक बुद्धु जैसे नहीं लगने की कोशिश करना, घमंड की बात है? यदि हम स्वभाव से ज़्यादा सचेत और भयभीत हैं, तो हमें एक दूसरे को प्रोत्साहित करना चाहिये। मैं इस सच्चाई से प्रेरित हुई कि मुझे कम तोड़ा नहीं चाहिये, जिसे वापस ले लिया जाएगा!

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संदर्भ

नोट्स:

जॉयस मेयर: एवरी डे लाइफ बाइबल, (फेथवर्ड्स2013) पन्ना 812

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