दिन 63

जीवन भर का अनुग्रह

बुद्धि भजन संहिता 30:1-7
नए करार मरकुस 12:13-27
जूना करार लैव्यव्यवस्था 11:1-12:8

परिचय

जब मैं विश्वविद्यालय में था तब मैंने एक बातचीत में हिस्सा लिया था, जिसका शीर्षक था 'आप दस साल बाद कहाँ होंगे?' इसका उद्देश्य था - विश्वविद्यालय के बाद जीवन की सभी चुनौतियों का सामना करते समय प्रोत्साहित रहना। मुझे याद है उस समय मैं सोच रहा था, 'दस साल! यह जीवन का लंबा समय है।' मैं इतनी दूर की सोच भी नहीं रख सकता था।

इसके विपरीत, जब मैं अपने जीवन में पीछे देखता हूँ तो दस साल, मुझे गुज़रे हुए कल के समान लगते हैं। जीवन तेज़ी से गुज़रे गया। ऐसा लगता है कि समय तेजी से भाग रहा है। अब मैं उनकी बुद्धिमानी को समझ पाया हूँ जिन्होंने हमें दूर की देखने के लिए प्रोत्साहित किया था।

हम तुरंत संतुष्टि पाने वाले समाज में जी रहे हैं। तुरंत रोकड़ा, तुरंत क़र्ज़, तुरंत गलत लेन – देन, तुरंत किस्मत की जीत। आतंकवाद का बड़ा खतरा बना रहता है। आज का लेखांश हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर, 'सनातन परमेश्वर हैं' (यशायाह 40:48)। परमेश्वर चीज़ों को दूरदृष्टि से देखते हैं: वह दूर की देखते हैं और वह चाहते हैं कि आप जीवन भर उनके अनुग्रह का आनंद लें।

बुद्धि

भजन संहिता 30:1-7

मन्दिर के समर्पण के लिए दाऊद का एक पद।

30हे यहोवा, तूने मेरी विपत्तियों से मेरा उद्धार किया है।
 तूने मेरे शत्रुओं को मुझको हराने और मेरी हँसी उड़ाने नहीं दी।
 सो मैं तेरे प्रति आदर प्रकट करुँगा।
2 हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मैंने तुझसे प्रार्थना की।
 तूने मुझको चँगा कर दिया।
3 कब्र से तूने मेरा उद्धार किया, और मुझे जीने दिया।
 मुझे मुर्दों के साथ मुर्दों के गर्त में पड़े हुए नहीं रहना पड़ा।

4 परमेश्वर के भक्तों, यहोवा की स्तुति करो!
 उसके शुभ नाम की प्रशंसा करो।
5 यहोवा क्रोधित हुआ, सो निर्णय हुआ “मृत्यु।”
 किन्तु उसने अपना प्रेम प्रकट किया और मुझे “जीवन” दिया।
 मैं रात को रोते बिलखाते सोया।
 अगली सुबह मैं गाता हुआ प्रसन्न था।

6 मैं अब यह कह सकता हूँ, और मैं जानता हूँ
 यह निश्चय सत्य है, “मैं कभी नहीं हारुँगा!”
7 हे यहोवा, तू मुझ पर दयालु हुआ
 और मुझे फिर अपने पवित्र पर्वत पर खड़े होने दिया।
 तूने थोड़े समय के लिए अपना मुख मुझसे फेरा
 और मैं बहुत घबरा गया।

समीक्षा

जीवन का लंबा दृष्टिकोण

क्या आप मुश्किल दौर से गुज़र रहे हैं? क्या आपको लगता है कि यह सदा के लिए बना रहेगा?

परमेश्वर का अनुग्रह जीवन भर का है (पद - 5)। जब दाऊद अपने जीवन में पीछे देखते हैं, तो वह धन्यवाद और स्तुति से भर जाते हैं (पद - 4)। हाँ, वह बड़े मुश्किल दौर से गुजरे थे। लेकिन परमेश्वर ने उन्हें अधोलोक में से निकाला और उनके शत्रुओं को उन पर आनंदित होने नहीं दिया (पद - 1)। जब उन्होंने परमेश्वर से मदद मांगी, तो परमेश्वर ने उन्हें चंगा किया (पद - 2)।

'हे मेरे परमेश्वर, मैं ने तेरी दोहाई दी और तू ने मझे चंगा किया है। हे परमेश्वर, तू ने मेरा प्राण अधोलोक में से निकाला है, तू ने मुझ को जीवित रखा और कब्र में पड़ने से बचाया है' (पद - 2-3)।

दाऊद ऐसे समय से गुज़रे थे जब परमेश्वर उस पर क्रोधित थे (पद - 5) और जब परमेश्वर ने उनसे अपना चेहरा छिपा लिया था (पद - 7ब)। (क्योंकि दाऊद ने व्यभिचार और हत्या की थी)। फिर भी जब वह अपने जीवन में पीछे देखते हैं तो उन्हें दु:ख और परीक्षा के समय में परमेश्वर के जीवन भर का अनुग्रह नज़र आता है।

प्रार्थना

पिता, आपका धन्यवाद कि आपका क्रोध क्षण भर का होता है लेकिन आपका अनुग्रह जीवन भर बना रहता है। आपका धन्यवाद कि आप कल, आज और कल एक जैसे हैं और मैं आप पर भरोसा कर सकता हूँ।

नए करार

मरकुस 12:13-27

यीशु को छलने का प्रयत्न

13 तब उन्होंने कुछ फरीसियों और हेरोदियों को उसे बातों में फसाने के लिये उसके पास भेजा। 14 वे उसके पास आये और बोले, “गुरु, हम जानते हैं कि तू बहुत ईमानदार है और तू इस बात की तनिक भी परवाह नहीं करता कि दूसरे लोग क्या सोचते हैं। क्योंकि तू मनुष्यों की है सियत या रुतवे पर ध्यान दिये बिना प्रभु के मार्ग की सच्ची शिक्षा देता है। सो बता कैसर को कर देना उचित है या नहीं? हम उसे कर चुकायें या न चुकायें?”

15 यीशु उनकी चाल समझ गया। उसने उनसे कहा, “तुम मुझे क्यों परखते हो? एक दीनार लाओ ताकि मैं उसे देख सकूँ।” 16 सो वे दीनार ले आये। फिर यीशु ने उनसे पूछा, “इस पर किस का चेहरा और नाम अंकित है?” उन्होंने कहा, “कैसर का।”

17 तब यीशु ने उन्हें बताया, “जो कैसर का है, उसे कैसर को दो और जो परमेश्वर का है, उसे परमेश्वर को दो।” तब वे बहुत चकित हुए।

सदूकियों की चाल

18 फिर कुछ सदूकी, (जो पुनर्जीवन को नहीं मानते) उसके पास आये और उन्होंने उससे पूछा, 19 “हे गुरु, मूसा ने हमारे लिये लिखा है कि यदि किसी का भाई मर जाये और उसकी पत्नी के कोई बच्चा न हो तो उसके भाई को चाहिये कि वह उसे ब्याह ले और फिर अपने भाई के वंश को बढ़ाये। 20 एक बार की बात है कि सात भाई थे। सबसे बड़े भाई ने ब्याह किया और बिना कोई बच्चा छोड़े वह मर गया। 21 फिर दूसरे भाई ने उस स्त्री से विवाह किया, पर वह भी बिना किसी संतान के ही मर गया। तीसरे भाई ने भी वैसा ही किया। 22 सातों में से किसी ने भी कोई बच्चा नहीं छोड़ा। आखिरकार वह स्त्री भी मर गयी। 23 मौत के बाद जब वे लोग फिर जी उठेंगे, तो बता वह स्त्री किस की पत्नी होगी? क्योंकि वे सातों ही उसे अपनी पत्नी के रूप में रख चुके थे।”

24 यीशु ने उनसे कहा, “तुम न तो शास्त्रों को जानते हो, और न ही परमेश्वर की शक्ति को। निश्चय ही क्या यही कारण नहीं है जिससे तुम भटक गये हो? 25 क्योंकि वे लोग जब मरे हुओं में से जी उठेंगे तो उनके विवाह नहीं होंगे, बल्कि वे स्वर्गदूतों के समान स्वर्ग में होंगे। 26 मरे हुओं के जी उठने के विषय में क्या तुमने मूसा की पुस्तक में झाड़ी के बारे में जो लिखा गया है, नहीं पढ़ा? वहाँ परमेश्वर ने मूसा से कहा था, ‘मैं इब्राहीम का परमेश्वर हूँ, इसहाक का परमेश्वर हूँ और याकूब का परमेश्वर हूँ।’ 27 वह मरे हुओं का नहीं, बल्कि जीवितों का परमेश्वर है। तुम लोग बहुत बड़ी भूल में पड़े हो!”

समीक्षा

अनंतकाल की दूरदृष्टि

जब लोग मर जाते हैं, तो क्या होता है? क्या सच में मृत्यु ही अंत है? आपका कोई प्रियजन या परिवार का सदस्य मर गया होगा और आप पूछते होंगे कि क्या आप उन्हें कभी नहीं देख पाएंगे? अब वे कहाँ हैं? क्या वे हमेशा के लिए चले गए हैं? या वे सो रहे हैं? या वे कहीं पर जीवित हैं?

यीशु के विरोधी अपने प्रश्नों से उन्हें लगातार फंसाने की कोशिश कर रहे थे (पद - 13)।

पहले उन लोगों ने धन के बारे में फंसाने की कोशिश की। मगर, वे जान गए कि यीशु 'ईमानदार' हैं। वे जानते थे कि यीशु ने सच ही कहा है, चाहें यह लोगों को पसंद आया हो या नहीं (पद - 14)।

फिर उन्होंने उनकी परीक्षा लेने के लिए यीशु से कपटपूर्ण सवाल किये। यह जीवन और मृत्यु के बारे में था। यहूदियों तथा फरीसियों और सदूकियों की प्रथा में मृत्यु के बाद जीवन के बारे में आंतरिक मतभेद था। \[जैसा कि मुझे याद है, गहरा मतभेद यह था कि फरीसी ('फार आई सी - far I see’) लोग मृत्यु के बाद फिर से जी उठने पर विश्वास करते थे, जबकि सदूकी ('सैड यू सी - sad you see’) मृत्यु के बाद फिर से जी उठने पर विश्वास नहीं करते थे।\]

यीशु ने बताया कि सदूकी दो कारणों से गलत थे: पहला, उन्हें वचनों की जानकारी नहीं थी, और दूसरा, वे परमेश्वर की सामर्थ को नहीं जानते थे (पद - 24)।

  1. वचन
  • यीशु इस बात की पुष्टि करते हैं कि मृत्यु के बाद भी जीवन है। क्योंकि सदूकी केवल पिन्तेकुस (बाइबल की पहली पाँच पुस्तकों) पर ही विश्वास करते थे, यीशु ने उसी आधार पर उनसे वाद - विवाद किया और उन्हें निर्गमन 3:6 से बताया: 'मरे हुओं के जी उठने के विषय में क्या तुम ने मूसा की पुस्तक में झाड़ी की कथा में नहीं पढ़ा, कि परमेश्वर ने उस से कहा? मैं अब्राहम का परमेश्वर, और इसहाक का परमेश्वर, और याकूब का परमेश्वर हूँ? परमेश्वर मरे हुओं का नहीं, वरन जीवतों का परमेश्वर है' (मरकुस 12:26-27) दूसरे शब्दों में, अब्राहम, इसहाक और याकूब अब भी जीवित हैं!
  1. परमेश्वर की सामर्थ
  • 1 कुरिंथियों 15 में मरे हुओं में से जी उठने के विषय में नये नियम का सबसे अनवरत और गहरा स्पष्टीकरण है। पौलुस बार - बार परमेश्वर की सामर्थ पर ज़ोर देते हैं, जिसके बारे में सदूकियों ने इंकार किया था। वह लिखते हैं, 'वह अनादर के साथ बोया जाता है, और तेज के साथ जी उठता है; निर्बलता के साथ बोया जाता है; और सामर्थ के साथ जी उठता है' (1कुरिंथिंयों 15:43)। परमेश्वर हमें प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जय देते हैं (पद - 56-57)।
  • आश्चर्यजनक सच्चाई यह है कि जो सामर्थ मसीह के फिर से जी उठने के समय में थी वही सामर्थ आज भी आप में कार्य कर रही है, और भविष्य में भी कार्य करती रहेगी, वह आपको ज्यादा से ज्यादा मसीह की समानता में ला रही है (इफीसीयों 1:19-20 देखें)।
  • इसलिए जो कोई मसीह में मरा है वह अब भी जीवित है। आप उन्हें दोबारा देखेंगे। हालाँकि वियोग बहुत ही कठिन है, फिर भी जीवन के सभी संघर्षों को अनंत की दृष्टि से देखना चाहिये। परमेश्वर दूर की देखते हैं।

प्रार्थना

प्रभु आपका बहुत - बहुत धन्यवाद कि, यह जीवन का अंत नहीं है। आपका धन्यवाद कि मरे हुए फिर से जी उठेंगे। जीवन के सारे संघर्षों को अनंत की दृष्टि से देखने में मेरी मदद कीजिये।

जूना करार

लैव्यव्यवस्था 11:1-12:8

माँस भोजन के नियम

11यहोवा ने मूसा और हारून से कहा, 2 “इस्राएल के लोगों से कहो: ये जानवर हैं जिन्हें तुम खा सकते हो: 3 यदि जानवर के खुर दो भागों में बँटे हों और वह जानवर जुगाली भी करता हो तो तुम उस जानवर का माँस खा सकते हो।

ऐसे जानवर जिनका माँस नहीं खाना चाहिए

4-6 “कुछ जानवर जुगाली करते हैं, किन्तु उनके खुर फटे नहीं होते। तो ऐसे जानवरों को मत खाओ—ऊँट, शापान और खरगोश वैसे हैं, इसलिए वे तुम्हारे लिए अपवित्र हैं। 7 अन्य जानवर दो भागों में बँटी खुरों वाले हैं, किन्तु वे जुगाली नहीं करते। उन जानवरों को मत खाओ। सुअर बैसे ही हैं, अतः वे तुम्हारे लिए अशुद्ध हैं। 8 उन जानवरों का माँस मत खाओ! उनके शव को छूना भी मत वे तुम्हारे लिए अशुद्ध हैं!

समुद्री भोजन के नियम

9 “यदि कोई जानवर समुद्र या नदी में रहता है और उसके पंख और परतें हैं तो तुम उस जानवर को खा सकते हो। 10-11 किन्तु यदि जानवर समुद्र या नदी में रहता है और उसके पंख और परतें नहीं होतीं तो उस जानवर को तुम्हें नहीं खाना चाहिए। वह गन्दे जानवरों में से एक है। उस जानवर का माँस मत खाओ। उसके शव को छूना भी मत! 12 तुम्हें पानी के हर एक जानवर को, जिसके पंख और परतें नहीं होतीं, उसे घिनौने जानवरों में समझना चाहिए।

अभोज्य पक्षी

13 “तुम्हें निम्न पक्षियों को भी घिनौने पक्षी समझना चाहिए। इन पक्षियों में से किसी को मत खाओ: उकाब, गिद्ध, शिकारी पक्षी, 14 चील, सभी प्रकार के बाज नामक पक्षी, 15 सभी प्रकार के काले पक्षी, 16 शुतुर्मर्ग, सींग वाला उल्लू, समुद्री जलमुर्ग, सभी प्रकार के बाज, 17 उल्लू, समुद्री काग, बड़ा उल्लू, 18 जलमुर्ग, मछली खानेवाले पेलिकन नामक खेत जलपक्षी, समुद्री गिद्ध, 19 हंस, सभी प्रकार के सारस, कठफोड़वा और चमगादड़।

कीटपतंगों को खाने के नियम

20 “और सभी ऐसे कीट पतंगे जिनके पंख होते हैं तथा जो रेंग कर चलते भी हैं। ये घिनौने कीट पतंगे हैं! 21 किन्तु यदि पतंगों के पंख हैं और वह रेंग कर चलता भी हो तथा उसके पैरों के ऊपर टांगों में ऐसे जोड़ हैं कि वह उछल सके तो तुम उन पतंगों को खा सकते हो। 22 ये पतंगे हैं जिनहें तुम खा सकते होः हर प्रकार की टिड्डियाँ, हर प्रकार की सपंख टिड्डियाँ, हर प्रकार के झींगुर हर प्रकार के टिड्डे।

23 “किन्तु अन्य सभी वे कीट पतंगे जिनके पंख हैं और जो रेंग भी सकते हैं, तुम्हारे लिए घिनौने प्राणी हैं। 24 वे कीट पतंगे तुमको असुद्ध करेंगे। कोई व्यक्ति जो मरे कीट पतंगे को छूएगा, सन्ध्या तक अशुद्ध रहेगा। 25 यदि कोई मरे कीट पतंगो में से किसी को उठाता है तो उस व्यक्ति को अपने कपड़े धो लेने चाहिए। वह व्यक्ति सन्ध्या तक अशुद्ध रहेगा।

घिनौने जानवरों के विषय में अन्य नियम

26-27 “कुछ जानवरों के घुर फटे होते हैं किन्तु खुर के ठीक ठीक दो भाग नहीं होते। कुछ जानवर जुगाली नहीं करते। कुछ जानवरों के घुर नहीं होते, वे अपने पंजों पर चलते हैं ऐसे सभी जानवर तुम्हारे लिए घनौने हैं। कोई व्यक्ति, जो उन्हें छूयेगा अशुद्ध हो जाएगा। वह व्यक्ति सन्ध्या तक अशुद्ध रहेगा। 28 यदि कोई व्यक्ति उनके मरे शरीर को उठाता है तो उस व्यक्तति को अपने वस्त्र धोने चाहिए। वह व्यक्ति सन्ध्या तक अशुद्ध रहेगा। वे जानवर तुम्हारे लिए अशुद्ध हैं।

रेंगेने वाले जानवरों के बारे में नियम

29 “ये रेंगने वाले जानवर तुम्हारे लिए घिनौने हैं: छछून्दर, चूहा, सभी प्रकार के बड़े गिरगिट, 30 छिपकली, मगरमच्छ, गिरगिट, रेगिस्तानी गोहेर, और रंग बदलता गिरगिट। 31 ये रेंगने वाले जानवर तुम्हारे लिये घिनौने हैं। कोई व्यक्ति जो उन मरे हुओं को छूएगा सन्ध्या तक अशुद्ध रहेगा।

घिनौने जानवरों के बारे में नियम

32 “यदि किसी घिनौने जानवरों में से कोई मरा हुआ जानवर किसी चीज़ पर गिरे तो वह चीज़ अशुद्ध हो जाएगी। यह लकड़ी, चमड़ा, कपड़ा, शोक वस्त्र या कोई भी औजार हो सकात है। जो कुछ भी वह हो उसे पानी से धोना चाहिए। यह सन्ध्या तक अशुद्ध रहेगा। तब यह फिर शुद्ध हो जाएगा। 33 यदि उन गन्दे जानवरों में से कोई मरा हुआ मिट्टी के कटोरे में गिरे तो कटोरे की कोई भी चीज़ अशुद्ध हो जाएगी। तुम्हें कटोरा अवश्य तोड़ देना चाहिए। 34 यदि अशुद्ध मिट्टी के कटोरे का पानी किसी भोजन पर पड़े तो भोजन अशुद्ध हो जाएगा। अपवित्र कटोरे में कोई भी दाखमधु अशुद्ध हो जाएगी। 35 यदि किसी मरे हुए घिनौने जानवर का कोई भाग किसी चीज़ पर आ पड़े तो वह चीज शुद्ध नहीं रहेगी। इसे टुकडे—टुकड़े कर देन चाहिए। चाहे वह चूल्हा हो चाहे कड़ाही। वे तुम्हारे लिए सदा अशुद्ध रहेंगी।

36 “कोई सोता या कुआँ जिसमें पानी रहता है, शुद्ध बना रहेगा किन्तु कोई व्यक्ति जो किसी मरे घिनौने जानवर को छूयेगा, अशुद्ध हो जाएगा 37 यदि उन घिनौने मरे जानवरों का कोई भाग बोए जाने वाले बीज पर आ पड़े तो भी वह शुद्ध ही रहेगा। 38 किन्तु भिगोने के लिए यदि तुम कुछ बीजों पर पानी डालेते हो और तब यदि मरे घिनौने जानवर का कोई भाग उन बीजों पर आ पड़े तो वे बीज तुम्हारे लिए अशुद्ध हैं।

39 “और भी, यदि भोजन के लिए उपयुक्त कोई जानवर अपने आप मर जाए तो जो व्यक्ति उसके मरे शरीर को छूयेगा, सन्ध्या तक अशुद्ध रहेगा 40 और उस व्यक्ति को अपने वस्त्र धोने चाहिए। जो उस मृत जानवर के शरीर का माँस खाए। वह व्यक्ति सन्ध्या तक अशुद्ध रहेगा। जो व्यक्ति मरे जानवर के शरीर को उठाएगा उसे भी अपने वस्त्रों को धोना चाहिए। यह व्यक्ति सन्ध्या तक अशुद्ध रहेगा।

41 “हर एक ऐसा जानवर जो धरती पर रेंगता है, वो उन जानवरों में से एक है, जिसे यहोवा ने खाने को मना किया है। 42 तुम्हें ऐसे किसी भी रेंगने वाले जानवर को नहीं खाना चाहिए जो पेट के बल रेंगता है या चारों पैरों पर चलता है, या जिसके बहुत से पैर हैं। ये तुम्हारे लिए घिनौने जानवर हैं! 43 उन घिनौने जानवरों से अपने को अशुद्ध मत बनाओ। तुम्हें उनके साथ अपने को अशुद्ध नहीं बनाना चाहिए! 44 क्यों क्योंकि में तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ! मैं पवित्र हूँ इसलिए तुम्हें अपने को पवित्र रखना चाहिए! उन घिनौने रेंगने वाले जानवरों से अपने को घोनौना न बनाओ! 45 मैं तुम लोगों को मिस्र से लाया। मैंने यह इसलिए किया कि तुम लोग मेरे विशेष जन बने रह सको। मैंने यह इसलिए किया कि मैं तुमहार परमेश्वर बन सकूँ। मैं पवित्र हूँ अतः तम्हें भी पवित्र रहना है!”

46 वे नियम सभी मवेशियों, पक्षियों और धरती के अन्य जानवरों के लिए हैं। वे नियम समुद्र में रहने वाले सभी जानवरों और धरती पर रेंगने वाले सभी जानवरों के लिए हैं। 47 वे उपदेश इसलिए हैं कि लोग शुद्ध जानवरों और घिनौने जानवरों में अन्तर कर सकें। इस, प्रकार लोग जानेंगे कि कौन सा जानवर खाने योग्य है और कौन सा खाने योग्य नहीं है।

नयी माताओं के लिए नियम

12यहोवा ने मूसा से कहा, 2 “इस्राएल के लोगों से कहोः

“यदि कोई स्त्री एक लड़के को जन्म देती है तो वह स्त्री सात दिन तक अशुद्ध रहेगी। यह उसके रक्त स्राव के मासिकधर्म के समय अशुद्ध होने की तरह होगा। 3 आठवें दि लड़के का खतना होना चाहिए। 4 खून की हानि से उत्पन्न अशुद्धि से शुद्ध होने के तैंतीस दिन बाद तक यह होगा। उस स्त्री को वह कुछ नहीं छूना चाहिए जो पवित्र है। उसे पवित्र स्थान में तब तक नहीं जाना चाहिए जब तक उसके पवित्र होने का समय पूरा न हो जाए। 5 किन्तु यदि स्त्री लड़की को जन्म देती है तो माँ रक्त स्राव के मासिक धर्म के समय की तरह दो स्पताह तक शुद्ध नहीं होगी। वह अपने खून की हानि के छियासठ दिन बाद शुद्ध हो जाती है।

6 “नई माँ जिसने अभी लड़की या लड़के को जन्म दिया है, ऐसी माँ के शुद्ध होने का विशेष समय पूरा होने पर उसे मिलापवाले तम्बू में विशेष भेंटें लानी चाहिए। उसे उन भेंटों को मिलापवाले तम्बू के द्वार पर याजक को देना चाहिए। उसे एक वर्ष का मेमना होमबलि के लिए और पापबलि के हेतु एक फ़ाख्ता या कबूतर का बच्चा लाना चाहिए। 7-8 यदि स्त्री मेमना लाने में असमर्थ हो तो वह दो फ़ाख्ते या दो कबूतर के बच्चे ला सकती है। एक पक्षी होमबलि के लिए होगा तथा एक पापबलि के लिए। याजक यहोवा के सामने उनहें अर्पित करेगा। इस प्रकार वह उसके लिए उसके पापों का भुगतान करेगा। तब वह अपने खून की हानि की अशुद्धि से शुद्ध होगी। ये नियम उन स्त्रियों के लिए हैं जो एक लड़का या लड़की को जन्म देती हैं।”

समीक्षा

इतिहास का लंबा दृष्टिकोण

लैव्यव्यवस्था में जो भी नियम दिये गए हैं उन सबका इस धरती पर क्या मकसद है? ये बाइबल में क्यों हैं?

हमेशा की तरह हम पुराने नियम को नये नियम की दृष्टि से समझते हैं, खासकर के यीशु की दृष्टि से। परमेश्वर की योजना दीर्घकालीन थी। वह दुनिया को मसीह के आगमन के लिए तैयार कर रहे थे।

नया नियम हमें बताता है कि अजीब नज़र आने वाले ये सभी नियम जिन्हें हम आज के लेखांश में पढ़ने जा रहे हैं, ये केवल 'आने वाले समय की छाया हैं' (कुलुस्सीयों 2:17); मगर यह सच्चाई, मसीह में पाई जाती है। इन नियमों का उद्देश्य पवित्रता के बारे में सिखाना था – ' मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ; इस प्रकार अपने आप को अशुद्ध न करना क्योंकि मैं पवित्र हूँ, इसलिये तुम पवित्र बनो' (लैव्यव्यवस्था 11:44)।

पहले के मसीही जन को पवित्र जीवन जीने के बारे में प्रोत्साहित करने के लिए पतरस अपनी पहली पत्री में इस वचन का उद्धरण करते हैं। वह लिखते हैं, 'आज्ञाकारी बालकों की नाईं अपनी अज्ञानता के समय की पुरानी अभिलाषाओं के सदृश न बनो। पर जैसा तुम्हारा बुलाने वाला पवित्र है, वैसे ही तुम भी अपने सारे चाल चलन में पवित्र बनो। क्योंकि लिखा है, कि पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूँ' (1पतरस 1:14-16)।

फिर भी नया नियम हमें बताता है कि परमेश्वर ने हमें मसीह के द्वारा पवित्र किया है। इसलिए प्रेरित पौलुस भी कहते हैं कि, 'इसलिये खाने पीने के विषय में तुम्हारा कोई फैसला न करे' (कुलुस्सीयों 2:16)। ये सभी नियम यीशु के आने के बाद कम नहीं हुए हैं।

व्यवहारिक कारणों से इनमें से कई नियम शायद पहले से ही थे। उदाहरण के लिए स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होने के कारण सूअर का मांस खाना (क्योंकि इससे बीमारी फैलती है) पूरी तरह से मना था। उसी तरह, शुद्धिकरण के नियम सख्त थे, क्योंकि वे व्यवहारिक ज़रूरतों का ख्याल रखते थे। परमेश्वर चाहते हैं कि आप बुद्धिमानी से स्वास्थयवर्धक भोजन करें!

बच्चे के जन्म के बाद शुद्धिकरण नैतिक शुद्धता के बारे में नहीं था, बल्कि यह रीति संबंधि अशुद्धता के बारे में था (लैव्यव्यवस्था 12:2)। 'लहू के बहने' से शुद्धिकरण (पद - 7), वैवाहिक मेल - जोल या बच्चे के जन्म से जुड़े किसी दोष से संबंधित नहीं था। वास्तव में ये नियम स्त्रियों के लिए महान आशीषें थीं जिन्होंने हाल ही में किसी बच्चे को जन्म दिया था। समाज से अलग रहने का अतिरिक्त समय, स्त्री को बच्चा जनने के बाद सामान्य जीवन की भीड़ - भाड़ में तुरंत लौटने से बचाता था।

यह लेखांश हमें यीशु की पृष्टभूमि का संकेत भी देता है। यह उस गरीबी को दर्शाता है जहाँ से वह आए थे; जब मरियम और यूसुफ यरूशलेम में गए थे मरियम 'एक मेमने' की होमबलि नहीं चढ़ा सकती थीं (पद - 8); 'मूसा की व्यवस्था के अनुसार उन के शुद्ध होने के दिन पूरे हुए तो वे उसे यरूशलेम में ले गए, कि प्रभु के सामने लाएं और प्रभु की व्यवस्था के वचन के अनुसार पंडुकों का एक जोड़ा, या कबूतर के दो बच्चे ला कर बलिदान करें' (पद - 8, लूका 222-24)।

इस व्यवस्था के अंतर्गत अपने पुत्र के जन्म के लिए परमेश्वर की दीर्घकालीन योजना थी। परमेश्वर पूरे इतिहास में यीशु की पृष्ठभूमि तैयार कर रहे थे। उन्होंने ही इस व्यवस्था को पूरा किया और क्रूस पर इन नियमों का अंत किया। वह मरे हुओं में से फिर से जी उठे और हमारे लिए भी यह संभव बनाया कि हम भी एक दिन मरे हुओं में जी उठेंगे, यीशु के साथ, परमेश्वर के वारिस के रूप में (गलातियों 4:4-7)।

प्रार्थना

प्रभु, मैं आपको धन्यवाद देता हूँ कि अब मैं व्यवस्था के अंतर्गत नहीं हूँ। आपका धन्यवाद कि मैं आपकी संतान के रूप में अपनाया गया हूँ और यह कि आपने मेरे हृदय में यीशु की आत्मा भेजी है। आपका धन्यवाद कि मैं अनंतकाल तक आपके संग रहूँगा। मुझे जीवन की दूर दृष्टि रखने में और अनंत जीवन अपनाने में और जीवन भर आपके अनुग्रह का आनंद लेने में मेरी मदद कीजिये।

पिप्पा भी कहते है

भजन संहिता 30

'मैं ने तो अपने चैन के समय कहा था, कि मैं कभी नहीं टलने का' (पद - 6)। जब मेरा विश्वास ऊँचाइयों पर होता है तो मैं उस चैन को जानती हूँ, मुझे ऐसा लगता है कि प्रभु में मेरे विश्वास को कोई हिला नहीं सकता।

फिर भी कभी - कभी, समस्याओं, परेशानियों या बीमारी के द्वारा मेरा विश्वास हिल जाता है। 'जब तू ने अपना मुख फेर लिया तब मैं घबरा गया' (पद - 7ब)। तब मैं मदद के लिए फिर से अपने प्रभु का नाम लेती हूँ (पद - 2)।

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संदर्भ

नोट्स:

जहाँ पर कुछ बताया न गया हो, उन वचनों को पवित्र बाइबल, न्यू इंटरनैशनल संस्करण एन्ग्लिसाइड से लिया गया है, कॉपीराइट © 1979, 1984, 2011 बिबलिका, पहले इंटरनैशनल बाइबल सोसाइटी, हूडर और स्टोगन पब्लिशर की अनुमति से प्रयोग किया गया, एक हॅचेट यूके कंपनी सभी अधिकार सुरक्षित। ‘एनआईवी’, बिबलिका यू के का पंजीकृत ट्रेडमार्क संख्या 1448790 है।

जिन वचनों को (एएमपी, AMP) से चिन्हित किया गया है उन्हें एम्प्लीफाइड® बाइबल से लिया गया है। कॉपीराइट © 1954, 1958, 1962, 1964, 1965, 1987 लॉकमैन फाउंडेशन द्वारा प्राप्त अनुमति से उपयोग किया गया है। (www.Lockman.org)

जिन वचनों को (एमएसजी MSG) से चिन्हित किया गया है उन्हें मैसेज से लिया गया है। कॉपीराइट © 1993, 1994, 1995, 1996, 2000, 2001, 2002. जिनका प्रयोग एनएवीप्रेस पब्लिशिंग ग्रुप की अनुमति से किया गया है।

2012 के लिए नोट्स

उदाहरण के लिए, सूअर का मांस खाना पूरी तरह से मना था (क्योंकि इससे बीमारी फैलती है)। (डॅब्ल्यू।एफ। एल्ब्राइट, यावेह एंड द गोड्स ऑफ केनन, 1998)।

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