आत्मिक अधिकार का उपयोग
परिचय
उसने मेरा दरवाज़ा खोला, मुझे लगा वह मेरा माली है। उसकी उम्र अस्सी से ज़्यादा थी। वह बहुत ही दयालु था और मैंने उसकी गहरी नम्रता का अनुभव किया।
मैं नब्बे साल का था। मैं पहली बार किसी युवा कैंप में गया था।
उस रात मुझे यह जानकर अचरज हुआ कि वह एक प्रवक्ता है। उनकी आवाज़ में अजब सा अधिकार था। युवाओं और छात्राओं से भरा हुआ कमरा, उन्हें बड़े ध्यान से सुन रहा था। आप एक सुई के गिरने की आवाज़ भी सुन सकते थे। उसका संदेश काफी साधारण था और यह यीशु पर केन्द्रित था। मैं स्तब्ध रह गया। इससे पहले मैंने कभी किसी को इस अधिकार से बोलते हुए नहीं सुना था।
धीरे से बोलने वाले, विनम्र और गहरी आत्मिकता वाले इस व्यक्ति ने यू.के. में मसीही लीडर्स की सारी कौम को प्रभावित किया था। रेवरेंट ई.जे.एच. नॅश एक विनयशील पादरी थे जिनका बाहरी रूप रंग वर्णन से परे था और उनका दिल मसीह के लिए प्रज्वलित था।
उनका अधिकार उनके जीवन की पदवी से या सांसारिक अधिकार से नहीं आया था। बल्कि, उनका अधिकार यीशु मसीह के साथ लीडरशिप से आया था। यह आत्म - प्रमाणित था।
आजकल लोग अधिकार के प्रति बहुत सावधान रहते हैं। अवश्य ही, यह अपमानित हो सकता है। मगर, दैवीय अधिकार, आत्मिक अधिकार महान आशीषों का स्रोत है।
भजन संहिता 29:1-11
दाऊद का एक गीत।
29परमेश्वर के पुत्रों, यहोवा की स्तुति करो!
उसकी महिमा और शक्ति के प्रशंसा गीत गाओ।
2 यहोवा की प्रशंसा करो और उसके नाम को आदर प्रकट करो।
विशेष वस्त्र पहनकर उसकी आराधना करो।
3 समुद्र के ऊपर यहोवा की वाणी निज गरजती है।
परमेश्वर की वाणी महासागर के ऊपर मेघ के गरजन की तरह गरजता है।
4 यहोवा की वाणी उसकी शक्ति को दिखाती है।
उसकी ध्वनि उसके महिमा को प्रकट करती है।
5 यहोवा की वाणी देवदार वृक्षों को तोड़ कर चकनाचूर कर देता है।
यहोवा लबानोन के विशाल देवदार वृक्षों को तोड़ देता है।
6 यहोवा लबानोन के पहाड़ों को कँपा देता है। वे नाचते बछड़े की तरह दिखने लगता है।
हेर्मोन का पहाड़ काँप उठता है और उछलती जवान बकरी की तरह दिखता है।
7 यहोवा की वाणी बिजली की कौधो से टकराती है।
8 यहोवा की वाणी मरुस्थलों को कँपा देती है।
यहोवा के स्वर से कादेश का मरुस्थल काँप उठता है।
9 यहोवा की वाणी से हरिण भयभीत होते हैं।
यहोवा दुर्गम वनों को नष्ट कर देता है।
किन्तु उसके मन्दिर में लोग उसकी प्रशंसा के गीत गाते हैं।
10 जलप्रलय के समय यहोवा राजा था।
वह सदा के लिये राजा रहेगा।
11 यहोवा अपने भक्तों की रक्षा सदा करे,
और अपने जनों को शांति का आशीष दे।
समीक्षा
अधिकार की आवाज़
हमारे समाज में अत्यधिक आत्मिक भूख और ज़रूरत है। लोग आत्मिक ज्ञान और अनुभव की खोज में हैं। यह भजन हमें 'परमेश्वर की आवाज़' (पद - 3) की ओर संकेत करता है। दाऊद परमेश्वर की आवाज़ की अद्भुत ताकत, प्रताप और अधिकार का वर्णन करते हैं।
आजकल परमेश्वर की आवाज़ को सुनने का तरीका बाइबल के वचनों के द्वारा है। परमेश्वर के वचन आधिकारिक, शक्तिशाली और प्रतापी हैं: 'उसके मन्दिर में हर कोई घुटनों पर आकर महिमा ही महिमा बोलता रहता है' (पद - 9)। घुटनों पर आना यानि परमेश्वर की वाणी को सुनने का उचित तरीका है। मुझे हर दिन की शुरुवात में घुटनों पर आना बाइबल पढ़ना, और परमेश्वर की आवाज़ सुनना और यह पूछना अच्छा लगता है, 'प्रभु, आज आप मुझ से क्या कह रहे हैं? '
दाऊद यह कहकर शुरुवात करते हैं, 'यहोवा ही का गुणानुवाद करो, यहोवा की महिमा और सामर्थ को सराहो' (पद - 1)। सभी अधिकार, ताकत और सामर्थ परमेश्वर ही की है। फिर भी वह इसे खुद के लिए कभी नहीं रखते। जब आप उनकी आवाज़ सुनते हैं तो वह अपना अधिकार, ताकत और सामर्थ आपको देते हैं। दाऊद यह कहकर समाप्त करता है, 'परमेश्वर अपनी प्रजा को बल देगा; परमेश्वर अपनी प्रजा को शान्ति की आशीष देगा' (पद - 11)।
ये दो बातें हैं जिसकी हमें बेहद ज़रूरत है, जीवन में युद्ध का सामना करने के लिए (आंतरिक और बाहरी युद्ध)। हमें परमेश्वर की 'शक्ति' और उनकी 'शांति' की ज़रूरत है।
प्रार्थना
प्रभु, मैं आपको धन्यवाद देता हूँ कि आपने अपना अधिकार, ताकत और सामर्थ हमें दिया है। कृपया आज मुझे युद्ध के लिए बलवंत कीजिये और जीवन के तूफान के बीच में मुझे शांति दीजिये।
मरकुस 11:27-12:12
यीशु के अधिकार पर यहूदी नेताओं को संदेह
27 फिर वे यरूशलेम लौट आये। यीशु जब मन्दिर में टहल रहा था तो प्रमुख याजक, धर्मशास्त्री और बुजुर्ग यहूदी नेता उसके पास आये। 28 और बोले, “तू इन कार्यों को किस अधिकार से करता है? इन्हें करने का अधिकार तुझे किसने दिया है?”
29 यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुमसे एक प्रश्न पूछता हूँ, यदि मुझे उत्तर दे दो तो मैं तुम्हें बता दूँगा कि मैं यह कार्य किस अधिकार से करता हूँ। 30 जो बपतिस्मा यूहन्ना दिया करता था, वह उसे स्वर्ग से प्राप्त हुआ था या मनुष्य से? मुझे उत्तर दो!”
31 वे यीशु के प्रश्न पर यह कहते हुए आपस में विचार करने लगे, “यदि हम यह कहते हैं, ‘यह उसे स्वर्ग से प्राप्त हुआ था,’ तो यह कहेगा, ‘तो तुम उसका विश्वास क्यों नहीं करते?’ 32 किन्तु यदि हम यह कहते हैं, ‘वह मनुष्य से प्राप्त हुआ था,’ तो लोग हम पर ही क्रोध करेंगे।” (वे लोगों से बहुत डरते थे क्योंकि सभी लोग यह मानते थे कि यूहन्ना वास्तव में एक भविष्यवक्ता है।)
33 इसलिये उन्होंने यीशु को उत्तर दिया, “हम नहीं जानते।”
इस पर यीशु ने उनसे कहा, “तो फिर मैं भी तुम्हें नहीं बताऊँगा कि मैं ये कार्य किस अधिकार से करता हूँ।”
परमेश्वर का अपने पुत्र को भेजना
12यीशु दृष्टान्त कथाओं का सहारा लेते हुए उनसे कहने लगा, “एक व्यक्ति ने अगूंरों का एक बगीचा लगाया और उसके चारों तरफ़ दीवार खड़ी कर दी। फिर अंगूर के रस के लिए एक कुण्ड बनाया और फिर उसे कुछ किसानों को किराये पर दे कर, यात्रा पर निकल पड़ा।
2 “फिर अंगूर पकने की ऋतु में उसने उन किसानों के पास अपना एक दास भेजा ताकि वह किसानों से बगीचे में जो अंगूर हुए हैं, उनमें से उसका हिस्सा ले आये। 3 किन्तु उन्होंने पकड़ कर उस दास की पिटाई की और खाली हाथों वहाँ से भगा दिया। 4 उसने एक और दास उनके पास भेजा। उन्होंने उसके सिर पर वार करते हुए उसका बुरी तरह अपमान किया। 5 उसने फिर एक और दास भेजा जिसकी उन्होंने हत्या कर डाली। उसने ऐसे ही और भी अनेक दास भेजे जिनमें से उन्होंने कुछ की पिटाई की और कितनों को मार डाला।
6 “अब उसके पास भेजने को अपना प्यारा पुत्र ही बचा था। आखिरकार उसने उसे भी उनके पास यह कहते हुए भेज दिया, ‘वे मेरे पुत्र का तो सम्मान करेंगे ही।’
7 “उन किसानों ने एक दूसरे से कहा, ‘यह तो उसका उत्तराधिकारी है। आओ इसे मार डालें। इससे उत्तराधिकार हमारा हो जायेगा।’ 8 इस तरह उन्होंने उसे पकड़ कर मार डाला और अंगूरों के बगीचे से बाहर फेंक दिया।
9 “इस पर अंगूर के बगीचे का मालिक क्या करेगा? वह आकर उन किसानों को मार डालेगा और बगीचा दूसरों को दे देगा। 10 क्या तुमने शास्त्र का यह वचन नहीं पढ़ा है:
‘वह पत्थर जिसे कारीगरों ने बेकार माना,
वही कोने का पत्थर बन गया।’
11 यह प्रभु ने किया,
जो हमारी दृष्टि में अद्भुत है।’”
12 वे यह समझ गये थे कि उसने जो दृष्टान्त कहा है, उनके विरोध में था। सो वे उसे बंदी बनाने का कोई रास्ता ढूँढने लगे, पर लोगों से वे डरते थे इसलिये उसे छोड़ कर चले गये।
समीक्षा
परमेश्वर द्वारा दिया गया अधिकार
यीशु ने परमेश्वर द्वारा दिये गए अधिकार से बातें की और कार्य किया। उन्होंने प्रभु की आवाज़ सुनीं और उन्होंने परमेश्वर के ही शब्दों को कहा। यदि आप अधिकार से बोलना चाहते हैं तो उनके साथ समय बिताइये और उनकी आवाज़ सुनिये।
यह सभी को स्पष्ट है कि यीशु के पास अधिकार था। उनके विरोधियों ने केवल यही प्रश्न किया कि, 'यह अधिकार तुझे किस ने दिया है कि तू ये काम करे?' (11:28)। यीशु ने यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले के बारे में शानदार सवाल किया।
यीशु ने उन से पूछा, 'यूहन्ना का बपतिस्मा क्या स्वर्ग की ओर से था या मनुष्यों की ओर से था?' (पद - 30)। वे ना तो यह कहना चाहते थे कि उसे यह अधिकार मनुष्यों की ओर से मिला है क्योंकि लोग जानते थे कि वह एक सच्चे भविष्यवक्ता थे (पद - 32)।
मैंने एक बार एक प्रचारक को सुना था जिसका मानना था कि पवित्र आत्मा के आत्मिक वरदान प्रेरितों के युग में ही समाप्त हो गए थे, उनसे यह सवाल किया गया था, 'क्या पिन्तेकुस क्रांति परमेश्वर की गतिविधि थी?' आज के लेखांश में भी यह इसी तरह की प्रतिक्रिया को उजागर करता है – वह इस प्रश्न का जवाब नहीं दे पाए।
यह कहना कि 'यह गतिविधि परमेश्वर की ओर से थी' इस बात को प्रमाणित करता है कि, हमारे आधुनिक जगत में पवित्र आत्मा का आत्मिक वरदान उंडेला जा रहा है। और 'यह परमेश्वर की ओर से है' इस बात से इंकार करना यानि पूरी दुनिया में 600 मिलियन से भी ज़्यादा मसीही लोगों को पिन्तेकुस की क्रांति द्वारा परमेश्वर के अनुभव से इंकार करना है।
क्योंकि यीशु से सवाल करने वालों ने यीशु के इस सवाल का जवाब देने से इंकार कर दिया, इसलिए यीशु ने भी अपने अधिकार के बारे में उनके सवालों का जवाब देने से इंकार कर दिया। 'यीशु ने उन से कहा, मैं भी तुम को नहीं बताता, कि ये काम किस अधिकार से करता हूँ' (पद - 33)।
फिर यीशु दृष्टांत में बताते हैं, जिसका इरादा यह बताना था कि उन्हें यह अधिकार कहां से मिला है: 'तब उन्होंने उसे पकड़ना चाहा; क्योंकि वे समझ गए थे, कि उस ने हमारे विरोध में यह दृष्टान्त कहा है: पर वे लोगों से डरे; और उसे छोड़ कर चले गए' (12:12)।
यीशु का यह दृष्टांत उस मनुष्य के बारे में है 'जिसने दाख की बारी लगाई, और उसके चारों ओर बाड़ा बान्धा, और रस का कुंड खोदा, और गुम्मट बनाया; और किसानों को उसका ठेका देकर परदेश चला गया' (पद - 1)। यह दृष्टांत यशायाह 5:1-7 पर आधारित है जिसमें परमेश्वर स्वामी हैं और उनके लोग (विशेष रूप से लीडर्स) दाख की बारी हैं। यीशु के इस दृष्टांत में, परमेश्वर ने जिन दासों को भेजा था जिन्हें लोगों ने मार डाला था वे परमेश्वर के भविष्यवक्ता थे, जिसमे यूहन्ना बतिस्मा देने वाला भी शामिल है। फिर यीशु इस दृष्टांत में खुद का परिचय देते हैं: 'अब एक ही रह गया था, जो उसका प्रिय पुत्र था; अन्त में उस ने उसे भी उन के पास यह सोचकर भेजा कि वे मेरे पुत्र का आदर करेंगे' (मरकुस 12:6)।
यीशु ने बताया कि उनके पास असाधारण अधिकार हैं क्योंकि वह परमेश्वर के असाधारण पुत्र हैं। यहाँ पर प्रिय पुत्र और उनके वारिस और विभिन्न दासों के बीच स्पष्ट अंतर बताया गया है जिन्हें पहले भेजा गया था। फिर भी अद्भुत दूरदृष्टि से, यीशु यह बताते हैं कि, परमेश्वर का असाधारण पुत्र मारा जाएगा (पद - 7-8)।
फिर वह बताते हैं कि परमेश्वर के लोगों की (यानि चर्च के प्राचीन लीडर्स की) लीडरशिप नए लीडर्स को दी जाएगी जिसमें यीशु उनके सिरे के पत्थर होंगे: 'जिस पत्थर को राजमिस्त्रयों ने निकम्मा ठहराया था, वही कोने का सिरा हो गया?' (पद - 10; भजन संहिता 118:22 देखें)।
परमेश्वर के असाधारण पुत्र के पास असाधारण अधिकार हैं जैसा कि परमेश्वर के लोगों यानि असाधारण सिरे के पत्थर के पास था। उनकी सुनिये और आप भी अधिकार से बोलने लगेंगे जो कि उनके अधिकार का परिणाम है।
प्रार्थना
प्रभु, आपका धन्यवाद कि आप परमेश्वर के असाधारण पुत्र हैं जिन्होंने परमेश्वर के अधिकार से बोला था। मुझे अपने साथ घनिष्ठता से चलने में, आपकी आवाज़ सुनने में और अधिकार से आपके वचनों को कहने में मेरी मदद कीजिये।
लैव्यव्यवस्था 9:1-10:20
परमेश्वर द्वारा याजकों को स्वीकृती
9आठवें दिन, मूसा ने हारून और उसके पुत्रों को बुलाया। उस ने इस्राएल के बुजुर्गों (नेताओं) को भी बुलाया। 2 मूसा ने हारून से कहा, “अपने पशूओं में से एक बछड़ा और एक मेढ़ा लो। इन जानवरों में कोई दोष नहीं होना चाहिए। बछड़ा पापबलि होगा और मेढ़ा होमबलि होगा। इन जानवरों को यहोवा को भेंट करो। 3 इस्राएल के लोगों से कहो, ‘पापबलि हेतु एक बकरा लो। एक बछड़ा और एक मेमना होमबलि के लिए लो। बछड़ा और मेमना दोनों एक वर्ष के होने चाहिए। इन जानवरों में कोई दोष नहीं होना चाहिए। 4 एक साँड और एक मेढ़ा मेलबलि के लिए लो। उन जानवरों को और तेल मिली अन्नबलि लो और उन्हें यहोवा को भेंट चढ़ाओ। क्यों? कियोंकि आज यहोवा की महिमा तुम्हारे सामने प्रकट होगी।’”
5 इसलिए सभयी लोग मिलापवाले तम्बू में आए और वे सभयी उन चीज़ों को लाए जिनके लिए मूसा ने आदेश दिया था। सभी लोग यहोवा के सामने खड़े हुए। 6 मूसा ने कहा, “तुमने वही किया है जो यहोवा ने आदेश दिया। तुन लोग यहोवा की महिमा देखोगे।”
7 तब मूसा ने हारून से ये बातें कहीं, “जाओ और वह करो जिसके लिए यहोवा ने आदेश दिया था। वेदी के पास जाओ और पापबलि तथा होमबलि चढ़ाओ। यह सब अपने और लोगों के पापों के भुगतान के लिए करो। तुम लोगों की लायी हुई बलि को लो और उसे यहोवा को अर्पित करो। यह उनके पापों का भुगतान होगा।”
8 इसलिए हारून वेदी के पास गया। उसने बछड़े को पापबलि हेतु मारा। यह पापबलि स्वयं उसके अपने लिए थी। 9 तब हारून के पुत्र हारून के पास खून लाए। हारून ने अपनी उँगली खून में डाली और वेदी के सिरों पर इसे लगाया। तब हारून ने वेदी की नींव पर खून उँडेला। 10 हारून ने पापबलि से चर्बी, गुर्दे और कलेजे की चर्बी को लिया। उस ने उनहें वेदी पर जलाया। उसने उसी प्रकार किया जिस प्रकार यहोवा ने मूसा को आदेश दिया था। 11 तब हारून ने डेरे के बाहर माँस और चमड़े को जलाया।
12 इसके बादस, हारून ने होमबलि के लिए उस जानवर को मार। जानवर को टुकड़ों में काटा गाय। हारून के पुत्र खून को हारून के पास लाए और हारून ने वेदी के चारों ओर खून डाला। 13 हारून के पुत्रों ने उन टुकड़ों और होमबलि का सिर हारून को दिया। तब हारून ने उन्हें वेदी पर जलाया। 14 हारून ने होमबलि के भीतरी भागों और पैरों को धोया और उसने उन्हें वेदी पर जलाया।
15 तब हारून लोगों की बलि लाया। उसने लोगों के लिए पापबलि वाले बकरे को मारा। उसने बकरे को पहले की तरह पापबलि के लिए चढ़ाया। 16 हारून होमबलि को लाया और उसने वह बलि चढ़ाई। वैसे ही जैसे यहोवा ने आदेश दिया था। 17 हारून अन्नबलि को वेदी के पास लाया। उसने मुट्ठी भर अन्न लिया और प्रातः काल की नित्य बलि के साथ उसे वेदी पर रखा।
18 हारून ने लोगों के लिए मेलबलि के साँड और मेढ़े को मारा। हारून के पुत्र खून को हारून के पास लाए। हारून ने इस खून को वेदी के चारों ओर उँडेला। 19 हारून के पुत्र साँड और मेढ़े की चर्बी भी लाए। वे चर्बी भरी पूँछ, भीतरी भागों को ढकने वाली चर्बी, गुर्दे और कलेजे को ढकने वाली चर्बी भी लाए। 20 हारून के पुत्रों ने चर्बी के इन भागों को साँड और मेढ़े की छातियों पर रखा। हारून ने चर्बी के भागों को लेकर उसे वेदी पर जलाया। 21 मूसा के आदेश के अनुसार हारून ने छातियों और दायीं जाँघ को उत्तोलन भेंट के लिए यहोवा के सामने हाथों में ऊपर उठाया।
22 तब हारून ने अपने हाथ लोगों की ओर उठाए और उन्हें आशीर्वाद दिया। हारून पापबलि, होमबलि और मेलबलि को चढ़ाने के बाद वेदी से नीचे उतर आया।
23 मूसा और हारून मिलापवाले तम्बू में गए और फिर बाहर आकर उन्होंने लोगों को आशीर्वाद दिया। यबोवा की उपस्थिति से सभी लोगों के सामने तेज प्रकट हुआ। 24 यहोवा से अग्नि प्रकट हुई और उसने वेदी पर होमबलि और चर्बी को जलाया। सभी लोगों ने जब यह देखा तो वे चिल्लाए और उन्होंने धरती पर गिरकर प्रणाम किया।
परमेश्वर की ज्वाला द्वारा विनाश
10फिर तभी हारून के पुत्रों नादाब और अबीहू ने पाप किया। दोनों पुत्रों ने लोबान जलाने के लिए तश्तरी ली। उन्होंने एक अलग ही आग का प्रयोग किया और लोबान को जलाया। उन्होंने उस आग का उपयोग नहीं किया जिसके उपयोग का आदेश मूसा ने उन्हें दिया था। 2 इसलिए योहव से ज्वाला प्रकट हुई और उसने नादाब और अबीहू को नष्ट कर दीया। वे यहोवा के सामने मरे।
3 तब मूसा ने हारून से कहा, “यहोवा कहता है, ‘जो याजक मेरे पास आए, उन्हें मेरा सम्मान करना चाहिए! मैं उन के लिए और सब ही के लिये पवित्र माना जाऊँ।’” इसलिए हारून अपने मरे हुए पुत्रों के लिए खामोश रहा।
4 हारून के चाचा उज्जीएल के दो पुत्र थे। वे मीशाएल और एलसाफान थे। मूसा ने उन पुत्रों से कहा, “पवित्र स्थान के सामने के भगा में जाओ। अपने चचेरे भाईयों के शवों को उठाओ और उन्हें डेरे के बाहर ले जाओ।”
5 इसलिए मीशाएल और इलसाफान ने मूसा का आदेश माना। वे नादाब और अबीहू के शवों को बाहर लाए। नादाब और अबीहू तब तक अपने विशेष अन्तःवस्त्र पहने थे।
6 तब मूसा ने हारून और उसके अन्य पुत्रों एलीआजार और ईतामार से बात की। मूसा ने उनसे कहा, “कोई शोक प्रकट न करो! अपने वस्त्र न फाड़ो या अपने बालों को न बिखरो! शोक प्रकट न करो, तुम मरोगे नहीं और योहवा तुम सभी लोगों से अप्रसन्न नहीं होगा। इस्राएल का पूरा राष्ट्र तुम लोगों का सम्बन्धी है। वे यहोवा द्वारा नादाब और अबीहू के जलाने के विषय में रो पीट सकते हैं। 7 किन्तु तुम लोगों को मिलापवाले तम्बू भी नहीं छोड़ना चाहिए । यदि तुम लोग उस द्वार से बाहर जाओगे तो मर जाओगे। क्यों क्योंकि यहोवा के अभिषेक का तेल तुम ने लगा रखा है।” सो हारून एलीआजार और ईतामार ने मूसा की आज्ञा मानी।
8 तब योहा ने हारून से कहा, 9 “तुम्हें और तम्हारे पुत्रों को दाखमधु या मध उस समय नहीं पीनी चाहिए जब तुम लोग मिलापवाले तम्बू में आओ। यदि तुम ऐसा करोगे तो मर जाओगे! यह नियम तुम्हारी पीढ़ियों में सदा चलता रहेगा। 10 तुम्हें, जो चीज़ें पवित्र हैं तथा जो पवित्र नहीं हैं, जो शुद्ध हैं और जो शुद्ध नहीं हैं उनमें अन्तर करना चाहिए। 11 यहोवा ने मूसा को अपने नियम दिए और मूसा ने उन नियमों को लोगों को दिया। “हारून तुम्हें उन सभी नियमों की शिक्षा लोगों को देना चाहिए।”
12 अभी तक हारून के दो पुत्र एलीआज़ार और ईतामार जीवित थे। मूसा ने हारून और उसके दोनों पुत्रों से बात की। मूसा ने कहा, “कुछ अन्नबलि उन बलियों में से बची हैं जो आग में जलाई गई थीं। तुम लोग अन्नबलि का वह भाग खाओगे। किन्तु तुम लोगों को इसे बिना ख़मीर मिलाए खाना चाहिए। इसे वेदी के पास खाओ। क्यों क्योंकि वह भेंट बहुत पवित्र है। 13 वह उस भेंट का भाग है, जो यहोवा के लिए आग में जलाई गई थी और जो नियम मैंने तुमको बताया, वह सिखाता है कि वह भाग तुम्हारा और तम्हारे पुत्रों का है। किन्तु तुम्हें इसे पवित्र स्थान पर ही खाना चाहिए।
14 “तुम, तुम्हारे पुत्र और तुम्हारी पुत्रियाँ भी उत्तोलन बलि से छाती को और मेलबलि से जाँघ को खा सकेंग। इन्हें तुम्हें किसी पवित्र स्थान पर नहीं खाना है। बल्कि तुम्हें इन्हें किसी शुद्ध स्थान पर खाना चाहिए। क्यों क्योंकि ये मेलबलियों में से मिली है। इस्रएल के लोग ये बलि यहोवा को देते हैं। उन जानवरों के कुछ भाग को लोग खाते हैं किन्तु छाती और जाँघ तुम्हारा भाग है। 15 लोगों को अपने जानवरों की चर्बी आग में जलाई जाने वाली बलि के रूप में लानी चाहिए। उन्हें मेलबलि की जाँध और उत्तोलन बलि की छाती भी लानी चाहिए। उसे यहोवा के सामने उत्तोलित करना होगा और यह बलि तुम्हारा भाग होगा। यह तुम्हारा और तुम्हारे बच्चों का होगा। योहवा के आदेश के अनुसार बलि का वह भाग सदा तुम्हारा होगा।”
16 मूसा ने पापबलि के बकरे के बारे में पूछा। किन्तु उसे पहले ही जला दिया गया था। मूसा हारून के शेष पुत्रों एलीआज़ार और ईतामार पर बहुत क्रोधित हुआ। मूसा ने कहा, 17 “तुम लोगों को यह बकरा पवित्र स्थान पर खाना था। यह बहुत पवित्र है! तुम लोगों ने इसे यहोवा के सामने क्यों नहीं खाया? यहोवा ने उसे तुम लोगों के अपराधों को दूर करने के लिए दिया। वह बकरा लोगों के पापों के भुगतान के लिए था। 18 देखो! तुम उस बकरे का खून पवित्र स्थान के भीतर नहीं लाए। तुम्हें इस बकरे को पवित्र स्थान पर खाना था जैसा कि मैंने आदेश दिया है।”
19 किन्तु हारून ने मूसा से कहा, “सुनों, आज वे अपनी पापबलि और होमबलि यहोवा के सामने लाए। किन्तु तुम जानते हो कि आज मेरे साथ क्या हुआ! क्या तुम यह समझते हो कि यदि मैं पापबलि को आज खाऊँगा तो यहोव प्रसन्न होगा? नहीं!”
20 जब मूसा ने यह सुना तो वह सहमत हो गया।
समीक्षा
यीशु का अधिकार
परमेश्वर की उपस्थिति में आना एक अद्भुत बात है – 'तब यहोवा का तेज सारी जनता को दिखाई दिया….. इसे देखकर जनता ने जयजयकार का नारा लगाया, और अपने अपने मुंह के बल गिरकर दंडवत किया ' (9:23-24)।
नादाब और अबीहू (10:1-2) के उदाहरण हमें यह दर्शाता है कि परमेश्वर की उपस्थिति का फायदा कभी नहीं उठाना चाहिये। हमारे युग में लोग अक्सर परमेश्वर के साथ संबंध बनाना चाहते हैं लेकिन वे इसे खुद की शर्तों पर और खुद के तरीके से चाहते हैं। फिर भी, केवल यीशु के कारण आप परमेश्वर की उपस्थिति में साहस से आ सकते हैं वह भी बिना किसी डर के जैसा कि नादाब और अबीहू आग से भस्म हो गए थे।
पुराने नियम में बलि की जटिल प्रक्रिया द्वारा परमेश्वर की उपस्थिति में प्रवेश कर पाना संभव था। महायाजक को खुद के लिए और लोगों के लिए भी बलिदान चढ़ाना पड़ता था (9:7-8)। क्योंकि महायाजक एक मनुष्य हुआ करता था, जैसे कि हम कमज़ोर और पापी हैं, उसे खुद के साथ - साथ लोगों के पापों के लिए भी बलिदान चढ़ाना पड़ता था।
यीशु के पास असाधारण अधिकार था। वह पापमुक्त महायाजक हैं। जैसा कि इब्रानियों के लेखक लिखते हैं: 'सो ऐसा ही महायाजक हमारे योग्य था, जो पवित्र, और निष्कपट और निर्मल, और पापियों से अलग, और स्वर्ग से भी ऊंचा किया हुआ हो। और उन महायाजकों की नाईं उसे आवश्यक नहीं कि प्रति दिन पहले अपने पापों और फिर लोगों के पापों के लिये बलिदान चढ़ाए; क्योंकि उस ने अपने आप को बलिदान चढ़ाकर उसे एक ही बार निपटा दिया' (इब्रानियों 7:26-27)।
इसके परिणाम स्वरूप, यीशु के द्वारा आप परमेश्वर की पवित्र उपस्थिति में प्रवेश कर सकते हैं: 'सो हे भाइयो, जब कि हमें यीशु के लोहू के द्वारा उस नए और जीवते मार्ग से पवित्र स्थान में प्रवेश करने का हियाव हो गया है। जो उस ने परदे अर्थात अपने शरीर में से होकर, हमारे लिये अभिषेक किया है, और इसलिये कि हमारा ऐसा महान याजक है, जो परमेश्वर के घर का अधिकारी है। तो आओ; हम सच्चे मन, और पूरे विश्वास के साथ, और विवेक को दोष दूर करने के लिये हृदय पर छिड़काव लेकर, और देह को शुद्ध जल से धुलवा कर परमेश्वर के समीप जाए' (10:19-22)।
आज आप परमेश्वर की उपस्थिति में आ सकते हैं और उनकी आवाज़ सुन सकते हैं, और उनका बल तथा उनकी शांति पा सकते हैं और अधिकार के साथ बोल सकते हैं जो परमेश्वर की आवाज़ सुनने से आती है।
प्रार्थना
प्रभु, आपका धन्यवाद कि अब मैं यीशु के लहू के द्वारा अति पवित्र स्थान में प्रवेश कर सकता हूँ। आज मैं सच्चे दिल से और संपूर्ण विश्वास से परमेश्वर के समीप आना चाहता हूँ और अधिकार से बोलना चाहता हूँ जो परमेश्वर की आवाज़ सुनने से आता है।
पिप्पा भी कहते है
भजन संहिता 29:11
'परमेश्वर अपनी प्रजा को बल देगा; यहोवा अपनी प्रजा को शान्ति की आशीष देगा'
हरदिन मुझे यही चाहिये: उनकी 'शांति' और उनका 'बल'।

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संदर्भ
नोट्स:
जहाँ पर कुछ बताया न गया हो, उन वचनों को पवित्र बाइबल, न्यू इंटरनैशनल संस्करण एन्ग्लिसाइड से लिया गया है, कॉपीराइट © 1979, 1984, 2011 बिबलिका, पहले इंटरनैशनल बाइबल सोसाइटी, हूडर और स्टोगन पब्लिशर की अनुमति से प्रयोग किया गया, एक हॅचेट यूके कंपनी सभी अधिकार सुरक्षित। ‘एनआईवी’, बिबलिका यू के का पंजीकृत ट्रेडमार्क संख्या 1448790 है।
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